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Thursday, October 29, 2026
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भारतीय राजनीति में यह नया मोड़ है, मंजिल नहीं! शाबाशी नहीं, सफर जारी है

राजनीतिक चर्चा लेख – 29 अक्टूबर 2026

MLC चुनाव बैलेट पेपर से ही होते हैं।”सोशल मीडिया पर ‘कांग्रेस का खाता नहीं खुला’ का दावा किया जा रहा है, जबकि चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि कांग्रेस ने नागपुर जैसी प्रतिष्ठित सीट जीतकर अपना खाता खोला है।”

भारतीय राजनीति के बदलते परिदृश्य में जब भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मुकाबले का आकलन होता है, तो अक्सर महाभारत के ‘कौरव सेना बनाम एकल योद्धा’ का द्वंद्व मानस पटल पर कौंध जाता है।

आज की राजनीति में यह चर्चा बेहद प्रासंगिक हो गई है कि क्या कांग्रेस का अस्तित्व मुख्य रूप से राहुल गांधी के इर्द-गिर्द सिमट गया है, जबकि उनके सामने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का एक विशाल कुनबा है, जिसके पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का अनुशासित और अजेय माना जाने वाला सांगठनिक तंत्र खड़ा है।

इस मुकाबले की जमीनी हकीकत को समझने के लिए हाल ही में चार राज्यों (उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक) में हुए विधान परिषद (MLC) के द्विवार्षिक चुनाव और पिछले लोकसभा चुनाव के आंकड़े एक दिलचस्प तस्वीर पेश करते हैं।

MLC चुनाव: ‘सुपर शून्य’ के नैरेटिव का सच और भाजपा के गढ़ों में सेंध

हालिया MLC चुनावों के नतीजों के बाद मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह नैरेटिव बनता दिखा कि कांग्रेस पूरी तरह सिमट गई है। लेकिन निष्पक्ष चुनावी विश्लेषण दिखाता है कि सिक्के का दूसरा पहलू भाजपा के लिए भी गंभीर आत्ममंथन का विषय है।

कांग्रेस का नफा-नुकसान: यह सच है कि इन राज्यों की अधिकांश सीटों पर कांग्रेस उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी और उसने कर्नाटक व बिहार में अपनी कुछ पारंपरिक शिक्षक सीटें गंवा दीं।

लेकिन यह कहना पूरी तरह गलत होगा कि कांग्रेस का खाता नहीं खुला। सच यह है कि उसका आंकड़ा 2 से 1 हुआ।

भाजपा के मजबूत गढ़ों का ढहना: RSS के विशाल कैडर और मजबूत सांगठनिक कुनबे के बावजूद भाजपा को इन चुनावों में कुछ ऐसे झटके लगे, जिसने राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया। भाजपा अपने सबसे मजबूत और पारंपरिक गढ़ों को बचाने में नाकाम रही।

प्रतिष्ठा की सीटों पर हार: इसमें सबसे चौंकाने वाली हार RSS के मुख्यालय और नितिन गडकरी व देवेंद्र फडणवीस के गृह क्षेत्र नागपुर स्नातक सीट पर हुई, जहाँ कांग्रेस ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इसके अलावा, प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी (काशी) शिक्षक सीट और पिछले तीन दशक से भाजपा का गढ़ रही पटना शिक्षक सीट पर भी भाजपा को शिकस्त झेलनी पड़ी।

यह साफ दिखाता है कि जहाँ कांग्रेस के लिए हर स्तर पर अभी लंबी सांगठनिक लड़ाई बाकी है, वहीं भाजपा का अभेद्य माना जाने वाला तंत्र भी अपने सबसे सुरक्षित किलों में सामना करते दिखा है।

मीडिया और बड़े आंकड़ों की गवाही: 44 से 100+ और 303 से 240 का सफर

पिछले एक दशक में देश की दोनों बड़ी पार्टियों के ग्राफ में आया बदलाव इस बात का गवाह है कि लोकतंत्र में कोई भी लहर हमेशा के लिए अमर नहीं होती।

कांग्रेस का पुनरुत्थान: साल 2014 के लोकसभा चुनाव में जब कांग्रेस महज 44 सीटों पर सिमट गई थी, तब आलोचकों ने इसे पार्टी का अंत मान लिया था। 2019 में भी पार्टी केवल 52 सीटों तक ही पहुंच सकी।

लेकिन 2024 के आम चुनाव में राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने जोरदार वापसी करते हुए न सिर्फ 99 सीटें जीतीं, बल्कि बाद में उपचुनावों में जीत के साथ यह आंकड़ा 100 के पार पहुंच गया। यह उछाल दिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी विपक्ष ने अपनी जमीन वापस हासिल की है।

भाजपा का घटता संख्या बल: दूसरी तरफ, 2019 में अपने दम पर 303 सीटों का प्रचंड बहुमत हासिल करने वाली भाजपा 2024 में 240 सीटों पर सिमट गई। RSS जैसी मजबूत रीढ़ और ‘पन्ना प्रमुखों’ के विशाल कैडर के बावजूद भाजपा को अपने दम पर पूर्ण बहुमत के आंकड़े से पीछे रहना पड़ा और सहयोगियों पर निर्भर होना पड़ा।

आम चर्चा में क्या यह ‘कौरव सेना’ बनाम ‘एकल योद्धा’ की लड़ाई है?

राजनीतिक चर्चा में तो भाजपा के पास जो सांगठनिक मशीनरी है, उसका मुकाबला करना किसी भी राजनीतिक दल के लिए लोहे के चने चबाने जैसा है। RSS का कैडर-आधारित नेटवर्क चुनाव के समय भाजपा के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच का काम करता है।

खबर विश्लेषण की स्थिति में सत्ता पक्ष को एक विशाल ‘सांगठनिक सेना’ कहना गलत नहीं होगा, जिसके सामने विपक्ष की ओर से राहुल गांधी एक मुख्य लड़ाके के रूप में वैचारिक मोर्चा संभाले हुए हैं।

कांग्रेस अपनी 2 पारंपरिक सीटों पर काबिज थी और इस बार उसने कुल 12 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें से वह केवल 1 प्रतिष्ठित सीट (महाराष्ट्र की नागपुर स्नातक सीट) जीतने में सफल रही।

संक्षेप में: कांग्रेस ने 1 खोया, भाजपा के हाथ से 4 निकले।

दूसरी ओर, भाजपा इन सभी 28 सीटों पर चुनाव मैदान में उतरी थी और उसने कुल 13 सीटों पर जीत दर्ज की, लेकिन इस प्रक्रिया में उसके हाथ से 4 सबसे मजबूत और पारंपरिक गढ़ (जैसे नागपुर, वाराणसी और पटना) निकल गए।

सब कुछ मीडिया जानकारी है जहाँ कांग्रेस 12 में से केवल 1 सीट जीतकर अपने सांगठनिक बिखराव से जूझती नजर आई, वहीं भाजपा का सभी 28 सीटों पर लड़कर 4 प्रतिष्ठित सीटें गंवाना उसके लिए एक बड़ा रणनीतिक और प्रतीकात्मक झटका साबित हुआ है।

चक्रवात अर्नब के बाद केंद्र अलर्ट, अमित शाह ने चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों से की बात

नई दिल्ली। चक्रवात अर्नब से प्रभावित राज्यों में हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने के प्रयास शुरू किए है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से बातचीत कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए केंद्र की ओर से हरसंभव मदद देने का भरोसा दिलाया।चक्रवात के असर से कई इलाकों में तेज हवाओं, भारी बारिश और जलभराव जैसी परेशानियां सामने आई है। ऐसे में प्रशासन का जोर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, जरूरतमंद परिवारों को सहायता देने और बिजली, सड़क सहित जरूरी सेवाओं को जल्द बहाल करने पर है।

मुख्यमंत्रियों से चर्चा कर मदद का भरोसा

गृह मंत्री अमित शाह ने चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से संपर्क कर चक्रवात से पैदा हुए हालात और राहत कार्यों की जानकारी ली। इस दौरान प्रभावित इलाकों में आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने और जरूरत के मुताबिक केंद्रीय एजेंसियों की मदद देने का आश्वासन दिया गया।प्राकृतिक आपदा के दौरान केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल को अहम माना जाता है। इससे प्रभावित क्षेत्रों की जरूरतों का आकलन कर बचाव दलों और राहत सामग्री को समय पर पहुंचाने में मदद मिलती है। गृह मंत्री ने इस संबंध में सोशल मीडिया पर भी जानकारी साझा की।

NDRF और SDRF की टीमें राहत अभियान में सक्रिय

चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमें तैनात है। इनका काम जोखिम वाले इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना, स्थानीय प्रशासन की मदद करना और आपात स्थितियों से निपटना है।प्रशासन की ओर से राहत शिविरों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने और संवेदनशील इलाकों पर नजर रखने के प्रयास भी किए जा रहे है। लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ भोजन, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है।

आंध्र प्रदेश में फसलों और सार्वजनिक सुविधाओं को नुकसान

चक्रवात का आंध्र प्रदेश में व्यापक असर सामने आया है। तेज हवाओं और बारिश के चलते कृषि व बागवानी फसलों, बिजली व्यवस्था, सड़कों और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचने की जानकारी दी गई है।मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अमित शाह से बातचीत के दौरान राज्य के हालात और नुकसान से अवगत कराया। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में क्षति का आकलन करने के लिए केंद्रीय टीमें भेजने के साथ राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक सहायता की मांग की।मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य के 14 जिलों में बचाव कार्यों के लिए NDRF की 16 और SDRF की 11 टीमें तैनात की गई थीं।

ओडिशा में संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने की तैयारी

ओडिशा के दक्षिणी हिस्सों में भी चक्रवात का प्रभाव देखने को मिला है। भारी बारिश और बाढ़ की आशंका के मद्देनजर संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के प्रयास किए गए। स्थानीय प्रशासन को जलभराव और मौसम से जुड़ी परिस्थितियों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए है।राहत शिविरों में भोजन, साफ पानी, चिकित्सा सुविधा और अन्य जरूरी संसाधनों की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में बारिश और तेज हवाओं से जनजीवन प्रभावित

चक्रवात के असर से छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में मौसम बदला है। राजधानी रायपुर के साथ बस्तर और प्रदेश के अन्य इलाकों में बारिश तथा तेज हवाओं के कारण जनजीवन प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।संभावित नुकसान को देखते हुए संबंधित विभागों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत अभियान शुरू करने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के बीच तालमेल बनाए रखने पर भी जोर दिया जा रहा है।

बिजली, सड़क और जरूरी सेवाओं की बहाली पर नजर

चक्रवात के बाद प्रभावित इलाकों में सामान्य स्थिति बहाल करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है। तेज हवाओं से पेड़ और बिजली के खंभे गिरने, सड़क संपर्क टूटने तथा भारी बारिश से जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है।ऐसे में बिजली विभाग, स्वास्थ्य सेवाओं, स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को समन्वय के साथ काम करना पड़ता है। लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ जरूरी सेवाओं को जल्द बहाल करना प्राथमिकता बनी हुई है।

केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय पर जोर

चक्रवात को लेकर केंद्र सरकार ने प्रभावित होने की आशंका वाले राज्यों की तैयारियों की समीक्षा भी की थी। राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति की बैठक में राहत शिविरों, बचाव दलों और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी।अब गृह मंत्री की मुख्यमंत्रियों से बातचीत के बाद राहत कार्यों में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को और महत्व दिया जा रहा है। प्रभावित परिवारों तक भोजन, पेयजल, सुरक्षित आश्रय और चिकित्सा सहायता पहुंचाने के साथ लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने और जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।

नशीली दवाओं के अवैध कारोबार पर पुलिस का शिकंजा, 6 लाख की गोलियों के साथ तीन गिरफ्तार

बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने नशीली दवाओं की तस्करी के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 6 लाख रुपये कीमत की नशीली गोलियां बरामद की गई है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी इन गोलियों को बेचने के लिए ग्राहक तलाश रहे थे।

मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई

पुलिस के अनुसार, जिले में पुलिस अधीक्षक किरण गंगाराम चव्हाण के निर्देश पर अवैध गतिविधियों और नशीले पदार्थों के कारोबार के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चन्द्रकांत गवर्ना और एसडीओपी विनय साहू के मार्गदर्शन में 27 अक्टूबर को यह कार्रवाई की गई।बालोद थाने में पदस्थ निरीक्षक शिशुपाल सिन्हा को सूचना मिली थी कि तांदुला नदी के किनारे रामघाट मंदिर के पास कुछ लोग बाइक और स्कूटी पर नशीली दवाएं लेकर पहुंचे है। वे इन दवाओं को बेचने के लिए खरीदारों की तलाश कर रहे थे। सूचना मिलते ही पुलिस और ANTF की संयुक्त टीम ने मौके पर दबिश दी।

1500 टैबलेट बरामद, वाहन और मोबाइल भी जब्त

मौके से नवीन चावला, आशीष निर्मलकर और किशन बहादुर उर्फ नेपाली को पकड़ा गया। तलाशी के दौरान उनके पास से Nitrosun-10 नाम की 1500 टैबलेट बरामद हुई। ये नाइट्राजेपाम दवा की गोलियां है, जिनकी कुल कीमत करीब 6 लाख रुपये बताई गई है।कार्रवाई के दौरान पुलिस ने नगदी, दोपहिया वाहन और मोबाइल फोन भी जब्त किए। पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि वे नशीली गोलियां ओडिशा के भुवनेश्वर से लेकर आ रहे थे।

NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज

बालोद थाने में आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 0574/2026 दर्ज किया गया है। मामला एनडीपीएस एक्ट, 1985 की धारा 22(ग) के तहत दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस जब्त सामग्री और आरोपियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। आगे की वैधानिक कार्रवाई भी की जा रही है।

पुलिस ने आम लोगों से की सहयोग की अपील

बालोद पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि नशीली दवाओं की अवैध बिक्री या किसी अन्य संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को दें। पुलिस ने लोगों से नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक रहने और युवाओं को नशे से दूर रखने में सहयोग करने की अपील भी की है।

बैलेट पेपर की दुहाई देने वाली कांग्रेस बैलेट पेपर से हुए चुनाव में भी खाता नहीं खोल सकी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने चार राज्यों में हुए विधान परिषद चुनावों के नतीजों को लेकर कांग्रेस पर तीखा कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा कि बार-बार बैलेट पेपर से चुनाव कराने की दुहाई देने वाली कांग्रेस को अब बैलेट पेपर से हुए चुनावों में भी करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक की 28 विधान परिषद सीटों के लिए हुए चुनावों में कांग्रेस अपना खाता तक नहीं खोल पाई। विशेष रूप से कर्नाटक में अपनी सरकार होने के बावजूद कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनावी हार पर बार-बार मतदान प्रक्रिया को कठघरे में खड़ा करने वाली कांग्रेस अब अपनी इस पराजय के लिए किसे दोष देगी?

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कांग्रेस को अपनी चुनावी विफलताओं का ठीकरा मतदान प्रक्रिया पर फोड़ने के बजाय आत्ममंथन करना चाहिए। कांग्रेस को समझना चाहिए कि चुनाव ईवीएम से हो या बैलेट पेपर से, जीत के लिए जनता का विश्वास जरूरी है, झूठे आरोप और राजनीतिक शोर-शराबा नहीं।

बिलासपुर हाईकोर्ट का फैसला: बिना विभागीय जांच चौकीदार को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देना गलत

 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के चौकीदार रामसिंह यादव को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के आदेश को निरस्त कर दिया है। न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि नियमित विभागीय जांच के बिना दंड के तौर पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति नहीं दी जा सकती।अदालत ने विश्वविद्यालय को कर्मचारी को सेवा में वापस लेने और दो महीने के भीतर उसके वेतन का काल्पनिक निर्धारण करने का निर्देश दिया है। हालांकि, सेवा से बाहर रहने की अवधि का बकाया वेतन देने की मांग स्वीकार नहीं की गई।

ड्यूटी से अनुपस्थिति पर हुई थी कार्रवाई

रामसिंह यादव की नियुक्ति 6 जुलाई 2002 को विश्वविद्यालय में चौकीदार के पद पर हुई थी। परिवीक्षा अवधि पूरी होने के बाद 8 जुलाई 2004 को उन्हें नियमित कर्मचारी बना दिया गया।विश्वविद्यालय ने आरोप लगाया था कि रामसिंह 7 जून से 4 अगस्त 2011 के बीच ड्यूटी से अनुपस्थित रहे। इस संबंध में जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब में उन्होंने बीमारी और हृदय संबंधी परेशानी का हवाला दिया था। बाद में विश्वविद्यालय ने पांच आरोपों के साथ आरोपपत्र भी जारी किया।10 सितंबर 2012 को विश्वविद्यालय ने 461 दिन की अनुपस्थिति को बिना वेतन की अवधि मानते हुए एक वेतनवृद्धि रोकने का दंड दिया। इसके बाद 16 अप्रैल 2013 को उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का आदेश जारी कर दिया गया। इस फैसले के खिलाफ कर्मचारी ने अभ्यावेदन दिया, लेकिन 11 जुलाई 2018 को उसे भी खारिज कर दिया गया।

हाईकोर्ट ने दंडात्मक कार्रवाई को ठहराया अनुचित

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश दंडात्मक प्रकृति का था और इसे नियमित विभागीय जांच के बिना जारी किया गया था। अदालत ने 16 अप्रैल 2013 के सेवानिवृत्ति आदेश के साथ 11 जुलाई 2018 को अभ्यावेदन खारिज करने के फैसले को भी रद्द कर दिया।विश्वविद्यालय की ओर से दलील दी गई थी कि कर्मचारी पूरे सेवाकाल में बार-बार अनुपस्थित रहा और उसका कार्यप्रदर्शन भी संतोषजनक नहीं था। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे आरोप निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना दंडात्मक कार्रवाई को उचित नहीं ठहरा सकते।

पांच साल बाद अदालत पहुंचे कर्मचारी को नहीं मिलेगा पिछला वेतन

हाईकोर्ट ने रामसिंह यादव की सेवा बहाली का रास्ता साफ किया, लेकिन पिछला वेतन देने की मांग मंजूर नहीं की। अदालत के मुताबिक, याचिकाकर्ता ने यह दावा नहीं किया था कि सेवा से बाहर रहने के दौरान उसे दूसरी नौकरी नहीं मिली और रोजगार तलाशने के बावजूद वह बेरोजगार रहा।इसके अलावा, कर्मचारी अनिवार्य सेवानिवृत्ति के करीब पांच साल बाद हाईकोर्ट पहुंचा था। इसी आधार पर उसे पिछला वेतन दिए बिना सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया गया। उसके वेतन और वेतनवृद्धि का निर्धारण काल्पनिक आधार पर किया जाएगा।विश्वविद्यालय को आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने की तारीख से दो महीने के भीतर बहाली और वेतन निर्धारण से जुड़ी आवश्यक कार्रवाई पूरी करनी होगी।

छत्तीसगढ़ में साल 2027 की छुट्टियों का कैलेंडर जारी, जानें होली-दिवाली, ईद और छेरछेरा पर कब रहेगा अवकाश

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने वर्ष 2027 के लिए शासकीय कार्यालयों और संस्थानों में सामान्य अवकाश, सार्वजनिक अवकाश और ऐच्छिक अवकाश की सूची जारी कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। जारी आदेश के अनुसार, वर्ष 2027 में छत्तीसगढ़ के शासकीय सेवकों को निर्धारित सामान्य अवकाश के साथ अपनी इच्छानुसार तीन ऐच्छिक अवकाश लेने की पात्रता होगी.

2027 के सामान्य अवकाश

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, वर्ष 2027 में सामान्य अवकाश की सूची में छेरछेरा, गणतंत्र दिवस, संत रविदास जयंती, महाशिवरात्रि, ईद-उल-फितर, होली, गुड फ्राइडे, भक्त माता कर्मा जयंती, डॉ. अंबेडकर जयंती, रामनवमी, महावीर जयंती, ईद-उल-जुहा (बकरीद), बुद्ध पूर्णिमा, मोहर्रम, कबीर जयंती, हरेली, विश्व आदिवासी दिवस, रक्षाबंधन, कृष्ण जन्माष्टमी, हरितालिका तीज, महात्मा गांधी जयंती, दीपावली, छठ पूजा, गुरु घासीदास जयंती और क्रिसमस शामिल हैं।

रविवार को पड़ने वाले त्योहारों पर अलग से अवकाश नहीं

अधिसूचना के अनुसार, वर्ष 2027 में स्वतंत्रता दिवस, ईद-ए-मिलाद, दशहरा (विजयादशमी) और गुरु नानक जयंती रविवार को पड़ रहे हैं। इसलिए इन त्योहारों के लिए अलग से सामान्य अवकाश घोषित नहीं किया गया है।

ऐच्छिक अवकाश की सूची

राज्य सरकार ने वर्ष 2027 के लिए ऐच्छिक अवकाशों की सूची भी जारी की है। इसमें नए साल का दिन, मकर संक्रांति, नेताजी सुभाषचंद्र बोस जयंती, बसंत पंचमी, छत्रपति शिवाजी जयंती, राजिम मेला माघ पूर्णिमा, गुड़ी पड़वा, वैशाखी, रथयात्रा, नाग पंचमी, पोला, गणेश चतुर्थी, नवाखाई, विश्वकर्मा जयंती, अग्रसेन जयंती, करवाचौथ, गोवर्धन पूजा, भगवान सहस्त्रबाहु जयंती, संत नामदेव जयंती और शहीद वीरनारायण सिंह बलिदान दिवस सहित कई त्योहार एवं महत्वपूर्ण दिवस शामिल हैं।

कर्मचारियों को मिलेंगे तीन ऐच्छिक अवकाश

जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रत्येक शासकीय सेवक को सूची में शामिल ऐच्छिक अवकाशों में से अपनी इच्छानुसार केवल तीन अवकाश लेने की पात्रता होगी। रविवार को पड़ने वाले कुछ ऐच्छिक अवकाशों को सूची में शामिल नहीं किया गया है।

इसके अलावा, परक्राम्य लिखित अधिनियम, 1881 की धारा 25 के तहत सार्वजनिक अवकाशों की अलग सूची भी जारी की गई है। इस सूची में बैंक एवं कोषालयों के लिए निर्धारित अवकाश शामिल हैं। बैंकों की वार्षिक लेखाबंदी का अवकाश केवल बैंकों और कोषालयों के लिए घोषित किया गया है।

किसानों की आय बढ़ाने बाजार आधारित खेती और फसल विविधीकरण को दें सर्वाेच्च प्राथमिकता- कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी

रायपुर। कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने कहा है कि प्रदेश के किसानों की आय में वृद्धि, आधुनिक कृषि तकनीकों का विस्तार और कृषि आधारित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन राज्य शासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों को परंपरागत खेती के साथ-साथ बाजार की मांग के अनुरूप लाभकारी फसलों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाए। विशेष रूप से धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, मिलेट्स तथा अन्य अधिक आय देने वाली फसलों का रकबा बढ़ाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए।

कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी आज रायपुर संभाग के अधिकारियों की मैराथन समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्यपालन, सहकारिता, बीज निगम, मंडी बोर्ड तथा अन्य संबंधित विभागों द्वारा संचालित केंद्र एवं राज्य प्रवर्तित योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। उन्होंने योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

15 नवंबर से धान खरीदी अभियान, सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश

कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने आगामी 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर प्रारंभ होने वाले धान खरीदी अभियान की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि किसानों को धान विक्रय में किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। इसके लिए कृषि, सहकारिता, मार्कफेड सहित संबंधित विभाग आपसी समन्वय से सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते सुनिश्चित करें। उन्होंने खाद-बीज की उपलब्धता, भंडारण एवं वितरण व्यवस्था की भी समीक्षा की तथा इन कार्यों में पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी के लिए साथी पोर्टल का उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

फसल विविधीकरण की धीमी प्रगति पर नाराजगी, दलहन-तिलहन और मिलेट्स का रकबा बढ़ाने पर जोर

श्री परदेशी ने फसल विविधीकरण की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकारियों को इसमें तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को धान के स्थान पर दलहन, तिलहन और कोदो-कुटकी, रागी जैसी मिलेट्स फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने बताया कि धान के बदले अन्य निर्धारित फसलों की खेती करने पर किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपए अनुदान देने का प्रावधान है। इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिकाधिक किसानों को लाभान्वित किया जाए। उन्होंने उद्यानिकी फसलों के विस्तार पर जोर देते हुए फूलों, फलों, मखाना और ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि फसल विविधीकरण केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित न रहे, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें स्थायी बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी परिणाममूलक प्रयास किए जाएं।

चक्रवात से फसलों को नुकसान होने पर तत्काल सर्वे कर किसानों को दिलाएं राहत

कृषि उत्पादन आयुक्त ने बंगाल की खाड़ी में आए चक्रवात श्अर्नबश् के संभावित प्रभावों को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चक्रवात के कारण प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचने की स्थिति में तत्काल सर्वे कराया जाए। उन्होंने प्रभावित किसानों के प्रकरण तैयार कर शासन के प्रचलित नियमों एवं योजनाओं के अंतर्गत पात्रतानुसार राहत और सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

कृषि यंत्रीकरण का वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंचे, मशीनों के संचालन का दें व्यावहारिक प्रशिक्षण

कृषि यंत्रीकरण सबमिशन की समीक्षा करते हुए श्री परदेशी ने कहा कि शासन द्वारा आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किसानों को विभिन्न कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके बावजूद फसल की बुआई और कटाई के समय हरियाणा, पंजाब सहित अन्य राज्यों से आने वाली कृषि मशीनों का उपयोग अधिक दिखाई देता है। यह स्थिति गंभीरता से विचार करने योग्य है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन की योजनाओं के अंतर्गत कृषि यंत्र प्राप्त करने वाले किसानों को मशीनों के संचालन, रखरखाव और उपयोग का समुचित व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाए। इससे किसान उपलब्ध कृषि यंत्रों का बेहतर उपयोग कर सकेंगे और खेती की लागत में कमी आएगी।

अमानक कीटनाशक बेचने वालों पर चलेगा विशेष अभियान, जबरन अन्य उत्पाद बेचने पर भी होगी कार्रवाई

कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने निजी कृषि आदान विक्रय केंद्रों में अनियमितताओं की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसी शिकायतें प्राप्त हो रही हैं कि कुछ निजी विक्रेता प्रतिष्ठित कंपनियों के बीज अथवा कीटनाशक खरीदने वाले किसानों को जबरन अन्य अमानक उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य करते हैं। इस प्रकार की फोर्स टैगिंग की प्रवृत्ति पर तत्काल रोक लगाई जाए। उन्होंने बिना लाइसेंस कीटनाशकों का विक्रय करने तथा अमानक उत्पाद बेचने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध विशेष जांच अभियान चलाने और दोषियों पर नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से नियमित निरीक्षण एवं सतत निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।

बलौदाबाजार में 700 एकड़ में ब्लैक राइस उत्पादन की पहल की सराहना, अन्य जिले भी अपनाएं मॉडल

बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त ने किसानों को बाजार आधारित और अधिक लाभकारी खेती से जोड़ने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने सुगंधित चावल एवं अन्य विशिष्ट कृषि उत्पादों की व्यावसायिक संभावनाओं का लाभ उठाने के निर्देश दिए। इस दौरान बलौदाबाजार जिले के कलेक्टर ने जानकारी दी कि जिले के कसडोल विकासखंड में लगभग 700 एकड़ क्षेत्र में ब्लैक राइस का उत्पादन कराया जा रहा है। इसके विपणन के लिए जापान की एक कंपनी से समन्वय स्थापित किया गया है तथा 25 हजार रुपए प्रति क्विंटल की दर से विक्रय की जानकारी दी गई।

कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के बाजार आधारित कृषि मॉडल किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने अन्य जिलों के अधिकारियों को भी स्थानीय परिस्थितियों, उत्पादन क्षमता और बाजार की मांग के अनुरूप ऐसे नवाचार अपनाने के निर्देश दिए।

हर जिले में विकसित होंगे दो से तीन विशिष्ट कृषि मॉडल

श्री परदेशी ने रायपुर संभाग के सभी जिलों के अधिकारियों को कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के साथ समन्वय स्थापित कर जिले की जलवायु, मिट्टी, उपलब्ध संसाधनों और बाजार की मांग के अनुरूप दो से तीन विशिष्ट कृषि गतिविधियों का चयन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों को मॉडल के रूप में विकसित किया जाए, ताकि संबंधित जिले की कृषि क्षेत्र में अलग पहचान स्थापित हो सके। इससे किसानों को नई तकनीकों, बेहतर उत्पादन और विपणन के अवसर उपलब्ध होंगे।

पीएम-आशा के तहत फसलों की खरीदी और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करें

कृषि उत्पादन आयुक्त ने प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) की समीक्षा करते हुए निर्धारित फसलों की खरीदी तथा किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए चलाए जा रहे अभियान से पारंपरिक ठोस उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के प्रयासों को गति मिली है। अधिकारियों ने बीज उत्पादन एवं भंडारण की स्थिति संतोषजनक होने की जानकारी देते हुए बताया कि किसानों को बिचौलियों के बजाय सीधे बीज निगम के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। बैठक में उद्यानिकी, पशुपालन एवं मत्स्यपालन विभाग के अधिकारियों ने भी विभागीय योजनाओं की प्रगति और किसानों तथा पशुपालकों को लाभान्वित करने के लिए संचालित गतिविधियों की जानकारी दी।

संभागवार समीक्षा से योजनाओं के क्रियान्वयन में आएगी तेजी

उल्लेखनीय है कि कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी द्वारा प्रदेश के विभिन्न संभागों के अधिकारियों की क्रमवार समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इन बैठकों का उद्देश्य कृषि एवं संबद्ध विभागों की योजनाओं की जमीनी प्रगति का आकलन करना, क्रियान्वयन में आ रही समस्याओं का निराकरण करना तथा किसानों को शासन की योजनाओं का समय पर लाभ सुनिश्चित कराना है। इसी क्रम में आज रायपुर संभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में कृषि विभाग के संचालक राहुल देव, मार्कफेड के प्रबंध संचालक जितेंद्र शुक्ला, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के प्रबंध संचालक अजय अग्रवाल, पशुधन विकास विभाग के संचालक चंद्रकांत वर्मा, मत्स्यपालन विभाग के संचालक एन.एस. नाग, मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक महेंद्र सावन्नी, एपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक सहित रायपुर संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा कृषि, सहकारिता एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

स्वामी आत्मानंद स्कूलों में 1812 संविदा पदों पर भर्ती की तैयारी पूरी: 31 अक्टूबर से 4 नवंबर तक तीन पालियों में होगा एग्जाम

रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में 1812 रिक्त संविदा पदों पर भर्ती के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) 31 अक्टूबर से 4 नवंबर 2026 तक आयोजित की जाएगी। लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी सूचना के अनुसार प्रदेश के विभिन्न 24 परीक्षा केंद्रों में कुल 34 हजार 604 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होंगे।उप संचालक लोक शिक्षण संचालनालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार परीक्षा के लिए रायपुर में सर्वाधिक 6 केंद्र बनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त बिलासपुर में 6, दुर्ग में 4, भिलाई में 4, जांजगीर-चांपा (चाम्पा) में एक, सरगुजा में एक तथा बस्तर (जगदलपुर) में दो परीक्षा केंद्र निर्धारित किए गए हैं। अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश प्रवेश पत्र के साथ उपलब्ध कराए गए हैं।

तीन पालियों में आयोजित होगी भर्ती परीक्षा

सीबीटी परीक्षा प्रतिदिन तीन पालियों में आयोजित की जाएगी। प्रथम पाली सुबह 8.30 बजे से 10.30 बजे तक, द्वितीय पाली दोपहर 12.30 बजे से 2.30 बजे तक तथा तृतीय पाली शाम 4.30 बजे से 6.30 बजे तक आयोजित होगी। परीक्षार्थियों को परीक्षा प्रारंभ होने से 90 मिनट अर्थात 1.30 घण्टा पहले परीक्षा केंद्र में पहुंचना होगा। प्रथम पाली के अभ्यर्थियों को सुबह 7 बजे, द्वितीय पाली के अभ्यर्थियों को सुबह 11 बजे तथा तृतीय पाली के अभ्यर्थियों को अपरान्ह 3 बजे निर्धारित परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया जाएगा। परीक्षा प्रारंभ होने के 15 मिनट पहले परीक्षा केंद्र का मुख्य द्वार बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं मिलेगा।

प्रवेश पत्र के साथ मूल पहचान पत्र लाना अनिवार्य 100 अंकों की होगी परीक्षा, गलत उत्तर पर होगी निगेटिव मार्किंग

सीबीटी परीक्षा में सभी विषयों के प्रश्नपत्र की अवधि दो घंटे निर्धारित की गई है। प्रत्येक प्रश्नपत्र में 100 प्रश्न होंगे तथा पूर्णांक 100 अंक होगा। सही उत्तर के लिए एक अंक दिया जाएगा, जबकि गलत उत्तर पर एक चौथाई अंक की कटौती की जाएगी। परीक्षा के बाद उत्तरों का मॉडल उत्तर जारी किया जाएगा। लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी अभ्यर्थियों से निर्धारित समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचने, प्रवेश पत्र में दिए गए निर्देशों का पालन करने तथा आवश्यक दस्तावेज साथ लाने की अपील की है।

माना बस्ती के तालाब बनेंगे पक्षी विहार: प्रवासी पक्षियों को मिलेगा सुरक्षित प्राकृतिक आवास, जनपद CEO ने पंचायत को कार्ययोजना बनाने दिए निर्देश

रायपुर। माना बस्ती के तालाबों को पक्षी विहार के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जाएगी। यहां आने वाले प्रवासी पक्षियों को सुरक्षित प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराने के लिए तालाबों के संरक्षण और संवर्धन पर जोर दिया जाएगा। जनपद पंचायत धरसींवा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आशीष केशरवानी ने ग्राम पंचायत माना बस्ती का निरीक्षण कर पंचायत को इस संबंध में कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कुमार बिश्वरंजन के निर्देश पर जिले में ग्रामीण विकास कार्यों की नियमित निगरानी की जा रही है। इसी क्रम में केशरवानी ने माना बस्ती पहुंचकर शासकीय विद्यालयों, पंचायत भवन और तालाबों का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति, पंचायत की व्यवस्थाओं और ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को जरूरी निर्देश दिए।

बालिका शौचालय निर्माण में देरी पर जताई नाराजगी

निरीक्षण के दौरान विद्यालय में निर्माणाधीन बालिका शौचालय का काम धीमी गति से चलने पर जनपद सीईओ ने नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित कर्मचारियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने और तय समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण काम पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में बालिकाओं के लिए स्वच्छ और सुरक्षित शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी है। ऐसे कार्यों में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

पोषण वाटिका की सराहना

विद्यालय परिसर में विकसित पोषण वाटिका का निरीक्षण करते हुए जनपद सीईओ ने इसकी सराहना की। उन्होंने कहा कि पोषण वाटिका के माध्यम से बच्चों को हरी सब्जियों, पौष्टिक आहार और संतुलित भोजन के महत्व की जानकारी मिलती है। इससे बच्चों में पौधों के प्रति लगाव बढ़ता है और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी विकसित होती है। उन्होंने इसे बच्चों के स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में अच्छी पहल बताया।

तालाबों को पक्षी विहार के रूप में विकसित करने की तैयारी

माना बस्ती के तालाबों में प्रवासी पक्षियों की आवक को देखते हुए जनपद सीईओ ने इन्हें पक्षी विहार के रूप में विकसित करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने को कहा। तालाबों का संरक्षण, साफ-सफाई और संवर्धन कर उन्हें पक्षियों के अनुकूल प्राकृतिक आवास के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे प्रवासी और स्थानीय पक्षियों को सुरक्षित वातावरण मिलेगा। साथ ही, ग्रामीणों में पक्षी संरक्षण और जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

पंचायत की आय बढ़ाने कर वसूली पर जोर

निरीक्षण के दौरान पंचायत की आय और राजस्व व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। जनपद सीईओ ने समर्थ पोर्टल के माध्यम से पंचायत के निर्धारित करों की शत-प्रतिशत वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पंचायत की अपनी आय बढ़ने से गांव में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार, साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था और अन्य विकास कार्यों को गति मिलेगी। इसके लिए पंचायत स्तर पर कर वसूली की नियमित समीक्षा करने और राजस्व संग्रहण में तेजी लाने को कहा गया।

निरीक्षण के दौरान करारोपण अधिकारी गजेश यदु, ग्राम पंचायत की सरपंच सुनीता लेखु बैश, पंचायत सचिव लता सेन, रोजगार सहायक सहित अन्य संबंधित कर्मचारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

सीएम विष्णुदेव साय आज निवास से जुड़ेंगे कार्यक्रमों में, चक्रवात के चलते रायपुर में स्कूल-कॉलेज बंद

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज मुख्यमंत्री निवास से ही विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। निर्धारित कार्यक्रमों में वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल होंगे। इस दौरान सरगुजा जिले में आयोजित बाबा कार्तिक उरांव जन्म शताब्दी समारोह 2026 में उनकी सहभागिता होगी। इसके अलावा वे सीतापुर से तराई तक बनने वाले फोरलेन सड़क मार्ग का शुभारंभ भी करेंगे।

बाबा कार्तिक उरांव जन्म शताब्दी समारोह में होंगे शामिल

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरगुजा जिले में आयोजित बाबा कार्तिक उरांव जन्म शताब्दी समारोह से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ेंगे। इसी माध्यम से वे सीतापुर से तराई तक फोरलेन सड़क मार्ग के शुभारंभ कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे। मुख्यमंत्री के आज के कार्यक्रम मुख्यमंत्री निवास से ही संचालित होंगे।

चक्रवात अर्नब के मद्देनजर रायपुर में स्कूल-कॉलेज बंद

चक्रवाती तूफान अर्नब के संभावित प्रभाव को देखते हुए रायपुर जिला प्रशासन ने विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए एहतियाती कदम उठाया है। मौसम खराब होने, भारी बारिश और तेज हवाएं चलने की आशंका के बीच जिले के सभी स्कूलों और कॉलेजों में एक दिन का अवकाश घोषित किया गया है।

विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन का फैसला

जिला प्रशासन की ओर से जारी आदेश में प्रतिकूल मौसम की आशंका को ध्यान में रखते हुए शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने का निर्णय लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, खराब मौसम के दौरान विद्यार्थियों को होने वाली संभावित परेशानियों से बचाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

अभिभावकों और विद्यार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे स्कूल-कॉलेज दोबारा खुलने के संबंध में जिला प्रशासन और संबंधित संस्थानों की आधिकारिक सूचना पर नजर रखें।