डिजिटल डेस्क -16 मई 2026
विगत दिनों कैसे देश की जनता ने देखा कि तमिलनाडु विधानसभा में कुछ ऐसा हुआ जो आमतौर पर नहीं दिखता,क्या दिखा नयापन देखते है!!
विधानसभा कक्ष में जब विपक्ष के नेता एक के बाद एक सवाल उठा रहे थे, तब मुख्यमंत्री थलापती विजय — यानी जोसेफ विजय चंद्रशेखर — चुपचाप बैठकर उन बातों को नोट कर रहे थे। कोई हंगामा नहीं, कोई जवाबी शोर नहीं।
हाथ में बस कागज और कलम मतलब हाथ काम करने के लिए है हाथ पर हाथ धरकर बैठने के लिए नहीं।
चलिए सत्ता की राजनीति में यह छोटी सी बात है, लेकिन हमारी मौजूदा राजनीति में यह दृश्य असामान्य है। सदन में आमतौर पर जो होता है वह सब जानते हैं — विपक्ष बोले तो सत्तापक्ष का शोर, सत्तापक्ष बोले तो विपक्ष का हंगामा। नतीजा? कोई नहीं।
लेकिन यहाँ एक मुख्यमंत्री था जो सुन रहा था बस…
नहीं नोट भी कर रहा था।एक सही संदेश की जन प्रतिनिधि वहां सीख भी सकता है और लिख भी सकता है राज्य विकास और समस्या समाधान की नई स्क्रिप्ट।
आजकल राजनीति में ‘सुनना’ सबसे मुश्किल काम माना जाता है, खासकर तब जब आप सत्ता में हों। विपक्ष की बात को नजरअंदाज करना आसान है, उसे दबाना और भी आसान। लेकिन उसे लिखकर रखना — यह बताता है कि आप उस पर कुछ करने का इरादा रखते हैं ।हां ,जैसे कभी पीएम नेहरू ने पीएम अटल को सुनना चाहता था।
अब सीएम विजय का यह इरादा कितना ज़मीन पर उतरता है, यह तो वक्त बताएगा।सीएम राजनीति में नए हैं और उन पर नज़रें टिकी हैं। एक सत्र की कार्यशैली से किसी नेता को परखना जल्दबाजी होगी।
लेकिन शुरुआत बुरी नहीं है।
(सोशल मीडिया साभार और प्रतिक्रिया न्यूज निजी विचार पर आधारित)


