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Friday, October 23, 2026
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बस्तर में बाढ़ से भारी नुकसान, राष्ट्रपति मुर्मु से राहत और विकास की आस: फूलो देवी नेताम

 रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु छत्तीसगढ़ दौरे के दूसरे दिन शुक्रवार को जगदलपुर पहुंचेंगी। यहां वे बस्तर की ऐतिहासिक और पारंपरिक व्यवस्था मुरिया दरबार में शामिल होंगी। राष्ट्रपति के इस दौरे से क्षेत्र के आदिवासी समुदाय को कई उम्मीदें हैं। कांग्रेस की राज्यसभा सांसद फूलो देवी नेताम ने कहा कि बस्तर के लोग चाहते हैं कि राष्ट्रपति उनकी समस्याओं और मांगों को गंभीरता से सुनें तथा उनके समाधान के लिए प्रयास करें।नेताम के मुताबिक, हाल में आई भीषण बाढ़ से बस्तर में व्यापक नुकसान हुआ है। किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं और कई परिवारों को जान-माल की क्षति उठानी पड़ी है। ऐसे हालात में लोगों को उम्मीद है कि राष्ट्रपति के दौरे से प्रभावित परिवारों को राहत दिलाने और क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

बस्तर में संसाधनों की कमी नहीं, जरूरत बेहतर योजना की

फूलो देवी नेताम ने कहा कि बस्तर वन संपदा और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध क्षेत्र है। उनके अनुसार, यहां विकास की संभावनाएं मौजूद हैं, लेकिन इसके लिए प्रभावी योजनाओं और उन्हें लागू करने की मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत है।उन्होंने उम्मीद जताई कि क्षेत्र की जरूरतों पर ध्यान देकर बस्तर में विकास कार्यों को गति दी जा सकती है और स्थानीय लोगों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

मुरिया दरबार में आम लोगों की भागीदारी पर उठाए सवाल

मुरिया दरबार की व्यवस्था को लेकर भी सांसद ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहले इस आयोजन में स्थानीय आदिवासी समुदाय सहित विभिन्न समाजों के लोग बिना किसी रोक-टोक के शामिल होते थे। लेकिन अब उनके अनुसार, प्रशासनिक दबाव और पास व्यवस्था के चलते आम लोगों की भागीदारी प्रभावित हो रही है।नेताम का कहना है कि मुरिया दरबार को ऐसा मंच बने रहना चाहिए, जहां लोग स्वतंत्र रूप से अपनी समस्याएं रख सकें और उनकी बात सुनी जाए। उन्होंने कहा कि पहले इस परंपरा में लोगों की शिकायतों और जरूरतों पर ध्यान दिया जाता था। उनके मुताबिक, आयोजन को राजनीतिक प्रभाव से दूर रखा जाना चाहिए और इसमें सत्ताधारी दल का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।

मलेरिया और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सरकार पर सवाल

बस्तर में मलेरिया की समस्या और मच्छरदानी वितरण से जुड़े टेंडर में देरी का मुद्दा उठाते हुए फूलो देवी नेताम ने इसे सरकारी व्यवस्था की कमी बताया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों को उनकी जरूरत के अनुरूप स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए उन्होंने समय पर जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने और लोगों तक उपचार की सुविधाएं पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया।

महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा पर जताई चिंता

छत्तीसगढ़ में महिला अपराध की घटनाओं को लेकर भी सांसद ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद प्रदेश में बालिकाओं के खिलाफ हत्या और दुष्कर्म जैसी घटनाएं बढ़ी हैं। नेताम ने दावा किया कि रोजाना तीन से चार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं।उन्होंने कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते हुए सरकार से महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा अपराध के मामलों में सख्त कार्रवाई करने की मांग की।

राष्ट्रपति के दौरे से बस्तर की समस्याओं पर ध्यान देने की उम्मीद

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के मुरिया दरबार में शामिल होने को बस्तर के मुद्दों को सामने रखने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है। बाढ़ से प्रभावित परिवारों को राहत, किसानों के नुकसान, स्वास्थ्य सेवाओं, आदिवासी समुदाय की भागीदारी और महिलाओं की सुरक्षा जैसे विषय क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं।फूलो देवी नेताम ने उम्मीद जताई कि राष्ट्रपति के समक्ष उठने वाले मुद्दों पर गंभीरता से विचार होगा और बस्तर के लोगों की जरूरतों के अनुरूप विकास तथा राहत के प्रयास आगे बढ़ेंगे।

बिलासपुर में पांच दिन बिजली कटौती, 24 से 28 अक्टूबर तक रोजाना चार घंटे बंद रहेगी सप्लाई

 बिलासपुर। शहर के बिजली उपभोक्ताओं के लिए जरूरी खबर है। बिलासपुर के अलग-अलग इलाकों में बिजली लाइन से जुड़े निर्माण और रखरखाव कार्यों के चलते लगातार पांच दिनों तक निर्धारित समय के लिए बिजली आपूर्ति बंद रहेगी। बिजली कंपनी की सूचना के अनुसार, 24 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक रोजाना सुबह 10:30 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक बिजली बंद रखी जाएगी।इस दौरान अलग-अलग दिनों में विभिन्न उपकेंद्रों और फीडरों से जुड़े क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होगी। कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे बिजली बंद होने से पहले अपने जरूरी काम पूरे कर लें। विभाग के अनुसार, काम की स्थिति के आधार पर शटडाउन की अवधि में बदलाव भी किया जा सकता है।

24 अक्टूबर: यूनिवर्सिटी उपकेंद्र से जुड़े इलाके प्रभावित

शनिवार, 24 अक्टूबर को यूनिवर्सिटी सब स्टेशन के बिरकोना, कोनी, यूनिवर्सिटी और इंजीनियरिंग कॉलेज फीडर बंद रहेंगे। इसके चलते बड़ी कोनी, पेट्रोल पंप क्षेत्र, गणेश इन्क्लेव, कंचन विहार और छोटी कोनी में बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी।इसके अलावा रिवरव्यू कॉलोनी, कोनी थाना क्षेत्र, आईटीआई, कंट्री क्लब, इंजीनियरिंग कॉलेज और गुरु घासीदास विश्वविद्यालय यानी जीजीयू के आसपास के क्षेत्रों में भी बिजली बंद रहने की संभावना है।

25 अक्टूबर: सदर बाजार और सिम्स अस्पताल क्षेत्र में कटौती

रविवार, 25 अक्टूबर को बृहस्पति बाजार सब स्टेशन के सदर बाजार फीडर पर काम किया जाएगा। इसके कारण करुणा चौक, उदल चौक, गोलबाजार, मिशन अस्पताल और मध्यनगरी चौक के आसपास बिजली आपूर्ति प्रभावित होगी।डॉ. आभा वर्मा के आसपास के क्षेत्र और 33 केवी सिम्स अस्पताल क्षेत्र में भी निर्धारित समय के दौरान बिजली बंद रह सकती है।

26 अक्टूबर: भारतीय नगर और सलूजा विहार में बिजली बंद

सोमवार, 26 अक्टूबर को भारतीय नगर सब स्टेशन के सलूजा विहार फीडर से जुड़े इलाकों में बिजली आपूर्ति रोकी जाएगी। इस दौरान भारतीय नगर, सलूजा विहार और आसपास की कॉलोनियों के उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

27 अक्टूबर: मंगला और आसपास की कॉलोनियों पर असर

मंगलवार, 27 अक्टूबर को मंगला सब स्टेशन के मंगला, टंकी नंबर एक, टंकी नंबर दो और कुशाभाऊ ठाकरे फीडर बंद रहेंगे।इससे मंगला, गीतांजलि पार्क, सनसिटी, महर्षि स्कूल, गंगानगर फेज-2, मंगला बस्ती, धुरीपारा और दीनदयाल कॉलोनी में बिजली आपूर्ति प्रभावित होगी।

28 अक्टूबर: अलका एवेन्यू सहित कई इलाकों में कटौती

बुधवार, 28 अक्टूबर को अलका एवेन्यू सब स्टेशन के अलका एवेन्यू, आदर्श चौक और उषा उपवन फीडर बंद रखे जाएंगे। इसके चलते अलका एवेन्यू के तीनों फेज, मंगला बस्ती, शैल विहार और ब्रिज विहार में बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी।इसके अलावा जेपी विहार, जॉय रेसिडेंसी, यमुना विहार और उषा उपवन कॉलोनी के लोगों को भी निर्धारित समय के दौरान बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है।

उपभोक्ता पहले निपटा लें जरूरी काम

बिजली कंपनी ने लोगों से अपील की है कि वे निर्धारित शटडाउन को ध्यान में रखते हुए पानी भरने, जरूरी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को चार्ज करने और अन्य बिजली आधारित कामों की पहले से व्यवस्था कर लें।हालांकि, बिजली आपूर्ति बंद रहने की अवधि कार्य की प्रगति के अनुसार घट या बढ़ सकती है। इसलिए संबंधित क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को विभाग की ओर से जारी सूचना पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।

जशपुर से रायपुर का सफर होगा आसान, भारतमाला कॉरिडोर से घट सकता है यात्रा का समय

 जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में सड़क कनेक्टिविटी मजबूत करने की दिशा में भारतमाला परियोजना को अहम माना जा रहा है। प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर के बनने से जशपुर का रायपुर के साथ-साथ बिलासपुर, कोरबा और झारखंड से संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। इससे लोगों को आवागमन में सहूलियत मिलेगी और व्यापार, कृषि तथा पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों को भी गति मिल सकती है।

14 घंटे के सफर को कम करने की तैयारी

वर्तमान में जशपुर से रायपुर पहुंचने में यात्रियों को करीब 14 घंटे तक लगने की बात कही जाती है। कॉरिडोर तैयार होने के बाद यात्रा का समय कम करने का लक्ष्य है। परियोजना से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, सफर को करीब 8 से 9 घंटे तक लाने की संभावना जताई गई है। कुछ आकलनों में यात्रा का समय 5 से 6 घंटे तक होने की उम्मीद भी व्यक्त की गई है। हालांकि, वास्तविक समय सड़क के अंतिम मार्ग, उसकी स्थिति और यात्रा की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

707 किलोमीटर के कॉरिडोर में जशपुर की अहम भूमिका

भारतमाला परियोजना के तहत प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 707 किलोमीटर बताई गई है। इसमें लगभग 104 किलोमीटर हिस्सा जशपुर जिले से होकर गुजरने की जानकारी दी गई है। इस मार्ग से रायपुर और धनबाद के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है।कॉरिडोर से पत्थलगांव, जशपुर और आसपास के क्षेत्रों को भी लाभ मिल सकता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रयासों से केंद्र सरकार की इस परियोजना को आगे बढ़ाए जाने की बात कही जा रही है।

खेती, व्यापार और पर्यटन को मिल सकता है बढ़ावा

बेहतर सड़क संपर्क का सीधा फायदा स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलने की उम्मीद है। किसानों के लिए अपनी उपज को मंडियों और बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान हो सकता है। वहीं, व्यापारियों को सामान के परिवहन में सुविधा मिलने से कारोबार की लागत और समय कम करने में मदद मिल सकती है।इसके अलावा, इलाज, उच्च शिक्षा और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए बड़े शहरों तक पहुंचना भी आसान हो सकता है। सड़क नेटवर्क मजबूत होने से जशपुर के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की पहुंच बेहतर होने और स्थानीय कारोबार को नए अवसर मिलने की संभावना है।

रेल और सड़क परियोजनाओं से विकास को मिलेगी रफ्तार

जशपुर जिले में सड़क संपर्क सुधारने के साथ अन्य परिवहन परियोजनाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। कटनी-गुमला राष्ट्रीय राजमार्ग का काम आगे बढ़ने से क्षेत्रीय संपर्क को मजबूती मिलने की उम्मीद है। वहीं, लोहरदगा से धरमजयगढ़ तक रेल लाइन को केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने की जानकारी से जिले में रेल सुविधा की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होने की उम्मीद बढ़ी है।इसके साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और राज्य राजमार्गों से जुड़े कार्य भी क्षेत्र की कनेक्टिविटी सुधारने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।कुल मिलाकर, भारतमाला कॉरिडोर और अन्य परिवहन परियोजनाएं जशपुर के विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। इन योजनाओं का वास्तविक लाभ निर्माण कार्य पूरा होने, सड़क की गुणवत्ता और यातायात सुविधाओं के प्रभावी संचालन पर निर्भर करेगा।

छत्तीसगढ़ में शस्त्र पूजा के दौरान फायरिंग पर विवाद, एसपी अंकिता शर्मा को ही नोटिस मिलने से उठे सवाल

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में विजयादशमी के मौके पर हुई शस्त्र पूजा अब पुलिस विभाग के लिए विवाद की वजह बन गई है। राजनांदगांव की पुलिस अधीक्षक आईपीएस अंकिता शर्मा का AK-47 से हवा में फायरिंग करते हुए वीडियो सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। लेकिन दूसरे जिलों से भी पुलिस अधिकारियों के फायरिंग करते हुए वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि कार्रवाई केवल अंकिता शर्मा के खिलाफ ही क्यों की गई।रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, दुर्ग, कबीरधाम और बस्तर समेत कई जिलों से ऐसे वीडियो सामने आने की खबरों ने विभागीय कार्रवाई में समानता को लेकर बहस तेज कर दी है। फिलहाल अंकिता शर्मा से स्पष्टीकरण मांगा गया है। उनके जवाब के आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा।

शस्त्र पूजा के बाद AK-47 से की गई फायरिंग

यह घटना 20 अक्टूबर 2026 की बताई गई है। विजयादशमी के अवसर पर राजनांदगांव पुलिस लाइन में शस्त्र पूजा का आयोजन हुआ था। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने हथियारों तथा वाहनों की पूजा की। कार्यक्रम के बाद एसपी अंकिता शर्मा ने AK-47 राइफल से हवा में कई राउंड फायर किए।सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में अंकिता शर्मा साड़ी पहने राइफल चलाती नजर आती हैं। उनके आसपास अन्य पुलिस अधिकारी और कर्मचारी भी दिखाई देते हैं। वीडियो सामने आने के बाद हथियारों के इस्तेमाल और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठने लगे। कुछ लोगों ने इसे दशहरे की परंपरा से जोड़ा, जबकि कुछ ने लोगों की मौजूदगी में फायरिंग को जोखिम भरा बताया।

एएसपी कीर्तन राठौर का वीडियो भी आया सामने

मामले के बीच एक अन्य वीडियो भी सामने आया, जिसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर AK-47 से फायरिंग करते दिखाई दिए। इसके बाद चर्चा शुरू हुई कि क्या शस्त्र पूजा के दौरान फायरिंग केवल एसपी ने की थी या दूसरे अधिकारी भी इसमें शामिल थे।अलग-अलग जिलों से सामने आए वीडियो ने मामले को और व्यापक बना दिया है। अब यह सवाल भी अहम हो गया है कि सभी घटनाओं में सुरक्षा के क्या इंतजाम थे और क्या हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े नियमों का पालन किया गया था।

रायपुर से बस्तर तक कई जिलों के वीडियो का दावा

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, राजनांदगांव के अलावा रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, दुर्ग, कबीरधाम और बस्तर से भी शस्त्र पूजा के बाद फायरिंग के वीडियो सामने आए हैं। कुछ वीडियो में पुलिस अधिकारी राइफल से हवा में गोली चलाते नजर आते हैं।हालांकि, सभी वीडियो में इस्तेमाल किए गए कारतूसों, घटनाओं की परिस्थितियों और सुरक्षा व्यवस्था के बारे में समान जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए हर घटना को एक जैसा मानना उचित नहीं होगा। इसके बावजूद कई जिलों से ऐसे दृश्य सामने आने के बाद केवल एक अधिकारी को नोटिस दिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।

22 अक्टूबर को अंकिता शर्मा को जारी हुआ नोटिस

छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय ने 22 अक्टूबर को राजनांदगांव की एसपी अंकिता शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया। राजनांदगांव रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अजय यादव ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि फायरिंग से जुड़े वीडियो और हथियारों के इस्तेमाल के नियमों को ध्यान में रखते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है।आईजी के अनुसार, अंकिता शर्मा का जवाब मिलने के बाद उसे अपनी टिप्पणी के साथ वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा जाएगा। इसके बाद विभाग आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा।गौरतलब है कि नोटिस जारी होने का अर्थ किसी अधिकारी को अंतिम रूप से दोषी ठहराना नहीं है। फिलहाल एसपी से जवाब मांगा गया है। उनके खिलाफ किसी अंतिम दंडात्मक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।

दूसरे अधिकारियों को नोटिस क्यों नहीं मिला?

इस पूरे विवाद का सबसे अहम सवाल यह है कि दूसरे जिलों में हुई फायरिंग के मामलों में क्या कदम उठाए गए हैं। 23 अक्टूबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया गया कि अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी नहीं किए गए हैं।रिपोर्ट के अनुसार, अंकिता शर्मा का वीडियो सोशल मीडिया पर अधिक प्रसारित हुआ और इससे पुलिस की छवि पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका के कारण उनसे जवाब मांगा गया।इस जानकारी के बाद विभागीय कार्रवाई के आधार पर बहस शुरू हो गई है। सवाल है कि कार्रवाई किसी वीडियो के अधिक वायरल होने के कारण होनी चाहिए या फिर हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े नियमों की जांच सभी संबंधित मामलों में समान रूप से की जानी चाहिए।हालांकि, अभी यह कहना सही नहीं होगा कि दूसरे अधिकारियों ने भी समान परिस्थितियों में नियमों का उल्लंघन किया या उनके मामलों की जांच नहीं हुई। इसकी स्पष्ट जानकारी संबंधित घटनाओं की जांच के बाद ही मिल सकेगी।

शस्त्र पूजा और फायरिंग में है अंतर

विजयादशमी पर शस्त्र पूजा की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। पुलिस विभाग की कई इकाइयों में भी इस अवसर पर हथियारों और वाहनों की पूजा की जाती है। लेकिन शस्त्रों की पूजा करना और उनसे फायरिंग करना अलग-अलग गतिविधियां हैं।सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी आरके विज ने कहा कि शस्त्र पूजा के दौरान हथियार चलाना अनिवार्य नहीं है। उनके मुताबिक, फायरिंग केवल सुरक्षित स्थानों पर और जरूरी सावधानियों के साथ की जानी चाहिए।इस मामले में प्रमुख चिंता किसी अधिकारी के पहनावे या पूजा में शामिल होने की नहीं, बल्कि हथियारों के सुरक्षित इस्तेमाल और निर्धारित प्रक्रियाओं के पालन की है।

क्या फायरिंग में असली गोलियों का इस्तेमाल हुआ?

वीडियो वायरल होने के बाद यह सवाल भी उठा कि फायरिंग के दौरान वास्तविक गोलियां चलाई गई थीं या केवल आवाज पैदा करने वाले ब्लैंक राउंड इस्तेमाल किए गए थे।एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, शस्त्र पूजा के दौरान कभी-कभी आवाज करने वाले कारतूसों का इस्तेमाल किया जाता है। अधिकारी ने दावा किया कि ऐसे आयोजनों में वास्तविक गोलियां नहीं चलाई जातीं। हालांकि, अंकिता शर्मा और दूसरे अधिकारियों के वीडियो में इस्तेमाल हुए कारतूसों की तकनीकी पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।ब्लैंक राउंड में सामान्य गोली की तरह कोई प्रक्षेप्य बाहर नहीं निकलता, लेकिन फायरिंग के दौरान हथियार के मुंह से गर्म गैस और अन्य पदार्थ निकल सकते हैं। इसलिए ऐसे कारतूसों का इस्तेमाल भी जोखिम से पूरी तरह मुक्त नहीं होता और सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी रहता है।

उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने भी दिया बयान

विवाद सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव से भी इस बारे में सवाल किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय का संज्ञान लेगी। इसके बाद पुलिस मुख्यालय की ओर से अंकिता शर्मा को नोटिस जारी किए जाने की पुष्टि हुई।अब निगाहें इस बात पर हैं कि विभाग जांच को केवल राजनांदगांव तक सीमित रखेगा या दूसरे जिलों से सामने आए वीडियो की परिस्थितियों की भी समीक्षा करेगा।

परंपरा के साथ सार्वजनिक सुरक्षा भी जरूरी

शस्त्र पूजा के दौरान फायरिंग का मामला अब एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है। इससे तीन अहम सवाल सामने आए हैं: क्या हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े नियमों का पालन हुआ, क्या आयोजन में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम थे और क्या विभाग सभी संबंधित मामलों में एक समान मानदंड अपनाएगा?अंकिता शर्मा के जवाब और वरिष्ठ अधिकारियों के फैसले के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल इस घटनाक्रम ने पुलिस विभाग में अनुशासन, परंपरा और हथियारों के सुरक्षित इस्तेमाल के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।

दर्दनाक सड़क हादसा, 16 चक्का ट्रक से भिड़ी कार, दो महिलाओं की मौत और तीन घायल

 महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में शुक्रवार सुबह राष्ट्रीय राजमार्ग-53 पर भीषण सड़क दुर्घटना हो गई। पटेवा थाना क्षेत्र के बावनकेरा चौक के पास एक कार आगे चल रहे 16 चक्का ट्रक के पिछले हिस्से से जा टकराई। हादसे में कार सवार दो महिलाओं की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया।

शादी समारोह से लौट रहे थे कार सवार

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कार में पांच लोग सवार थे। सभी ओडिशा के संबलपुर में आयोजित एक शादी समारोह में शामिल होने के बाद वापस लौट रहे थे। इसी दौरान महासमुंद जिले में उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई।

बताया जा रहा है कि कार में सवार लोग मूल रूप से राजनांदगांव जिले के निवासी हैं। हालांकि, उनकी पहचान और पते की आधिकारिक पुष्टि की प्रक्रिया जारी है। शादी समारोह से लौटते समय हुए इस हादसे ने परिवारों की खुशियों को गहरे दुख में बदल दिया।

बावनकेरा चौक के पास ट्रक से टकराई कार

दुर्घटना पटेवा थाना क्षेत्र के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग-53 पर हुई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कार ओडिशा की ओर से आ रही थी। बावनकेरा चौक के पास वह आगे चल रहे 16 चक्का ट्रक के पिछले हिस्से से टकरा गई।

टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। वाहन में बैठे लोगों को गंभीर चोटें आईं। सड़क से गुजर रहे लोगों ने दुर्घटना की सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया।

दो महिलाओं ने तोड़ा दम, तीन घायलों को किया गया रेफर

हादसे के बाद कार में फंसे सभी पांच लोगों को बाहर निकालकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुमगांव ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद दो महिलाओं को मृत घोषित कर दिया।

अन्य तीन घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर चिकित्सा के लिए दूसरे अस्पताल रेफर किया गया। फिलहाल घायलों का उपचार जारी है। उनकी स्थिति को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

मृतकों की पहचान और परिजनों की जानकारी जुटा रही पुलिस

दुर्घटना में जान गंवाने वाली दोनों महिलाओं की पहचान की पुष्टि के लिए पुलिस प्रयास कर रही है। वाहन में सवार लोगों के नाम, पते और उनके परिजनों से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है।

प्रारंभिक जानकारी में सभी के राजनांदगांव जिले से होने की बात कही गई है। पुलिस इसकी पुष्टि कर रही है। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के तहत शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। आगे की कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद की जाएगी।

हादसे के बाद ट्रक चालक के फरार होने की जानकारी

स्थानीय समाचार रिपोर्ट के मुताबिक, कार से टक्कर होने के बाद ट्रक चालक वाहन लेकर घटनास्थल से चला गया। पुलिस दुर्घटना में शामिल ट्रक और उसके चालक के संबंध में जानकारी जुटा रही है।

ट्रक की पहचान, पंजीयन संबंधी विवरण और चालक की भूमिका को लेकर स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर दुर्घटना से जुड़े साक्ष्य जुटाए। साथ ही क्षतिग्रस्त कार को सड़क से हटवाकर यातायात सामान्य करने की कार्रवाई की गई।

दुर्घटना की असली वजह जानने में जुटी पुलिस

प्रारंभिक जानकारी में कार के आगे चल रहे ट्रक के पिछले हिस्से से टकराने की बात सामने आई है। हालांकि, हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

जांच के दौरान वाहनों की गति, उनके बीच की दूरी, सड़क की स्थिति और दुर्घटना के समय की परिस्थितियों की पड़ताल की जा सकती है। तकनीकी जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हादसे के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।

इस दर्दनाक दुर्घटना में दो महिलाओं की जान जाने और तीन लोगों के गंभीर रूप से घायल होने से क्षेत्र में शोक का माहौल है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

बस्तर से राष्ट्रपति भवन तक का ऐतिहासिक रिश्ता, राजेंद्र प्रसाद से द्रौपदी मुर्मु तक 5 राष्ट्रपतियों ने दिया विकास का संदेश

जगदलपुर। बस्तर की धरती केवल प्राकृतिक खूबसूरती और समृद्ध जनजातीय संस्कृति के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तित्वों के दौरों की ऐतिहासिक गवाह भी रही है। आजादी के बाद से अब तक देश के पांच राष्ट्रपतियों के बस्तर आगमन का उल्लेख मिलता है। इन यात्राओं के दौरान शिक्षा, सामुदायिक सहयोग, स्वास्थ्य सेवाओं, पर्यटन और जनजातीय संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जोर दिया गया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 23 अक्टूबर 2026 को अपने दूसरे बस्तर प्रवास पर ऐतिहासिक मुरिया दरबार में शामिल होने के लिए जगदलपुर पहुंच रही हैं। इससे पहले उन्होंने 7 फरवरी 2026 को बस्तर पंडुम में भाग लिया था। उनका मौजूदा दौरा बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक परंपराओं और जनजातीय समाज की सांस्कृतिक पहचान के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बस्तर के इतिहास में राष्ट्रपति के दौरों को देखें तो हर यात्रा का अपना अलग महत्व सामने आता है। किसी ने ग्रामीणों को सामूहिक प्रयासों के लिए प्रेरित किया, तो किसी ने शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय विकास की जरूरतों को रेखांकित किया।

1. डॉ. राजेंद्र प्रसाद: ग्रामीण विकास और श्रमदान का संदेश

23 मार्च 1953 को देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बस्तर का दौरा किया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल के साथ वे जगदलपुर के नजदीक एक गांव पहुंचे थे। बताया जाता है कि ग्रामीणों के निमंत्रण पर हुए इस दौरे में उन्होंने स्थानीय लोगों के प्रयासों से तैयार छात्रावास का उद्घाटन किया और कुएं के निर्माण के लिए भूमिपूजन किया।

इस यात्रा का प्रमुख संदेश सामुदायिक सहयोग और श्रमदान से विकास को गति देने का था। स्वतंत्रता के शुरुआती वर्षों में देश के सामने ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं का विस्तार एक बड़ी चुनौती थी। ऐसे समय में राष्ट्रपति का ग्रामीणों के बीच पहुंचना और उनके सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करना विशेष महत्व रखता था।

उनका संदेश था कि समाज की प्रगति के लिए सरकारी योजनाओं के साथ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। यह सोच आत्मनिर्भरता, स्थानीय सहयोग और ग्रामीण विकास की भावना को मजबूत करने वाली थी।

2. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम: शिक्षा और वैज्ञानिक सोच पर जोर

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का बस्तर से जुड़ाव उनके राष्ट्रपति बनने से पहले भी रहा था। रक्षा वैज्ञानिक के रूप में उन्होंने इस क्षेत्र का दौरा किया था। गिरोला और मारडूम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन से जुड़े केंद्रों की स्थापना के संदर्भ में भी उनकी भूमिका का उल्लेख मिलता है।

4 जून 2004 को राष्ट्रपति के रूप में वे तोकापाल क्षेत्र के रानसरगीपाल गांव पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों से संवाद किया तथा शिक्षा के महत्व पर जोर दिया।

डॉ. कलाम का मानना था कि किसी भी समाज का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी की शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और लक्ष्य हासिल करने के संकल्प पर निर्भर करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए निरंतर मेहनत करने की प्रेरणा दी।

बस्तर जैसे दूरस्थ क्षेत्र में उनका यह संदेश विशेष महत्व रखता था, जहां शिक्षा के अवसरों का विस्तार सामाजिक और आर्थिक बदलाव की दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है।

3. प्रतिभा पाटिल: पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण की संभावनाएं

देश की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने 29 सितंबर 2008 को बस्तर का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात का भ्रमण किया और क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को करीब से देखा।

चित्रकोट जलप्रपात और आसपास के प्राकृतिक परिवेश ने बस्तर में पर्यटन विकास की संभावनाओं को रेखांकित किया। इस क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ पर्यटन सुविधाओं का विस्तार स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है।

उनकी यात्रा से जुड़ा प्रमुख संदेश यह था कि प्राकृतिक धरोहरों की सुरक्षा और पर्यटन विकास को साथ लेकर आगे बढ़ना जरूरी है। बस्तर की पहचान केवल जंगलों और प्राकृतिक संपदा तक सीमित नहीं है। यहां की पारंपरिक कला, स्थानीय संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत भी पर्यटन को नई दिशा दे सकती है।

4. रामनाथ कोविंद: स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा को प्राथमिकता

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 25 और 26 जुलाई 2018 को बस्तर का दो दिवसीय दौरा किया था। इस दौरान वे दंतेवाड़ा पहुंचे और मां दंतेश्वरी के दर्शन किए। उन्होंने चित्रकोट जलप्रपात का भी भ्रमण किया।

26 जुलाई को जगदलपुर के डिमरापाल स्थित स्वर्गीय बलीराम कश्यप स्मृति शासकीय मेडिकल कॉलेज परिसर में शहीद महेंद्र कर्मा स्मृति चिकित्सालय का लोकार्पण उनके दौरे का प्रमुख कार्यक्रम रहा।

इस अवसर पर स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और शिक्षा को बेहतर बनाने की जरूरत महत्वपूर्ण विषयों में शामिल रही। दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना विकास की बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है।

उनकी यात्रा ने इस बात को रेखांकित किया कि बस्तर के युवाओं को उच्च शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण के बेहतर अवसर मिलने चाहिए। साथ ही, स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना भी क्षेत्र की प्रगति के लिए आवश्यक है।

5. द्रौपदी मुर्मु: जनजातीय विरासत और पारंपरिक व्यवस्था का सम्मान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का बस्तर दौरा क्षेत्र की जनजातीय पहचान और सांस्कृतिक परंपराओं के लिहाज से विशेष महत्व रखता है। वे 7 फरवरी 2026 को बस्तर पंडुम में शामिल हुई थीं। अब 23 अक्टूबर 2026 को उनके दूसरे प्रवास में ऐतिहासिक मुरिया दरबार और बस्तर दशहरा से जुड़े कार्यक्रम प्रमुख हैं।

मुरिया दरबार बस्तर की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है। इसमें मांझी, चालकी और अन्य पारंपरिक जनजातीय प्रतिनिधि अपनी बात रखते हैं। ऐतिहासिक रूप से यह आयोजन बस्तर की पुरानी प्रशासनिक और सामाजिक परंपराओं से जुड़ा रहा है। वर्तमान समय में भी यह स्थानीय समाज और पारंपरिक प्रतिनिधियों के विचार सामने रखने का मंच है।

राष्ट्रपति मुर्मु की इसमें भागीदारी से जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक संस्थाओं के महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने का अवसर मिलेगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक भागीदारी और सांस्कृतिक संरक्षण जैसे विषय इस क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हालांकि, राष्ट्रपति अपने संबोधन में किन मुद्दों पर विशेष जोर देंगी, यह उनके कार्यक्रम के बाद ही स्पष्ट होगा।

मुरिया दरबार क्यों है बस्तर की विशिष्ट पहचान

बस्तर दशहरा देश के सबसे लंबे समय तक चलने वाले पारंपरिक उत्सवों में गिना जाता है। इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक विशेषताएं देश के अन्य क्षेत्रों में मनाए जाने वाले दशहरा उत्सव से अलग हैं। यहां मां दंतेश्वरी की आराधना के साथ जनजातीय रीति-रिवाजों और सामुदायिक सहभागिता का विशेष महत्व है।

मुरिया दरबार इसी उत्सव की प्रमुख परंपराओं में शामिल है। इस आयोजन में पारंपरिक प्रतिनिधि स्थानीय समाज से जुड़े विषयों और सामुदायिक समस्याओं को सामने रखते हैं। यह परंपरा बस्तर की ऐतिहासिक पहचान और सामाजिक संरचना को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

राष्ट्रपति की मौजूदगी से इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा और पहचान मिलने की संभावना है।

श्रमदान से शिक्षा और स्वास्थ्य तक, बदलती प्राथमिकताओं की कहानी

बस्तर में राष्ट्रपतियों के दौरों का ऐतिहासिक क्रम क्षेत्र की जरूरतों और विकास की प्राथमिकताओं को समझने का अवसर देता है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद के दौरे में सामुदायिक सहयोग और ग्रामीण विकास का संदेश प्रमुख था। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने शिक्षा और वैज्ञानिक सोच को महत्व दिया। प्रतिभा पाटिल की यात्रा ने पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण की संभावनाओं को सामने रखा, जबकि रामनाथ कोविंद के दौरे में स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा से जुड़े प्रयास महत्वपूर्ण रहे।

अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के दौरे में जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक संस्थाओं और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर विशेष ध्यान है।

इन यात्राओं को एक साथ देखने पर स्पष्ट होता है कि बस्तर की प्रगति केवल बुनियादी सुविधाओं के विस्तार तक सीमित नहीं है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आर्थिक अवसरों के साथ स्थानीय संस्कृति तथा पारंपरिक पहचान का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है।

प्रधानमंत्रियों का भी बस्तर से रहा जुड़ाव

राष्ट्रपतियों के अलावा देश के कई प्रधानमंत्रियों ने भी अलग-अलग समय पर बस्तर का दौरा किया है। पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी तक, राष्ट्रीय नेतृत्व के बस्तर प्रवास का संबंध क्षेत्र की विकास संबंधी जरूरतों, जनजातीय समाज और प्रशासनिक प्राथमिकताओं से रहा है।

बस्तर का महत्व इसकी प्राकृतिक संपदा, सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय विरासत से जुड़ा है। राष्ट्रीय नेतृत्व की यात्राएं समय-समय पर इस क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं को व्यापक स्तर पर सामने लाने का माध्यम बनी हैं।

राष्ट्रपति मुर्मु के दौरे से क्या हैं उम्मीदें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का जनजातीय समुदाय से जुड़ाव और मुरिया दरबार जैसे पारंपरिक आयोजन में उनकी भागीदारी इस दौरे को विशेष बनाती है। बस्तर में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, स्थानीय विकास और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े विषय महत्वपूर्ण हैं।

मुरिया दरबार पारंपरिक प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का अवसर देता है। ऐसे में राष्ट्रपति की उपस्थिति जनजातीय समाज की परंपराओं और स्थानीय मुद्दों को व्यापक स्तर पर सामने लाने में महत्वपूर्ण हो सकती है।

बस्तर का इतिहास बताता है कि यहां आने वाले राष्ट्रपतियों ने अलग-अलग समय पर विकास की विभिन्न प्राथमिकताओं को रेखांकित किया है। इस बार भी सबकी निगाहें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के कार्यक्रम पर रहेंगी। मुरिया दरबार के ऐतिहासिक मंच पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की उपस्थिति बस्तर की परंपराओं, जनजातीय पहचान और राष्ट्रीय महत्व के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखी जा रही है।

बस्तर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का दौरा, मां दंतेश्वरी के दर्शन से मुरिया दरबार तक कई अहम कार्यक्रम

जगदलपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के छत्तीसगढ़ के बस्तर दौरे को लेकर जगदलपुर में व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई हैं। उनके निर्धारित कार्यक्रम में मां दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना, ऐतिहासिक मुरिया दरबार में सहभागिता और लालबाग मैदान में आयोजित सार्वजनिक समारोह शामिल हैं। इस दौरान राष्ट्रपति के बस्तर की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था से जुड़े प्रतिनिधियों से संवाद करने और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का कार्यक्रम भी तय किया गया है।

राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से 23 अक्टूबर को मुरिया दरबार और बस्तर दशहरा से संबंधित कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी की आधिकारिक जानकारी दी गई थी। राष्ट्रपति का यह दौरा बस्तर की धार्मिक मान्यताओं, जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक परंपराओं के लिहाज से खास महत्व रखता है।

सुबह जगदलपुर पहुंचने को लेकर प्रशासन ने की तैयारी

निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, राष्ट्रपति के शुक्रवार सुबह जगदलपुर पहुंचने की जानकारी दी गई थी। स्थानीय कार्यक्रम विवरण में सुबह करीब 10:30 बजे आगमन का समय बताया गया था। उनके दौरे को व्यवस्थित बनाने के लिए जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने प्रमुख स्थलों पर विशेष इंतजाम किए।

जगदलपुर एयरपोर्ट से लेकर मां दंतेश्वरी मंदिर, सिरहासार भवन और लालबाग मैदान तक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई। कार्यक्रम स्थलों पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती, प्रवेश नियंत्रण और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया।

मां दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना का कार्यक्रम

राष्ट्रपति के कार्यक्रम में सुबह 11 बजे मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन-पूजन का समय निर्धारित किया गया था। मां दंतेश्वरी को बस्तर अंचल की आराध्य देवी माना जाता है। स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक जीवन में मंदिर का विशेष स्थान है।

बस्तर दशहरा की अनेक पारंपरिक रस्में देवी मां की आराधना से जुड़ी हुई हैं। यही कारण है कि यहां दशहरा उत्सव का स्वरूप देश के अन्य हिस्सों से अलग दिखाई देता है। मंदिर में दर्शन के बाद राष्ट्रपति के मुरिया दरबार सहित अन्य निर्धारित आयोजनों में शामिल होने की योजना थी।

मुरिया दरबार में जनजातीय प्रतिनिधियों से मुलाकात

सिरहासार भवन में आयोजित मुरिया दरबार राष्ट्रपति के दौरे का प्रमुख आकर्षण है। इस कार्यक्रम में बस्तर की पारंपरिक व्यवस्था से जुड़े मांझी, चालकी और विभिन्न जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधियों की सहभागिता प्रस्तावित है।

मुरिया दरबार स्थानीय समाज की परंपराओं को संरक्षित रखने के साथ सामुदायिक मुद्दों और क्षेत्र की समस्याओं पर चर्चा करने का महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। इसमें पारंपरिक प्रतिनिधि अपनी बात रखते हैं और स्थानीय विषयों को सामने लाते हैं।

राष्ट्रपति की उपस्थिति से बस्तर की इस ऐतिहासिक व्यवस्था को व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है। यह आयोजन जनजातीय समुदायों की सामाजिक भागीदारी और उनकी परंपराओं के महत्व को भी रेखांकित करता है।

दोपहर 12:45 बजे सार्वजनिक आयोजन में शामिल होने की योजना

उपलब्ध कार्यक्रम विवरण के अनुसार, राष्ट्रपति के दोपहर करीब 12:45 बजे मुरिया दरबार और बस्तर दशहरा से जुड़े सार्वजनिक आयोजन में शामिल होने का कार्यक्रम निर्धारित था। इस दौरान बस्तर की सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक जीवनशैली को सामने रखने की तैयारी की गई थी।

बस्तर दशहरा अपनी लंबी अवधि, विशिष्ट अनुष्ठानों और व्यापक सामुदायिक भागीदारी के लिए जाना जाता है। इस उत्सव में विभिन्न जनजातीय समुदाय अपनी परंपराओं के अनुरूप भाग लेते हैं। धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकजुटता भी इस आयोजन की प्रमुख विशेषता है।

लालबाग मैदान में सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन

राष्ट्रपति के दौरे में लालबाग मैदान का कार्यक्रम भी महत्वपूर्ण है। यहां बस्तर दशहरा से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक परंपराओं को प्रदर्शित करने की तैयारी की गई थी। राष्ट्रपति के प्रदर्शनी का अवलोकन करने और आमसभा को संबोधित करने का कार्यक्रम भी निर्धारित था।

आयोजन के माध्यम से क्षेत्र की पारंपरिक कला, जनजातीय जीवनशैली और सांस्कृतिक पहचान को प्रस्तुत करने की योजना बनाई गई। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और आम नागरिकों की भागीदारी प्रस्तावित थी।

सुरक्षा व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम

राष्ट्रपति के प्रवास को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने प्रमुख कार्यक्रम स्थलों पर निगरानी बढ़ाई। स्थानीय प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन उड़ाने पर रोक और कुछ प्रमुख सड़कों पर यातायात नियंत्रित करने की व्यवस्था की गई थी।

राष्ट्रपति के काफिले की आवाजाही के दौरान कुछ मार्गों पर यातायात प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए नागरिकों से प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने की अपील की गई। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए।

वन मंत्री केदार कश्यप ने परखी तैयारियां

राष्ट्रपति के आगमन से पहले वन मंत्री केदार कश्यप ने लालबाग मैदान पहुंचकर आयोजन की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने मंच, बैठक व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंध, यातायात संचालन और आम नागरिकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा की।

अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी करने के निर्देश दिए गए, ताकि कार्यक्रम के दौरान लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। प्रशासन का जोर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के साथ आयोजन को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने पर रहा।

बस्तर की परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की उम्मीद

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का मुरिया दरबार और बस्तर दशहरा से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होना क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के लिए अहम माना जा रहा है। बस्तर दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय समाज की ऐतिहासिक परंपराओं, सामुदायिक सहभागिता और विशिष्ट सामाजिक व्यवस्था का प्रतीक है।

इस दौरे के माध्यम से बस्तर की लोकसंस्कृति, पारंपरिक संस्थाओं और जनजातीय समुदायों की विरासत को व्यापक स्तर पर सामने लाने का अवसर मिलेगा। इससे देशभर में बस्तर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान के प्रति जागरूकता बढ़ने की संभावना है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मां दंतेश्वरी के दरबार में टेका मत्था, देश की खुशहाली के लिए की प्रार्थना

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर दौरे पर पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को जगदलपुर स्थित प्रसिद्ध मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की। बस्तर की आराध्य देवी के समक्ष उन्होंने देशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना की। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी उपस्थित रहे। मंदिर पहुंचने पर राष्ट्रपति का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया गया।

राष्ट्रपति का मंदिर में दर्शन-पूजन बस्तर की धार्मिक आस्था और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। उनका यह दौरा ऐसे समय में हुआ, जब बस्तर दशहरा की पारंपरिक रस्मों और जनजातीय परंपराओं से जुड़े आयोजनों का विशेष महत्व है।

मां दंतेश्वरी के दर्शन कर लिया आशीर्वाद

बस्तर प्रवास के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मां दंतेश्वरी मंदिर पहुंचीं और धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप पूजा-अर्चना की। उन्होंने देवी मां के समक्ष देश की उन्नति और नागरिकों के मंगलमय जीवन के लिए प्रार्थना की। बस्तर के लोगों के लिए मां दंतेश्वरी केवल आराध्य देवी ही नहीं, बल्कि उनकी ऐतिहासिक पहचान और सामाजिक जीवन से जुड़ी आस्था का भी प्रमुख केंद्र हैं।

मंदिर में सालभर श्रद्धालुओं का आगमन होता है। बस्तर दशहरा के अवसर पर यहां की धार्मिक गतिविधियों और देवी आराधना का महत्व और बढ़ जाता है। ऐसे में राष्ट्रपति का मंदिर पहुंचना स्थानीय परंपराओं के प्रति सम्मान का महत्वपूर्ण अवसर बना।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री भी रहे मौजूद

राष्ट्रपति के दर्शन-पूजन के दौरान छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी उनके साथ रहे। इस अवसर पर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और निरंतर विकास की कामना की गई।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति के बस्तर आगमन को प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने मां दंतेश्वरी के प्रति बस्तरवासियों की गहरी आस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि देवी मां इस क्षेत्र की धार्मिक मान्यताओं और लोकजीवन में विशेष स्थान रखती हैं। राष्ट्रपति का मंदिर में दर्शन करना बस्तर की ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक परंपराओं के सम्मान के रूप में भी देखा जा रहा है।

बस्तर दशहरा की परंपराओं में मां दंतेश्वरी की विशेष भूमिका

बस्तर की सांस्कृतिक पहचान में मां दंतेश्वरी मंदिर का विशिष्ट स्थान है। यहां की धार्मिक परंपराएं सदियों से स्थानीय समाज और जनजातीय जीवन से जुड़ी रही हैं। बस्तर दशहरा भी इसी विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसकी परंपराएं देश के अन्य क्षेत्रों में मनाए जाने वाले दशहरा उत्सव से अलग हैं।

जहां देश के अधिकांश हिस्सों में दशहरा भगवान राम की रावण पर विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है, वहीं बस्तर दशहरा देवी आराधना, जनजातीय रीति-रिवाजों और सामुदायिक सहभागिता के लिए जाना जाता है। इस उत्सव में स्थानीय परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं का विशेष महत्व रहता है।

जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान मिलने की उम्मीद

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र अपनी प्राचीन परंपराओं, जनजातीय विरासत और विशिष्ट जीवनशैली के कारण अलग पहचान रखता है। यहां प्रकृति, धार्मिक आस्था और सामाजिक जीवन के बीच गहरा जुड़ाव दिखाई देता है।

बस्तर के जनजातीय समुदायों ने पीढ़ी दर पीढ़ी अपनी लोककलाओं, धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक रीति-रिवाजों को सहेजकर रखा है। राष्ट्रपति के प्रवास से इन सांस्कृतिक धरोहरों को व्यापक स्तर पर पहचान मिलने और उनकी महत्ता को नए सिरे से सामने लाने की उम्मीद है।

ऐतिहासिक मुरिया दरबार में भी सहभागिता का कार्यक्रम

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के दौरे में मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन के साथ जगदलपुर में आयोजित मुरिया दरबार और बस्तर दशहरा से जुड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होने का कार्यक्रम भी निर्धारित था।

मुरिया दरबार बस्तर की ऐतिहासिक और सामाजिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें पारंपरिक व्यवस्था से जुड़े मांझी, चालकी और जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधि भाग लेते हैं। इस मंच पर स्थानीय समाज से जुड़े मुद्दों और क्षेत्र के महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाता है।

राष्ट्रपति के आधिकारिक कार्यक्रम में 23 अक्टूबर को जगदलपुर में मुरिया दरबार और सार्वजनिक आयोजन में उनकी सहभागिता का उल्लेख किया गया था। उनका बस्तर दौरा क्षेत्र की धार्मिक आस्था, जनजातीय परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

वोट चोरी के विरोध में रायपुर में कांग्रेस की साइकिल-बाइक रैली, मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग

रायपुर। 23 अक्टूबर 2026

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कथित वोट चोरी और मतदाता सूची से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के विरोध में कांग्रेस ने साइकिल एवं बाइक रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तथा कथित चुनावी अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC), प्रदेश कांग्रेस कमेटी एवं जिला कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार आयोजित इस रैली में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुमार मेनन के नेतृत्व में तथा अरुण होरा की उपस्थिति में निकाली गई इस रैली के माध्यम से मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया। रैली में शामिल कार्यकर्ताओं ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में मताधिकार की अहमियत पर जोर देते हुए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।

कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक तथा संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने वोट चोरी के मुद्दे को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उनके अनुसार, देशभर में लगभग 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने इस मामले की जांच कराने और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। यह आंकड़ा कांग्रेस नेता द्वारा लगाए गए आरोप के रूप में सामने आया है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

प्रदर्शन के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में निष्पक्ष चुनाव और मतदाता सूची की विश्वसनीयता बेहद महत्वपूर्ण है। मतदाता सूची से नाम हटाए जाने संबंधी शिकायतों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए, ताकि किसी भी पात्र मतदाता को अपने मताधिकार से वंचित न होना पड़े।

रैली में श्रीकुमार मेनन, अरुण होरा सहित कांग्रेस के अन्य नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कांग्रेस ने इस प्रदर्शन के जरिए वोट चोरी के आरोपों को लेकर अपनी चिंता जाहिर की और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग को आगे बढ़ाया।

जनचौपाल36 | रायपुर, छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में ठंड के लिए करना होगा इंतजार, अगले 5 दिन शुष्क रहेगा मौसम, रात के तापमान में आएगी गिरावट

रायपुर: छत्तीसगढ़ में ठंड बढ़ने की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को अभी कुछ दिन और इंतजार करना पड़ सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक, फिलहाल प्रदेश में मौसम शुष्क बना रहेगा और अगले पांच दिनों तक बारिश की संभावना कम है। अगले 24 घंटे के दौरान तापमान में किसी बड़े बदलाव के आसार नहीं हैं। इसके बाद रात के न्यूनतम तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट हो सकती है।

रायपुर में साफ रहेगा आसमान

मौसम विभाग के स्थानीय पूर्वानुमान के अनुसार, 23 अक्टूबर को रायपुर में आसमान साफ रहने की संभावना है। इस दौरान अधिकतम तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। दिन के समय गर्मी का असर बना रह सकता है, जबकि रात में तापमान गिरने से हल्की राहत मिलने की उम्मीद है।

रायपुर में सबसे अधिक, अंबिकापुर में सबसे कम तापमान

पिछले 24 घंटों के दौरान छत्तीसगढ़ में मौसम शुष्क रहा और कहीं भी उल्लेखनीय बारिश दर्ज नहीं की गई। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को रायपुर में अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 13.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ।

प्रदेश में फिलहाल बारिश को लेकर कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। आने वाले दिनों में भी मौसम के शुष्क बने रहने की संभावना है।

बंगाल की खाड़ी में बन रहा मौसमी सिस्टम

मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी और उससे लगे पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी के क्षेत्र में ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इसका प्रभाव अंडमान द्वीप समूह के आसपास भी बना हुआ है।

इस मौसमी सिस्टम के पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। इसके प्रभाव से 23 अक्टूबर के आसपास दक्षिण-पूर्व और उससे लगे पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र विकसित हो सकता है। आगे बढ़ने के दौरान यह सिस्टम अधिक मजबूत भी हो सकता है।

कब बढ़ेगी छत्तीसगढ़ में ठंड?

फिलहाल मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक शुष्क मौसम बना रहेगा। रात के तापमान में संभावित गिरावट से सुबह और देर रात हल्की ठंडक महसूस हो सकती है। हालांकि, पूरे प्रदेश में ठंड बढ़ने की स्थिति कब बनेगी, इसे लेकर अभी निश्चित समय बताना संभव नहीं है।

मौसम में बदलाव की गति तापमान, हवा की दिशा और दूसरे मौसमी कारकों पर निर्भर करेगी। ऐसे में आने वाले दिनों के मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखना जरूरी होगा।