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Thursday, October 29, 2026
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ACB ग्रुप के खिलाफ CBI जांच की मांग, 30 को धरना

कोरबा, छत्तीसगढ़ /28 अक्टूबर 2026

ACB ग्रुप की कोलवाशरियों के विस्तार और रिजेक्ट कोल आधारित पावर प्लांटों के लिंकेज व प्रदूषण पर कार्रवाई की मांग- 30 अक्टूबर को कलेक्टर कार्यालय कोरबा के सामने धरना

भारतीय जनाधिकार पार्टी, छत्तीसगढ़ के जिला संयोजक दिनेश यादव, जिलाध्यक्ष सूरजभान दास बैरागी और महिला जिलाध्यक्ष श्रीमती रेखा भारतीय ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में बताया कि ACB ग्रुप, उसकी संबद्ध कोलवाशरियों, ताप विद्युत परियोजनाओं तथा SECL से जुड़ी जनहित शिकायतों पर पार्टी पहले दीपका और SECL मुख्यालय, बिलासपुर में धरना-प्रदर्शन कर चुकी है।

उन पर ठोस और समयबद्ध कार्रवाई की मांग को लेकर अब 30 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर कार्यालय, कोरबा के सामने धरना आंदोलन किया जाएगा।

कोयले की आवक से रिजेक्ट कोल के अंतिम उपयोग तक संपूर्ण फोरेंसिक जांच, CBI जांच और संयुक्त SIT गठन की मांग।

पदाधिकारियों ने कहा कि कोरबा और आसपास के क्षेत्रों में कोयला खनन, कोलवाशरी संचालन, ताप विद्युत उत्पादन और कोयला परिवहन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है। संबंधित विभागों और सक्षम प्राधिकारियों को पहले भेजी गई शिकायतों में इन बिंदुओं की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है:

– कोलवाशरी की स्वीकृत क्षमता और क्षमता विस्तार
– कोयला लिंकेज और उच्च गुणवत्ता वाले कोयले की प्राप्ति
– रिजेक्ट कोल और मिडलिंग्स की मात्रा
– पावर प्लांट में ईंधन का उपयोग
– पर्यावरणीय अनुपालन
– कोयले का वास्तविक लेखांकन

उन्होंने कहा कि सरकारी अभिलेखों, वास्तविक स्टॉक, परिवहन विवरण, उत्पादन रिकॉर्ड, पर्यावरणीय निगरानी और वैज्ञानिक परीक्षणों का आपस में मिलान कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए। विशेष रूप से:

कोयला लिंकेज से प्राप्त कोयले का वास्तविक उपयोग कहां और कितना हुआ?

पूर्व शिकायतों में बड़े पैमाने पर उच्च गुणवत्ता वाले कोयले की प्राप्ति और उपयोग पर प्रश्न उठाए गए हैं। संबंधित अवधि के कोयला लिंकेज, आवंटन, Fuel Supply Agreement (FSA), उठाव, परिवहन, प्राप्ति, गुणवत्ता और अंतिम उपयोग का आधिकारिक रिकॉर्ड से सत्यापन कराया जाए।

जांच में स्पष्ट किया जाए कि कोयले की घोषित मात्रा और वास्तविक प्राप्ति में कितना अंतर है, कोयले का उपयोग किन इकाइयों में हुआ और क्या संबंधित अनुबंधों व सरकारी शर्तों का पालन किया गया।

जब पावर प्लांट में रिजेक्ट कोल और मिडलिंग्स का उपयोग किया जाना है, तो उसके वास्तविक ईंधन मिश्रण, गुणवत्ता, मात्रा, तापीय क्षमता, उत्पादन और लागत का सत्यापन आवश्यक है।

पदाधिकारियों ने बताया कि धरने में ACB ग्रुप और SECL से जुड़ी शिकायतों पर स्वतंत्र जांच और कार्रवाई की मांग रखी जाएगी, साथ ही CBI जांच और संयुक्त विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मांग की जाएगी।

बस्तर के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण से मिल रही आत्मनिर्भरता की नई राह

रायपुर,छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में शांति, विकास और आत्मनिर्भरता की नई तस्वीर उभर रही है. कभी नक्सल हिंसा और चुनौतियों से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब युवाओं के हाथों में हुनर और भविष्य के प्रति नया विश्वास दिखाई दे रहा है. राज्य सरकार की मंशा है कि बस्तर का प्रत्येक युवा अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर आगे बढ़े तथा विकास की मुख्यधारा में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करे. कौशल प्रशिक्षण, पुनर्वास और रोजगार के समन्वित प्रयासों से बस्तर अब हिंसा की पहचान से आगे बढ़कर शांति, हुनर, आत्मनिर्भरता और समृद्धि की नई पहचान बनाने की दिशा में अग्रसर है.

कौशल विकास एवं रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण को विशेष प्राथमिकता

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा आत्मसमर्पित माओवादियों (पुनर्वासितों) और नक्सल प्रभावित परिवारों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कौशल विकास एवं रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है. सरकार की इस पहल से पुनर्वासितों को सम्मानजनक आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के साथ ही बस्तर में स्थायी शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त हो रहा है.

पुनर्वासितों को हुनर से जोड़ने की अभिनव पहल

राज्य सरकार द्वारा बस्तर संभाग के पुनर्वासितों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से विशेष कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं. इसके अंतर्गत कुल 7,567 आत्मसमर्पित माओवादियों में से अब तक 2,323 को विभिन्न व्यवसायों में कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है. यह प्रशिक्षण मुख्य रूप से बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बस्तर, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और गरियाबंद जिलों में दिया गया है.प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन, राजमिस्त्री, सोलर पीवी इंस्टॉलर (सूर्यमित्र), दोपहिया एवं चारपहिया वाहन मरम्मत तकनीशियन तथा सिलाई मशीन ऑपरेटर जैसे रोजगारोन्मुखी व्यवसायों में दक्ष बनाया जा रहा है. इन पाठ्यक्रमों से युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्राप्त करने में सहायता मिल रही है.

50 हजार 53 युवाओं को किया गया है नियोजित

बस्तर के दूरस्थ एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संचालित नियद नेल्ला नार योजना 2.0 विकास और विश्वास का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है. योजना के अंतर्गत 10 जिलों में अब तक कुल 1 लाख 11 हजार 165 युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, जबकि 50 हजार 53 युवाओं को नियोजित किया गया है. योजना के तहत आत्मसमर्पित माओवादियों में से 1,267 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है तथा 461 युवा प्रशिक्षणरत हैं. वहीं 779 नक्सल हिंसा से प्रभावित हितग्राहियों को प्रशिक्षित किया गया है और 191 हितग्राही वर्तमान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं. यह पहल प्रभावित परिवारों को आजीविका के नए अवसर प्रदान करने के साथ उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.

हिंसा का रास्ता छोड़ हुनर और रोजगार की ओर बढ़ रहे कदम

आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के पुनर्वास में कौशल प्रशिक्षण एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रहा है. प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को उनकी योग्यता और रुचि के अनुरूप रोजगार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं. बीजापुर जिले के प्रशिक्षित युवाओं को हितग्राही गारमेंट फैक्ट्री, राजमिस्त्री एवं स्वयं के सिलाई कार्य जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर मिले हैं. वहीं बस्तर जिले में प्रशिक्षित युवाओं को पुलिस बल, सुरक्षा गार्ड, कृषि एवं श्रम कार्यों से जोड़ा गया है. इन प्रयासों का उद्देश्य आत्मसमर्पित युवाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराना है.

बस्तर के छह पुनर्वास केंद्रों को व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता के रूप में मिली मान्यता

आत्मसमर्पित माओवादियों के पुनर्वास को और प्रभावी बनाने के लिए बस्तर संभाग के संबंधित जिलों में स्थित आठ पुनर्वास केंद्रों में से छह केंद्रों को व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता (VTP) के रूप में पंजीकृत किया गया है. इनमें बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा, बस्तर और कांकेर जिले शामिल हैं. इससे पुनर्वास केंद्रों में रहने वाले युवाओं को व्यवस्थित एवं रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है.इसके साथ ही आत्मसमर्पित नक्सलियों एवं नक्सल पीड़ित परिवारों के युवाओं को प्रशिक्षण से जोड़ने के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता में विशेष शिथिलता प्रदान की गई है. प्रशिक्षण-पूर्व पंजीयन में आधार की अनिवार्यता को शिथिल कर मूल्यांकन से पूर्व इसे अनिवार्य किया गया है, ताकि दस्तावेजों के अभाव में कोई भी पात्र युवा प्रशिक्षण से वंचित न रह जाए.

दूरस्थ अंचलों तक पहुंचेगा कौशल विकास का लाभ

बस्तर संभाग के दुर्गम एवं ग्रामीण अंचलों के युवाओं को उनके क्षेत्र में ही कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रत्येक विकासखंड में एक स्किल डेवलपमेंट सेंटर (SDC) स्थापित करने की दिशा में कार्यवाही की जा रही है. बीजापुर जिले में स्किल डेवलपमेंट सेंटर के अंतर्गत असिस्टेंट मेसन पाठ्यक्रम में 30 युवाओं का प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया है.वहीं वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में आवासीय प्रशिक्षण सुविधाओं के विस्तार के लिए नवीन मद में 780 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है. इससे दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं को प्रशिक्षण सुविधाओं से जोड़ने में मदद मिलेगी.

आत्मनिर्भर बनाने के क्षेत्र में विश्वास और विकास का नया वातावरण तैयार

बस्तर में कौशल विकास और पुनर्वास की यह पहल केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक बदलाव की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया भी है. आत्मसमर्पित माओवादियों और नक्सल प्रभावित परिवारों को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास क्षेत्र में विश्वास और विकास का नया वातावरण तैयार कर रहे हैं.

छत्तीसगढ़ में बिजली उपभोक्ताओं को राहत, एम-ऊर्जा योजना की बढ़ी अवधि, विकास परियोजनाओं को भी मंजूरी

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के साथ प्रदेश में विकास कार्यों को गति देने के लिए कई अहम फैसले लिए हैं. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान (एम-ऊर्जा) की पात्रता अवधि बढ़ाने सहित रेल कनेक्टिविटी, पर्यटन, खेल और औद्योगिक निवेश से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई.

200 यूनिट तक बिजली बिल में मिलती रहेगी राहत

राज्य सरकार के फैसले के मुताबिक, घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक बिजली बिल में मिलने वाली रियायत जारी रहेगी. वहीं, योजना के तहत 400 यूनिट तक की मासिक बिजली खपत से संबंधित पात्रता अवधि को 31 मार्च 2027 तक बढ़ाया गया है. इस निर्णय से प्रदेश के करीब 7.25 लाख घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को लाभ मिलने की उम्मीद है.

295 किलोमीटर लंबी रेल लाइन परियोजना को मंजूरी

कैबिनेट ने कटघोरा से डोंगरगढ़ तक प्रस्तावित रेल लाइन के काम में तेजी लाने के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया. लगभग 295 किलोमीटर लंबी इस रेल परियोजना की अनुमानित लागत करीब 8,000 करोड़ रुपये बताई गई है. प्रस्तावित मार्ग कटघोरा, तखतपुर, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ को जोड़ते हुए डोंगरगढ़ तक पहुंचेगा.

परियोजना के क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड के माध्यम से इक्विटी निवेश की व्यवस्था को मंजूरी दी गई है. इसके तहत राज्य सरकार और रेल मंत्रालय की ओर से 1,000-1,000 करोड़ रुपये के योगदान का प्रावधान बताया गया है.

कूंरा नगर पंचायत का नाम बदलकर कुंवरगढ़ करने की तैयारी

रायपुर जिले की नगर पंचायत कूंरा का नाम बदलकर कुंवरगढ़ करने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट की स्वीकृति मिली है. यह कदम स्थानीय ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है.

अधोसंरचना, पर्यटन और खेल को मिलेगा बढ़ावा

प्रदेश में विकास की गति तेज करने के लिए सरकार ने तीन नए मिशनों के प्रारूप को मंजूरी दी है. इनमें मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन-2026, मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन और मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन शामिल हैं. इन अभियानों के तहत अगले पांच वर्षों में विशेष बजट प्रावधान किए जाने की योजना है.

कोल गैसीफिकेशन और फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र पर जोर

औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में संशोधन के जरिए 1,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली कोल गैसीफिकेशन परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज का रास्ता खोला गया है.

इसके अलावा, राजनांदगांव जिले के सोमनी में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के सहयोग से मल्टी फ्रूट प्रोसेसिंग फैसिलिटी स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई. लगभग 400 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना के लिए 31.55 एकड़ भूमि आवंटित करने का निर्णय लिया गया है.

आम लोगों और कारोबार को मिल सकता है फायदा

बिजली बिल में राहत से घरेलू उपभोक्ताओं को आर्थिक सहारा मिलने की उम्मीद है. वहीं, रेल परियोजना, पर्यटन, खेल और औद्योगिक निवेश से जुड़े फैसले प्रदेश में कनेक्टिविटी, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं.

9 गौधामों के संचालन को मिली मंजूरी, धरसींवा, अभनपुर और तिल्दा के गौधाम शामिल

रायपुर। जिला स्तरीय गौधाम समिति की बैठक आज हुई, जिसमें रायपुर जिले में 9 गौधाम के संचालन के लिए आवेदनों को मंजूरी दी गई। इनमें धरसींवा विकासखंड के अंतर्गत धनौली गौधाम के लिए अमृतधाम इष्टमित्र मानवपीठ सेवा संघ, देवेंद्र नगर रायपुर: निलजा गौधाम के लिए महादेव गौधाम सेवा समिति निलजा, पंडरभट्ठा गौधाम के लिए ग्राम गौधाम समिति पंडरभट्ठा, बरबंदा गौधाम के लिए ग्राम पंचायत बरबंदा तथा नगरगांव गौधाम के लिए ग्राम पंचायत नगरगांव के आवेदन शामिल हैं।

अभनपुर विकासखंड के पिपरौद गौधाम के लिए गोमती धाम गौशाला सेवा समिति पिपरौद तथा खोरपा गौधाम के लिए अयोध्या गौ सेवा समिति खोरपा के आवेदन अनुमोदित किए गए हैं। तिल्दा विकासखंड के मोहदा गौधाम के लिए मां पाताल भैरवी गौधाम समिति मोहदा तथा कोदवा गौधाम के लिए कामधेनु सेवा समिति कोदवा के आवेदन को मंजूरी दी गई है।

अनुमोदित आवेदनों में स्वयंसेवी संस्थाओं और ग्राम पंचायतों के आवेदन शामिल हैं। बैठक में जिला स्तरीय गौधाम समिति के अध्यक्ष तोमस कुमार यदु, सदस्य हरिका साहू, सदस्य उमेश साहू, संयुक्त संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं शंकर लाल उइके सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

संविदा क्षेत्र समन्वयकों को हाईकोर्ट से राहत, 45 साल तक भर्ती में विचार करने के निर्देश

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने संविदा क्षेत्र समन्वयकों को राहत देते हुए 45 साल की उम्र तक भर्ती के लिए विचार करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है, यदि याचिकाकर्ता शर्तें पूरी करते हैं तो उन्हें भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाए।

क्या है मामला?

दरअसल, रामफल केवट जनपद पंचायत सारंगढ़ और स्वप्निल जायसवाल जनपद पंचायत बेमेतरा में संविदा क्षेत्र समन्वयक के रूप में कार्यरत हैं। ब्लॉक परियोजना प्रबंधक पद के लिए 27 मार्च 2026 को विज्ञापन जारी हुआ था। इसमें 1 जनवरी 2026 को आयु सीमा के आधार पर उनकी उम्मीदवारी को निरस्त कर दिया गया। दोनों की उम्र क्रमशः 42 और 38 वर्ष थी।

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में क्या कहा?

याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट को बताया कि याचिका लंबित रहने के दौरान राज्य सरकार ने 16 सितंबर 2026 को नया परिपत्र जारी कर संविदा कर्मचारियों की अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष कर दी। चूंकि 27 मार्च 2026 की भर्ती प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए नई आयु सीमा का लाभ उन्हें भी दिया जाना चाहिए।

सरकार ने याचिकाकर्ताओं की मांगों किया विरोध

राज्य सरकार और जिला पंचायत ने याचिकाकर्ताओं की मांगों का विरोध करते हुए कहा कि नई आयु सीमा का लाभ 16 सितंबर 2026 से मिलेगा। भर्ती प्रक्रिया इससे पहले शुरू हो चुकी थी। लिहाजा बाद का परिपत्र इस भर्ती पर लागू नहीं होना चाहिए।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि 27 मार्च 2026 की भर्ती प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है और शुरुआती चरण में है। ऐसे में नई आयु सीमा का लाभ याचिकाकर्ताओं को दिया जाना उचित है। कोर्ट ने सीईओ जिला पंचायत को 16 सितंबर के सर्कुलर और लागू आरक्षण व्यवस्था के अनुसार याचिकाकर्ताओं की उम्मीदवारी पर 30 दिन में पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है।

दिल्ली में कांग्रेस के प्रदर्शन पर BJP विधायक अजय चंद्राकर का तंज, बोले- व्यापारियों को भी नहीं मंजूर आंदोलन

रायपुर। दिल्ली में 1 नवंबर को होने वाले कांग्रेस के प्रदर्शन पर भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की स्थिति अभी क्षेत्रीय दल की है. कांग्रेस को अब किसी पर भरोसा नहीं है. कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट, और चुनाव आयोग के हलफनामे पर भी प्रश्न उठाया है. कांग्रेस अराजकता पैदा करने के लिए राजनीति कर रही है. व्यापारी भी उस प्रदर्शन का विरोध कर रहे हैं.

वहीं कांग्रेस के दिल्ली आंदोलन पर बीजेपी के पोस्ट “कृपया उन्हें भेजें, खड़गे जी बोलेंगे तुम नहीं आओगे तो तुम्हारा बाप भी आयेगा” पर विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि खड़गे की भाषा की देशव्यापी निंदा हुई. उसको यही दफन कर दिया जाए. इतना बड़ा वाक्यांश नहीं है कि रोज दोहराया जाए.

वहीं भिलाई में 4 करोड़ नगदी पकड़ाए जाने पर पीसीसी चीफ दीपक बैज के संघ कार्यालय के पैसा जाने वाले तंज पर अजय चंद्राकर ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के छत्तीसगढ़ अध्यक्ष को कुछ भी नहीं मालूम. नागपुर, दिल्ली या मुंबई जा रहा था, इसका क्या आधार है? दरअसल, कांग्रेस जनहित के मुद्दों से कट चुकी है. ऊलूल-जुलूल बात करके छपने का प्रयास करती है. राजनीति के लिए कोई तथ्य कांग्रेस के पास नहीं है.

जनजातीय गौरव दिवस के लिए भाजपा ने की पदाधिकारियों की नियुक्ति, देखें लिस्ट

 रायपुर। भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ प्रदेश इकाई ने जनजातीय गौरव दिवस के विभिन्न कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रदेश स्तर पर संयोजक, सहसंयोजक एवं सदस्य नियुक्त किए हैं। इस संबंध में प्रदेश कार्यालय ने आज सूची जारी की।

जारी सूची के अनुसार, मंत्री रामविचार नेताम, केदार कश्यप और राधेश्याम राठिया को संयोजक नियुक्त किया गया है। वहीं, महेश कश्यप संयोजक, सत्यानारायण सिंह, विकास मरकाम सहसंयोजक, लता उसेंडी, प्रणव मरपच्ची, रूप सिंह मंडावी, डाॅ. देवेंद्र माहला एवं विजय जगत सदस्य बनाए गए हैं।

जनसुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता, चक्रवाती तूफान से निपटने सभी तैयारियां सुनिश्चित करें -राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा

रायपुर। बंगाल की खाड़ी में बन रहे चक्रवाती तूफान अर्नब के संभावित प्रभाव को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने जनसुरक्षा और आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, रायपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार 27 एवं 28 अक्टूबर को प्रदेश के सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर, कांकेर, महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद, बालोद और रायपुर जिले में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होने की संभावना है। संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन ने संबंधित जिलों में सतर्कता बढ़ाने और आवश्यक एहतियाती उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

नागरिकों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि प्रदेश के नागरिकों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। संभावित चक्रवाती तूफान और भारी बारिश से उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशासन को पूरी सतर्कता और तत्परता के साथ कार्य करना होगा। किसी भी आपात स्थिति में प्रभावित लोगों तक तत्काल सहायता पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को आपदा प्रबंधन से जुड़ी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार रखने और संवेदनशील क्षेत्रों की विशेष निगरानी करने के निर्देश दिए।

मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि संभावित आपदा से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए समय पर सूचना और पूर्व तैयारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों को तेज हवाओं और तूफान से गिरने की आशंका वाले जर्जर एवं असुरक्षित मकानों को चिन्हित कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही जलाशयों के जलस्तर की नियमित निगरानी करने और पानी छोड़े जाने की स्थिति में संबंधित क्षेत्रों को 48 घंटे पहले सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं।

आपदा प्रबंधन की तैयारी विशेष प्राथमिकता में

राज्य शासन द्वारा संभावित आपदा से प्रभावित होने वाले संवेदनशील गांवों का चिन्हांकन भी किया गया है। सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर, कांकेर, महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद, बालोद और रायपुर सहित 12 अति संवेदनशील जिलों में 763 गांव चिन्हित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त शेष 21 जिलों में 1006 संवेदनशील गांवों की पहचान की गई है। इस प्रकार प्रदेश में कुल 1769 गांवों को चिन्हित कर आपदा प्रबंधन की तैयारियों में विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।

आपदा संबंधी सूचनाओं के लिए टोल फ्री नंबर 1070

राज्य में आपदा संबंधी सूचनाओं और त्वरित सहायता के लिए बाढ़ नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे संचालित है। इसका टोल फ्री नंबर 1070 है। संभावित खतरे के प्रति नागरिकों को जागरूक करने के लिए दामिनी एवं मेघदूत मोबाइल ऐप के माध्यम से मौसम संबंधी चेतावनियां प्रसारित की जा रही हैं।

राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने नागरिकों से मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने, अनावश्यक जोखिम से बचने तथा प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन के समन्वित प्रयासों तथा नागरिकों की सतर्कता से संभावित आपदा के प्रभाव को कम करने और जनजीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

CG Rajyotsav 2026: 2 नवंबर को सभी जिलों में मनेगा राज्योत्सव, शासन ने मुख्य अतिथियों की सूची की जारी

रायपुर।  छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर राज्योत्सव 2026 का आयोजन प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में 2 नवंबर को किया जाएगा। राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने जिला मुख्यालयों में आयोजित होने वाले एक दिवसीय राज्योत्सव कार्यक्रमों के लिए मुख्य अतिथियों का निर्धारण कर दिया है। इस संबंध में 27 अक्टूबर को आदेश जारी किया गया है। विभिन्न जिलों में राज्य शासन के मंत्री, सांसद और विधायक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

राज्य शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार जांजगीर-चांपा जिले में संघ राज्य मंत्री तोखन साहू, बिलासपुर में उप मुख्यमंत्री अरुण साव तथा दुर्ग में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा मुख्य अतिथि होंगे। सरगुजा में मंत्री रामविचार नेताम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में मंत्री दयालदास बघेल, कांकेर में मंत्री केदार कश्यप, कोरबा में मंत्री लखन लाल देवांगन, जशपुर में मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, रायगढ़ में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, सूरजपुर में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, गरियाबंद में मंत्री टंकराम वर्मा तथा राजनांदगांव में मंत्री गजेन्द्र यादव मुख्य अतिथि होंगे।

इसी प्रकार कोरिया में विधायक भैयालाल राजवाड़े, बीजापुर में मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, बलौदाबाजार-भाटापारा में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, बेमेतरा में सांसद विजय बघेल, कबीरधाम में सांसद संतोष पाण्डेय, बलरामपुर-रामानुजगंज में सांसद चिंतामणि महाराज, महासमुंद में सांसद रूपकुमारी चौधरी, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में सांसद राधेश्याम राठिया, सक्ती में सांसद कमलेश जांगड़े, दन्तेवाड़ा में सांसद महेश कश्यप, बालोद में सांसद भोजराज नाग, सुकमा में सांसद देवेन्द्र प्रताप सिंह तथा मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में सांसद लक्ष्मी वर्मा मुख्य अतिथि होंगी।

मुंगेली में विधायक पुन्नूलाल मोहले, धमतरी में विधायक अजय चन्द्राकर, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में विधायक श्रीमती रेणुका सिंह, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में विधायक श्री अमर अग्रवाल, कोण्डागांव में विधायक सुश्री लता उसेंडी, नारायणपुर में विधायक श्री विक्रम उसेंडी तथा बस्तर में विधायक श्री किरण देव मुख्य अतिथि होंगे।

विकास योजनाओं और उपलब्धियों की प्रदर्शनी होगी आकर्षण का केंद्र

राज्य शासन द्वारा पूर्व में जारी निर्देशों के अनुसार सभी जिला मुख्यालयों में राज्योत्सव के अवसर पर विभिन्न विकास विभागों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इनमें विभागीय उपलब्धियों, महत्वपूर्ण योजनाओं और सफल परियोजनाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। इस वर्ष कार्यक्रमों का मुख्य थीम ‘सुसंस्कृत नारी, युवा उड़ान’ निर्धारित किया गया है।

जिला स्तर पर स्थानीय कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी। कार्यक्रमों में शालीनता और गरिमा बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। शासन की कल्याणकारी योजनाओं के हितग्राहियों को भी कार्यक्रमों में लाभान्वित किया जाएगा।

1 से 3 नवंबर तक रोशन होंगे शासकीय भवन

राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर 1 से 3 नवंबर तक सभी जिला मुख्यालयों में स्थित शासकीय भवनों पर आकर्षक रोशनी की जाएगी। इसके लिए संबंधित विभाग अपने बजट से आवश्यक व्यवस्थाएं करेंगे।

राज्य शासन ने सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि मुख्य अतिथियों के परामर्श से कार्यक्रमों का निर्धारण करते हुए आयोजन की समुचित तैयारियां सुनिश्चित करें। जिला स्तरीय कार्यक्रमों में मंत्रीगण, सांसदों, विधायकों एवं जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

Bilaspur High Court: CGPSC की मुख्य परीक्षा की आंसर शीट से गायब मिले 4 पन्ने, अब अभ्यर्थी को मिलेंगे 50 हजार

CGPSC answer sheet missing pages: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी कि सीजीपीएससी की बड़ी लापरवाही सामने आई है. आयोग की इ लापरवाही पर बिलासपुर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. इसमें एक अभ्यर्थी की आंसरशीट से 4 पन्ने गायब मिलने पर हाई कोर्ट ने आयोग पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. इसके साथ ही आयोग को कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि, अभ्यर्थी को भी मुआवजा तीन महीने के अंदर दे.

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के मुताबिक, पूरा मामला CGPSC के एक कॉम्पटेटिव एग्जाम से जुड़ा हुआ है. जिसमें परीक्षा में शामिल हुए एक अभ्यर्थी ने अपनी आंसरशीट की मार्किंग देखने के लिए सूचना के अधिकार यानी कि राइट टू इनफॉर्मेशन के तहत आवेदन किया. जब उसे आयोग की तरफ से आंसरशीट की फोटोकॉपी मिली तो उसमें कई पन्ने गायब मिले.

उत्तरपुस्तिका से 4 पन्ने गायब मिले

आंसरशीट की फोटोकॉपी की गहनता से जांच करने पर पता चला कि, उसकी मुख्य आंसरशीट में से 4 पन्ने गायब थे. सबसे गंभीर बात यह है कि, उन गायब पन्नों में लगभग 30 अंकों के प्रश्नों के उत्तर लिखे हुए थे. यानी अभ्यर्थी ने जो जवाब लिखे थे, उनका मूल्यांकन ही नहीं हो पाया, जिससे उसका रिजल्ट सीधे तौर पर प्रभावित हुआ.

अभ्यर्थी ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा

उत्तरपुस्तिका से पन्ने गायब होने और आयोग द्वारा कोई संतोषजनक जवाब न मिलने पर अभ्यर्थी ने बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की. याचिका में कहा गया कि आयोग की लापरवाही के कारण उसका भविष्य खराब हो रहा है. मामले की सुनवाई जस्टिस पी.पी. साहू की एकल पीठ में हुई. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने CGPSC की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई. कोर्ट ने कहा कि आयोग जैसी संवैधानिक संस्था से इस तरह की लापरवाही की उम्मीद नहीं की जा सकती. कोर्ट ने यह भी पाया कि शिकायत मिलने के बाद भी आयोग ने मामले की जांच को गंभीरता से नहीं लिया और समय पर पूरी नहीं की. इसी लापरवाही को देखते हुए कोर्ट ने यह बड़ा फैसला सुनाया.

कोर्ट का आदेश

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में दो अहम बातें कहीं हैं:

आयोग पीड़ित अभ्यर्थी को 50 हजार रुपये का मुआवजा 3 महीने के भीतर दे.

CGPSC पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाता है.