डिजिटल डेस्क – 08/05/2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर को भारतीय सभ्यता, आत्मबल और सांस्कृतिक स्वाभिमान का प्रतीक बताते हुए कहा कि सदियों के संघर्ष और आक्रमणों के बावजूद सोमनाथ की आस्था कभी समाप्त नहीं हुई। 11 मई को पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 2026 की शुरुआत में उन्हें “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” में शामिल होने का सौभाग्य मिला था और अब वे एक बार फिर उस ऐतिहासिक क्षण को जीने जा रहे हैं, जब भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर का लोकार्पण किया था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की शाश्वत चेतना और अटूट संकल्प का प्रतीक है। समुद्र तट पर स्थित यह धाम सदियों से यह संदेश देता आया है कि तूफान कितने भी बड़े क्यों न हों, मानव साहस और आत्मबल हर बार फिर उठ खड़ा होता है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ की लहरें मानवीय चेतना के अमर होने का उद्घोष करती हैं।
पीएम मोदी ने अपने संदेश में उन महान विभूतियों को भी नमन किया, जिन्होंने सोमनाथ की रक्षा और पुनर्निर्माण में योगदान दिया। उन्होंने राजा भोज, भीम प्रथम, कर्णदेव सोलंकी, जयसिंह सिद्धराज और अनेक वीर शासकों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महापुरुषों ने भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए संघर्ष किया। वहीं अहिल्या बाई होलकर के योगदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने कठिन समय में भी भक्ति और परंपरा की ज्योति जलाए रखी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास विध्वंस से सृजन तक की यात्रा का प्रतीक है और यह 75वीं वर्षगांठ भारत की सांस्कृतिक शक्ति और पुनर्जागरण का प्रेरणादायी उत्सव बनेगी।


