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Wednesday, October 28, 2026
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जनसुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता, चक्रवाती तूफान से निपटने सभी तैयारियां सुनिश्चित करें -राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा

रायपुर। बंगाल की खाड़ी में बन रहे चक्रवाती तूफान अर्नब के संभावित प्रभाव को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने जनसुरक्षा और आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, रायपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार 27 एवं 28 अक्टूबर को प्रदेश के सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर, कांकेर, महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद, बालोद और रायपुर जिले में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होने की संभावना है। संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन ने संबंधित जिलों में सतर्कता बढ़ाने और आवश्यक एहतियाती उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

नागरिकों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि प्रदेश के नागरिकों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। संभावित चक्रवाती तूफान और भारी बारिश से उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशासन को पूरी सतर्कता और तत्परता के साथ कार्य करना होगा। किसी भी आपात स्थिति में प्रभावित लोगों तक तत्काल सहायता पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को आपदा प्रबंधन से जुड़ी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार रखने और संवेदनशील क्षेत्रों की विशेष निगरानी करने के निर्देश दिए।

मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि संभावित आपदा से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए समय पर सूचना और पूर्व तैयारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों को तेज हवाओं और तूफान से गिरने की आशंका वाले जर्जर एवं असुरक्षित मकानों को चिन्हित कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही जलाशयों के जलस्तर की नियमित निगरानी करने और पानी छोड़े जाने की स्थिति में संबंधित क्षेत्रों को 48 घंटे पहले सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं।

आपदा प्रबंधन की तैयारी विशेष प्राथमिकता में

राज्य शासन द्वारा संभावित आपदा से प्रभावित होने वाले संवेदनशील गांवों का चिन्हांकन भी किया गया है। सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर, कांकेर, महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद, बालोद और रायपुर सहित 12 अति संवेदनशील जिलों में 763 गांव चिन्हित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त शेष 21 जिलों में 1006 संवेदनशील गांवों की पहचान की गई है। इस प्रकार प्रदेश में कुल 1769 गांवों को चिन्हित कर आपदा प्रबंधन की तैयारियों में विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।

आपदा संबंधी सूचनाओं के लिए टोल फ्री नंबर 1070

राज्य में आपदा संबंधी सूचनाओं और त्वरित सहायता के लिए बाढ़ नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे संचालित है। इसका टोल फ्री नंबर 1070 है। संभावित खतरे के प्रति नागरिकों को जागरूक करने के लिए दामिनी एवं मेघदूत मोबाइल ऐप के माध्यम से मौसम संबंधी चेतावनियां प्रसारित की जा रही हैं।

राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने नागरिकों से मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने, अनावश्यक जोखिम से बचने तथा प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन के समन्वित प्रयासों तथा नागरिकों की सतर्कता से संभावित आपदा के प्रभाव को कम करने और जनजीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

CG Rajyotsav 2026: 2 नवंबर को सभी जिलों में मनेगा राज्योत्सव, शासन ने मुख्य अतिथियों की सूची की जारी

रायपुर।  छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर राज्योत्सव 2026 का आयोजन प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में 2 नवंबर को किया जाएगा। राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने जिला मुख्यालयों में आयोजित होने वाले एक दिवसीय राज्योत्सव कार्यक्रमों के लिए मुख्य अतिथियों का निर्धारण कर दिया है। इस संबंध में 27 अक्टूबर को आदेश जारी किया गया है। विभिन्न जिलों में राज्य शासन के मंत्री, सांसद और विधायक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

राज्य शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार जांजगीर-चांपा जिले में संघ राज्य मंत्री तोखन साहू, बिलासपुर में उप मुख्यमंत्री अरुण साव तथा दुर्ग में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा मुख्य अतिथि होंगे। सरगुजा में मंत्री रामविचार नेताम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में मंत्री दयालदास बघेल, कांकेर में मंत्री केदार कश्यप, कोरबा में मंत्री लखन लाल देवांगन, जशपुर में मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, रायगढ़ में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, सूरजपुर में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, गरियाबंद में मंत्री टंकराम वर्मा तथा राजनांदगांव में मंत्री गजेन्द्र यादव मुख्य अतिथि होंगे।

इसी प्रकार कोरिया में विधायक भैयालाल राजवाड़े, बीजापुर में मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, बलौदाबाजार-भाटापारा में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, बेमेतरा में सांसद विजय बघेल, कबीरधाम में सांसद संतोष पाण्डेय, बलरामपुर-रामानुजगंज में सांसद चिंतामणि महाराज, महासमुंद में सांसद रूपकुमारी चौधरी, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में सांसद राधेश्याम राठिया, सक्ती में सांसद कमलेश जांगड़े, दन्तेवाड़ा में सांसद महेश कश्यप, बालोद में सांसद भोजराज नाग, सुकमा में सांसद देवेन्द्र प्रताप सिंह तथा मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में सांसद लक्ष्मी वर्मा मुख्य अतिथि होंगी।

मुंगेली में विधायक पुन्नूलाल मोहले, धमतरी में विधायक अजय चन्द्राकर, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में विधायक श्रीमती रेणुका सिंह, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में विधायक श्री अमर अग्रवाल, कोण्डागांव में विधायक सुश्री लता उसेंडी, नारायणपुर में विधायक श्री विक्रम उसेंडी तथा बस्तर में विधायक श्री किरण देव मुख्य अतिथि होंगे।

विकास योजनाओं और उपलब्धियों की प्रदर्शनी होगी आकर्षण का केंद्र

राज्य शासन द्वारा पूर्व में जारी निर्देशों के अनुसार सभी जिला मुख्यालयों में राज्योत्सव के अवसर पर विभिन्न विकास विभागों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इनमें विभागीय उपलब्धियों, महत्वपूर्ण योजनाओं और सफल परियोजनाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। इस वर्ष कार्यक्रमों का मुख्य थीम ‘सुसंस्कृत नारी, युवा उड़ान’ निर्धारित किया गया है।

जिला स्तर पर स्थानीय कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी। कार्यक्रमों में शालीनता और गरिमा बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। शासन की कल्याणकारी योजनाओं के हितग्राहियों को भी कार्यक्रमों में लाभान्वित किया जाएगा।

1 से 3 नवंबर तक रोशन होंगे शासकीय भवन

राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर 1 से 3 नवंबर तक सभी जिला मुख्यालयों में स्थित शासकीय भवनों पर आकर्षक रोशनी की जाएगी। इसके लिए संबंधित विभाग अपने बजट से आवश्यक व्यवस्थाएं करेंगे।

राज्य शासन ने सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि मुख्य अतिथियों के परामर्श से कार्यक्रमों का निर्धारण करते हुए आयोजन की समुचित तैयारियां सुनिश्चित करें। जिला स्तरीय कार्यक्रमों में मंत्रीगण, सांसदों, विधायकों एवं जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

Bilaspur High Court: CGPSC की मुख्य परीक्षा की आंसर शीट से गायब मिले 4 पन्ने, अब अभ्यर्थी को मिलेंगे 50 हजार

CGPSC answer sheet missing pages: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी कि सीजीपीएससी की बड़ी लापरवाही सामने आई है. आयोग की इ लापरवाही पर बिलासपुर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. इसमें एक अभ्यर्थी की आंसरशीट से 4 पन्ने गायब मिलने पर हाई कोर्ट ने आयोग पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. इसके साथ ही आयोग को कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि, अभ्यर्थी को भी मुआवजा तीन महीने के अंदर दे.

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के मुताबिक, पूरा मामला CGPSC के एक कॉम्पटेटिव एग्जाम से जुड़ा हुआ है. जिसमें परीक्षा में शामिल हुए एक अभ्यर्थी ने अपनी आंसरशीट की मार्किंग देखने के लिए सूचना के अधिकार यानी कि राइट टू इनफॉर्मेशन के तहत आवेदन किया. जब उसे आयोग की तरफ से आंसरशीट की फोटोकॉपी मिली तो उसमें कई पन्ने गायब मिले.

उत्तरपुस्तिका से 4 पन्ने गायब मिले

आंसरशीट की फोटोकॉपी की गहनता से जांच करने पर पता चला कि, उसकी मुख्य आंसरशीट में से 4 पन्ने गायब थे. सबसे गंभीर बात यह है कि, उन गायब पन्नों में लगभग 30 अंकों के प्रश्नों के उत्तर लिखे हुए थे. यानी अभ्यर्थी ने जो जवाब लिखे थे, उनका मूल्यांकन ही नहीं हो पाया, जिससे उसका रिजल्ट सीधे तौर पर प्रभावित हुआ.

अभ्यर्थी ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा

उत्तरपुस्तिका से पन्ने गायब होने और आयोग द्वारा कोई संतोषजनक जवाब न मिलने पर अभ्यर्थी ने बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की. याचिका में कहा गया कि आयोग की लापरवाही के कारण उसका भविष्य खराब हो रहा है. मामले की सुनवाई जस्टिस पी.पी. साहू की एकल पीठ में हुई. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने CGPSC की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई. कोर्ट ने कहा कि आयोग जैसी संवैधानिक संस्था से इस तरह की लापरवाही की उम्मीद नहीं की जा सकती. कोर्ट ने यह भी पाया कि शिकायत मिलने के बाद भी आयोग ने मामले की जांच को गंभीरता से नहीं लिया और समय पर पूरी नहीं की. इसी लापरवाही को देखते हुए कोर्ट ने यह बड़ा फैसला सुनाया.

कोर्ट का आदेश

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में दो अहम बातें कहीं हैं:

आयोग पीड़ित अभ्यर्थी को 50 हजार रुपये का मुआवजा 3 महीने के भीतर दे.

CGPSC पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाता है.

बिलासपुर में अमूल, गोवर्धन और वचन के घी के सैंपल फेल, खाद्य विभाग की कार्रवाई की तैयारी

बिलासपुर। बिलासपुर में दूध और उससे बने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से पिछले 9 महीने में अलग-अलग दुकानों और संस्थानों से लिए गए दूध, दही, घी और पनीर के नमूनों की जांच रिपोर्ट में कई उत्पाद तय मानकों पर खरे नही उतरे। इनमें अमूल, गोवर्धन और वचन जैसे बड़े ब्रांड के घी के नमूने भी शामिल बताए जा रहे है। रिपोर्ट सामने आने के बाद विभाग संबंधित मामलों में आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

बड़े ब्रांड के घी के नमूने भी जांच में अमानक

खाद्य सुरक्षा विभाग ने विभिन्न रिटेलरों से घी के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेजे थे। खबर के मुताबिक, अमूल, गोवर्धन और वचन ब्रांड के घी के नमूने भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नही पाए गए। इससे बाजार में बिक रहे डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे है।

हालांकि, किसी उत्पाद का नमूना अमानक मिलने का अर्थ अपने आप यह साबित होना नही है कि वह नकली है। उत्पाद में किस तरह की कमी मिली और जांच रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष दर्ज है, यह संबंधित रिपोर्ट के आधार पर ही स्पष्ट होगा।

कई दुकानों और संस्थानों से लिए गए नमूने

विभाग ने नेशनल डेयरी, शौर्य सुपरमार्ट, अपना मार्ट और बजरंग स्वीट्स समेत कई संस्थानों से दूध, दही और घी के नमूने लिए है। इसके अलावा शहर की अन्य मिठाई दुकानों से भी मिठाइयों के नमूने जांच के लिए भेजे गए है।

विभाग अलग-अलग प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच कर रहा है। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

दीपावली से पहले जांच अभियान तेज

दीपावली के दौरान दूध, दही, घी, खोवा और मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग ने इन उत्पादों की सैंपलिंग पर ध्यान बढ़ाया है, ताकि बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच हो सके और उपभोक्ताओं की सेहत से जुड़ी चिंताओं को दूर किया जा सके।

जांच रिपोर्ट के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई

नमूनों के अमानक पाए जाने के बाद संबंधित मामलों में जुर्माने समेत अन्य कानूनी कार्रवाई हो सकती है। कार्रवाई का स्वरूप जांच रिपोर्ट, खाद्य सुरक्षा नियमों और संबंधित मामले के तथ्यों पर निर्भर करेगा। अब यह देखना होगा कि विभाग की जांच के बाद किन संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।

करम पूजा परब में CM विष्णु देव साय की बड़ी घोषणा, उरांव समाज के लिए 50 लाख से बनेगा सामुदायिक भवन

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने करम पूजा परब 2026 के अवसर पर उरांव समाज को बड़ी सौगात देने की घोषणा की है। रायपुर जिले के गनोद गांव में समाज के लिए 50 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक भवन बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक पर्व प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान हैं। इनका संरक्षण करना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सभी की साझा जिम्मेदारी है।

करम पूजा परब में शामिल हुए मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बुधवार को राजधानी रायपुर स्थित अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम परिसर में आयोजित करम पूजा परब 2026 में शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन उरांव (सरना) आदिवासी विकास संघ ने किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने करम राजा की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। समारोह की शुरुआत भारत माता के तैलचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर की गई।

करम परब जनजातीय संस्कृति और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान यहां के पारंपरिक लोकपर्वों और प्रकृति के साथ जनजातीय समाज के गहरे संबंधों से बनी है। करम परब केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान, आपसी प्रेम और सामाजिक एकता का संदेश देने वाला पर्व है।

उन्होंने कहा कि पूर्वजों ने प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीने की जो परंपरा विकसित की थी, उसका महत्व आज भी बना हुआ है। ऐसे पर्व समाज को पर्यावरण संरक्षण, पारिवारिक एकता और आपसी सहयोग की सीख देते हैं।

गनोद गांव में बनेगा 50 लाख रुपये का सामुदायिक भवन

मुख्यमंत्री ने रायपुर जिले के गनोद गांव में उरांव समाज के लिए 50 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा की। इस भवन के बनने से समाज के लोगों को सामाजिक बैठकों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पारंपरिक आयोजनों के लिए स्थायी स्थान उपलब्ध हो सकेगा।

मुख्यमंत्री के अनुसार, सामुदायिक भवन सामाजिक मेलजोल बढ़ाने और समाज को संगठित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

नई पीढ़ी तक पहुंचाई जाएगी सांस्कृतिक विरासत

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सुरक्षित रखना भी जरूरी है। जनजातीय समाज की भाषा, लोकगीत, लोकनृत्य, रीति-रिवाज और पारंपरिक त्योहार उसकी विशिष्ट पहचान हैं। इन परंपराओं से युवाओं को परिचित कराना आवश्यक है, ताकि सांस्कृतिक विरासत का सिलसिला आगे भी जारी रहे।

उन्होंने उरांव समाज की ओर से अपनी परंपराओं को संरक्षित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को वरिष्ठजनों से सीखने और अपने सांस्कृतिक मूल्यों को समझने का अवसर देते हैं।

प्रकृति के प्रति सम्मान और सामाजिक एकता का संदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि करम पूजा परब के माध्यम से परिवार और समाज की खुशहाली की कामना की जाती है। यह त्योहार लोगों को आपसी भाईचारे, सहयोग और सामाजिक सद्भाव के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की विविध जनजातीय परंपराएं प्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इनके संरक्षण के लिए समाज की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

समारोह में समाज के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के पदाधिकारी, समाज के प्रमुख बिंदेश्वर भगत, उरांव (सरना) आदिवासी विकास संघ के प्रतिनिधि, समाज के वरिष्ठजन और बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने सभी को करम पूजा परब की शुभकामनाएं देते हुए प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

78 साल के प्यारे मियां को 10 बार उम्रकैद, नाबालिगों के यौन शोषण मामले में 77.64 लाख का जुर्माना

 भोपाल : विशेष पॉक्सो अदालत ने नाबालिग बच्चियों के यौन शोषण से जुड़े गंभीर मामले में प्यारे मियां को 10 बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 78 वर्षीय प्यारे मियां पर अदालत ने 77.64 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मामले में उसकी सहयोगी राबिया बी को भी दोषी ठहराते हुए 20 साल की सजा सुनाई गई है। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए इसे बेहद क्रूर और असहनीय कृत्य बताया।

नौकरी दिलाने का लालच देकर बच्चियों को बुलाता था

मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार, प्यारे मियां पर वर्ष 2014 से नाबालिग बच्चियों का शोषण करने के आरोप थे। वह बच्चियों को नौकरी दिलाने का भरोसा देता था और इसके बदले हर महीने 10 हजार रुपये वेतन देने की बात कहता था। बच्चियों के परिवारों का विश्वास हासिल करने के लिए वह उनके घर भी जाता था। आरोप है कि वह बच्चियों को नशीले पदार्थों का सेवन कराकर उनका यौन शोषण करता था।

हिडन कैमरों से रिकॉर्डिंग कर करता था ब्लैकमेल

यह मामला वर्ष 2020 में सामने आया था। रातीबड़ पुलिस को गश्त के दौरान नशे की हालत में पांच नाबालिग बच्चियां मिली थीं। पूछताछ में बच्चियों ने बताया कि उन्हें जन्मदिन मनाने के बहाने बुलाया गया था, जहां उन्हें शराब पिलाई गई और उनके साथ यौन शोषण किया गया।

इसके बाद पुलिस ने शाहपुरा स्थित विष्णु हाईटेक सिटी के एक फ्लैट की जांच की। वहां से आपत्तिजनक सामग्री मिलने की जानकारी सामने आई। जांच में आरोप लगा कि फ्लैट में हिडन कैमरे लगाए गए थे, जिनसे बच्चियों की रिकॉर्डिंग की जाती थी। इन वीडियो के जरिए पीड़िताओं को ब्लैकमेल करने और डराने के आरोप भी सामने आए। बच्चियों को धमकाने के लिए पिस्टल का इस्तेमाल किए जाने की बात भी जांच में सामने आई।

विदेश भागने की कोशिश में था आरोपी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्यारे मियां देश छोड़कर विदेश जाने की तैयारी में था। जांच एजेंसियों ने उसकी तलाश के लिए लुकआउट नोटिस जारी किया था। बताया गया कि वह भोपाल से इंदौर पहुंचा और अपनी गाड़ी आष्टा में छोड़ दी। इसके बाद वह दिल्ली होते हुए जम्मू-कश्मीर पहुंचा, जहां पुलिस की मदद से उसे गिरफ्तार किया गया।

अवैध संपत्तियों पर भी हुई कार्रवाई

इस मामले के सामने आने के बाद प्यारे मियां की कथित अवैध संपत्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी। अब विशेष पॉक्सो अदालत के फैसले ने मामले में न्यायिक प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण चरण को पूरा किया है। अदालत द्वारा सुनाई गई सजा और जुर्माना नाबालिगों के खिलाफ अपराधों की गंभीरता को रेखांकित करता है।

गढ़चिरौली के जंगल में नक्सलियों के ठिकाने का खुलासा, 5 हथियारों के साथ विस्फोटक और वर्दी बरामद

 राजनांदगांव : छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से लगे महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में पुलिस ने नक्सलियों के खिलाफ अभियान के दौरान बड़ी कार्रवाई की है। जंगल में छिपाकर रखे गए हथियार, विस्फोटक और अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद की गई है। गुप्त सूचना के आधार पर चलाए गए तलाशी अभियान में पुलिस को पांच अग्निशस्त्र समेत कई अहम सामान मिले हैं। इस कार्रवाई को नक्सल गतिविधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गुप्त सूचना के आधार पर जंगल में पहुंचीं पुलिस की टीमें

गढ़चिरौली पुलिस को जानकारी मिली थी कि पोस्टे वांगेतुरी क्षेत्र के मौजा माचुवंचा के जंगल में नक्सलियों ने हथियार और विस्फोटक छिपाकर रखे हैं। सूचना मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक एम. रमेश के मार्गदर्शन में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। अभियान में पुलिस की चार टुकड़ियों के साथ बम निरोधक दस्ते की एक टीम को भी शामिल किया गया। संयुक्त तलाशी के दौरान जंगल में छिपाकर रखी गई सामग्री का पता चला।

तलाशी में मिले पांच अग्निशस्त्र और विस्फोटक

पुलिस के मुताबिक, तलाशी अभियान के दौरान मौके से एक बारह बोर राइफल, तीन सिंगल शॉट राइफल और एक एयर गन बरामद की गई। इसके अलावा 12 क्लेमोर, एक बोतल में रखा आईईडी विस्फोटक, एक जिंदा क्लेमोर विस्फोटक, एक वायरलेस माइक सेट और हथियार का एक लोअर हैंडगार्ड भी मिला।

सुतली बम और नक्सली वर्दी भी जब्त

हथियारों और विस्फोटकों के अलावा पुलिस को मौके से 100 सुतली बम, हरे कपड़े से तैयार नक्सली वर्दी के पांच जोड़े और अन्य नक्सली साहित्य भी मिला है। अभियान के दौरान कुछ विस्फोटकों और संबंधित सामग्री को मौके पर ही नष्ट किए जाने की जानकारी दी गई है।

नक्सल विरोधी अभियान में अहम कार्रवाई

गढ़चिरौली में हुई इस कार्रवाई से जंगल में छिपाकर रखे गए हथियारों और अन्य सामग्री को जब्त करने में पुलिस को सफलता मिली है। सीमावर्ती क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों पर नजर रखने और सुरक्षा अभियान जारी रखने के लिहाज से यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Chhattisgarh Riyasat Veethika: छत्तीसगढ़ की 14 रियासतों का इतिहास होगा एक जगह, शाही धरोहरों से रूबरू होंगे पर्यटक

Chhattisgarh Riyasat Veethika: छत्तीसगढ़ की पहचान केवल गठन के 25 वर्षों तक सीमित नहीं है, बल्कि इस धरती का इतिहास सदियों पुराना है। प्रदेश में कभी 14 रियासतों का शासन रहा, जिनकी अपनी विशिष्ट संस्कृति, परंपराएं और ऐतिहासिक विरासत थी। अब इस गौरवशाली अतीत को सहेजने और देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाने की तैयारी है। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की पहल पर प्रदेश में रियासत वीथिका विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। यहां एक ही स्थान पर सभी 14 रियासतों के इतिहास, राजसी जीवनशैली और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलेगी।

पर्यटन मंडल ने शुरू की तैयारी, राजपरिवारों से मांगे सुझाव

रियासत वीथिका परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए पर्यटन मंडल ने शुरुआती तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस सिलसिले में संबंधित रियासतों के राजपरिवारों के वंशजों से संपर्क किया गया है। उनसे ऐतिहासिक वस्तुओं, दस्तावेजों और पारिवारिक संग्रह में सुरक्षित धरोहरों की जानकारी जुटाने के साथ सुझाव भी मांगे गए हैं। पहल का उद्देश्य पुरानी विरासत को सुरक्षित रखना और आने वाली पीढ़ियों को प्रदेश के इतिहास से परिचित कराना है।

एक ही छत के नीचे दिखेगी 14 रियासतों की शाही विरासत

प्रस्तावित रियासत वीथिका को स्थायी प्रदर्शनी के रूप में विकसित करने की योजना है। इसमें प्रत्येक रियासत के इतिहास और उसकी विशिष्ट पहचान को दर्शाने के लिए अलग-अलग खंड बनाए जाएंगे। इससे पर्यटक एक ही जगह पर छत्तीसगढ़ के राजसी अतीत को करीब से समझ सकेंगे।

प्रदर्शनी में राजपरिवारों के राजचिह्न, शाही ध्वज, तलवारें, ढाल, भाले, दुर्लभ तस्वीरें, पुराने दस्तावेज, पारंपरिक पोशाकें, आभूषण और रियासतकालीन सिक्के रखे जाने की योजना है। बताया जा रहा है कि कुछ राजपरिवारों के वंशजों ने अपने निजी संग्रह की ऐतिहासिक वस्तुएं उपलब्ध कराने पर भी सहमति जताई है।

महल और किले बनेंगे पर्यटन के नए केंद्र

पर्यटन विकास की यह योजना केवल ऐतिहासिक गैलरी बनाने तक सीमित नहीं है। प्रदेश के पुराने महलों, किलों और गढ़ों को भी विरासत पर्यटन से जोड़ने की तैयारी है। योजना के तहत उपयुक्त ऐतिहासिक इमारतों को हेरिटेज होटल और होमस्टे के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।

इससे पर्यटकों को ऐतिहासिक इमारतों में ठहरने और पुराने राजसी परिवेश का अनुभव लेने का अवसर मिल सकता है। साथ ही, स्थानीय स्तर पर रोजगार, हस्तशिल्प और पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

ये थीं छत्तीसगढ़ की 14 ऐतिहासिक रियासतें

छत्तीसगढ़ के इतिहास में बस्तर, कांकेर, नंदगांव, खैरागढ़, छुईखदान, कवर्धा, रायगढ़, सारंगढ़, जशपुर, उदयपुर, कोरिया, चांगभखार, सक्ती और सरगुजा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन रियासतों की अपनी प्रशासनिक व्यवस्था, सांस्कृतिक परंपराएं और ऐतिहासिक पहचान थी। प्रस्तावित वीथिका के जरिए इन सभी विरासतों को एक साझा मंच पर प्रस्तुत करने की योजना है।

इतिहास के संरक्षण के साथ पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

पर्यटन मंडल की इस पहल से प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर सामने लाने में मदद मिल सकती है। रियासत वीथिका पर्यटकों, इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों और शोधकर्ताओं के लिए भी उपयोगी केंद्र बन सकती है। वहीं, महलों और किलों को पर्यटन से जोड़ने की योजना स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है।

परियोजना की अंतिम रूपरेखा, निर्माण स्थल और शुरुआत की समयसीमा को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद इसकी विस्तृत तस्वीर स्पष्ट होगी।

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव पर आसमान में दिखेगा सारंग टीम का दम, 2 नवंबर को 80 मिनट तक बंद रहेंगी रायपुर एयरपोर्ट की उड़ानें

 छत्तीसगढ़ : 25वें राज्योत्सव के मौके पर नवा रायपुर में भारतीय वायुसेना की सारंग एयरोबेटिक टीम रोमांचक हवाई प्रदर्शन करेगी। इस आयोजन को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। एयर शो के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर 2 नवंबर को करीब 80 मिनट तक विमानों की आवाजाही रोक दी जाएगी। इसके चलते कुछ घरेलू उड़ानों के समय में बदलाव होने की संभावना है।

सेंध जलाशय के ऊपर होगा हवाई प्रदर्शन

राज्योत्सव के मुख्य कार्यक्रम के तहत 2 नवंबर को नवा रायपुर स्थित सेंध जलाशय के ऊपर एयर शो आयोजित किया जाएगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, सुबह 10:40 बजे से दोपहर 12 बजे तक रायपुर एयरपोर्ट से विमानों का संचालन बंद रहेगा। इस अवधि में सुरक्षा कारणों से संबंधित हवाई क्षेत्र में ड्रोन समेत अन्य गैर-अनुमत उड़ानों पर भी रोक रहेगी।

चार हेलीकॉप्टरों के साथ करतब दिखाएगी सारंग टीम

सारंग भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध हेलीकॉप्टर एयरोबेटिक टीम है। यह टीम स्वदेशी ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टरों के जरिए आसमान में शानदार करतब पेश करती है। एक-दूसरे के बेहद करीब उड़ान भरना, हवा में अलग-अलग आकृतियां बनाना और तालमेल के साथ जटिल प्रदर्शन करना इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं। राज्योत्सव में इस टीम का प्रदर्शन दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहने वाला है।

दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद की उड़ानों पर पड़ सकता है असर

एयरपोर्ट पर निर्धारित समय के लिए विमान संचालन बंद रहने से कुछ उड़ानों के शेड्यूल में बदलाव किया गया है। दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों से आने-जाने वाले यात्रियों को अपनी यात्रा से पहले उड़ान की स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी गई है। यात्रियों को एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल एप या संबंधित सूचना माध्यम से फ्लाइट का ताजा स्टेटस जांच लेना चाहिए।

1 नवंबर को होगा एयर शो का अभ्यास

मुख्य प्रदर्शन से एक दिन पहले, यानी 1 नवंबर को एयर शो का फुल रिहर्सल भी प्रस्तावित है। अभ्यास के दौरान भी हवाई क्षेत्र में कुछ समय के लिए प्रतिबंध लागू किए जा सकते हैं। ऐसे में यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा से पहले एयरपोर्ट और एयरलाइन की ओर से जारी ताजा सूचनाओं पर नजर रखें।

CG Cyclone Arnab: छत्तीसगढ़ में चक्रवाती तूफान का खतरा, बस्तर से पूरे प्रदेश तक अलर्ट, प्रशासन सतर्क

CG Cyclone Arnab:  छत्तीसगढ़ में बंगाल की खाड़ी में बन रहे चक्रवाती तूफान और भारी बारिश की आशंका ने चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में तेज बारिश और बाढ़ से प्रभावित बस्तर संभाग में मौसम की नई चुनौती सामने आ सकती है। ऐसे में प्रदेश के अन्य इलाकों में भी संभावित मौसमी बदलाव को लेकर सतर्कता बरती जा रही है।

बाढ़ से उबर रहे बस्तर के सामने फिर चुनौती

बीते दिनों भारी बारिश और बाढ़ के कारण बस्तर में जनजीवन प्रभावित हुआ था। प्रभावित इलाकों में हालात सामान्य होने के बीच चक्रवाती तूफान की आशंका ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। यदि दोबारा तेज बारिश होती है, तो राहत और पुनर्वास कार्यों पर भी असर पड़ सकता है।

प्रशासन अलर्ट मोड पर

मौसम की संभावित स्थिति को देखते हुए प्रशासन सतर्क है। ऐसे हालात में मौसम संबंधी चेतावनियों पर नजर रखना, निचले इलाकों में सावधानी बरतना और आपात स्थिति के लिए तैयार रहना जरूरी है।