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Wednesday, November 4, 2026
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रायपुर में इस दिन बंद रहेंगे सभी सरकारी दफ्तर, स्थानीय अवकाश में हुआ बदलाव

 रायपुर : छत्तीसगढ़ शासन ने राजधानी रायपुर और नवा रायपुर अटल नगर के लिए स्थानीय अवकाश की तारीख में बदलाव किया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी नए आदेश के मुताबिक, अब 20 नवंबर 2026, शुक्रवार को देवउठनी एकादशी के अवसर पर स्थानीय अवकाश रहेगा। इस दिन रायपुर और नवा रायपुर के राज्य शासन के सभी सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे।

गोवर्धन पूजा की छुट्टी में बदलाव के बाद लिया गया फैसला

दरअसल, शासन की ओर से जारी पुराने आदेश में 9 नवंबर को गोवर्धन पूजा के लिए स्थानीय अवकाश घोषित किया गया था। इसके बाद 26 अक्टूबर को जारी नई अधिसूचना में गोवर्धन पूजा को सामान्य अवकाश घोषित कर दिया गया। ऐसे में इस दिन पहले से तय स्थानीय अवकाश की आवश्यकता नहीं रह गई थी।

इसी को ध्यान में रखते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने स्थानीय अवकाश में संशोधन करते हुए 9 नवंबर के स्थान पर 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी का अवकाश घोषित किया है।

बैंक और कोषालय में जारी रहेगा कामकाज

शासन के आदेश के अनुसार, 20 नवंबर का स्थानीय अवकाश सभी संस्थानों पर लागू नहीं होगा। बैंक, कोषालय और उप कोषालय इस दिन सामान्य रूप से खुले रहेंगे। वित्तीय संस्थानों में भी कामकाज जारी रहेगा। यानी सरकारी कार्यालयों में छुट्टी रहेगी, लेकिन बैंकिंग और कोषालय से जुड़ी सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी।

सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा लंबा वीकेंड

20 नवंबर को शुक्रवार होने के कारण पांच दिवसीय कार्य सप्ताह वाले सरकारी कर्मचारियों को लगातार तीन दिनों की छुट्टी का लाभ मिल सकता है। शुक्रवार के स्थानीय अवकाश के बाद शनिवार और रविवार को साप्ताहिक अवकाश रहेगा। इस तरह कर्मचारियों को तीन दिन का लंबा वीकेंड मिलेगा।

CG : गांव में सात दिन पहले मनाई जाती है दिवाली, 100 साल पुरानी मान्यता के पीछे छिपी है अनोखी कहानी..!

 धमतरी। देशभर में जहां कार्तिक अमावस्या को दीपावली का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है, वहीं छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सेमरा गांव में दिवाली मनाने की परंपरा सबसे अलग है। यहां ग्रामीण अमावस्या के दिन नहीं, बल्कि एक सप्ताह पहले अष्टमी तिथि को दीपावली का त्योहार मनाते हैं। हैरानी की बात यह है कि इस परंपरा के पीछे करीब 100 साल पुरानी मान्यता और एक रहस्यमयी लोककथा जुड़ी हुई है।

सपने में ग्राम देवता ने दिया था आदेश

ग्रामीणों के अनुसार, करीब 100 साल पहले गांव के बैगा को ग्राम देवता ने सपने में दर्शन देकर सभी त्योहार निर्धारित तिथि से सात दिन पहले मनाने का आदेश दिया था। मान्यता है कि इस परंपरा का पालन नहीं करने पर गांव में कोई अनहोनी या विपदा आ सकती है। तभी से ग्रामीण पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस परंपरा का निर्वहन करते आ रहे हैं।

गांव के बुजुर्गों द्वारा सुनाई जाने वाली कहानी के मुताबिक, पुराने समय में सेमरा गांव घने जंगलों के बीच बसा हुआ था। एक दिन गांव के दो दोस्त जंगल घूमने गए, जहां शेर ने उन पर हमला कर दिया। इस घटना में दोनों की मौत हो गई। ग्रामीण उनके शव गांव लेकर आए और अंतिम संस्कार किया। बताया जाता है कि इस घटना के कुछ दिनों बाद ही बैगा को ग्राम देवता ने सपने में दर्शन दिए और त्योहार सात दिन पहले मनाने का निर्देश दिया।

दिवाली ही नहीं, सभी त्योहार सात दिन पहले

सेमरा गांव में केवल दीपावली ही नहीं, बल्कि धनतेरस से लेकर गोवर्धन पूजा तक पांचों दिन के सभी रीति-रिवाज एक सप्ताह पहले ही पूरे कर लिए जाते हैं। ग्रामीण पारंपरिक तरीके से पूजा-पाठ, दीप प्रज्वलन और उत्सव मनाते हैं। इस दौरान गांव में मेले जैसा माहौल रहता है। ससुराल गई बेटियां भी मायके लौटकर परिवार के साथ दीपावली का पर्व मनाती हैं।

अमावस्या के दिन सामान्य रहता है गांव का माहौल

इस परंपरा की सबसे अनोखी बात यह है कि जब देशभर में दीपावली की रोशनी और आतिशबाजी से उत्सव मनाया जाता है, तब सेमरा गांव में सामान्य दिनों जैसा माहौल रहता है। यहां न तो विशेष दीपावली पूजन होता है और न ही कोई बड़ा जश्न मनाया जाता है। आसपास के गांवों से लोग इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए सेमरा पहुंचते हैं।

भले ही आधुनिक दौर में इस मान्यता को कुछ लोग अंधविश्वास मानें, लेकिन सेमरा के ग्रामीणों के लिए यह उनकी आस्था, परंपरा और पूर्वजों की विरासत का हिस्सा है। गांव के युवा भी इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। यही वजह है कि करीब एक सदी पुरानी यह अनूठी परंपरा आज भी कायम है।

भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, चुनाव याचिका पर हाईकोर्ट में 5 नवंबर को सुनवाई

बिलासपुर। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ दायर चुनाव याचिका के मामले में मंगलवार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। आज भाजपा सांसद विजय बघेल की गवाही होनी थी, लेकिन सुनवाई के दौरान भूपेश बघेल की ओर से उनके अधिवक्ता ने आवेदन पेश कर अगली तारीख देने की मांग की।

भूपेश बघेल के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने का हवाला देते हुए सुनवाई आगे बढ़ाने का आग्रह किया। इसके बाद हाईकोर्ट में विजय बघेल के बयान के लिए अब 5 नवंबर की तारीख तय की गई। हाईकोर्ट में सुनवाई के बीच ही सुप्रीम कोर्ट से भूपेश बघेल को झटका लगा। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी एसएलपी (विशेष अनुमति याचिका) खारिज कर दी।

शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें चुनाव याचिका की सुनवाई के दौरान प्रारंभिक मुद्दे तय करने से इनकार किया गया था। यह मामला वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में पाटन सीट से भूपेश बघेल के निर्वाचन को विजय बघेल द्वारा दी गई चुनौती से जुड़ा है। अब सभी की नजरें 5 नवंबर को होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां विजय बघेल का बयान दर्ज होना है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मंगलवार को चुनाव याचिका की सुनवाई में देरी करने के प्रयासों पर नाराजगी जताई। पीठ ने कहा कि चुनाव याचिकाओं का निपटारा उचित समयसीमा के भीतर होना चाहिए। न्यायमूर्ति मोहना ने पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा से कहा कि मुकदमे को आगे बढ़ने दीजिए। आप जितना संभव हो सके, उतनी देरी कर रहे हैं। फैसला आएगा।

जानिए क्या है पूरा मामला

दरअसल, विजय बघेल ने 2023 के पाटन विधानसभा चुनाव को लेकर भूपेश बघेल के खिलाफ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की थी। विजय बघेल ने आरोप लगाया कि भूपेश बघेल ने मतदान से पहले लागू 48 घंटे की प्रचार-निषेध अवधि के दौरान निर्वाचन क्षेत्र में रैली निकाली और उन्होंने उनका चुनाव रद्द करने का अनुरोध किया। इस याचिका को लेकर भूपेश बघेल की ओर से आपत्ति लगाई गई थी। इसमें तर्क दिया गया था कि चुनाव याचिका निर्धारित समय-सीमा के बाद दायर की गई है। इस आवेदन पर हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान विजय बघेल की गवाही की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भूपेश बघेल की ओर से इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब मामला हाईकोर्ट में चल रहा है।

घरौंदा सेंटर में बच्चों की मौत पर हाईकोर्ट गंभीर, 11 कोर्ट कमिश्नर करेंगे सेंटर्स का निरीक्षण

बिलासपुर। रायपुर के घरौंदा सेंटर में 8 बच्चों की मौत और 5 बच्चों के गायब होने को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। इसे अमानवीय बताते हुए हाईकोर्ट ने सभी कोर्ट कमिश्नरों को जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने कहा है।

इससे पहले वित्त और समाज कल्याण विभाग के सचिव और मुख्य सचिव ने शपथपत्र प्रस्तुत कर घरौंदा सेंटर्स के बच्चों के बारे में जानकारी दी। इसमें बताया गया कि तीन साल में शासन ने 9 करोड़ रुपए बच्चों पर खर्च किए हैं। हाईकोर्ट ने मामले में 11 कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किए हैं। इनमें एडवोकेट विवेक श्रीवास्तव, अपूर्व त्रिपाठी, संघर्ष पाण्डेय, शिवाली दुबे और ईश्वर जायसवाल शामिल हैं। इन सभी को शासन और केंद्र की योजनाओं के तहत संचालित सेंटर्स का निरीक्षण कर वस्तुस्थिति की रिपोर्ट पेश करने कहा गया है।

रायपुर की संस्था कोपलवाणी ने कोर्ट में एक जनहित याचिका लगाई है। पिछले कुछ सालों में एनजीओ की मदद से बच्चों के लिए चलाई जा रही संस्था घरौंदा में बच्चों की भूखमरी से मौत के मामले में कोर्ट ने शासन से जवाब तलब किया था। मामले में संस्था ने पहले राज्य के बड़े प्रशासनिक अफसरों से लिखित शिकायत की थी।

नगरीय निकाय चुनाव के लिए भाजपा ने बनाई प्रदेश चुनाव टोली, चुनाव प्रभारी और सहप्रभारियों की नियुक्ति भी की, देखें लिस्ट…

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आगामी नगरीय निकाय चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने नगरीय निकाय चुनाव के मद्देनजर प्रदेश चुनाव टोली का गठन करते हुए वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं। जारी नियुक्ति आदेश के अनुसार, सांसद संतोष पांडेय को प्रदेश मुख्य प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं नगरीय निकायों के लिए चुनाव प्रभारी और सहप्रभारियों की नियुक्ति की घोषणा भी की गई है।

देखें लिस्ट –

अमित जोगी के वीडियो पर बवाल, भाजपा ने FIR के लिए पुलिस को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम

रायपुर। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी के खिलाफ भाजपा ने मोर्चा खोल दिया है। सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक वीडियो पोस्ट करने के मामले में भाजपा नेताओं ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। रायपुर पश्चिम विधायक राजेश मूणत के नेतृत्व में बड़ी संख्या में भाजपा नेता और कार्यकर्ता सिविल लाइन थाने पहुंचे और पुलिस को शिकायत सौंपकर वीडियो बनाने तथा उसे सोशल मीडिया पर साझा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

इस दौरान विधायक राजेश मूणत ने कहा कि अमित जोगी ने देश के प्रधानमंत्री और चुनाव आयोग के प्रमुख ज्ञानेश कुमार को लेकर जिस प्रकार का वीडियो निर्माण कर सोशल मीडिया पर साझा किया है और वीडियो में जिस प्रकार की भूमिका अदा की गई है, वह निंदनीय है। उन्होंने कहा कि राजनीति में सिद्धांतों और विचारों की लड़ाई होती है और अपनी बात रखने का एक तरीका होता है, लेकिन चरित्र हत्या करते हुए बेडरूम के दृश्य दिखाना उचित नहीं है।

इस वीडियो की पटकथा लिखने वाले और इसे बनाने वाले सभी लोगों के खिलाफ हमने शिकायत की है। साथ ही उन्होंने पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है कि मामले में उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, जो इस कूटरचना के रचयिता हैं। ऐसा नहीं होने पर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता दोबारा थाने पहुंचेंगे।

राहुल गांधी जनता का विश्वास खो चुके हैं, डिबेट से बढ़ाना चाहते हैं राजनीतिक कद: मंत्री ओपी चौधरी

रायपुर। राहुल गांधी के डिबेट चैलेंज और SIR पर अमित शाह के लोकसभा का विशेष सत्र बुलाने के बयान पर मंत्री ओपी चौधरी का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि जनता राहुल गांधी को नकार चुकी है और उन्हें 100 से अधिक बार पराजय का स्वाद चखा चुकी है. राहुल गांधी अपनी राजनीतिक हाइट बढ़ाने के लिए डिबेट की बात कर रहे हैं.

ओपी चौधरी ने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उन्हें जॉइंट पार्लियामेंट या विशेष सत्र में चर्चा का प्रस्ताव दिया है. लेकिन वह सत्र से दूर भागेंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी पॉलिटिकल हाइट बढ़ाने के लिए चिल्ला रहे हैं.

5 लाख पीपल के पेड़ लगाने का लक्ष्य

मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि ‘पीपल सिटी’ के रूप में विकसित करने की तैयारी है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को ‘विकसित भारत संकल्प पीपल वन’ का लोकार्पण किया था. उन्होंने 5 लाख पीपल के पेड़ लगाने का लक्ष्य तय किया है. उन्होंने बताया कि पहले एक लाख पीपल के पेड़ लगाने का लक्ष्य था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 5 लाख कर दिया गया है. 

वंदे मातरम अधूरे गायन पर नोटिस जारी

रायगढ़ में एक कॉलेज में वंदे मातरम का पूरा गायन नहीं होने के मामले में नोटिस जारी किए जाने पर भी वित्त मंत्री ने बयान दिया. उन्होंने कहा कि कॉलेज में वंदे मातरम का अधूरा गायन हुआ था, जिसके बाद गायन पूरा किया गया. इस मामले में कलेक्टर ने प्रशासनिक सख्ती बढ़ाते हुए नोटिस जारी किया है. उन्होंने लोगों से वंदे मातरम एक्ट का पालन करते हुए व्यवहार करने की अपील की.

नक्सलवाद खत्म होने के बाद बस्तर में विकास की नई संभावनाएं : मंत्री ओपी चौधरी

बस्तर के विकास को लेकर ओपी चौधरी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ को राज्य बनाकर बड़ी सौगात दी थी. इसके लिए छत्तीसगढ़वासी उनके आभारी हैं. उन्होंने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद बस्तर में विकास की नई संभावनाएं उभरकर सामने आई हैं. आने वाले समय में बस्तर पर्यटन के क्षेत्र में विकसित होगा और छत्तीसगढ़ के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. वहीं कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के हित में राज्य निर्माण का फैसला नहीं लिया.

शादी का प्रलोभन देकर युवती से दुष्कर्म करने वाला आरोपी गिरफ्तार

अंतागढ़ (कांकेर)। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के अंतागढ़ थाना क्षेत्र में शादी का झांसा देकर युवती के साथ शारीरिक संबंध बनाने के आरोप में पुलिस ने 23 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए फरार आरोपी को 24 घंटे से भी कम समय में पकड़ लिया। न्यायालय में पेश किए जाने के बाद आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

शादी का प्रलोभन देकर संबंध बनाने का आरोप

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, अंतागढ़ क्षेत्र की एक युवती ने शिकायत दर्ज कराई कि साहिल बघेल (23), निवासी हिंदुबिनापाल (कदमपारा) ने उसे शादी का प्रलोभन दिया और उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। युवती के मुताबिक, जब उसने आरोपी पर शादी को लेकर दबाव बनाया, तो वह उससे दूरी बनाने लगा। शिकायत दर्ज होने की जानकारी मिलने के बाद आरोपी फरार हो गया था।

‘मोर-मितान’ अभियान के तहत कार्रवाई

कांकेर पुलिस के विशेष अभियान ‘मोर-मितान’ के तहत बीट आरक्षक को आरोपी के संबंध में महत्वपूर्ण सूचना मिली। इसके आधार पर अंतागढ़ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए फरार आरोपी को 24 घंटे से भी कम समय में गिरफ्तार कर लिया।

बीएनएस की धारा 69 के तहत मामला दर्ज

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ थाना अंतागढ़ में अपराध क्रमांक 68/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत कार्रवाई की है। पूछताछ और आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

राज्योत्सव के मंच से अमित शाह का कांग्रेस पर हमला, SIR पर संसद में बहस की चुनौती, राहुल गांधी को भी घेरा

 रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। नवा रायपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष को खुली चुनौती दी। शाह ने कहा कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने के लिए तैयार है। यदि आवश्यकता पड़ी तो विशेष संसदीय सत्र बुलाने पर भी विचार किया जा सकता है। अपने संबोधन में उन्होंने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति, कथित नकली संसद और नक्सलवाद के मुद्दे पर भी विपक्ष को घेरा।

SIR पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाने की पेशकश

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार संसद में हर महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करने के लिए तैयार है। विपक्ष को यदि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कोई आपत्ति है, तो उसे संसद के भीतर अपने सवाल और तर्क रखने चाहिए।उन्होंने राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं से संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने देने की अपील की। शाह ने कहा कि लोकतंत्र से जुड़े विषयों पर चर्चा के लिए संसद से बेहतर कोई मंच नहीं हो सकता। सरकार इस मुद्दे पर बहस से पीछे नहीं हटेगी और जरूरत पड़ने पर विशेष सत्र बुलाने के लिए भी तैयार है।कांग्रेस नेताओं द्वारा संविधान की प्रति लेकर किए जाने वाले प्रदर्शनों पर भी गृह मंत्री ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि संविधान के प्रति सम्मान केवल उसकी प्रति हाथ में लेकर दिखाने से साबित नहीं होता, बल्कि राजनीतिक व्यवहार में भी संवैधानिक मूल्यों का पालन होना चाहिए।

राहुल गांधी की कथित नकली संसद पर उठाए सवाल

केंद्रीय गृह मंत्री ने कांग्रेस की ओर से आयोजित मॉक पार्लियामेंट को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद के बाहर अलग से संसद जैसा आयोजन करना देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था की गरिमा के अनुरूप नहीं है।शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि एक तरफ संसद की कार्यवाही बाधित की जाती है और दूसरी तरफ बाहर अलग मंच तैयार करके बहस का दिखावा किया जाता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को वास्तविक संसदीय चर्चा में हिस्सा लेना चाहिए।हालांकि, ये आरोप अमित शाह ने अपने राजनीतिक संबोधन के दौरान लगाए। इस कार्यक्रम के संदर्भ में राहुल गांधी या कांग्रेस की ओर से इन टिप्पणियों पर कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आई है।

नक्सलवाद को लेकर कांग्रेस की भूमिका पर उठाए सवाल

राज्योत्सव समारोह में अमित शाह ने नक्सलवाद के मुद्दे पर भी कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने माओवादियों की कथित समानांतर व्यवस्था ‘जनताना सरकार’ का समर्थन किया था।शाह के मुताबिक, माओवादी संगठनों ने संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था से अलग अपनी प्रशासनिक संरचना तैयार कर रखी थी। इसमें मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री जैसे पद भी बनाए गए थे। उन्होंने पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम के वर्ष 2010 के एक कथित बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए पर्याप्त राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं दिखाई गई।

नक्सलवाद के खात्मे को लेकर सरकार की उपलब्धियां गिनाईं

अमित शाह ने कहा कि वर्ष 2023 में छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनने के बाद नक्सलवाद के खात्मे का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। उन्होंने दावा किया कि केंद्र और राज्य सरकार की रणनीति तथा सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से इस दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है।उन्होंने बताया कि माओवादी संगठनों से जुड़े लोगों को हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का अवसर दिया गया। शाह ने दावा किया कि करीब 90 प्रतिशत माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया, जबकि शेष 10 प्रतिशत सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए।इस अभियान में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, छत्तीसगढ़ पुलिस और स्थानीय नागरिकों के योगदान की भी उन्होंने सराहना की। गृह मंत्री ने कहा कि नक्सली हिंसा के कारण बस्तर और आसपास के इलाकों में लंबे समय तक विकास प्रभावित रहा।

आदिवासी परिवारों की पीड़ा का किया जिक्र

अपने संबोधन में शाह ने नक्सली हिंसा से प्रभावित आदिवासी परिवारों की समस्याओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने मानवाधिकारों के नाम पर नक्सलवाद का समर्थन करने वालों पर सवाल उठाते हुए कहा कि हिंसा का शिकार हुए गरीब आदिवासियों के जीवन और अधिकारों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।उन्होंने कहा कि बस्तर के लोगों ने लंबे समय तक हिंसा और असुरक्षा का सामना किया है। अब शांति स्थापित होने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार जैसी सुविधाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत है।

बस्तर को पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य

अमित शाह ने छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक विरासत को प्रदेश की बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद का प्रभाव कम होने से बस्तर सहित प्रभावित क्षेत्रों में पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।उन्होंने बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों में शामिल करने का लक्ष्य रखा।शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। आने वाले दस वर्षों में यहां के नागरिकों की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश को संसाधनों की संपन्नता से जनसामान्य की आर्थिक समृद्धि तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

राज्योत्सव के मंच से राष्ट्रीय और प्रदेश की राजनीति पर साधा निशाना

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के समापन समारोह में अमित शाह का संबोधन कई राजनीतिक और विकास से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रहा। उन्होंने जहां SIR के बहाने कांग्रेस और राहुल गांधी को संसद में चर्चा की चुनौती दी, वहीं नक्सलवाद के मुद्दे पर पिछली सरकारों की नीतियों पर सवाल उठाए।इसके साथ ही उन्होंने बस्तर के विकास, पर्यटन विस्तार और आदिवासी समाज की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने को लेकर केंद्र सरकार का दृष्टिकोण भी सामने रखा। उनका पूरा संबोधन राष्ट्रीय राजनीति से लेकर छत्तीसगढ़ के भविष्य की विकास योजनाओं तक केंद्रित रहा।

खड़गे की टिप्पणी पर विजय शर्मा का अनोखा अंदाज, काली हुडी पहनकर दिया सियासी जवाब, Gen-Z स्टाइल में लिखा ‘Modi Kahin Nahi Jayega Broooo!’

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने राजनीतिक बयानबाजी के बीच सोशल मीडिया पर एक अलग अंदाज में अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी के बाद विजय शर्मा ने काले रंग की हुडी पहनकर अपनी तस्वीर साझा की। इस हुडी पर बड़े अक्षरों में ‘Modi Kahin Nahi Jayega Broooo!’ लिखा हुआ है। उनके इस अंदाज को खड़गे की टिप्पणी के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि उन्होंने अपनी बात रखने के लिए पारंपरिक राजनीतिक बयान के बजाय युवाओं के बीच लोकप्रिय Gen-Z शैली का सहारा लिया।

सोशल मीडिया पोस्ट में दोहराया खास संदेश

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने 3 नवंबर 2026 को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर यह तस्वीर पोस्ट की। इसके साथ उन्होंने लिखा, ‘मोदी कहीं नहीं जाएगा, Broooo!’। पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन का संदेश दिया गया है।तस्वीर में काली हुडी पर अंग्रेजी में लिखा वाक्य खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हिंदी और अंग्रेजी के इस मिश्रित अंदाज ने पोस्ट को युवाओं की बोलचाल वाली भाषा से जोड़ दिया है। सोशल मीडिया पर भी उनके इस नए अंदाज को लेकर चर्चा हो रही है।

पटना में खड़गे की टिप्पणी के बाद शुरू हुआ था विवाद

दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत 25 अक्टूबर 2026 को बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुई थी। बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की जयंती पर आयोजित समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे संबोधित कर रहे थे।इसी दौरान सभा में मौजूद एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में नारा लगाते हुए कहा कि मोदी कहीं नहीं जाएंगे। इस पर खड़गे ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, ‘मोदी का बाप भी जाएगा।’ इस बयान का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया।भाजपा नेताओं ने खड़गे की भाषा पर आपत्ति जताते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके परिवार के प्रति अनुचित टिप्पणी बताया था। इसके बाद दोनों राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी शुरू हो गई।

हुडी के जरिए विजय शर्मा ने रखी अपनी बात

इस विवाद के बीच विजय शर्मा ने किसी सार्वजनिक भाषण या विस्तृत बयान के बजाय कपड़ों पर लिखे संदेश के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया दी। उनकी हुडी पर लिखा वाक्य पटना के कार्यक्रम में लगाए गए नारे से मिलता-जुलता है।हालांकि, उप मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में सीधे तौर पर मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम नहीं लिया, लेकिन संदेश और पोस्ट साझा करने के समय को देखते हुए इसे उनके बयान से जोड़कर देखा जा रहा है।

छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी चर्चा तेज

खड़गे की टिप्पणी को लेकर पहले से ही भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी था। अब विजय शर्मा की तस्वीर सामने आने के बाद यह मुद्दा छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है।राजनीतिक संदेश को Gen-Z अंदाज में पेश करने की उनकी यह कोशिश सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रही है। काली हुडी पर लिखा ‘Modi Kahin Nahi Jayega Broooo!’ अब इस पूरे घटनाक्रम की सबसे चर्चित बात बन गया है।