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Saturday, October 31, 2026
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ACB ग्रुप से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई की मांग, कोरबा कलेक्ट्रेट के सामने धरना

3 नवंबर को रायपुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को काले झंडे दिखाने का ऐलान, कोल लिंकेज और पावर प्लांटों की जांच की मांग।

कोरबा, 30 अक्टूबर 2026।

ACB ग्रुप, कोलवाशरियों, रिजेक्ट कोल आधारित पावर प्लांटों और पर्यावरणीय प्रदूषण से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई की मांग को लेकर भारतीय जनाधिकार पार्टी, छत्तीसगढ़ ने शुक्रवार को कोरबा कलेक्ट्रेट के सामने धरना-प्रदर्शन किया।

पार्टी ने कलेक्टर के माध्यम से शासन को ज्ञापन सौंपकर स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच, संयुक्त विशेष जांच दल (SIT) के गठन और जरूरत पड़ने पर CBI जांच की मांग की।

पार्टी अध्यक्ष एवं संयोजक दीपक दुबे ने कहा कि कोलवाशरियों की स्वीकृत क्षमता, वास्तविक उत्पादन, कोयला लिंकेज से प्राप्त कोयले की मात्रा एवं गुणवत्ता तथा रिजेक्ट कोल और मिडलिंग्स के उपयोग की जांच जरूरी है।

उन्होंने मांग की कि कोयले की प्राप्ति से लेकर वाशरी प्रोसेसिंग, परिवहन और पावर प्लांटों में वास्तविक खपत तक का संपूर्ण Material Balance ऑडिट कराया जाए।

किसान श्रमिक नेता कमल साव ने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आ रही है।

युवा नेताओं संजय रत्नाकर और शैलेन्द्र गोपाल ने कोयला स्टॉक, वेटब्रिज, परिवहन, डिस्पैच, ईंधन खपत और बिजली उत्पादन के रिकॉर्ड का स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की।

पार्टी नेताओं ने कथित 6.50 लाख टन कोयला जब्ती और कोल लेवी से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए संबंधित इकाइयों की जांच तथा कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की।

प्रवक्ता कृष्णा टंडन ने MCCPL, रतिजा कोलवाशरी और बंधाखार स्थित 1×300 मेगावाट पावर प्लांट के अभिलेखों की जांच के साथ रिजेक्ट कोल, लिंकेज कोयले और पर्यावरणीय अनुपालना का सत्यापन कराने की मांग उठाई।

जिला संयोजक दिनेश यादव और अन्य नेताओं ने CCO, SECL, पर्यावरण संरक्षण मंडल तथा तकनीकी विभागों की संयुक्त जांच टीम गठित करने की मांग की।

प्रदेश उपाध्यक्ष विन्देश सिंह राठौर और प्रदेश सचिव मुकेश भारतीय ने घोषणा की कि 3 नवंबर को रायपुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्तावित आगमन पर काले झंडे दिखाकर विरोध दर्ज कराया जाएगा।

धरने में हेमंत पैगवार सहित पार्टी पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।


नगरीय प्रशासन विभाग में बड़े पैमाने पर तबादला, देखें लिस्ट

रायपुर। राज्य शासन ने नगरीय प्रशासन विभाग में बड़े पैमाने पर तबादला किया गया है. प्रशासनिक दृष्टिकोण से 50 से अधिक कर्मचारियों को नई पदस्थापना दी गई है. रायपुर नगर निगम के जोन कमिश्नर विनोद कुमार पाण्डेय को नगर पालिक परिषद बलौदाबाजार भेजा गया है. पूजा पिल्ले को मंदिर हसौद से रायपुर निगम में पदस्थ किया गया है.

देखें पूरी लिस्ट

5 नवंबर को लॉन्च होगा Motorola Signature 27, मिलेगा 200MP कैमरा और दमदार Snapdragon प्रोसेसर

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मोटोरोला अपना नया फ्लैगशिप स्मार्टफोन Motorola Signature 27 अगले महीने ग्लोबल मार्केट में लॉन्च करने जा रहा है। कंपनी ने इसकी लॉन्च डेट कन्फर्म कर दी है। यह स्मार्टफोन 5 नवंबर को पेश किया जाएगा। लॉन्च से पहले फोन को Geekbench 7 पर स्पॉट किया गया है। यहां से इसके प्रोसेसर, रैम और परफॉर्मेंस से जुड़ी कई जानकारियां सामने आई हैं। फोन में 200MP का पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा मिलने की भी पुष्टि की गई है। इसके अलावा कंपनी इसमें 7 साल तक ऑपरेटिंग सिस्टम अपडेट देने वाली है।

Motorola Signature 27 Launch Date: कब होगा लॉन्च?

मोटोरोला ने अपने ऑफिशियल X अकाउंट के जरिए Motorola Signature 27 की लॉन्च डेट का खुलासा किया है। कंपनी इस स्मार्टफोन को 5 नवंबर को लॉन्च करेगी। इसके लिए कंपनी ने ‘Elegantly Crafted for Comfort’ टैगलाइन का इस्तेमाल किया है।

इससे पहले कंपनी ने Snapdragon Summit 2026 के दौरान इस फ्लैगशिप स्मार्टफोन को पेश किया था। इसके अलावा फोन को इंडियन मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 में भी शोकेस किया गया था। यह कंपनी की Signature सीरीज का दूसरा स्मार्टफोन होगा। फिलहाल कंपनी ने इसकी कीमत और बिक्री से जुड़ी जानकारी साझा नहीं की है।

Geekbench पर सामने आई फोन की परफॉर्मेंस

लॉन्च से पहले Motorola Signature 27 को Geekbench 7 बेंचमार्क प्लेटफॉर्म पर देखा गया है। इस लिस्टिंग में फोन के हार्डवेयर और परफॉर्मेंस से जुड़ी जानकारी सामने आई है।

गीकबेंच टेस्ट में स्मार्टफोन ने सिंगल-कोर टेस्ट में 3,313 पॉइंट हासिल किए हैं। वहीं मल्टी-कोर टेस्ट में इसे 11,088 पॉइंट मिले हैं। लिस्टिंग के मुताबिक, फोन Android 17 पर काम कर सकता है।

इसके अलावा बेंचमार्क लिस्टिंग में फोन करीब 10.94GB मेमोरी के साथ नजर आया है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि कंपनी इसे 12GB RAM के साथ लॉन्च कर सकती है।

Snapdragon प्रोसेसर और ArcticMesh कूलिंग सिस्टम

Motorola Signature 27 को Geekbench पर QTI SM8975 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर के साथ लिस्ट किया गया है। इसकी क्लॉक स्पीड 3.74GHz, 4.03GHz और 5.01GHz बताई गई है। ग्राफिक्स के लिए इसमें Adreno 850 GPU मिल सकता है।

हालांकि, मोटोरोला पहले ही कन्फर्म कर चुका है कि इस स्मार्टफोन में Snapdragon 8 Elite Extreme Gen 6 चिपसेट दिया जाएगा। बेहतर परफॉर्मेंस और हीट मैनेजमेंट के लिए कंपनी ने इसमें ArcticMesh कूलिंग सिस्टम भी दिया है। इस कूलिंग सिस्टम की मदद से फोन पर लंबे समय तक गेमिंग और दूसरे हैवी टास्क करने में मदद मिल सकती है।

कैमरा इस स्मार्टफोन की बड़ी खासियतों में से एक होगा। कंपनी ने कन्फर्म किया है कि फोन में 200MP का पेरिस्कोपिक टेलीफोटो कैमरा मिलेगा। इससे यूजर्स को दूर की चीजों की तस्वीरें लेने में मदद मिलेगी।

हालांकि, फोन के बाकी कैमरों की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। कंपनी लॉन्च इवेंट के दौरान कैमरा सेटअप से जुड़ी अन्य जानकारियां साझा कर सकती है।

दो कलर ऑप्शन में आएगा स्मार्टफोन

Motorola Signature 27 को दो कलर ऑप्शन में पेश किया जाएगा। इसमें Pantone Coal Smoke और Pantone Capulet Green कलर शामिल हैं।

फोन में Woven टेक्स्चर दिया गया है। कंपनी के मुताबिक, इससे डिवाइस को बेहतर ग्रिप और मजबूती मिलेगी। इसका डिजाइन भी प्रीमियम होगा।

7 साल तक मिलेगा OS अपडेट

सॉफ्टवेयर सपोर्ट के मामले में भी Motorola Signature 27 खास हो सकता है। कंपनी इस स्मार्टफोन के लिए 7 साल तक ऑपरेटिंग सिस्टम अपग्रेड देने वाली है। इससे यूजर्स को लंबे समय तक नए सॉफ्टवेयर फीचर्स और अपडेट का फायदा मिलेगा।

फिलहाल फोन की कीमत, पूरी स्पेसिफिकेशन और भारत में लॉन्च से जुड़ी जानकारी सामने नहीं आई है। इन सभी जानकारियों के लिए 5 नवंबर को होने वाले लॉन्च इवेंट का इंतजार करना होगा।

ग्रामीण बेटियों के लिए उच्च शिक्षा की राह होगी आसान,सपनों को मिलेगी नई उड़ान – मंत्री टंक राम वर्मा

रायपुर- राज्य के ग्रामीण अंचलों में उच्च शिक्षा का विस्तार करने और विद्यार्थियों को घर के नजदीक बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा के विशेष प्रयासों से धमतरी जिले के मगरलोड विकासखंड अंतर्गत ग्राम करेलीबड़ी तथा बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम सुहेला में नवीन शासकीय महाविद्यालय प्रारंभ करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। राज्य शासन ने वित्तीय वर्ष 2026 – 27 में  दोनों महाविद्यालयों के लिए कुल 66 पदों के सृजन की स्वीकृति प्रदान की है। इस निर्णय से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों, विशेषकर बेटियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के नए अवसर मिलेंगे।

        राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार उच्च शिक्षा को गांवों और दूरस्थ अंचलों तक सुलभ बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। करेलीबड़ी और सुहेला में नवीन शासकीय महाविद्यालयों की स्थापना इसी संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक विद्यार्थियों को महाविद्यालयीन शिक्षा के लिए दूर जाना पड़ता है। इससे समय और धन अधिक खर्च होता है तथा कई बार बेटियों की आगे की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। नए महाविद्यालय प्रारंभ होने से इन कठिनाइयों में कमी आएगी और बेटियों को अपने घर के नजदीक उच्च शिक्षा प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी।

मंत्री  वर्मा ने कहा कि ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के समान अवसर देना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। आर्थिक परिस्थितियां अथवा महाविद्यालय की दूरी किसी भी विद्यार्थी की उच्च शिक्षा में बाधा नहीं बननी चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन महाविद्यालयों के प्रारंभ होने से आसपास के गांवों के युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने, उच्च शिक्षा प्राप्त करने और बेहतर भविष्य बनाने का अवसर मिलेगा।

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा दोनों महाविद्यालयों के लिए स्वीकृत पदों में एक प्राचार्य, 12 सहायक प्राध्यापक, एक ग्रंथपाल, एक क्रीड़ाधिकारी, एक सहायक ग्रेड-01, पांच प्रयोगशाला तकनीशियन, एक सहायक ग्रेड-02, एक सहायक ग्रेड-03 तथा पांच प्रयोगशाला परिचारक के पद शामिल हैं। इसके अतिरिक्त दो भृत्य, एक बुक लिफ्टर, एक स्वच्छक और एक चौकीदार की सेवाएं कलेक्टर दर पर सेवाप्रदाता के माध्यम से उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।
       
उच्च शिक्षा के विस्तार से ग्रामीण अंचलों में खुलेंगे प्रगति के नए द्वार

करेलीबड़ी और सुहेला में नवीन शासकीय महाविद्यालयों की स्थापना से धमतरी तथा बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ेगी। विशेष रूप से उन परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके बच्चों को अब तक महाविद्यालयीन शिक्षा के लिए दूरस्थ स्थानों पर जाना पड़ता था। यह पहल ग्रामीण बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के साथ ही युवाओं के शैक्षणिक सशक्तिकरण और क्षेत्र के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

दंतेवाड़ा में पैंगोलिन तस्करी का भंडाफोड़, 14 किलो खाल-शल्क के साथ 6 आरोपी गिरफ्तार

दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में वन विभाग ने वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। सालखपरी यानी पैंगोलिन की तस्करी करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के कब्जे से करीब 14 किलो पैंगोलिन की खाल और शल्क बरामद किए गए हैं। वन विभाग की टीम अब तस्करी के पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है।

वन विभाग को सूचना मिली थी कि कुछ लोग पैंगोलिन की खाल और शल्क की तस्करी कर रहे हैं। सूचना के आधार पर टीम ने गीदम थाना क्षेत्र के पास घेराबंदी कर तीन आरोपियों को पकड़ा। पूछताछ के बाद जावंगा के पास दबिश देकर तीन अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया।

वाहन की तलाशी के दौरान स्टेपनी के पास छिपाकर रखी गई बोरी से करीब 14 किलो पैंगोलिन की खाल और शल्क बरामद हुए। वन विभाग के मुताबिक, बरामद शल्क करीब छह से सात पैंगोलिन के शिकार से जुटाए जाने की आशंका है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान लक्ष्मण तेलाम, दीपक, मासा मूर्ति, हेमंत वासम, कुहरम भीमा और मासाराम मंडावी के रूप में हुई है। इनमें पांच आरोपी बीजापुर और एक आरोपी दंतेवाड़ा जिले का निवासी बताया गया है।

डीएफओ रंगनाथा राधाकृष्णा वाय और एसडीओ शिवेंद्र सिंह के निर्देशन में हुई इस कार्रवाई में गीदम रेंजर शिव टंडन, बचेली रेंजर डॉ. प्रीतेश पांडेय, डिप्टी रेंजर के. राजू और बीट गार्ड लक्ष्मी प्रसाद चालकी समेत वन विभाग के अन्य कर्मचारी शामिल रहे। अब वन विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि पैंगोलिन का शिकार कहां किया गया था और बरामद शल्क एवं खाल को किन लोगों तक पहुंचाया जाना था। तस्करी के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को मिलेंगे 6 नए जज, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दी नियुक्ति प्रस्ताव को मंजूरी

रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 30 अक्टूबर को हुई बैठक में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में 6 लोगों की नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इनमें 4 अधिवक्ता और 2 न्यायिक अधिकारी शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, अधिवक्ता वर्ग से आनंद शुक्ला, रत्न निधि पुष्टि उर्फ आरएन पुष्टि उर्फ रतन पुष्टि, शशांक ठाकुर और सौरभ शर्मा के नामों को मंजूरी दी गई है। वहीं, न्यायिक अधिकारियों की श्रेणी से रजनीश श्रीवास्तव और बलराम प्रसाद वर्मा को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किए जाने के प्रस्ताव पर सहमति जताई गई है।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की इस मंजूरी के बाद अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में इन छह नामों की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इससे हाईकोर्ट में न्यायिक व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

राष्ट्रीय एकता दिवस- अखंडता का संकल्प: सरदार पटेल और मजबूत भारत का सपना

एकता केवल देश की सीमाओं से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, समान अवसर और सामाजिक सद्भाव से होती है

धनंजय राठौर
संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
अशोक कुमार चन्द्रवंशी
सहायक जनसंपर्क अधिकारी

विशेष आलेख– भारत की पहचान उसकी विविधता और एकता में है। यहाँ अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं, अलग-अलग संस्कृतियों और परंपराओं का पालन किया जाता है, फिर भी देशवासियों को एक सूत्र में बाँधने वाली भावना है-राष्ट्रीय एकता। यह एकता केवल देश की सीमाओं की रक्षा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात से भी जुड़ी है कि हर नागरिक स्वयं को देश के साझा भविष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा महसूस करे।

हर वर्ष 31 अक्टूबर को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है। यह दिवस हमें उनके ऐतिहासिक योगदान को याद करने के साथ-साथ आज के भारत में एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की जिम्मेदारी का एहसास कराता है।

सरदार पटेल ने रखी एकीकृत भारत की मजबूत नींव

वर्ष 1947 में देश की स्वतंत्रता के समय भारत के सामने अनेक चुनौतियाँ थीं। अंग्रेजी शासन समाप्त होने के बाद देशी रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करना एक बड़ी चुनौती थी। ऐसे समय में देश के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने वी. पी. मेनन और अन्य अधिकारियों के सहयोग से संवाद, समझदारी और दृढ़ नेतृत्व के माध्यम से रियासतों के एकीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया, जिन्होंने 560 से अधिक रियासतों का भारत संघ में विलय कर देश को एक सूत्र में पिरोया। देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को मजबूत करने तथा आंतरिक एवं बाहरी चुनौतियों का सामना करने के लिए राष्ट्रीय संकल्प को मजबूत किया।

सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों ने एक मजबूत और एकीकृत भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वर्ष 2014 से उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में विशेष रूप से मनाया जा रहा है। इस अवसर पर ‘रन फॉर यूनिटी’, राष्ट्रीय एकता की शपथ और विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से देश की एकता और अखंडता का संदेश दिया जाता है। सरदार पटेल की विरासत हमें सिखाती है कि विभिन्न विचारों, हितों और पहचानों के बीच तालमेल बनाकर ही एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है।

आज विकास के साथ एकता को मजबूत करना भी जरूरी

आज भारत के सामने चुनौती रियासतों को एकजुट करने की नहीं, बल्कि विकास के लाभों को देश के प्रत्येक क्षेत्र और नागरिक तक पहुँचाने की है। सड़क, रेल, बिजली, संचार और डिजिटल सुविधाओं का विस्तार दूरस्थ क्षेत्रों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ता है। इससे लोगों को शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और व्यापार के बेहतर अवसर मिल सकते हैं। हालाँकि, केवल बुनियादी ढाँचे का विकास ही राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए यह भी जरूरी है कि विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को विकास के समान अवसर मिलें, सार्वजनिक सेवाएँ सुलभ हों और उनकी आवश्यकताओं को उचित महत्व दिया जाए।

लोकतंत्र की स्थिरता, स्वतंत्रता की रक्षा और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए राष्ट्रीय एकता और एकीकरण अत्यंत आवश्यक है। जब तक पूरा राष्ट्र एकता की भावना से बंध नहीं जाता, तब तक देश में कोई विकास या आर्थिक प्रगति संभव नहीं है। इसलिए, राष्ट्रीय एकीकरण को सुदृढ़ करने के लिए राष्ट्रवाद को बढ़ावा देना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। राष्ट्रीय एकीकरण की रक्षा के लिए हमें एक मजबूत राष्ट्र की आवश्यकता है। अतः जाति, क्षेत्रवाद, धर्म आदि पर केंद्रित संकीर्ण सोच से दूर रहकर हमें विघटनकारी तत्वों का दमन करना चाहिए।

प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और अन्य जनकल्याणकारी योजनाएँ लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में योगदान देती हैं। जब शासन की योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुँचता है और लोगों को आगे बढ़ने के अवसर मिलते हैं, तब व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ता है। यही विश्वास राष्ट्रीय एकता की नींव को मजबूत करता है।

सहकारी संघवाद से मजबूत होगा देश

भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार, उद्योग और आंतरिक सुरक्षा जैसे विषयों पर मिलकर काम करने से विकास को गति मिलती है। लोकतंत्र में राजनीतिक विचारों और क्षेत्रीय आकांक्षाओं में अंतर होना स्वाभाविक है। महत्वपूर्ण यह है कि इन मतभेदों का समाधान संवाद, संवैधानिक मूल्यों और आपसी सम्मान के माध्यम से किया जाए। जब विभिन्न सरकारें और संस्थाएँ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए जनहित को प्राथमिकता देती हैं, तब राष्ट्रीय एकता और मजबूत होती है। विकास की योजनाओं में स्थानीय जरूरतों का ध्यान रखना भी आवश्यक है, ताकि दूरस्थ और पिछड़े क्षेत्रों के नागरिक स्वयं को देश की विकास यात्रा से जुड़ा हुआ महसूस करें।

विविधता का सम्मान ही भारत की असली ताकत

भारत की एकता का अर्थ यह नहीं है कि सभी लोग एक जैसी भाषा बोलें, एक जैसी परंपराएँ अपनाएँ या एक जैसे विचार रखें। भारत की वास्तविक ताकत इस बात में है कि अलग-अलग पहचान और जीवनशैली वाले लोग एक-दूसरे का सम्मान करते हुए साथ रह सकें। डिजिटल संचार के इस दौर में सूचनाएँ तेजी से फैलती हैं। ऐसे में अफवाहों से बचना, किसी भी सूचना की सत्यता जाँचना और जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखना पहले से अधिक जरूरी हो गया है। समाज में अविश्वास और तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियों के बजाय संवाद, सहयोग और भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए।

राष्ट्रीय एकता केवल सरकारी कार्यक्रमों या संदेशों से कायम नहीं रह सकती। इसे मजबूत बनाने के लिए नागरिकों के दैनिक व्यवहार में समानता, संवेदनशीलता और परस्पर सम्मान का होना आवश्यक है।

‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’से बढ़ेगी आपसी समझ

देश की सांस्कृतिक विविधता को समझने और राज्यों के बीच आपसी संबंध मजबूत करने के उद्देश्य से वर्ष 2015 में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ पहल शुरू की गई। इसके माध्यम से विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा पारस्परिक समझ को बढ़ावा दिया जाता है। शैक्षणिक गतिविधियाँ, सांस्कृतिक कार्यक्रम, अंतरराज्यीय यात्राएँ और विभिन्न क्षेत्रों की कला एवं परंपराओं से परिचित कराने वाले आयोजन विशेष रूप से युवाओं में राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित कर सकते हैं। 1 से 15 नवंबर 2026 तक एक भारत श्रेष्ठ भारत की थीम पर भारत पर्व का आयोजन भी किया जाएगा।

युवा देश का भविष्य हैं। शिक्षा, खेल, सामाजिक सेवा, स्वच्छता और जनजागरूकता जैसे कार्यों में उनकी भागीदारी समाज को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जब युवा क्षेत्रीय और भाषाई भेदभाव से ऊपर उठकर देशहित को प्राथमिकता देते हैं, तब एक मजबूत और समावेशी भारत का मार्ग प्रशस्त होता है।

राष्ट्रीय एकता एक निरंतर जिम्मेदारी

राष्ट्रीय एकता दिवस हमें याद दिलाता है कि देश की एकता और अखंडता बनाए रखना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का साझा कर्तव्य है। देश की सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव, विकास के समान अवसर, सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास भी स्थायी शांति के लिए आवश्यक हैं। सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारत के राजनीतिक एकीकरण में ऐतिहासिक योगदान दिया। वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह समावेशी विकास, सामाजिक न्याय, आपसी सम्मान और संवैधानिक मूल्यों के माध्यम से इस एकता को और मजबूत बनाए।

राष्ट्रीय एकता का वास्तविक अर्थ यह नहीं है कि देश का प्रत्येक नागरिक एक जैसा सोचे, बल्कि यह है कि अलग-अलग विचारों, भाषाओं और संस्कृतियों के बावजूद सभी एक साझा भविष्य के निर्माण के लिए साथ खड़े हों। सरदार पटेल की विरासत से प्रेरणा लेकर एकता, सद्भाव और सहयोग को जीवन का हिस्सा बनाना ही राष्ट्रीय एकता दिवस का सच्चा संदेश है।

राष्ट्रीय एकता राष्ट्र को मजबूत और संगठित बनाती है। यह विभिन्न धर्मों, संप्रदायों, जातियों, पहनावे, सभ्यता और संस्कृति के लोगों को एक साथ बांधे रखती है। अनेक भिन्नताओं के बावजूद, सभी लोग एक-दूसरे के साथ पारस्परिक सद्भाव में रहते हैं। हमारे देश जैसी विविधता अन्य देशों में नहीं पाई जाती। यहाँ विभिन्न जातियों और समुदायों, धर्मो के लोग, जिनकी जीवनशैली, संस्कृति, भाषाएँ और रीति-रिवाज बिल्कुल भिन्न हैं, फिर भी एक साथ रहते हैं। भारत में ये सभी राष्ट्रीय एकता के धागे से बंधे हुए हैं।

Diwali 2026: दीपावली पर मिट्टी के दीये जलाने की क्यों है परंपरा? जानिए धार्मिक आस्था से लेकर पर्यावरण और संस्कृति तक इनका खास महत्व

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 Diwali 2026: दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही घरों और बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 8 नवंबर को दीपावली का पर्व मनाया जाएगा। त्योहार की तैयारियों के बीच बाजारों में मिट्टी के दीपक, रंगोली, सजावटी सामान और पटाखों की खरीदारी भी शुरू हो गई है।दीपावली का नाम सुनते ही आंखों के सामने जगमगाते दीपकों की तस्वीर उभरने लगती है। सदियों से इस पर्व पर मिट्टी के दीये जलाने की परंपरा चली आ रही है। सनातन धर्म में दीपक को शुभता, ज्ञान, सकारात्मकता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है।हालांकि, मिट्टी के दीपकों का महत्व केवल धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है। इनके साथ भारतीय लोककला, पारंपरिक कारीगरी, स्थानीय रोजगार और पर्यावरण जैसे कई पहलू भी जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि आधुनिक सजावट के दौर में भी मिट्टी के दीयों की अपनी अलग पहचान बनी हुई है। आइए जानते हैं दीपावली पर मिट्टी के दीये जलाने के पीछे छिपे धार्मिक और सांस्कृतिक कारण।

1. भारतीय लोककला और सदियों पुरानी परंपरा की पहचान हैं मिट्टी के दीये

मिट्टी के दीपक भारतीय संस्कृति और पारंपरिक हस्तशिल्प का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में कुम्हार समुदाय के कारीगर पीढ़ियों से मिट्टी को अपने हुनर से सुंदर आकार देकर दीये तैयार करते आ रहे हैं।इन छोटे-छोटे दीपकों में कारीगरों की मेहनत, कला और पारंपरिक ज्ञान की झलक दिखाई देती है। दीपावली के अवसर पर जब घरों में मिट्टी के दीये सजाए जाते हैं, तो उनके साथ हमारी सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत भी जीवंत हो उठती है।

2. अंधकार पर प्रकाश और निराशा पर उम्मीद की जीत का संदेश

सनातन परंपरा में दीपक जलाने का अर्थ केवल घर को रोशन करना नहीं है। इसे अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाने का प्रतीक माना जाता है।दीपावली की रात जलने वाला प्रत्येक दीपक यह संदेश देता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, उम्मीद और सकारात्मक सोच के सहारे जीवन में नई रोशनी लाई जा सकती है। यही वजह है कि दीपावली को बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की विजय का पर्व भी कहा जाता है।

3. कुम्हारों की आजीविका का मजबूत सहारा बनते हैं मिट्टी के दीये

दीपावली पर मिट्टी के दीपक खरीदने का एक महत्वपूर्ण पहलू स्थानीय कारीगरों को आर्थिक सहयोग देना भी है। त्योहार से पहले कुम्हार परिवार बड़ी संख्या में दीये तैयार करते हैं। उनकी बिक्री से होने वाली कमाई कई परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार बनती है।जब लोग बाजार से स्थानीय कुम्हारों के बनाए दीये खरीदते हैं, तो उनकी मेहनत को आर्थिक समर्थन मिलता है। इससे पारंपरिक मिट्टी कला को संरक्षण मिलता है और आने वाली पीढ़ियों तक यह हुनर पहुंचाने में भी मदद मिलती है।

4. पर्यावरण के लिहाज से कितने बेहतर हैं मिट्टी के दीये?

पर्यावरण के नजरिए से भी मिट्टी के दीयों का विशेष महत्व है। ये प्राकृतिक मिट्टी से तैयार किए जाते हैं और इस्तेमाल के बाद टूटने पर धीरे-धीरे मिट्टी में मिल सकते हैं। इस वजह से प्लास्टिक से बनी सजावटी वस्तुओं की तुलना में इनका कचरा प्रबंधन आसान होता है।हालांकि, दीयों में तेल या घी जलाने से कुछ मात्रा में धुआं और कालिख निकलती है। इसलिए इन्हें पूरी तरह प्रदूषण मुक्त नहीं कहा जा सकता। फिर भी स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले पारंपरिक मिट्टी के दीपक पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों में शामिल हैं।

दीपावली पर मिट्टी के दीये जलाने का महत्व

मिट्टी का एक छोटा सा दीपक धार्मिक आस्था के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, पारंपरिक कला और सामाजिक सहयोग का भी संदेश देता है। इसे जलाकर हम न केवल अपने घर को रोशन करते हैं, बल्कि स्थानीय कारीगरों की मेहनत और उनकी विरासत को भी सम्मान देते हैं।

इस दीपावली मिट्टी के दीये अपनाकर प्रकाश के इस पर्व को परंपरा, सकारात्मकता और स्वदेशी कारीगरी से जोड़ सकते हैं।

अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में 448 पदों पर भर्ती का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने रद्द करने का फैसला पलटा, तीन महीने में पूरी करनी होगी प्रक्रिया

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी पाने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने अंबिकापुर स्थित राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के 448 पदों पर चल रही भर्ती को निरस्त करने के सरकारी फैसले को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया को उसी पुराने चरण से आगे बढ़ाया जाए, जहां उसे रोका गया था।जस्टिस बिभू दत्ता गुरु की एकलपीठ ने 28 अक्टूबर 2026 को सुनाए गए फैसले में राज्य शासन और संबंधित अधिकारियों को आदेश की प्रति मिलने के तीन महीने के भीतर चयन प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। इसके तहत अभ्यर्थियों की पात्रता, शैक्षणिक दस्तावेज और मेरिट का परीक्षण करने के बाद निर्धारित नियमों के अनुसार योग्य उम्मीदवारों को नियुक्ति देनी होगी।

2022 में शुरू हुई थी 448 पदों पर भर्ती

पूरा मामला अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2022 में निकाली गई तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों की भर्ती से संबंधित है। महाविद्यालय प्रशासन ने 20 जुलाई 2022 को 448 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। बाद में वर्ष 2023 में इसमें संशोधन करते हुए नए विज्ञापन भी जारी किए गए।भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ अभ्यर्थियों की मेरिट सूची तैयार की गई। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि 23 अगस्त 2023 को उन्हें दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया था। इससे चयन प्रक्रिया काफी आगे पहुंच चुकी थी।हालांकि, इसी बीच 23 अप्रैल 2025 को आयोजित सामान्य सभा की बैठक में पूरी भर्ती निरस्त करने का निर्णय ले लिया गया। साथ ही इन पदों पर नए सिरे से छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल यानी व्यापम के माध्यम से भर्ती कराने का प्रस्ताव रखा गया।

भर्ती रद्द होने पर अभ्यर्थियों ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा

सरकारी फैसले से प्रभावित अभ्यर्थियों ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिका दाखिल करने वालों में आदित्य सैनी, युवराज लिंगम, टिकेश्वर राम, सुभद्रा पैंकरा, खेल साय, गौरव गोंड, दिलेश्वर राम, सोनम सिदार, प्रमोद जायसवाल और वृंदावती शामिल थे।अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता पवन श्रीवास्तव ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी। ऐसे समय में बिना किसी ठोस वजह के पूरी भर्ती को समाप्त करना उचित नहीं है।उन्होंने यह भी बताया कि दोबारा भर्ती शुरू होने की स्थिति में पहले आवेदन कर चुके कई उम्मीदवार निर्धारित आयु सीमा पार कर सकते हैं। इससे उन्हें नए विज्ञापन के तहत आवेदन करने का अवसर भी नहीं मिल पाएगा।

आवेदनों की संख्या को लेकर सामने आया बड़ा अंतर

सुनवाई के दौरान भर्ती रद्द करने के लिए दिए गए तर्कों में आवेदनों की संख्या का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहा। अधिकारियों ने एक लाख से अधिक आवेदन मिलने और चयन प्रक्रिया में अत्यधिक समय लगने को भर्ती निरस्त करने की वजह बताया था।लेकिन 19 जून 2025 को मेडिकल कॉलेज के डीन की ओर से चिकित्सा शिक्षा आयुक्त को भेजे गए आधिकारिक पत्र में अलग आंकड़े दर्ज थे।

पत्र के मुताबिक:

  • तृतीय श्रेणी के 63 पदों के लिए 10,374 आवेदन प्राप्त हुए थे।
  • चतुर्थ श्रेणी के 385 पदों के लिए 44,961 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।
  • दोनों श्रेणियों को मिलाकर कुल 55,335 आवेदन प्राप्त हुए थे।

याचिकाकर्ताओं ने इन आंकड़ों के आधार पर सरकारी फैसले पर सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने भी पाया कि भर्ती निरस्त करने के लिए बताई गई आवेदन संख्या और कॉलेज के आधिकारिक रिकॉर्ड में अंतर था। राज्य शासन इस विसंगति का संतोषजनक जवाब पेश नहीं कर सका।हालांकि, अदालत ने यह नहीं कहा कि सामान्य सभा की बैठक में जानबूझकर गलत जानकारी दी गई थी।

बिना ठोस वजह भर्ती समाप्त करना उचित नहीं : हाईकोर्ट

राज्य शासन की ओर से दलील दी गई कि किसी भर्ती में आवेदन करने या दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाए जाने से उम्मीदवार को नियुक्ति का कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता। प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार सरकार भर्ती प्रक्रिया में बदलाव करने के लिए स्वतंत्र है।हाईकोर्ट ने इस कानूनी स्थिति को स्वीकार किया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि सरकार को पहले से शुरू हो चुकी चयन प्रक्रिया समाप्त करने के लिए उचित और ठोस कारण बताना जरूरी है।अदालत के मुताबिक, संबंधित अधिकारी यह साबित नहीं कर सके कि पुरानी भर्ती प्रक्रिया में ऐसी कौन सी गंभीर कमी थी, जिसके कारण उसे पूरी तरह रद्द करना जरूरी हो गया। इसके अलावा यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि पहले से चल रही चयन प्रक्रिया को पूरा करना व्यावहारिक रूप से असंभव क्यों था।न्यायालय ने भर्ती रद्द करने के निर्णय को मनमाना मानते हुए कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत सुनिश्चित समानता, निष्पक्षता और भेदभाव रहित अवसर के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं था।

तीन महीने में पूरी करनी होगी चयन प्रक्रिया

हाईकोर्ट ने 23 अप्रैल 2025 की सामान्य सभा की बैठक में लिए गए भर्ती निरस्त करने के निर्णय के साथ इससे संबंधित 19 जून 2025 के पत्र को भी निरस्त कर दिया है।अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि 20 जुलाई 2022 के मूल भर्ती विज्ञापन और वर्ष 2023 में जारी संशोधित विज्ञापनों के आधार पर चयन प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाए।

इसके तहत विभाग को निम्नलिखित कार्रवाई करनी होगी:

  1. भर्ती प्रक्रिया को उसी चरण से आगे बढ़ाना होगा, जहां इसे रोका गया था।
  2. सभी संबंधित उम्मीदवारों की पात्रता की जांच करनी होगी।
  3. अभ्यर्थियों के शैक्षणिक और अन्य आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन करना होगा।
  4. निर्धारित मानकों के अनुसार तुलनात्मक मेरिट सूची तैयार करनी होगी।
  5. भर्ती नियमों के अनुरूप योग्य उम्मीदवारों को नियुक्ति आदेश जारी करने होंगे।

हाईकोर्ट ने इन सभी कार्यों को आदेश की प्रति प्राप्त होने के तीन महीने के भीतर पूरा करने की समयसीमा तय की है।

क्या 448 पदों पर आवेदन करने वाले सभी उम्मीदवारों को मिलेगी नौकरी?

हाईकोर्ट के फैसले के बाद अभ्यर्थियों के बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि क्या अब सभी आवेदकों को नियुक्ति मिल जाएगी। इस संबंध में स्थिति स्पष्ट है कि अदालत ने सभी उम्मीदवारों की नियुक्ति का आदेश नहीं दिया है।न्यायालय ने केवल पुरानी भर्ती प्रक्रिया को बहाल करते हुए उसे नियमानुसार पूरा करने का निर्देश दिया है। अंतिम चयन उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता, दस्तावेज सत्यापन, निर्धारित पात्रता, मेरिट और उपलब्ध पदों के आधार पर किया जाएगा।इस फैसले से उन हजारों युवाओं को बड़ी राहत मिली है, जो पिछले कई वर्षों से अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज की भर्ती प्रक्रिया पूरी होने की प्रतीक्षा कर रहे थे। अब अभ्यर्थियों की निगाहें राज्य शासन और मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर टिकी हैं कि हाईकोर्ट की तय समयसीमा के भीतर चयन प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ाई जाती है।

दुर्ग में जब्त 4 करोड़ रुपये की रकम पर कोर्ट का बड़ा फैसला, महिला कारोबारी की याचिका खारिज

 दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में बोलेरो पिकअप वाहन से बरामद 4 करोड़ रुपये नकद के मामले में नया मोड़ आ गया है। जब्त रकम को वापस पाने के लिए गुजरात की एक महिला कारोबारी ने दुर्ग न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया है। महिला ने दावा किया था कि पुलिस द्वारा जब्त की गई पूरी रकम उसकी है और इसका संबंध उसके कृषि व्यवसाय से है। हालांकि, फिलहाल इस रकम को किसी के सुपुर्द करने से न्यायालय ने इनकार कर दिया है।

महिला कारोबारी ने रकम पर जताया अपना दावा

जानकारी के मुताबिक, गुजरात की रहने वाली महिला ने न्यायालय में आवेदन देकर जब्त की गई 4 करोड़ रुपये की नकदी वापस मांगी थी। उसका कहना था कि यह रकम उसके कृषि कारोबार से संबंधित है और इसके लेनदेन को सही साबित करने के लिए उसके पास जरूरी दस्तावेज भी मौजूद हैं।महिला ने इन्हीं दस्तावेजों को आधार बनाते हुए कोर्ट से नकदी सुपुर्द करने की मांग की थी। हालांकि, न्यायालय ने उसकी दलीलों के बावजूद आवेदन स्वीकार नहीं किया।

आयकर विभाग की जांच पूरी होने तक नहीं मिलेगी रकम

न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पुलिस इस मामले की जांच आयकर विभाग को सौंप चुकी है। फिलहाल जांच एजेंसी नकदी के वास्तविक स्रोत और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है।ऐसी स्थिति में जांच पूरी होने और आयकर विभाग की रिपोर्ट सामने आने से पहले इतनी बड़ी रकम किसी व्यक्ति को सौंपना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने संकेत दिया कि आगे का निर्णय जांच रिपोर्ट के आधार पर ही लिया जाएगा।

पहले भी कई राज्यों में कर चुकी है ऐसी मांग

इस मामले में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि नकदी वापस लेने के लिए अदालत पहुंची महिला कारोबारी पहले भी अलग-अलग राज्यों में इसी तरह के मामलों में आवेदन कर चुकी है। जानकारी के अनुसार, पूर्व में पुलिस द्वारा जब्त की गई करोड़ों रुपये की रकम को वैध दस्तावेज प्रस्तुत कर अदालत के माध्यम से वापस लेने के मामले भी सामने आए हैं।

गुप्त चेंबर में छिपाकर रखे गए थे 4 करोड़ रुपये

पूरा मामला दुर्ग जिले के खुर्सीपार थाना क्षेत्र का है। कुछ दिन पहले राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुलिस की टीम नियमित वाहन जांच कर रही थी। इसी दौरान रायपुर से नागपुर की ओर जा रही बोलेरो मैक्स पिकअप को जांच के लिए रोका गया।वाहन की तलाशी के दौरान पुलिस को उसकी बनावट पर संदेह हुआ। इसके बाद जब गाड़ी की गहन जांच की गई तो अंदर एक विशेष रूप से तैयार किया गया गुप्त चेंबर मिला। इसी छिपे हुए हिस्से में नकदी के बंडल रखे गए थे। पुलिस ने जब रकम की गिनती की तो कुल 4 करोड़ रुपये बरामद हुए।

दो लोग हिरासत में, आयकर विभाग कर रहा जांच

नकदी की भारी मात्रा को देखते हुए पुलिस ने तत्काल वाहन और पूरी रकम जब्त कर ली। साथ ही वाहन में मौजूद दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयकर विभाग को भी इसकी सूचना दी गई।अब इस पूरे प्रकरण में आयकर विभाग की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। नकदी किस स्रोत से आई, इसका वास्तविक मालिक कौन है और इसके पीछे क्या वित्तीय लेनदेन हुआ है, इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।