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Sunday, November 1, 2026
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लोकतांत्रिक सदन में विपक्ष को ध्यान से सुनना — विजय की अलग राजनीतिक शैली

डिजिटल डेस्क -16 मई 2026

विगत दिनों कैसे देश की जनता ने देखा कि तमिलनाडु विधानसभा में कुछ ऐसा हुआ जो आमतौर पर नहीं दिखता,क्या दिखा नयापन देखते है!!

विधानसभा कक्ष में जब विपक्ष के नेता एक के बाद एक सवाल उठा रहे थे, तब मुख्यमंत्री थलापती विजय — यानी जोसेफ विजय चंद्रशेखर — चुपचाप बैठकर उन बातों को नोट कर रहे थे। कोई हंगामा नहीं, कोई जवाबी शोर नहीं।

हाथ में बस कागज और कलम मतलब हाथ काम करने के लिए है हाथ पर हाथ धरकर बैठने के लिए नहीं।

चलिए सत्ता की राजनीति में यह छोटी सी बात है, लेकिन हमारी मौजूदा राजनीति में यह दृश्य असामान्य है। सदन में आमतौर पर जो होता है वह सब जानते हैं — विपक्ष बोले तो सत्तापक्ष का शोर, सत्तापक्ष बोले तो विपक्ष का हंगामा। नतीजा? कोई नहीं।

लेकिन यहाँ एक मुख्यमंत्री था जो सुन रहा था बस…
नहीं नोट भी कर रहा था।एक सही संदेश की जन प्रतिनिधि वहां सीख भी सकता है और लिख भी सकता है राज्य विकास और समस्या समाधान की नई स्क्रिप्ट।

आजकल राजनीति में ‘सुनना’ सबसे मुश्किल काम माना जाता है, खासकर तब जब आप सत्ता में हों। विपक्ष की बात को नजरअंदाज करना आसान है, उसे दबाना और भी आसान। लेकिन उसे लिखकर रखना — यह बताता है कि आप उस पर कुछ करने का इरादा रखते हैं ।हां ,जैसे कभी पीएम नेहरू ने पीएम अटल को सुनना चाहता था।

अब सीएम विजय का यह इरादा कितना ज़मीन पर उतरता है, यह तो वक्त बताएगा।सीएम राजनीति में नए हैं और उन पर नज़रें टिकी हैं। एक सत्र की कार्यशैली से किसी नेता को परखना जल्दबाजी होगी।

लेकिन शुरुआत बुरी नहीं है।
(सोशल मीडिया साभार और प्रतिक्रिया न्यूज निजी विचार पर आधारित)

5 देशों की यात्रा पर पीएम मोदी पहुंचे नीदरलैंड, यूएई में हुए अहम समझौते

डिजिटल डेस्क – 16 मई 2026

15 से 20 मई 2026 तक यूनाइटेड अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की पांच देशों की यात्रा पर रवाना हो रहा हूं”- पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पाँच देशों के दौरे के दूसरे चरण में नीदरलैंड पहुँच गए हैं। वहाँ उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस यात्रा में वे नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन से मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं के बीच ट्रेड, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और क्लीन एनर्जी पर चर्चा होगी। इसके अलावा पीएम मोदी नीदरलैंड के महामहिम किंग विलेम-अलेक्जेंडर और क्वीन मैक्सिमा से भी भेंट करेंगे।

यूएई में क्या हुआ खास

इससे पहले पीएम मोदी का यूएई दौरा काफी अहम रहा। 15 मई को अबू धाबी में पीएम मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच मुलाकात हुई।

ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर यह दौरा बेहद नतीजेदार रहा। भारत और यूएई के बीच रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और एलपीजी आपूर्ति पर समझौते हुए। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और ADNOC के बीच हुए इस समझौते से भारत को दीर्घकालिक और प्राथमिकता के आधार पर एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

गौरतलब है कि यूएई फिलहाल भारत की घरेलू एलपीजी ज़रूरत का करीब 40 फीसदी हिस्सा पूरा करता है।

रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देश करीब आए। भारत और यूएई ने सामरिक रक्षा साझेदारी का ढाँचा तैयार किया जिसमें रक्षा उद्योग सहयोग, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान पर सहमति बनी।
निवेश के मामले में भी बड़ी खबर आई। यूएई ने भारत के बुनियादी ढाँचे में 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की।

पीएम मोदी ने यूएई में कहा — “मैं अपने दूसरे घर आया हूँ।” यह बात उन्होंने वहाँ बसे 45 लाख भारतीयों के संदर्भ में कही।
अब नीदरलैंड के बाद पीएम मोदी स्वीडन, नॉर्वे और इटली भी जाएँगे।

दिहाड़ी मजदूरों की बढ़ती आत्महत्याएं गंभीर सामाजिक संकट:ब्रजेश शर्मा

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रायपुर/दिल्ली-15 मई 2026

भारतीय जनता मजदूर ट्रेड यूनियन काउंसिल (BJMTUC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजेश शर्मा ने दिहाड़ी मजदूरों की बढ़ती आत्महत्याओं को बेहद गंभीर और चिंताजनक बताया है। उन्होंने आंकड़ों पर बात करते हुए कहा एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश में आत्महत्या करने वालों में दिहाड़ी मजदूरों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है, जो मजदूर वर्ग की बदहाल स्थिति को साफ दिखाती है ।
बृजेश शर्मा ने कहा कि बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, अस्थिर आय और कर्ज का बोझ अब केवल आर्थिक समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह मजदूरों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डाल रहा है। निर्माण कार्य, फैक्ट्री, ठेकेदारी और दैनिक मजदूरी पर निर्भर लाखों परिवार रोज़गार रुकने, बीमारी या समय पर भुगतान न मिलने की स्थिति में सीधे संकट में आ जाते हैं।

उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर मजदूरों की स्थिति अभी भी बेहद चिंताजनक है। कई राज्यों में समय पर वेतन, सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक सहायता योजनाओं तक पहुंच की कमी जैसी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं ।

BJMTUC ने सरकार से मांग की है कि दिहाड़ी मजदूरों के लिए स्थायी रोजगार, न्यूनतम आय सुरक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और मानसिक स्वास्थ्य सहायता को मजबूत किया जाए। संगठन का कहना है कि केवल आर्थिक योजनाएं ही नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीरता से काम करने की जरूरत है, ताकि मजदूर वर्ग खुद को अकेला और असहाय महसूस न करे ।(दीपक पाण्डेय राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी)



जिला बेमेतरा थाना नवागढ़ पुलिस टीम की गौवंश तस्करी पर सख्त कार्रवाई

आज तारीख 15.05.2026 को थाने नवागढ़ की पुलिस ने गौवंश तस्करी का सफल मामला पकड़ा।

बेमेतरा 15/05/2026

रमेश यादव (उम्र 35, निवासी वार्ड नंबर 4, नवागढ़) और अन्य गौ-रक्षक लोगों की शिकायत पर पता चला कि ग्राम नवागांव (महाराजी) के श्मशान घाट के पास एक खेत में बैल और बछड़ों को क्रूरतापूर्वक बांधकर रखा गया है। मौके पर जाकर देखा तो कुल 38 गोवंश (बछड़ा और बैल) वहां बंधे मिले। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि आरोपियों थनवार सतनामी और सुधे लाल सतनामी ने इन्हें बांध रखा था। हम लोग को देखते ही आरोपी तारेगांव की तरफ भाग खड़े हुए, जिन्हें टॉर्च की रोशनी से पहचान लिया गया।

शिकायत पर थाना नवागढ़ में केस दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी गई। मामले में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और छत्तीसगढ़ कृषक पशु संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। वरिष्ठ अधिकारियों को भी मामले की जानकारी दी गई।

पुलिस उप महानिरीक्षक रामकृष्ण साहू ने तुरंत कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश कुमार यादव, एसडीओपी बेमेतरा भुषण एक्का और एसडीओपी बेरला विनय कुमार के मार्गदर्शन में नवागढ़ थाना प्रभारी उपनिरीक्षक भुनेश्वर यादव और उनकी टीम ने जांच की अगुवाई की।

जांच में कुल 38 गाय/बछड़े जिन्हें करीब 2,00,000 रुपये की कीमत का बताया गया है, जब्त किए गए। इन्हें सुरक्षा के लिए ग्राम झालम के गौ अभ्यारण में रखवा दिया गया है।

आज आरोपियों थनवार घृतलहरे (पिता नेतराम घृतलहरे, उम्र 65, निवासी नवागांव) और सुधे लाल सोनवानी (पिता प्रभुदास सोनवानी, उम्र 39, निवासी नवागांव) को न्यायालय में पेश कर रिमांड पर भेज दिया गया।

इस कार्रवाई में थाना नवागढ़ की टीम—थाना प्रभारी उपनिरीक्षक भुनेश्वर यादव, सउनि कृष्ण कुमार क्षत्री, प्रधान आरक्षक गोपाल ध्रुव, आरक्षक ओंकार निर्मलकर, राहुल दुबे और अन्य स्टाफ तथा स्थानीय गौ सेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


छत्तीसगढ़ अवैध रेत उत्खनन-परिवहन पर प्रशासन सख्त: 5 हाईवा, 4 ट्रैक्टर जब्त; चालकों पर कार्रवाई

रायपुर, 15 मई 2026

प्रदेश भर में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन रोकने के लिए प्रशासन की छापामारी तेज की गई है। पिछले दो दिनों में विभिन्न जिलों में संयुक्त कार्रवाई के दौरान कुल 5 हाईवा और 4 ट्रैक्टर वाहन जब्त किए गए हैं, जबकि कई मामलों में दोषियों के खिलाफ वैधानिक कदम उठाए गए हैं।

जांजगीर-चांपा: राजस्व एवं खनिज विभाग की संयुक्त टीम ने केवा, भादा और नवापारा घाटों में विशेष निरीक्षण चलाकर अवैध रेत परिवहन करने वाले 5 हाईवा वाहन जब्त किए। जब्त वाहनों को पुलिस लाइन जांजगीर में सुरक्षित रखवाया गया है।

कार्रवाई के दौरान शांति व्यवस्था भंग करने के आरोप में चालक जोहन कुमार और संतोष मिरी के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की प्रासंगिक धाराओं के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई। जिला प्रशासन ने चेतावनी दी है कि अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण में संलिप्त लोगों के खिलाफ इसी तरह निरंतर और सख्त कदम उठाए जाएंगे।

बलरामपुर: खनिज विभाग की टीम ने विकासखंड शंकरगढ़ के ग्राम डीपाडीह के पास गलफुल्ला नदी क्षेत्र में छापा मारकर रेत से भरे 4 ट्रैक्टर जब्त किए। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि संबंधित वाहनों के खिलाफ आवश्यक करवाई जारी रखी जाएगी और जिले में अवैध खनिज परिवहन रोकने के लिए सतत निगरानी की जा रही है।

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अवैध खनिज उत्खनन या परिवहन की जानकारी तुरंत दें, ताकि त्वरित कार्रवाई संभव हो सके। आगे भी प्रदेश में खनिज और राजस्व की हानि रोकने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के उद्देश्य से समान रूप से सघन निगरानी और छापामारी जारी रखी जाएगी।

कलेक्टर के निर्देश पर बेमेतरा में अवैध रेत परिवहन अलर्ट; वाहन जप्त, अर्थदण्ड तय

बेमेतरा, 15 मई 2026

कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई के निर्देश पर जिले में अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी है। खनिज शाखा के निरीक्षण अभियान के दौरान बेमेतरा क्षेत्र से रेत से भरा एक वाहन जप्त किया गया।

खनिज विभाग की टीम ने जांच में वाहन चालक से आवश्यक दस्तावेज माँगे, जो प्रस्तुत नहीं किए गए। इसके बाद वाहन को थाना बेमेतरा की अभिरक्षा में रखा गया और उसके खिलाफ अवैध खनिज परिवहन का प्रकरण दर्ज कर लिया गया।

प्रकरण में खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 से 23-ख के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए वाहन पर कुल ₹30,500 का अर्थदण्ड निर्धारित किया गया है, जिसकी वसूली नियमानुसार की जाएगी।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अवैध उत्खनन और परिवहन को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और राजस्व एवं खनिजों का संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए निगरानी बढ़ाई जा रही है।

कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई ने निर्देश दिए हैं कि संबंधित अधिकारियों को नियमित जांच अभियान चलाना और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करनी है। प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि ऐसे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत दें ताकि त्वरित कार्रवाई हो सके।

बंगाल में तेज़ी से लागू हो रहे बदलाव; भाजपा सरकार ने पहले सप्ताह में कई बड़े निर्देश दिए

डिजिटलडेस्क/प. बंगाल, 15 मई 2026

पश्चिम बंगाल में हालिया सत्ता परिवर्तन के बाद नई भाजपा सरकार ने शुरुआती दिनों में ही कड़ा और व्यापक प्रशासनिक हस्तक्षेप शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में सरकार ने शिक्षा, कानून-व्यवस्था और जिला प्रशासन से जुड़े फैसलों की एक लहर जारी की है जिनका असर राज्य के रोज़मर्रा जीवन पर जल्दी दिखने लगा है।

स्कूलों में राष्ट्रगीत को जोड़ना
सभी सरकारी और निजी शैक्षणिक संस्थानों में मॉर्निंग असेंबली के दौरान ‘वंदे मातरम’ गाने का निर्देश दिया गया है।

सीमा सुरक्षा का त्वरित क्रियान्वयन
सीमा सुरक्षा बल (BSF) को आवश्यक भूमि सौंपने की प्रक्रिया 45 दिनों के भीतर पूरी करने का आदेश जारी हुआ है।

सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक अनुष्ठान पर सीमाएं
अब सार्वजनिक मार्गों पर सामूहिक नमाज़ पर रोक रहेगी; नमाज़ का आयोजन केवल मस्जिद तक सीमित होगा। धार्मिक स्थलों पर तेज ध्वनि उपकरणों (लाउडस्पीकर) के इस्तेमाल पर भी पाबंदी लगाने के निर्देश दिये गए हैं।

केंद्र की योजनाएँ प्रभावी रूप से लागू होंगी
राज्य में केंद्र सरकार की प्रमुख कल्याण योजनाओं — आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जन-आरोग्य, पीएम-किसान बीमा, पीएम-श्री, विश्वकर्मा, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और उज्ज्वला — को व्यापक रूप से लागू करने के निर्देश भेजे गए हैं।

प्रशासनिक एकीकरण और प्रशिक्षण
राज्य के आईएएस अधिकारियों को केंद्र के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल किया जाएगा; साथ ही भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों को राज्य स्तर पर पूरी तरह लागू करने का निर्णय लिया गया है।

सरकारी नौकरी के लिए आयु सीमा में नरमी
सरकारी भर्ती में अधिकतम आयु सीमा में पाँच वर्ष की वृद्धि की घोषणा की गई है ताकि नौकरी के दायरे में अधिक युवाओं को लाया जा सके।

पहले के सर्कुलरों को पुन: सक्रिय किया गया जो प्रशासनिक आदेश और जनगणना संबंधित निर्देश पिछली सरकार के दौरान रुके थे, उन्हें लागू करने का निर्देश दिया गया है।

राजनीतिक हिंसा के मामलों की समीक्षा
सरकार ने कहा कि अगर प्रभावित परिवार कानूनी कार्रवाई चाहेंगे तो संबंधित घटनाओं की पुनः जांच की जाएगी; आरोप है कि राजनीतिक हिंसा में सैंकड़ों लोग प्रभावित हुए थे।

पशु तस्करी और अवैध खनन पर सख्ती
पशु तस्करी को रोकने, केवल लाइसेंस धारक मेला संचालित करने तथा अवैध खनन के खिलाफ कड़े कदम उठाने के निर्देश दिये गए हैं।

सुरक्षा आवंटन पर पुनर्विचार
आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को मिली सुरक्षा वापस ली जा सकती है; कुछ सार्वजनिक व्यक्तियों की सुरक्षा भी सीमित करने के आदेश जारी किये गये हैं।

राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
इन पहलों को प्रशासनिक सुधार और केंद्र-समन्वय के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। समर्थक इसे त्वरित शासन परिवर्तन मान रहे हैं, जबकि विपक्ष और नागरिक संगठनों ने कुछ फैसलों — विशेषकर सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक गतिविधियों पर पाबंदी — को संवैधानिक स्वतंत्रताओं पर प्रश्नचिन्ह बताते हुए कड़ी आलोचना की है। अब देखने वाली बात यह है कि ये नीतियाँ अदालतों और जन-आरोपों में किस तरह पारित होती हैं और सार्वजनिक प्रतिक्रिया किस दिशा में झुकती है।

इंसान ‘पत्थर का व्यापारी’ बन गया: दौलत की मंडी में बिक रहा दिल

डिजिटल वर्ल्ड 15/05/2026

आज की दुनिया में सफलता की परिभाषा बदल गई है। लोग कहते हैं, “उसने बहुत दौलत पाई है,” लेकिन कोई यह नहीं देखता कि उस ऊँचाई तक पहुँचने के लिए उसने अपने भीतर के कितने ‘दिल’ की बलि दी है।

एक मर्मस्पर्शी और कड़वा सच हो सकता है। जब इंसान भावनाओं को मारकर भौतिकता की अंधी दौड़ में शामिल होता है, तो वह ‘अमीर’ तो हो जाता है, लेकिन अंदर से ‘रिक्त’ हो जाता है।

दिल की हत्या और तिजोरी का जन्म
इंसान जब अपने दिल की कोमल भावनाओं, संवेदनाओं और नैतिकता को मार देता है, तभी वह बेहिसाब दौलत इकट्ठा करने के काबिल हो पाता है। लोग प्रशंसा करते हैं उसके बंगलों की, उसकी गाड़ियों की, पर सच तो यह है कि उस चमक-धमक के पीछे एक मरा हुआ दिल छिपा है। वह दिल जो कभी दूसरों के दुःख में पिघलता था, अब वह एक ‘पत्थर’ में तब्दील हो चुका है।

पत्थरों का सौदागर
अक्सर अमीर होने के बाद लोग कहते हैं— “उसका दिल अब पत्थर का हो गया है।” यह सिर्फ एक मुहावरा नहीं, एक भयावह हकीकत है। उसके सीने में अब धड़कन नहीं, बल्कि सोने, चाँदी और हीरों की खनक समा गई है। वह अब भावनाओं का नहीं, बल्कि ‘पत्थरों का व्यापारी’ बन चुका है। वह हर रिश्ते को मुनाफे और नुकसान के तराजू पर तौलता है।

सोना, चाँदी और हीरा—ये सब कीमती तो हैं, पर ये निर्जीव हैं। जब इंसान का दिल इन्हीं से भर जाता है, तो उसमें जीवन की नमी खत्म हो जाती है।

क्या पत्थरों के सहारे जीवन संभव है?
एक बुनियादी सवाल जो हम सबको खुद से पूछना चाहिए— “क्या कोई पत्थर के दिल के साथ वाकई जिंदा रह सकता है?” चिकित्सा विज्ञान और अध्यात्म दोनों कहते हैं कि ‘साँस लेना’ और ‘जिंदा रहना’ दो अलग बातें हैं। हीरा-सोना आपकी तिजोरी तो भर सकते हैं, लेकिन वे आपके जीवन में वह ‘उमंग’ नहीं भर सकते जो एक जीता-जागता, धड़कता हुआ दिल दे सकता है।

जिस दिन शरीर की धड़कन रुकती है, यह सारी दौलत यहीं धरी रह जाती है। तब समझ में आता है कि जिस ‘पत्थर’ (दौलत) के लिए हमने अपना ‘पारस’ (दिल) खो दिया, वह पत्थर अंत में हमें बचाने नहीं आया
।

‘जन चौपाल 36′ की सीरीज का संदेश
“दौलत कमाइए, पर उसे दिल के अंदर मत आने दीजिए। क्योंकि जिस दिन दिल में ‘सिक्के’ खनकने लगेंगे, उस दिन ‘इंसानियत’ की आवाज सुनाई देना बंद हो जाएगी।”

जीवन और ‘मिट्टी की महक’ और भी निखरेगा,जब आप करोगे याद कि असली अमीरी दिल के सुकून में है, बैंक बैलेंस के पत्थरों में नहीं।

छत्तीसगढ़ माटी की सौंधी खुशबू से: स्थानीय संस्कृति की खोज

छत्तीसगढ़ पारंपरिक त्योहारों में बनाता असली रंग, नई पीढ़ी को जोड़ने की जरूरत

रायपुर, 15 मई 2026:-

आज हम छत्तीसगढ़ के त्यौहार और उत्सव पर बात करते है।
छत्तीसगढ़ को ‘धान का कटोरा’ तो कहा ही जाता है, लेकिन इसकी असली पहचान यहां की मिट्टी से जुड़ी संस्कृति और पारंपरिक त्योहारों से है। आधुनिकता की दौड़ में कहीं खोते जा रहे इन लोक उत्सवों को सहेजना अब जरूरी हो गया है।

छत्तीसगढ़ में तिहार (त्योहार) नहीं, जीवन पद्धति है
छत्तीसगढ़ के त्योहार सिर्फ कैलेंडर की तारीख नहीं हैं। ये यहां के किसान, आदिवासी और ग्रामीण जीवन का दर्पण हैं।
छत्तीसगढ़ में ही सभी त्यौहार पर्व पर आनंद और उत्सव मनाया जाता है।

राज्य के प्रमुख पारंपरिक त्योहार और उनका महत्व:

हरेली
छत्तीसगढ़ का पहला त्योहार हरेली मुझे लगता है इसका एक अभिप्राय हरियाली से हो सकता है जहां धरती चहुंओर हरियाली चुनर ओढ़े नजर आती है।सावन महीने में खेती-किसानी के औजारों की पूजा होती है। बैलों को सजाया जाता है, गेड़ी चढ़ने की प्रतियोगिता होती है। छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है जिसका संदेश साफ है- अन्नदाता और उसके साथी पशुओं का सम्मान।

पोला-पिठौरा
जो खेती किसानी में पहले बहुत काम आया बैलों के बगैर किसानी मुश्किल ही था इसलिए यह त्यौहार बैलों को समर्पित है। किसान अपने बैलों को नहलाकर, सींगों में तेल लगाकर, माला पहनाते हैं। बच्चे मिट्टी के नंदी-बैल से खेलते हैं। कृषि संस्कृति की जड़ से जोड़ता है यह पर्व।

तीजा
महिलाओं का सबसे बड़ा त्योहार। मायके आने वाली बेटियां सुआ, करमा, ददरिया गीत गाती हैं। फुलेरा बांधकर झूला झूलती हैं। नारी शक्ति और पारिवारिक जुड़ाव का प्रतीक।

नवाखाई
नए धान की फसल आने की खुशी। घर-घर नए चावल का भोग लगता है। ‘जुर मिलन’ मतलब जुड़कर एक साथ एकता की परंपरा में पूरा गांव एक साथ खाता है। सामुदायिक एकता का सबसे बड़ा उदाहरण।

बस्तर दशहरा
लोक प्रसिद्ध तिहार 75 दिन चलने वाला दुनिया का सबसे लंबा दशहरा। रावण दहन नहीं होता, बल्कि मां दंतेश्वरी की आराधना होती है। आदिवासी संस्कृति की जीवंत झांकी।

मड़ई मेला
उत्सव और आनंद बिखेरते गांव-गांव लगने वाले मेले। देवगुड़ी में पूजा के बाद नाचा, गम्मत, रहस का दौर चलता है। लोक कलाकारों को मंच मिलता है।

क्यों जरूरी है इनका संरक्षण?
संस्कृति विभाग के अधिकारी बताते हैं कि शहरीकरण के कारण युवा पीढ़ी सुआ-करमा के गीत भूल रही है। गेड़ी-भौंरा की जगह मोबाइल ने ले ली है। अगर ये त्योहार नहीं बचे तो छत्तीसगढ़ी पहचान का बड़ा हिस्सा खत्म हो जाएगा।

सरकार और समाज की पहल
राज्य सरकार ने ‘लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना’ के तहत मड़ई मेलों को अनुदान देना शुरू किया है। स्कूलों में हरेली-तीजा पर अवकाश और सांस्कृतिक कार्यक्रम अनिवार्य किए गए हैं। कई ग्राम पंचायतें अब ‘त्योहार कैलेंडर’ बनाकर उत्सव मना रही हैं।

विशेषज्ञ की राय
लोक संस्कृति के जानकार कहते हैं, “छत्तीसगढ़ के त्योहार प्रकृति और खेती से जुड़े हैं। ये हमें पर्यावरण बचाने का संदेश देते हैं। हरेली पर नीम की डाली गाड़ना, तीजा पर बीज सहेजना- ये सब सतत विकास के पाठ हैं।”

आगे की राह जन चौपाल 36 की चाह
जरूरत है कि इन त्योहारों को सिर्फ ‘इवेंट’ न बनाकर जीवन का हिस्सा बनाया जाए। स्कूल-कॉलेजों में लोकगीत प्रतियोगिता, गांवों में युवाओं को पारंपरिक वाद्य सिखाना, और सोशल मीडिया पर छत्तीसगढ़ी संस्कृति का प्रचार करना होगा। क्योंकि जब तक त्योहार जिंदा हैं, तब तक छत्तीसगढ़ की आत्मा जिंदा है।

“किरंदुल सड़क किनारे खड़े 10 चक्का वाहनों से बढ़ता खतरा पत्रकार ने दिखाया आईना”

अब कलेक्टर की कार्रवाई पर टिकी जनता की उम्मीद।

किरंदुल/कोड़ेनार/बस्तर न्यूज -14/05/2026(रवि सरकार)

हर चुनाव में नेता आते हैं,बड़े-बड़े वादे करते हैं,वोट लेकर चले जाते हैं, और फिर जनता को उसी हालात में छोड़ दिया जाता है।सड़कें भारी वाहनों से घिरी रहती हैं,आम नागरिकों की जान जोखिम में रहती है,लेकिन जिम्मेदार लोग आंखें मूंदे बैठे हैं।

“किरंदुल: मौत के साये में कोड़ेनार! सड़कों पर खड़े भारी वाहन दे रहे बड़े हादसे को न्योता, आखिर किसका इंतज़ार कर रहा प्रशासन?”

लौह अयस्क की नगरी कहा जाने वाला किरंदुल आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। कोड़ेनार पंचायत के वार्ड नंबर 4 में बैलाडीला ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन के सामने से लेकर प्रमुख चौक-चौराहों तक खड़ी 10 चक्का भारी गाड़ियां किसी भी वक्त बड़ी जनहानि का कारण बन सकती हैं।

वादे अनेक, व्यवस्था शून्य !
किरंदुल को नगर पालिका बने 28 साल बीत चुके हैं और देश को आज़ाद हुए 78 साल, लेकिन यहाँ का बुनियादी ढांचा आज भी लचर है। चुनाव दर चुनाव नेता आते हैं, बड़े-बड़े वादे कर वोट बटोरते हैं और गायब हो जाते हैं। जनता आज भी गंदगी, बदबू और जानलेवा ट्रैफिक के बीच जीने को मजबूर है।

बड़ा सवाल ?
अगर इन बेतरतीब खड़े वाहनों की वजह से कल कोई बड़ी दुर्घटना होती है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधि या ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन?

पल्ला झाड़ते जिम्मेदार
जब वाहन मालिकों से गाड़ियां हटाने को कहा जाता है, तो उनका रटा-रटाया जवाब मिलता है— “हमें जगह दो”। यहाँ सवाल यह उठता है कि पार्किंग की व्यवस्था करना पत्रकारों का काम है या शासन-प्रशासन का? पत्रकार समाज का आईना है, लेकिन व्यवस्था सुधारना उन जिम्मेदार कंधों का काम है जिन्हें जनता ने चुनकर भेजा है।

कलेक्टर से जगी उम्मीद
इस गंभीर समस्या को लेकर जब कलेक्टर महोदय से चर्चा की गई, तो उन्होंने संज्ञान लेते हुए फोटो और वीडियो साक्ष्य मांगे हैं और जल्द ही ठोस कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। नेताओं के खोखले वादों से थक चुकी जनता को अब केवल जिला प्रशासन से ही न्याय की उम्मीद बची है।

जन चौपाल 36/निष्कर्ष
किरंदुल आज खतरों के मुहाने पर खड़ा है। यदि समय रहते इन भारी वाहनों के लिए सुरक्षित पार्किंग सुनिश्चित नहीं की गई और सड़कों को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया, तो कोई बड़ा हादसा पूरे क्षेत्र को झकझोर सकता है। प्रशासन को जागना होगा, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।