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Sunday, November 1, 2026
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अम्बेडकर अस्पताल की बड़ी उपलब्धि, हृदय-फेफड़े से चिपकी कैंसर की हुई सर्जरी, चार घंटे तक चले ऑपरेशन में 60 वर्षीय मरीज को मिली जिंदगी

रायपुर। रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में डॉक्टरों ने 60 वर्षीय मरीज की छाती में दिल के पास मौजूद कैंसर की गांठ का चार घंटे ऑपरेशन कर निकाला। करीब 5 सेंटीमीटर की गांठ हृदय की प्रमुख रक्त वाहिकाओं और आसपास के अंगों से चिपकी थी। इसे निकालने के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव और मरीज की जान जाने का खतरा था, इसलिए कैंसर सर्जरी और हार्ट, चेस्ट एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग की संयुक्त टीम ने ऑपरेशन किया। सफल सर्जरी के बाद मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है।

जानिए कितना खतरनाक है इनवेसिव थाइमोमा थाइमोमा छाती में हृदय के सामने स्थित थाइमस ग्रंथि का ट्यूमर है । सामान्य थाइमोमा के मुकाबले इनवेसिव थाइमोमा आसपास के अंगों और ऊतकों तक फैल सकता है। इसके उपचार में कीमोथेरेपी, रेडिएशन और सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। ट्यूमर की स्थिति और फैलाव के आधार पर उपचार तय किया जाता है।

सर्जरी में इन डॉक्टरों की रही भूमिका डॉ. आशुतोष गुप्ता व डॉ. केके साहू के नेतृत्व में डॉ. किशन सोनी, डॉ. गुंजन अग्रवाल, डॉ. सोनम, डॉ. समृद्ध, डॉ. लावण्या, डॉ. आशीष मालव, डॉ. गौरव और डॉ. अक्षय ने ऑपरेशन में भूमिका निभाई। निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. संकल्प टीम में शामिल रहे।

मरीज की जा सकती थी जान

कैंसर सर्जरी और हार्ट, चेस्ट एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने बताया कि रायपुर के 60 वर्षीय मरीज को छाती में दर्द और भारीपन की शिकायत थी। निजी अस्पताल में बायोप्सी से इनवेसिव थाइमोमा की पुष्टि हुई थी । कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी के बाद मरीज अस्पताल पास पहुंचा।

कॉन्ट्रास्ट सीटी स्कैन कराया तो छाती में 5×4.3×2.5 सेंटीमीटर की गांठ मिली। यह महाधमनी (एओर्टा), पल्मोनरी आर्टरी, बाएं फेफड़े और हृदय की बाहरी झिल्ली से चिपकी थी। सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रमुख रक्त वाहिकाओं को सुरक्षित रखते हुए गांठ निकालने की थी। खासकर महाधमनी को नुकसान पहुंचने पर अत्यधिक रक्तस्राव हो सकता था।

दोनों विभागों ने मिलकर सर्जरी की योजना बनाई। छाती के बीच में चीरा लगाकर गांठ तक पहुंच बनाई। इसे आसपास के अंगों से अलग करना चुनौतीपूर्ण था। इसलिए गांठ के साथ हृदय की बाहरी झिल्ली और बाएं फेफड़े का कुछ हिस्सा भी निकालना पड़ा। हालत में सुधार होने पर छुट्टी दे दी गई।

राम मंदिर की जमीन को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, स्वतंत्र सर्वे और सीमांकन की मांग

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 नई दिल्ली। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से जुड़ा भूमि विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। अदालत में दाखिल नई याचिका में मांग की गई है कि यह जांच कराई जाए कि वर्तमान रामलला मंदिर उसी जमीन पर बना है या नहीं, जिसे 2019 के फैसले में मंदिर निर्माण के लिए निर्धारित किया गया था। याचिकाकर्ता ने संबंधित भूमि का स्वतंत्र सर्वेक्षण और सीमांकन कराने के लिए समिति या आयोग गठित करने की अपील की है।मामले की सुनवाई सोमवार, 2 नवंबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष प्रस्तावित है। इस पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल है।

विशेषज्ञों की समिति से जांच कराने की मांग

याचिका में कहा गया है कि 2019 के फैसले में निर्धारित जमीन की वास्तविक पहचान, सीमा और क्षेत्रफल स्पष्ट करने के लिए स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। इसके लिए राजस्व, पुरातत्व और तकनीकी विषयों के विशेषज्ञों को शामिल कर एक समिति या आयोग बनाने की मांग की गई है।याचिकाकर्ता का आग्रह है कि विशेषज्ञों की जांच से यह स्पष्ट हो सके कि मौजूदा रामलला मंदिर उसी स्थान और भूमि पर स्थित है, जिसके संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाया था। फिलहाल यह याचिका में उठाया गया सवाल है, इस पर अदालत का कोई नया निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

9 नवंबर 2019 को आया था सुप्रीम कोर्ट का फैसला

अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को फैसला सुनाया था। इस निर्णय के बाद राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ और मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ी।इसके बाद 5 अगस्त 2020 को मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया गया। 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। अब नई याचिका के जरिए मंदिर के निर्माण स्थल और 2019 के फैसले में निर्धारित भूमि के बीच संबंध को लेकर सवाल उठाया गया है।

सुनवाई के बाद अदालत के रुख पर रहेगी नजर

राम मंदिर से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है। ऐसे में भूमि के सर्वे और सीमांकन की मांग से जुड़े इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत याचिका पर क्या रुख अपनाती है और स्वतंत्र जांच की मांग पर क्या निर्देश देती है, इस पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

विदेशी MBBS डॉक्टरों को हाई कोर्ट से झटका, सिम्स में जमा एक लाख रुपये फीस नहीं होगी वापस

 बिलासपुर। विदेश से मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर छत्तीसगढ़ के सिम्स बिलासपुर में इंटर्नशिप करने वाले डॉक्टरों को हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने इंटर्नशिप के लिए जमा कराई गई एक लाख रुपये की फीस लौटाने और अगस्त 2022 से पहले की अवधि का स्टाइपेंड देने की मांग खारिज कर दी है। इस फैसले से संबंधित डॉक्टरों को पुरानी फीस और बकाया स्टाइपेंड का लाभ नहीं मिलेगा।

तीन याचिकाओं पर एक साथ हुई सुनवाई

इस मामले में डॉ. श्यामू कुमार जांगड़े सहित 14 डॉक्टरों ने याचिका दायर की थी। इनके अलावा डॉ. छत्रेश चौधरी और डॉ. प्रणव पांडेय ने भी अलग-अलग याचिकाएं लगाई थीं। तीनों मामलों की सुनवाई हाई कोर्ट के जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने एक साथ की। सुनवाई के बाद अदालत ने सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।

इंटर्नशिप के लिए जमा फीस लौटाने की मांग

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, विदेश से मेडिकल डिग्री हासिल करने के बाद सिम्स बिलासपुर में इंटर्नशिप के दौरान प्रत्येक डॉक्टर से एक लाख रुपये शुल्क लिया गया था। डॉक्टरों ने राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) के 4 मार्च 2022 के दिशा-निर्देश और 19 मई 2022 के परिपत्र का हवाला दिया था।उनका तर्क था कि इन निर्देशों के तहत विदेशी मेडिकल डिग्री प्राप्त छात्रों से इंटर्नशिप फीस नहीं ली जानी चाहिए और उन्हें भारतीय मेडिकल छात्रों के समान स्टाइपेंड मिलना चाहिए। इसी आधार पर जमा की गई रकम वापस करने की मांग की गई थी।

अगस्त 2022 से मिलने लगा था स्टाइपेंड

डॉक्टरों को अगस्त 2022 से स्टाइपेंड का भुगतान शुरू हुआ था। हालांकि, इससे पहले की इंटर्नशिप अवधि का भुगतान नहीं किया गया। याचिकाकर्ताओं ने पंजीयन की तारीख से स्टाइपेंड देने और पुराने बकाये का भुगतान करने की मांग अदालत के सामने रखी थी।

सरकार ने 2015 में फीस जमा होने का दिया हवाला

राज्य सरकार की ओर से अदालत में बताया गया कि संबंधित डॉक्टरों ने वर्ष 2015 में ही इंटर्नशिप की फीस जमा कर दी थी। सरकार ने 24 नवंबर 2022 को हुई बैठक के फैसले का भी उल्लेख किया। इसके अनुसार, 4 मार्च 2022 के परिपत्र से पहले जमा कराई गई फीस वापस नहीं की जानी थी।

18 नवंबर 2021 की तारीख पर टिका अदालत का फैसला

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि संबंधित सभी डॉक्टरों ने 18 नवंबर 2021 से पहले विदेशी मेडिकल डिग्री प्राप्त कर ली थी। ऐसे में वे बाद में जारी नए दिशा-निर्देशों का लाभ लेने के पात्र नहीं माने गए।अदालत ने यह भी माना कि अगस्त 2022 से पहले की अवधि के स्टाइपेंड भुगतान के लिए कोई अन्य लागू प्रावधान सामने नहीं था। इन्हीं आधारों पर तीनों याचिकाओं को खारिज कर दिया गया। इस फैसले के बाद डॉक्टरों को न तो सिम्स में जमा एक लाख रुपये की फीस वापस मिलेगी और न ही अगस्त 2022 से पहले की अवधि का स्टाइपेंड मिल सकेगा।

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में तीन दिन संगीत और लोककला की धूम, पलक मुच्छाल से अभिजीत भट्टाचार्य तक सजेगी शाम

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के 26वें स्थापना दिवस पर नवा रायपुर में 1 से 3 नवंबर तक राज्योत्सव का आयोजन किया जा रहा है। तीन दिन चलने वाले इस समारोह में प्रदेश की लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराओं और आधुनिक संगीत की विविध झलक देखने को मिलेगी। केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया समारोह का शुभारंभ करेंगे, जबकि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय उद्घाटन कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे।इस बार राज्योत्सव में बॉलीवुड के लोकप्रिय गायकों के साथ छत्तीसगढ़ के कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। पहले दिन पलक मुच्छाल, दूसरे दिन स्वास्ति मेहुल और अंतिम दिन अभिजीत भट्टाचार्य की संगीतमय प्रस्तुतियां मुख्य आकर्षण रहेंगी।

मुख्य मंच पर तीनों दिन खास कार्यक्रम

राज्योत्सव के पहले दिन 1 नवंबर को मुख्य मंच पर शाम 5 बजे से सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू होगा। शाम 5 से 6 बजे तक दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के कलाकार लोकसंगीत पेश करेंगे। शाम 6 बजे रायपुर के अनुराग शर्मा की प्रस्तुति होगी। इसके बाद शाम 6:30 से रात 8 बजे तक उद्घाटन समारोह आयोजित किया जाएगा। रात 8 बजे से पार्श्व गायिका पलक मुच्छाल अपने गीतों से दर्शकों का मनोरंजन करेंगी।2 नवंबर को शाम 6 से 7 बजे तक मैं अयोध्या हूं नाट्य प्रस्तुति होगी। इसके बाद शाम 7 बजे रायपुर के कलाकार सुनील सोनी मंच संभालेंगे। रात 8 बजे से गायिका स्वास्ति मेहुल की संगीतमय प्रस्तुति होगी।समारोह के अंतिम दिन 3 नवंबर को शाम 6 से 6:30 बजे तक दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के कलाकार लोकसंगीत पेश करेंगे। शाम 6:30 बजे पद्मश्री उषा बारले पंथी नृत्य की प्रस्तुति देंगी। शाम 7 से रात 9 बजे तक राज्य अलंकरण समारोह होगा। इसके बाद रात 9 बजे से गायक अभिजीत भट्टाचार्य अपने लोकप्रिय गीतों के साथ कार्यक्रम का समापन करेंगे।

शिल्पग्राम में भी सजेगा लोककलाओं का मंच

मुख्य मंच के अलावा शिल्पग्राम में भी तीनों दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। यहां स्थानीय और प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए कलाकार लोकसंगीत, नृत्य, नाटक और अन्य विधाओं का प्रदर्शन करेंगे।1 नवंबर को शिल्पग्राम में नौ प्रस्तुतियां रखी गई है। रायपुर के शिवेन्द्र मंडावी लोकसंगीत और गिटार वादन करेंगे। राजीव श्रीवास्तव का रिदम बैंड और संतोष कुमार सिन्हा का फ्यूजन बैंड भी प्रस्तुति देंगे। दुर्ग के चेतन देवांगन और रायपुर की दुर्गा साहू पंडवानी गायन करेंगे। अनुष्का सुल्ताना शास्त्रीय नृत्य पेश करेंगी। इसके अलावा दुर्ग की रजनी रजक लोकमंच एवं ढोलामारू, बिलासपुर की वंदिता साहू लोकसंगीत और पायल साहू लोकमंच की प्रस्तुति देंगी।

दूसरे दिन 11 सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

2 नवंबर को शिल्पग्राम में कुल 11 कार्यक्रम होंगे। प्रसन्ना अवस्थी लोकसंगीत और नृत्य प्रस्तुत करेंगी। सुष्मिता दास ओडिसी नृत्य करेंगी, जबकि दुर्ग की समप्रिया पूजा निषाद पंडवानी गाथा सुनाएंगी। बिलासपुर के अंकित निर्मलकर सूफी, गजल और सुगम संगीत पेश करेंगे।गरियाबंद की मिलवंतीन बाई सुआ नृत्य करेंगी। रायपुर की मेघा बोस ताम्रकार पारंपरिक लोकसंगीत और आंचल पाण्डेय कथक नृत्य प्रस्तुत करेंगी। धमतरी की रुखमनी दीवान लोकमंच पर प्रस्तुति देंगी। इसके साथ आदित्य मिश्रा बैंड, विनीता त्रिपाठी का कथक नृत्य और तेजराम साहू का लोकमंच कार्यक्रम भी शामिल रहेगा।

अंतिम दिन पंथी नृत्य, भजन और नाटक का आयोजन

3 नवंबर को शिल्पग्राम में दस प्रस्तुतियां होंगी। रायपुर की आस्था भट्ट भजन गायन करेंगी। दुर्ग की आरती बारले और रायपुर के दिनेश कुमार जांगड़े पंथी नृत्य प्रस्तुत करेंगे। कबीरधाम के राकेश सेन लोकमंच और पूर्णिमा साहू जसगीत एवं जगराता भजन पेश करेंगी।अभिषेक सोनकर आदिवासी लोकसंगीत और नृत्य प्रस्तुत करेंगे। दीपाली पाण्डेय कथक समूह नृत्य, वृद्धुमन वचस्पति भारती सूफी संगीत और अनुष्णा रॉय चौधरी कथक नृत्य पेश करेंगी। आनंदकुमार पाण्डेय की नाट्य प्रस्तुति के साथ शिल्पग्राम के कार्यक्रमों का समापन होगा।

लोकपरंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल

राज्योत्सव में पंडवानी, पंथी, सुआ, लोकगीत, आदिवासी नृत्य और शास्त्रीय नृत्य जैसी विधाओं को प्रमुखता दी गई है। इनके जरिए प्रदेश की लोकआस्था, सामाजिक परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को मंच पर उतारा जाएगा।तीन दिन का यह आयोजन स्थानीय कलाकारों के लिए अपनी कला और हुनर दिखाने का अवसर बनेगा। वहीं दर्शकों को एक ही परिसर में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक विधाओं से लेकर आधुनिक संगीत तक की प्रस्तुतियां देखने और सुनने का मौका मिलेगा।

नवा रायपुर में आज से तीन दिवसीय राज्योत्सव, 40 हजार वाहनों की पार्किंग और 25 एंबुलेंस तैनात

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के 26वें स्थापना दिवस के अवसर पर नवा रायपुर में तीन दिवसीय राज्योत्सव का भव्य आयोजन शुरू हो रहा है। इस वर्ष समारोह की थीम सशक्त नारी-युवा उड़ान रखी गई है। कार्यक्रम में प्रदेश की लोकसंस्कृति, देशभर के शिल्पकारों की कला, बॉलीवुड कलाकारों की प्रस्तुतियां और भारतीय वायुसेना के हवाई करतब दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहेंगे। समारोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली हस्तियों को 41 राज्य अलंकरण और पुरस्कार भी दिए जाएंगे।राज्योत्सव का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया करेंगे। वहीं, समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के शामिल होने का कार्यक्रम निर्धारित है। आयोजन के जरिए छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के साथ राज्य की विकास यात्रा और भावी योजनाओं को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

26 विभागों की प्रदर्शनियां, शिल्पकारों की कला भी दिखेगी

आयोजन स्थल पर देश के अलग-अलग राज्यों से आए कारीगरों ने आकर्षक सजावट और पंडाल तैयार किए है। यहां करीब 26 सरकारी विभागों की प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। इनमें शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं, उपलब्धियों और आगामी कार्ययोजनाओं की जानकारी दी जाएगी।राज्योत्सव की थीम के अनुरूप महिलाओं के सशक्तिकरण और युवाओं के लिए उपलब्ध अवसरों को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं के साथ देश के विभिन्न हिस्सों से आए शिल्पकारों के हस्तनिर्मित उत्पाद और कलाकृतियां भी लोगों को देखने को मिलेंगी।

40 हजार वाहनों के लिए पार्किंग, छह रास्तों से पहुंचेंगे दर्शक

बड़ी संख्या में लोगों के आने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने यातायात प्रबंधन की विस्तृत योजना तैयार की है। आयोजन स्थल तक पहुंचने के लिए छह मार्ग तय किए गए है। आसपास करीब 40 हजार वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की गई है। दर्शकों के प्रवेश के लिए दो द्वार निर्धारित किए गए है, ताकि भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके।पार्किंग क्षेत्रों से मुख्य आयोजन स्थल तक लोगों की आवाजाही को व्यवस्थित करने की भी योजना बनाई गई है। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद एक साथ वाहनों के बाहर निकलने से यातायात का दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में निर्धारित रास्तों और पार्किंग स्थलों का उपयोग करना जरूरी रहेगा।

300 शौचालय, 60 एलईडी स्क्रीन और विशाल डोम में बैठने की सुविधा

दर्शकों की सहूलियत के लिए आयोजन स्थल पर करीब 300 शौचालय बनाए गए है। स्वच्छ पेयजल, बिजली, साफ-सफाई और रोशनी के इंतजाम भी किए गए है। विशाल डोम में बैठने की विशेष व्यवस्था रहेगी। मुख्य मंच से दूर मौजूद दर्शक भी कार्यक्रम देख सके, इसके लिए करीब 60 एलईडी स्क्रीन लगाई जाएंगी।

20 बिस्तरों का अस्थायी अस्पताल और 25 एंबुलेंस तैयार

स्वास्थ्य सेवाओं को ध्यान में रखते हुए आयोजन स्थल पर 20 बिस्तरों वाला अस्थायी अस्पताल बनाया गया है। यहां आईसीयू की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। इसके अलावा 25 एंबुलेंस तैनात की जाएंगी, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीज को तत्काल उपचार मिल सके और अस्पताल पहुंचाया जा सके।आगजनी या अन्य आपात स्थिति से निपटने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी तैनात रहेंगी। बिजली व्यवस्था, मंच और भीड़ प्रबंधन से जुड़ी सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

सारंग और सूर्यकिरण टीम के हवाई करतब होंगे खास

इस बार राज्योत्सव का सबसे रोमांचक आकर्षण भारतीय वायुसेना का एयर शो रहेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 1 और 2 नवंबर को सारंग हेलीकॉप्टर टीम और सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम आसमान में करतब दिखाएंगी। सारंग टीम के पांच हेलीकॉप्टर रायपुर में अभ्यास कर चुके है।सेंध लेक क्षेत्र में प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान नौ विमानों से करीब 40 मिनट तक फॉर्मेशन फ्लाइंग और अन्य हवाई करतब दिखाए जाने की जानकारी दी गई है। इस प्रदर्शन को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है। सुरक्षा के लिहाज से निर्धारित क्षेत्र और प्रवेश संबंधी निर्देशों का पालन करना आवश्यक होगा।

पलक मुच्छाल और अभिजीत भट्टाचार्य की प्रस्तुतियां भी होंगी

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बॉलीवुड कलाकार पलक मुच्छाल, स्वस्ति मेहुल और अभिजीत भट्टाचार्य अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इनके साथ छत्तीसगढ़ के स्थानीय कलाकार भी मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। लोकगीत, लोकनृत्य और जनजातीय संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुतियों के जरिए प्रदेश की परंपराओं को सामने लाया जाएगा।

41 विभूतियों को मिलेगा राज्य अलंकरण और पुरस्कार

राज्योत्सव के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट काम करने वाली हस्तियों को कुल 41 राज्य अलंकरण और पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इन सम्मानों के जरिए प्रदेश के सामाजिक, सांस्कृतिक और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित किया जाएगा।छत्तीसगढ़ के गठन के 26 वर्ष पूरे होने पर आयोजित यह समारोह केवल सांस्कृतिक उत्सव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश की उपलब्धियों, विकास की प्राथमिकताओं और भविष्य की उम्मीदों को सामने रखने का अवसर भी बनेगा। अगले तीन दिनों तक नवा रायपुर में कला, संस्कृति, सम्मान और रोमांचक एयर शो का विशेष संगम देखने को मिलेगा।

पीएम मोदी की शुभकामनाओं पर सीएम साय ने जताया आभार, बोले- अटल जी के सपनों का छत्तीसगढ़ बनाएगी सरकार

 रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से मिली शुभकामनाओं के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आभार जताया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी, समृद्ध संस्कृति और मेहनतकश जनता के प्रति प्रधानमंत्री का स्नेह प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उनका मार्गदर्शन राज्य को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि प्रधानमंत्री की शुभकामनाएं प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और विकास की यात्रा के प्रति उनके जुड़ाव को दर्शाती है। उन्होंने समस्त प्रदेशवासियों की ओर से प्रधानमंत्री का धन्यवाद करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में बदलाव का उल्लेख

सीएम साय ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व और मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ शांति, विश्वास और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ जारी प्रयासों और बस्तर में आ रहे बदलाव को राज्य की विकास यात्रा का अहम हिस्सा बताया। उनके अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ सड़क, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार भी महत्वपूर्ण है।

किसानों की समृद्धि और महिला सशक्तिकरण पर जोर

मुख्यमंत्री ने किसानों की खुशहाली को प्रदेश की प्रगति का प्रमुख आधार बताया। कृषि प्रधान छत्तीसगढ़ में धान उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती विकास की अहम प्राथमिकताएं है। उन्होंने महिलाओं की बढ़ती आर्थिक और सामाजिक भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा कि माताओं और बहनों का सशक्तिकरण राज्य में हो रहे सकारात्मक बदलाव का महत्वपूर्ण पक्ष है।

आधुनिक सुविधाओं के विस्तार से विकास को गति

साय ने सड़क, संपर्क और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को भी राज्य की बदलती तस्वीर से जोड़ा। उन्होंने कहा कि आधुनिक अधोसंरचना प्रदेश की आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक प्रगति के लिए जरूरी है।

अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों का छत्तीसगढ़ बनाने का संकल्प

राज्य स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी याद किया। छत्तीसगढ़ का गठन 1 नवंबर 2000 को उनके नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के कार्यकाल में हुआ था। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अटल बिहारी वाजपेयी के समृद्ध छत्तीसगढ़ के सपने को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।उन्होंने इस लक्ष्य को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प से जोड़ते हुए कहा कि प्रदेश का विकास इसी व्यापक राष्ट्रीय दृष्टि के अनुरूप आगे बढ़ाया जाएगा।

प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन को बताया नई ऊर्जा का स्रोत

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री का स्नेह, भरोसा और मार्गदर्शन छत्तीसगढ़ को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में प्रेरक भूमिका निभाता रहेगा। अपने संदेश के अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री के प्रति दोबारा आभार जताते हुए सादर जोहार और जय छत्तीसगढ़ का संदेश दिया।

छत्तीसगढ़ के 26 साल: अटल बिहारी वाजपेयी के एक वादे से बना नया राज्य, जानिए अब तक के मुख्यमंत्रियों की खास योजनाएं

 छत्तीसगढ़ : आज अपना 26वां स्थापना दिवस मना रहा है। इस अवसर पर राज्य गठन से जुड़ा वह ऐतिहासिक दौर एक बार फिर चर्चा में है, जब अलग छत्तीसगढ़ का सपना साकार हुआ था। इस राज्य के निर्माण में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अहम भूमिका रही। उनके एक चुनावी वादे से शुरू हुई राजनीतिक पहल आखिरकार नवंबर 2000 में नए राज्य के गठन तक पहुंची। बीते 26 वर्षों में अलग-अलग मुख्यमंत्रियों ने अपनी प्राथमिकताओं के मुताबिक कई योजनाएं शुरू की, जो उनके कार्यकाल की पहचान बनीं।

अटल बिहारी वाजपेयी का 11 लोकसभा सीटों वाला वादा

भाजपा नेता सच्चिदानंद उपासने के अनुसार, राज्य गठन से पहले छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश का हिस्सा था। उस दौर में क्षेत्र की राजनीति में कांग्रेस का प्रभाव था। इसी बीच 1998-99 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी रायपुर के सप्रे शाला मैदान पहुंचे थे।यहां उन्होंने जनता के सामने एक संकल्प रखा। उन्होंने कहा था कि यदि भाजपा को छत्तीसगढ़ क्षेत्र की 11 लोकसभा सीटों पर समर्थन मिलता है, तो अलग राज्य बनाने की दिशा में कदम उठाया जाएगा।चुनाव परिणाम में भाजपा ने 11 में से 10 सीटों पर जीत हासिल की। इसके बाद केंद्र में सरकार बनने पर राज्य गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ी। अगस्त 2000 में संसद से छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण का प्रस्ताव पारित हुआ और 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ देश के नए राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।

अलग-अलग मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में बनी योजनाओं ने बनाई पहचान

राज्य गठन के बाद छत्तीसगढ़ की सत्ता संभालने वाले मुख्यमंत्रियों ने कृषि, ग्रामीण विकास, खाद्य सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों पर ध्यान दिया। इन योजनाओं ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को भी अलग पहचान दी।

अजीत जोगी: जल संकट से निपटने के लिए शुरू हुई जोगी डबरी

छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने वर्ष 2000 से 2003 तक प्रदेश की कमान संभाली। उनके कार्यकाल में ग्रामीण इलाकों में जल संकट एक बड़ी चुनौती था। सूखे और पानी की कमी से निपटने के लिए गांवों में छोटे तालाब और जल संग्रहण संरचनाएं तैयार कराने की पहल की गई। इस अभियान को जोगी डबरी के नाम से जाना गया।

डॉ. रमन सिंह: सस्ती चावल योजना से मिली चाउर वाले बाबा की पहचान

डॉ. रमन सिंह वर्ष 2003 से 2018 तक लगातार 15 साल मुख्यमंत्री रहे। उनके कार्यकाल की प्रमुख पहचान सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीब परिवारों को सस्ती दर पर चावल उपलब्ध कराने की योजना बनी।इस व्यवस्था के तहत पात्र परिवारों को 1 और 2 रुपये प्रति किलो की दर से चावल दिया जाने लगा। खाद्य सुरक्षा से जुड़ी इस पहल के कारण डॉ. रमन सिंह को चाउर वाले बाबा के नाम से भी जाना जाने लगा।

भूपेश बघेल: गोबर खरीदी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जोड़ने की पहल

वर्ष 2018 से 2023 तक मुख्यमंत्री रहे भूपेश बघेल ने कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अपनी योजनाओं का प्रमुख आधार बनाया। उनकी सरकार ने गोधन न्याय योजना शुरू की, जिसके तहत किसानों और पशुपालकों से 2 रुपये प्रति किलो की दर से गोबर खरीदा जाता था।योजना का उद्देश्य पशुपालन को आर्थिक रूप से उपयोगी बनाना, ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ाना और गोबर के इस्तेमाल से जैविक खाद को बढ़ावा देना था। इस मॉडल की देशभर में चर्चा हुई।

विष्णु देव साय: महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक सहायता

वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार ने मार्च 2024 में महतारी वंदन योजना शुरू की। इसके तहत पात्र विवाहित महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे बैंक खाते में दी जाती है।इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को नियमित आर्थिक सहयोग देना और परिवार के आर्थिक फैसलों में उनकी भागीदारी को मजबूत करना है।

26 साल की विकास यात्रा में बदली प्रदेश की तस्वीर

छत्तीसगढ़ ने राज्य गठन के बाद इन 26 वर्षों में अलग-अलग सरकारों के नेतृत्व में कई योजनाओं और विकास कार्यक्रमों का दौर देखा है। अटल बिहारी वाजपेयी के समय शुरू हुई अलग राज्य की पहल से लेकर आज तक प्रदेश की राजनीति में राज्य की पहचान, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और महिला कल्याण जैसे मुद्दे प्रमुख रहे है। स्थापना दिवस का अवसर इसी राजनीतिक और विकास यात्रा को याद करने का मौका है।

1 नवंबर से बदल गए कई जरूरी नियम, टोल पास से लेकर मोबाइल कॉल और पेंशन तक पड़ेगा असर

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 Rule Change From 1 November: नवंबर महीने की शुरुआत के साथ ही आम लोगों से जुड़े कई नियमों में बदलाव लागू हुए है। इनका असर वाहन चालकों, कारोबारियों, मोबाइल उपभोक्ताओं और पेंशन पाने वाले वरिष्ठ नागरिकों पर पड़ सकता है। नए बदलावों में सालाना टोल पास, GST रिटर्न प्रक्रिया, शराब की खरीदारी में डिजिटल भुगतान और मोबाइल पर कॉलर का नाम दिखाने जैसी सुविधाएं शामिल है। आइए जानते है नवंबर से जुड़े इन प्रमुख बदलावों के बारे में।

1. 1,500 रुपये में सालाना टोल पास की सुविधा

टोल प्लाजा के आसपास रहने वाले निजी वाहन मालिकों के लिए 1,500 रुपये का सालाना पास शुरू करने का प्रावधान किया गया है। इसका लाभ टोल प्लाजा से 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले पात्र स्थानीय वाहन मालिक उठा सकेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य स्थानीय लोगो को बार-बार टोल शुल्क चुकाने से राहत देना है।

2. GST रिटर्न प्रक्रिया को आसान बनाने की तैयारी

GST से जुड़े नियमों में भी बदलाव की दिशा में कदम उठाए जा रहे है। प्रस्तावित व्यवस्था में टैक्स रिफंड की प्रक्रिया सरल करने और कारोबारियों के लिए दस्तावेजी औपचारिकताएं कम करने पर जोर दिया जा रहा है। सालाना 5 करोड़ रुपये से कम टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए नई रिटर्न व्यवस्था लागू करने की योजना भी बताई गई है।

3. तमिलनाडु में महंगी शराब के लिए डिजिटल भुगतान जरूरी

तमिलनाडु में शराब की खरीदारी को लेकर भुगतान का नया नियम लागू किया गया है। TASMAC के प्रावधान के अनुसार, 1,000 रुपये से अधिक कीमत वाली शराब की बोतल खरीदने पर डिजिटल भुगतान करना अनिवार्य होगा। यानी तय सीमा से महंगी शराब की खरीद पर नकद भुगतान स्वीकार नहीं किया जाएगा।

4. अनजान नंबर से कॉल आने पर दिखेगा नाम

मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए CNAP यानी कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन सुविधा शुरू की जा रही है। इस सुविधा के तहत अनजान नंबर से फोन आने पर मोबाइल स्क्रीन पर कॉल करने वाले व्यक्ति का नाम दिखाई दे सकेगा। इसका उद्देश्य फर्जी कॉल, धोखाधड़ी और अनचाही कॉल की पहचान करने में मदद करना है।

5. पेंशन पाने वालों को जमा करना होगा जीवन प्रमाण पत्र

पेंशनभोगियों के लिए नवंबर का महीना महत्वपूर्ण है। उन्हें अपनी पेंशन जारी रखने के लिए जीवन प्रमाण पत्र यानी लाइफ सर्टिफिकेट जमा करना होगा। इसकी सामान्य अंतिम तारीख 30 नवंबर निर्धारित है। वहीं, 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ पेंशनभोगियों के लिए जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की प्रक्रिया 1 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है।

नवंबर में इन बदलावों पर रखें नजर

टोल पास, GST, डिजिटल भुगतान, मोबाइल कॉलर पहचान और पेंशन से जुड़े ये बदलाव अलग-अलग वर्ग के लोगो को प्रभावित कर सकते है। ऐसे में वाहन मालिकों, कारोबारियों और पेंशनभोगियों को अपने से जुड़े नियमों की जानकारी रखनी चाहिए, ताकि किसी तरह की परेशानी से बचा जा सके।

सिंहासन की पुतलियाँ श्मशान का बेताल या आज का रामलीला मैदान

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संदर्भ लेख विपक्ष रैली/रामलीला मैदान 1 नवंबर 2026

(दृश्य: 1 नवंबर की सुबह। टीवी स्क्रीन पर विपक्ष की आयोजित महारैली का सीधा प्रसारण चल रहा है। ज्वाला और ज्योतिपति मेज पर चाय की चुस्कियों के साथ गहन सोच में डूबे हैं।)

रुकावट के लिए लगे बेरीकेट्स कूद कर कार्यकर्ता पहुंच रहे रामलीला मैदान ।

ज्वाला: (स्क्रीन की ओर इशारा करते हुए, तीखे स्वर में) ज्योतिपति जी, आज 1 नवंबर है। सड़कों पर जनसैलाब है, विपक्ष की महारैली है और हवा में भारी असंतोष। 79 वर्षों के इस स्वतंत्र भारत में हम आज कहाँ खड़े हैं? क्या यह वही भारत है जिसका सपना हमारे पुरखों ने देखा था?

ज्योतिपति: (धीमे और गंभीर स्वर में) ज्वाला, इतिहास केवल कालचक्र नहीं, दर्पण होता है। 79 साल की इस यात्रा में अगर देश का ढांचा चरमराहट की आवाज़ कर रहा है, तो इसकी पृष्ठभूमि किसी एक दिन या एक नीति की देन नहीं है।

इतिहास गवाह है कि हम पहले क्षेत्रवाद, अलगाववाद, धर्मवाद और जातिवाद के कारण शताब्दियों तक गुलाम रहे। और जब 1000 साल के संघर्ष के बाद स्वतंत्रता मिली, तो हमने क्या किया? हमने ‘विकासवाद’ को राजनीति का मूलमंत्र बनाने के बजाय देश को तुष्टिकरण ‘आरक्षणवाद’ और ‘वोटबैंकवाद’ के चक्रव्यूह में धकेल दिया।

ज्वाला: लेकिन सत्ता में बैठे लोग तो इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास का दावा करते हैं!

ज्योतिपति: (कटाक्ष करते हुए) छद्म विकास! कागज़ों और विज्ञापनों पर दिखने वाला विकास, जो असल में विदेशी कर्ज़ के बलबूते खड़ा किया गया है। आज भारत विश्व के उन शीर्ष देशों में शामिल है जो भारी कर्ज़ के नीचे दबे हैं।

अमेरिका आज हम पर अनाप-शनाप टैरिफ़ की तलवार लटकाकर आर्थिक दबाव बना रहा है। सीमा पर स्थिति यह है कि चीन अरुणाचल के रास्ते भारतीय सीमा में पैठ बनाने की कोशिश में है।

कूटनीति का पहला नियम है कि जब विदेशी आक्रमणकारी और बाहरी शक्तियाँ ताकतवर हों, तो राजा का पहला कर्तव्य अपने घर को अंदर से अटूट बनाना होता है। लेकिन हम क्या कर रहे हैं? सामाजिक समरसता और समावेशन के नाम पर नए-नए विभाजन पैदा कर रहे हैं।

ज्वाला: यही तो मूल रहस्य है! महंगाई से आम नागरिक पिसा जा रहा है, बेकारी और बेरोजगारी से युवा त्रस्त हैं, महिलाओं के वास्तविक उत्थान पर नीतियाँ सिर्फ विज्ञापनों तक सीमित रह गईं।

पूर्ववर्ती सरकारों ने अगर तुष्टीकरण की नीति चलाई, तो मौजूदा व्यवस्था ने क्या किया? समान नागरिक संहिता (UCC) की बातें तो हुईं, पर व्यावहारिक धरातल पर अधिकारों की समरूपता की जगह नए प्रशासनिक विरोधाभास खड़े कर दिए गए। ऐसा क्यों है कि आज सवर्ण हो, महिला हो, या समाज का कोई अन्य वर्ग नाराजगी है?—हर कोई किसी न किसी मोड़ पर खुद को उपेक्षित या ठगा हुआ महसूस कर रहा है?

ज्योतिपति: (अंगुली उठाकर) ज्वाला, इसे समझने के लिए तुम्हें भारत की सबसे प्राचीन और तिलस्मी कथाओं के मूल दर्शन को समझना होगा। याद करो उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य के राजसिंहासन को—’सिंहासन बत्तीसी’।

जब विक्रमादित्य उस सिंहासन पर बैठते थे, तो उसमें जुड़ी 32 पुतलियाँ जीवंत हो उठती थीं।

वे पुतलियाँ केवल सजावट नहीं थीं, वे प्रजा के अधिकार, महिला सम्मान, राजधर्म और राजा के नैतिक दायित्वों की प्रतीक थीं। वे राजा से प्रश्न करती थीं और विक्रमादित्य हर प्रश्न का उत्तर अपने न्यायप्रिय और प्रजापालक आचरण से देते थे।

लेकिन जब राजा भोज उस सिंहासन पर बैठने लगा, तो 32 पुतलियों ने ऐसे प्रश्न पूछे जिनका उत्तर अहंकार और अयोग्यता के कारण भोज के पास नहीं था। पुतलियाँ उड़ गईं, सिंहासन बेजान हो गया और अंततः उसे ज़मीन में गाड़ना पड़ा।

ज्वाला: (आँखों में चमक लाते हुए) यानी आज की राजसत्ता भी राजा भोज की तरह उस सिंहासन की कसौटी पर निष्फल साबित हो रही है?

ज्योतिपति: बिलकुल। और कहानी यहीं खत्म नहीं होती। जब वही विक्रमादित्य प्रजापालन और न्याय के मार्ग से हटकर सिद्धियाँ और अति-शक्तियाँ पाने के लालच में तंत्र-मंत्र के चक्कर में पड़े, तो ‘बेताल पच्चीसी’ का जन्म हुआ।

बेताल पच्चीसी में राजतंत्र नहीं है; वहाँ श्मशान है, कंधे पर टँगा मुर्दा है, तंत्र और मंत्र है। बेताल हर बार सवाल पूछता है—”अगर उत्तर जानते हुए भी चुप रहे, तो तुम्हारा सिर टुकड़ों में टूट जाएगा।”

आज का तंत्र वही श्मशान की साधना बन चुका है। सत्ता राजधर्म छोड़कर केवल सत्ता में बने रहने की ‘सिद्धि’ पाने में लगी है। बेताल की तरह आज देश का आम नागरिक, युवा और बुद्धिजीवी सत्ता से सवाल पूछ रहा है, लेकिन सत्ता अहंकार के नशे में चूर है।

ज्वाला: आपने बहुत सटीक कहा। विक्रमादित्य के दरबार में नवरत्न थे—वराहमिहिर और आर्यभट्ट जैसे महान वैज्ञानिक और विद्वान। उसी परंपरा पर मुगल काल में भी नवरत्नों की व्यवस्था दिखी जहाँ योग्यताओं का समावेश था। लेकिन आज की राजनीति में ज्ञान और विवेक की जगह केवल वोटों का गणित है।

ज्योतिपति: राजसत्ता कोई खेल या मज़ाक नहीं है ज्वाला। सिंहासन पर बैठने वाले का धीर, वीर और गंभीर होना अति-आवश्यक है। जो सत्ता देश को बांटने, विभाजन करने, तुष्टीकरण करने या जाति-धर्म के नाम पर शासन करने का काम करती है, वह अंततः अपने ही पतन का गड्ढा खोदती है।

हमारे शास्त्रों में स्पष्ट लिखा है कि राजसत्ता से बड़ी ‘धर्मसत्ता’ होती है, और धर्मसत्ता व राजसत्ता दोनों ‘ईश्वरीय सत्ता’ के अधीन हैं। अहंकार ही सत्ता के पतन का सबसे बड़ा कारण है।

रावण को सत्ता और शक्ति का अहंकार था, जिसका अंत सबने देखा। इसके विपरीत, प्रभु श्री राम को सत्ता का रत्ती भर अहंकार नहीं था—एक साधारण नागरिक (धोबी) की शंका पर भी उन्होंने अपनी सबसे प्रिय वस्तु, माता सीता का त्याग कर राजधर्म की मर्यादा को सर्वोपरि रखा।

ज्वाला: तो क्या सत्ताधीशों को यह समझ नहीं आ रहा है कि यदि वे इस अहंकार से बाहर नहीं निकले, तो उनका हश्र भी पूर्ववर्ती सरकारों जैसा ही होगा?

ज्योतिपति: यदि वे इतिहास से सबक नहीं लेंगे, तो नियति अपना काम करेगी। जब तक देश में ‘विकासवाद’ और ‘समान नागरिक अधिकार’ को सच्चा आधार नहीं बनाया जाएगा, और जब तक सत्ता पुतलियों के प्रश्नों से भागकर बेताल के तिलस्म में उलझी रहेगी, तब तक न सीमाएँ सुरक्षित रहेंगी और न ही समाज।

आज की यह विपक्ष की महारैली और सड़कों का असंतोष उसी जन-आक्रोश का संकेत है।

राजसत्ता तभी तक जीवित रहती है जब तक वह प्रजा को संतान मानकर उसका समरूप पालन-पोषण करे, न कि उसे केवल एक वोट बैंक समझे।

(दोनों एक-दूसरे की ओर देखते हैं। चाय का कप मेज पर रखा जाता है और प्रकाश धीरे-धीरे धीमा होता है।)



छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला, दिवंगत प्रोफेसर के परिवार को मिलेगी पेंशन, एरियर्स के साथ ब्याज का भी होगा भुगतान

 रायपुर : छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने रायपुर चिकित्सा महाविद्यालय के दिवंगत सह प्राध्यापक डॉ. राकेश मोहन चंदोला के परिवार को आर्थिक राहत देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य मंत्रिपरिषद ने उनके लंबे सेवाकाल को परिवार पेंशन की गणना के लिए नियमित सेवा के रूप में स्वीकार करने की मंजूरी दे दी है। इसके बाद उनके पात्र परिजनों को परिवार पेंशन के साथ बकाया राशि और नियमानुसार ब्याज का लाभ भी मिलेगा।सरकार के इस फैसले से लंबे समय से पेंशन संबंधी लाभों का इंतजार कर रहे परिवार के लिए भुगतान का रास्ता साफ हुआ है। मंत्रिपरिषद ने 19 अक्टूबर 1987 से 7 जनवरी 2022 तक की सेवा अवधि को परिवार पेंशन के उद्देश्य से मान्य करने की स्वीकृति दी है।

34 साल से अधिक की सेवा अवधि को मिली मान्यता

दिवंगत डॉ. राकेश मोहन चंदोला रायपुर चिकित्सा महाविद्यालय में सह प्राध्यापक के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने 19 अक्टूबर 1987 से 7 जनवरी 2022 तक अपनी सेवाएं दी थीं।मंत्रिपरिषद के फैसले के अनुसार, करीब 34 वर्ष से अधिक की इस सेवा अवधि को परिवार पेंशन की पात्रता और गणना के लिए नियमित सेवा माना जाएगा। इससे उनके पात्र परिवारजनों को पेंशन संबंधी वित्तीय लाभ निर्धारित करने में मदद मिलेगी।

परिवार पेंशन के साथ बकाया राशि और ब्याज भी मिलेगा

राज्य सरकार ने इस मामले में केवल परिवार पेंशन की मंजूरी तक फैसला सीमित नहीं रखा है। पात्र परिजनों को बकाया पेंशन राशि यानी एरियर्स और नियमानुसार ब्याज देने की भी स्वीकृति प्रदान की गई है।अब संबंधित विभाग निर्धारित नियमों के आधार पर पेंशन की गणना करेगा। इसके बाद परिवार को मिलने वाली मासिक पेंशन, पिछली अवधि की बकाया राशि और देय ब्याज का भुगतान किया जाएगा।हालांकि उपलब्ध निर्णय में कुल एरियर्स, मासिक पेंशन की राशि, ब्याज की दर और भुगतान की निश्चित तारीख का विवरण सामने नहीं आया है।

रायपुर मेडिकल कॉलेज के दिवंगत सह प्राध्यापक से जुड़ा मामला

डॉ. राकेश मोहन चंदोला की सेवा अवधि को परिवार पेंशन के लिए मान्यता देने का प्रस्ताव राज्य मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा गया था। विचार-विमर्श के बाद सरकार ने उनकी निर्धारित सेवाओं को परिवार पेंशन के प्रयोजन से नियमित मानने की मंजूरी दे दी।यह स्पष्ट किया गया है कि सेवा अवधि को नियमित मानने की स्वीकृति विशेष रूप से परिवार पेंशन की गणना के लिए है। इसे अन्य सभी सेवा संबंधी लाभों के लिए स्वतः नियमितीकरण नहीं माना जाएगा।

विभागीय प्रक्रिया के बाद होगा भुगतान

मंत्रिपरिषद की मंजूरी मिलने के बाद अब संबंधित विभाग पेंशन और बकाया राशि की गणना से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करेगा। नियमानुसार ब्याज की गणना भी की जाएगी।इस फैसले से दिवंगत सह प्राध्यापक के पात्र परिवारजनों को परिवार पेंशन, एरियर्स और ब्याज के रूप में वित्तीय सहायता मिलने का रास्ता खुल गया है।