डिजिटलडेस्क/प. बंगाल, 15 मई 2026
पश्चिम बंगाल में हालिया सत्ता परिवर्तन के बाद नई भाजपा सरकार ने शुरुआती दिनों में ही कड़ा और व्यापक प्रशासनिक हस्तक्षेप शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में सरकार ने शिक्षा, कानून-व्यवस्था और जिला प्रशासन से जुड़े फैसलों की एक लहर जारी की है जिनका असर राज्य के रोज़मर्रा जीवन पर जल्दी दिखने लगा है।
स्कूलों में राष्ट्रगीत को जोड़ना
सभी सरकारी और निजी शैक्षणिक संस्थानों में मॉर्निंग असेंबली के दौरान ‘वंदे मातरम’ गाने का निर्देश दिया गया है।
सीमा सुरक्षा का त्वरित क्रियान्वयन
सीमा सुरक्षा बल (BSF) को आवश्यक भूमि सौंपने की प्रक्रिया 45 दिनों के भीतर पूरी करने का आदेश जारी हुआ है।
सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक अनुष्ठान पर सीमाएं
अब सार्वजनिक मार्गों पर सामूहिक नमाज़ पर रोक रहेगी; नमाज़ का आयोजन केवल मस्जिद तक सीमित होगा। धार्मिक स्थलों पर तेज ध्वनि उपकरणों (लाउडस्पीकर) के इस्तेमाल पर भी पाबंदी लगाने के निर्देश दिये गए हैं।
केंद्र की योजनाएँ प्रभावी रूप से लागू होंगी
राज्य में केंद्र सरकार की प्रमुख कल्याण योजनाओं — आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जन-आरोग्य, पीएम-किसान बीमा, पीएम-श्री, विश्वकर्मा, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और उज्ज्वला — को व्यापक रूप से लागू करने के निर्देश भेजे गए हैं।
प्रशासनिक एकीकरण और प्रशिक्षण
राज्य के आईएएस अधिकारियों को केंद्र के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल किया जाएगा; साथ ही भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों को राज्य स्तर पर पूरी तरह लागू करने का निर्णय लिया गया है।
सरकारी नौकरी के लिए आयु सीमा में नरमी
सरकारी भर्ती में अधिकतम आयु सीमा में पाँच वर्ष की वृद्धि की घोषणा की गई है ताकि नौकरी के दायरे में अधिक युवाओं को लाया जा सके।
पहले के सर्कुलरों को पुन: सक्रिय किया गया जो प्रशासनिक आदेश और जनगणना संबंधित निर्देश पिछली सरकार के दौरान रुके थे, उन्हें लागू करने का निर्देश दिया गया है।
राजनीतिक हिंसा के मामलों की समीक्षा
सरकार ने कहा कि अगर प्रभावित परिवार कानूनी कार्रवाई चाहेंगे तो संबंधित घटनाओं की पुनः जांच की जाएगी; आरोप है कि राजनीतिक हिंसा में सैंकड़ों लोग प्रभावित हुए थे।
पशु तस्करी और अवैध खनन पर सख्ती
पशु तस्करी को रोकने, केवल लाइसेंस धारक मेला संचालित करने तथा अवैध खनन के खिलाफ कड़े कदम उठाने के निर्देश दिये गए हैं।
सुरक्षा आवंटन पर पुनर्विचार
आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को मिली सुरक्षा वापस ली जा सकती है; कुछ सार्वजनिक व्यक्तियों की सुरक्षा भी सीमित करने के आदेश जारी किये गये हैं।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
इन पहलों को प्रशासनिक सुधार और केंद्र-समन्वय के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। समर्थक इसे त्वरित शासन परिवर्तन मान रहे हैं, जबकि विपक्ष और नागरिक संगठनों ने कुछ फैसलों — विशेषकर सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक गतिविधियों पर पाबंदी — को संवैधानिक स्वतंत्रताओं पर प्रश्नचिन्ह बताते हुए कड़ी आलोचना की है। अब देखने वाली बात यह है कि ये नीतियाँ अदालतों और जन-आरोपों में किस तरह पारित होती हैं और सार्वजनिक प्रतिक्रिया किस दिशा में झुकती है।


