डिजिटल डेस्क – 08/05/2026
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत पर भी दिखाई देने की आशंका जताई जा रही है। खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज होने और समुद्री मार्गों पर खतरा बढ़ने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात लंबे समय तक तनावपूर्ण रहे तो देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों से लेकर महंगाई तक पर असर पड़ सकता है।
दरअसल, भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में खाड़ी देशों से आयात करता है। फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल हैं। ऐसे में यदि वहां सैन्य संघर्ष बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार तेल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिससे खाद्य पदार्थों समेत रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। इससे महंगाई दर पर दबाव बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा शेयर बाजार में भी अस्थिरता देखने को मिल सकती है, क्योंकि वैश्विक निवेशक ऐसे समय सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं।
भारत का खाड़ी देशों के साथ व्यापारिक और रणनीतिक संबंध भी काफी मजबूत हैं। लाखों भारतीय नागरिक यूएई, सऊदी अरब, कतर और अन्य खाड़ी देशों में काम करते हैं। यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है, तो वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा और रोजगार को लेकर भी चिंता बढ़ सकती है।
हालांकि भारत सरकार हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय और संबंधित एजेंसियां खाड़ी क्षेत्र की स्थिति की निगरानी कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत फिलहाल संतुलित कूटनीतिक रुख अपनाते हुए अपने आर्थिक हितों और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देगा।


