CATEGORY
अतुलित बल धामम: जब समर भूमि में जागा त्रेता का महातेज
बगीचे का अंतिम प्रसन्न पेड़: जिंदगी कोई दौड़ या होड़ नहीं है?
सावन का महीना, पवन करे शोर
‘नर + मादा = नर्मदा’ — नदियों का मानवीकरण और भूगोल का रोमांस
सृष्टि और संसार: मनु, आदम और एडम, शब्दों का विज्ञान या मानव उत्पत्ति का एक ही सच?
ना सूर्योदय, ना सूर्यास्त… बस आदमी कहीं शिकस्त, तो कहीं परास्त!
नदी में डूबी पूरी जिंदगी”घमंड कोई भी हो, इंसान को अंदर से खाली कर देता है”
भारत: वैभव या भीड़? — एक नागरिक की बेबाक पड़ताल
शीशें का घर और बंजर होता दिल: ज़मीन अब पत्थर हो गई
दिव्य-योग : ऋषि, चूहा और अहंकार का रहस्य एवं दर्शन