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मनुष्य चाहे कहीं भी चला जाये, कर्म उसका पीछा नहीं छोड़ता

रविवारीय 19 जुलाई 2026

भारतीय दर्शन कहता है “संस्कार आत्मा में जन्म-जन्मांतर तक रहते हैं”, विज्ञान कहता है “संस्कार जीन्स में पीढ़ियों तक रहते हैं”। दोनों “पूर्व का प्रभाव वर्तमान पर पड़ता है” इस बात पर सहमत हैं, पर तंत्र (mechanism) पूरी तरह अलग बताते हैं।

भारतीय दर्शन कहता है संस्कार का वाहक आत्मा है, जो सूक्ष्म रूप में जन्म-जन्मांतर यात्रा करती है।

विज्ञान कहता है संस्कार का वाहक DNA/जीन्स है, जो जैविक रूप से पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होता है, बिना किसी आत्मा के।

श्रीकृष्ण और धृतराष्ट्र संवाद से यह शाश्वत सत्य उद्घाटित होता है — नियति के विधान में न प्रकृति हस्तक्षेप करती है, न स्वयं परमेश्वर। मनुष्य का प्रत्येक सकाम कर्म बीज बनकर आत्मा में सुप्त रहता है, और समय आने पर वृक्ष बनकर अवश्य फलित होता है। भोग को भोगे बिना कर्म का क्षय सम्भव नहीं। इसलिए जो कर्म करते समय सजग रहता है, करुणा और पश्चाताप को अपनाता है, वही आत्मा को भावी जन्मों के अंधकार से बचा पाता है।

कृष्ण-धृतराष्ट्र संवाद — नियति के गूढ़ रहस्य की कथा
महाभारत के गर्भ में छिपा एक ऐसा प्रसंग है, जो मनुष्य की चेतना को झकझोर कर उसे कर्म के अकाट्य विधान से साक्षात्कार कराता है। कहते हैं, एक दिन कुरुवंश के अंधे सम्राट धृतराष्ट्र ने स्वयं योगेश्वर श्रीकृष्ण को अपने महल में आमंत्रित किया। बाहर से राजसी वैभव से आलोकित उस राजमहल के भीतर, एक आत्मा भीतर ही भीतर किसी अदृश्य अग्नि में जल रही थी।

भगवान ने कोमल वाणी में पूछा — “राजन, इतने वैभव के मध्य भी आपके मुखमंडल पर यह व्यथा क्यों छाई है? किस प्रयोजन से आपने मुझे स्मरण किया?”
धृतराष्ट्र की वाणी काँप उठी — “हे वासुदेव! आप साक्षात् परब्रह्म परमेश्वर के सगुण स्वरूप हैं, यह मैं भलीभाँति जानता हूँ। मेरा मन वर्षों से किसी अदृश्य भार तले दबा है। केवल आप ही इस रहस्य का उद्घाटन कर सकते हैं।”

सुख के मध्य दुःख का रहस्य
कृष्ण ने कहा — “कहिए राजन, यदि मेरे सामर्थ्य में हुआ तो अवश्य निवारण करूँगा।”
धृतराष्ट्र बोले — “भगवन्! मेरे पास अपार धन-सम्पदा है, भोग के समस्त साधन हैं, फिर भी यह सब मुझे व्यर्थ प्रतीत होता है। नेत्रहीन होने का यह दुःख मुझे भीतर से खोखला किए दे रहा है। ऐसा क्यों है, इसी का उत्तर चाहता हूँ।”

कृष्ण मुस्कुराए, किन्तु उस मुस्कान में करुणा से अधिक एक गहन सत्य छिपा था। उन्होंने कहा — “राजन, हो सकता है किसी पूर्व जन्म में आपसे कोई ऐसा अपराध हुआ हो, जिसका फल इस जन्म में नियति बनकर आपके समक्ष खड़ा है। यही कारण है कि सम्पूर्ण ऐश्वर्य के मध्य भी आप सुख से वंचित हैं।”

नियति का गूढ़ विधान
धृतराष्ट्र ने जिज्ञासा से पूछा — “यह नियति आखिर है क्या? पहले इसका मर्म समझाएँ।”
तब भगवान कृष्ण ने वह परम रहस्य उद्घाटित किया, जो युगों-युगों से मनुष्य की बुद्धि को चुनौती देता आया है —
“मनुष्य के शुभ-अशुभ कर्म मृत्यु के पश्चात् भी नष्ट नहीं होते, वे संस्कार बनकर जीवात्मा के सूक्ष्म शरीर से चिपक जाते हैं। यह कर्म-संस्कार अनंत काल तक आत्मा के साथ यात्रा करता रहता है, जब तक उसका फल भोगकर वह पूर्णतः क्षीण नहीं हो जाता।

जीवात्मा चाहे कितने ही जन्म धारण कर ले, पूजा-पाठ करे, दान-पुण्य करे — फिर भी जब संचित कर्म का फल उदय होने का समय आता है, तो वह प्रकट होकर ही रहता है। कोई नहीं जानता कि नियति कब, किस क्षण अपना मुख खोलेगी।

और सबसे गूढ़ बात यह है — जब नियति प्रकट होती है, तब स्वयं ईश्वर भी उसमें हस्तक्षेप नहीं करता। न अपने लिए, न किसी और के लिए। ईश्वर स्वयं भी कर्म के इस शाश्वत विधान का सम्मान करता है और सदैव तटस्थ रहता है।”

कृष्ण ने आगे कहा — “यदि मैं चाहूँ तो अभी आपके नेत्र ठीक कर सकता हूँ, परन्तु आपका यह कष्ट प्रकृति के उस अटल नियम से बँधा है, जिसे नियति कहते हैं।”

चौदहवें जन्म का रहस्योद्घाटन
धृतराष्ट्र ने विनती की — “प्रभु, कम से कम कारण तो जान लूँ, जिससे मेरा मन थोड़ा हल्का हो सके।”
भगवान बोले, “इसका ज्ञान योगबल से ही सम्भव है।” और यह कहकर वे ध्यानमग्न हो गए।

उनकी दिव्य दृष्टि काल के परदे को चीरती हुई, एक-एक कर धृतराष्ट्र के पूर्व जन्मों में प्रवेश करने लगी — दस, ग्यारह, बारह, तेरह… और जब वे चौदहवें जन्म पर पहुँचे, तो एक हृदयविदारक दृश्य उनके सम्मुख उभरा।

उस जन्म में धृतराष्ट्र एक राजकुमार थे, वन में पक्षियों का शिकार करते हुए। उन्होंने एक निर्दोष पक्षी-शिशु पर बाण साध लिया। बाण चूका नहीं — वह सीधे उस अबोध शिशु की आँखों में जा धँसा। नन्हा पक्षी पीड़ा से तड़पने लगा, उसके नेत्रों से रक्त की धार बह चली।

और राजकुमार? वह उस करुण क्रंदन को अनसुना कर, बिना पश्चाताप के, बिना एक क्षण रुके, आगे बढ़ गया।

जब पश्चाताप ही कर्म को शुद्ध करता है
भगवान कृष्ण ने गहरी वेदना से कहा — “राजन, उस क्षण यदि आपने उस अबोध शिशु की तड़प देखकर हृदय से प्रायश्चित कर लिया होता, यदि आपने उसकी थोड़ी भी सहायता की होती, तो वह कर्म आपकी आत्मा पर अमिट छाप नहीं छोड़ता। किन्तु निर्ममता से किया गया वही अपराध संस्कार बनकर आपके साथ चौदह जन्मों तक यात्रा करता रहा, और आज नियति के रूप में प्रकट हुआ है।”

धृतराष्ट्र मौन हो गए। उनके नेत्रहीन मुख पर एक गहरा सन्नाटा छा गया — यह सन्नाटा किसी उत्तर का नहीं, बल्कि परम सत्य के साक्षात्कार का सन्नाटा था।

डिस्क्लेमर लाइन:
“यह लेख मेराविचार_मेरादर्शन पर आधारित है।”
“यह लेख उपलब्ध प्रसंग पर लेखक के निजी विचार पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचारों से janchoupal36.com का सहमत होना आवश्यक नहीं है।”



ईश्वर का स्वरूप अनुभूति में है दिखावे में नहीं ज्ञान और तर्क में भी नहीं

रविवारीय – 19/07/2026

जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ” यह अध्यात्म है अनुभूति है।अनुभूति से अनुभव है ईश्वर की वास्तविक अनुभूति वह गूढ़, आंतरिक अनुभव है जो मनुष्य की साधारण इंद्रियों और शब्दों से परे होती है। इसे शब्दों और सोच के माध्यम से व्यक्त करना कठिन इसलिए होता है क्योंकि यह अनुभूति ज्ञान या तर्क से नहीं, बल्कि एक गहरी भावना या आंतरिक चेतना से जुड़ी होती है। यह अनुभूति हमारे मन और हृदय की गहराइयों में होती है, जहां शब्द सीमित और अनुभव असीमित होता है।

अनुभूति के लिए आवश्यक है मन की शांति, एकाग्रता और अंदर की तरफ झांकने की क्षमता। जब मन सभी बाहरी विचारों, भावनाओं और मानसिक हलचल से मुक्त होता है, तभी वह उस गहन अनुभूति को महसूस कर पाता है जिसे हम ईश्वर की अनुभूति कहते हैं। यह ऐसी स्थिति होती है जहां न तो सोच की कोई बाधा रहती है और न ही शब्दों की जरूरत होती है।

इस प्रकार, ईश्वर की अनुभूति कोई बाहरी वस्तु या विचारधारा नहीं है बल्कि एक सहज, आंतरिक अनुभव है जो मन और भावनाओं की सीमा को पार करके होती है। इसे महसूस करना ‘मन की छठी इंद्रिय’ या ‘भावना की अनुभूति’ जैसा होता है, जो हृदय की गहराई में होती है और जिसका कोई सटीक वर्णन शब्दों में संभव नहीं होता।

साधारण उदाहरण दें तो जैसे प्रकाश को हम आंखों से देख पाते हैं लेकिन उसकी प्रकृति को पूरी तरह समझाना शब्दों में मुश्किल होता है, उसी तरह ईश्वर की अनुभूति भी मन और हृदय की गहन संवेदना है, जिसका अनुभव केवल अनुभव के द्वारा ही संभव है, न कि केवल शब्दों या सोच के माध्यम से।
यह कहा जाता है कि ईश्वर को “देखना” नहीं बल्कि “अनुभव करना” होता है, क्योंकि ईश्वर कोई बाहरी वस्तु नहीं जिसे नेत्रों से निहारा जा सके, बल्कि वह चेतना का वह सूक्ष्मतम स्तर है जो शब्दों, रूपों और सीमाओं से परे है। जिस प्रकार वायु को स्पर्श किया जा सकता है पर देखा नहीं जा सकता, उसी प्रकार परमात्मा को केवल भीतर की गहराई में उतरकर ही अनुभूत किया जा सकता है। यह अनुभव बाहरी आँखों का नहीं, अपितु अंतर्दृष्टि का विषय है — जब मन की चंचलता शांत होती है और अहंकार का पर्दा हटता है, तभी उस दिव्य उपस्थिति की झलक भीतर ही भीतर प्रकट होने लगती है।

यह उच्चतम चेतना की अवस्था अचानक प्राप्त नहीं होती, बल्कि निरंतर साधना, गहन ध्यान और आत्म-मंथन की सुदीर्घ यात्रा से फलित होती है। साधक जब श्वास और विचारों के परे जाकर अपने वास्तविक स्वरूप की खोज में तल्लीन होता है, तब धीरे-धीरे बाहरी संसार का शोर मौन में परिवर्तित होने लगता है, और उसी मौन में ईश्वर की उपस्थिति का बोध जागृत होता है। यह अनुभव न तो शब्दों में बाँधा जा सकता है, न ही किसी तर्क से सिद्ध किया जा सकता है — यह तो हृदय की गहराई में घटित होने वाला वह परम सत्य है, जिसे केवल वही जान पाता है जो सच्ची लगन से भीतर की ओर यात्रा करता है।

स्पेशल लोक अदालत में चेक बाउंस के 12 प्रकरण निपटे, 81.98 लाख का अवार्ड पारित

बेमेतरा-छत्तीसगढ़/ 18 जुलाई 2026

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा), नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के मार्गदर्शन तथा माननीय श्रीमती सरोज नंद दास, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बेमेतरा के निर्देशन में शनिवार को जिला न्यायालय परिसर, बेमेतरा में “स्पेशल लोक अदालत” का सफल आयोजन किया गया।

मुख्य अतिथि माननीय न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधिपति, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर रहे। इस अवसर पर जिला न्यायालय बेमेतरा से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती सरोज नंद दास सहित अन्य न्यायिक अधिकारीगण भी वर्चुअली समारोह से जुड़े।

लोक अदालत में परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के कुल 12 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण हुआ, जिनमें 81 लाख 98 हजार 960 रुपये की राशि के अवार्ड पारित किए गए। चेक अनादरण से संबंधित लंबित मामलों का निराकरण आपसी समझौते, सौहार्दपूर्ण, सरल, त्वरित एवं कम खर्चीली प्रक्रिया के माध्यम से किया गया।

इस दौरान न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, बैंक प्रतिनिधियों, न्यायालयीन कर्मचारियों, पैरालीगल वॉलेंटियर्स तथा पक्षकारों की सक्रिय सहभागिता रही।

अपील प्रकरण में 11.50 लाख का विवाद 2.50 लाख रुपये में सुलझा

खण्डपीठ क्रमांक-01 (पीठासीन अधिकारी श्री देवेंद्र कुमार, प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश) के समक्ष लंबित अपील प्रकरण क्रमांक 95/2024 में विचारण न्यायालय द्वारा पूर्व में अभियुक्त को 11.50 लाख रुपये प्रतिकर अदा करने का आदेश दिया गया था, जिसमें भुगतान न करने पर तीन माह के कारावास का प्रावधान भी था।

स्पेशल लोक अदालत में समझाइश के बाद यह राशि घटाकर 2.50 लाख रुपये में राजीनामा हुआ और अवार्ड पारित किया गया। इसी तरह दो अन्य अपील प्रकरण भी आपसी समझौते से निपटाए गए।

इलेक्ट्रॉनिक कांटा मशीन व कपड़ा दुकान हेतु ली गई राशि का विवाद भी सुलझा

खण्डपीठ क्रमांक-02 में लंबित प्रकरण क्रमांक 3922/2022 में अभियुक्त ने परिचय के आधार पर इलेक्ट्रॉनिक कांटा मशीन व कपड़ा दुकान का सामान खरीदने हेतु परिवादी से उधार राशि ली थी, जिसे समय पर न लौटाने पर चेक बैंक से अनादरित हो गया और मामला अदालत पहुंचा। लोक अदालत में समझाइश पर दोनों पक्षों ने स्वतंत्र सहमति से राजीनामा किया, जिससे विवाद सौहार्दपूर्ण ढंग से समाप्त हो गया।

इससे यह फिर सिद्ध हुआ कि आपसी सहमति से लंबित विवादों का त्वरित व प्रभावी समाधान संभव है।

छत्तीसगढ़ में अब तक 81 प्रतिशत रिकॉर्ड बारिश: मानसून हुआ झमाझम, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और बलरामपुर में बरसी खुशियां

छत्तीसगढ़/मानसून 18 जुलाई 2026

शुरुआती जून में भले ही बारिश ने थोड़ा इंतजार कराया था, जिससे बुवाई पर असर दिखा था, लेकिन जुलाई की मूसलाधार बारिश ने सारी कसर पूरी कर दी है।

छत्तीसगढ़ में इस बार बदरा दिल खोलकर बरस रहे हैं। खेत लबालब हैं, चेहरे पर मुस्कान है और अन्नदाताओं के हौसले बुलंद हैं। प्रदेश ने मानसून के इस सीजन में शानदार शुरुआत करते हुए अब तक 81.3 प्रतिशत बारिश का आंकड़ा पार कर लिया है।

जहां एक ओर जांजगीर-चांपा, बिलासपुर और गरियाबंद में झमाझम बारिश से किसान गदगद हैं, वहीं सारंगढ़-बिलाईगढ़ और बलरामपुर में तो बारिश ने सारे रिकॉर्ड ही तोड़ दिए हैं।

आंकड़ों में खुशहाली: 293.6 मिमी बरसा पानी

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक 1 जून से 17 जुलाई 2026 तक प्रदेश में औसतन 293.6 मिलीमीटर वास्तविक वर्षा दर्ज हो चुकी है। बीते 24 घंटे में ही पूरे प्रदेश का दैनिक औसत 26.0 मिमी रहा। यह आने वाले खरीफ सीजन, खासकर धान की फसल के लिए सोने पर सुहागा है।

कहां-कहां बरसे मेघ जमकर?
मानसून का सबसे खुशनुमा नजारा जांजगीर-चांपा में दिखा, जहां 24 घंटे में 80.0 मिमी बारिश ने खेतों को तालाब बना दिया।
बिलासपुर में 74.7 मिमी और गरियाबंद में 68.6 मिमी बारिश दर्ज की गई।

धमतरी, मुंगेली और दुर्ग जैसे मैदानी जिलों में भी मानसून सामान्य के पार पहुंच चुका है।

सारंगढ़-बिलाईगढ़ बना नंबर-1, बलरामपुर में भी बंपर

इस सीजन का हीरो बना है सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला। यहां सामान्य औसत से 177.9 प्रतिशत ज्यादा यानी 512.8 मिमी बारिश हो चुकी है।

बलरामपुर में भी 133.8 प्रतिशत अधिक बारिश से जलाशय लबालब हो गए हैं। राजधानी रायपुर में भी 110.7 प्रतिशत अधिक यानी 354.9 मिमी पानी गिर चुका है, जिससे शहर में हरियाली लौट आई है।

बिलासपुर में बाढ़ जैसे हालात, बस्तर में इंतजार
एक तरफ खुशी है तो दूसरी तरफ चुनौती भी। बिलासपुर में कॉलोनियां ताल-तलैया बन गई हैं, लोगों की परेशानी बढ़ी है और प्रशासन राहत कार्य में जुटा है।

वहीं बस्तर संभाग के सुकमा, बीजापुर और कांकेर में अभी भी बारिश की रफ्तार धीमी है। हालांकि मौसम विभाग ने राहत की खबर दी है। जुलाई के अंतिम सप्ताह में एक मजबूत सिस्टम सक्रिय हो रहा है, जिसका सीधा फायदा बस्तर को मिलेगा और बारिश का कोटा जल्द पूरा हो जाएगा।

जगन्नाथपुरी रथ यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, पुलिस ने श्रद्धालुओं के लिए जारी की जरूरी एडवाइजरी

जगन्नाथपुरी/न्यूज 18 जुलाई 2026

हिंदुओं के प्रथम धाम श्रद्धा स्थल जगन्नाथपुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दौरान भारी भीड़ उमड़ने के बाद ओडिशा पुलिस के महानिदेशक वाईबी खुरानिया ने शुक्रवार को श्रद्धालुओं से खास अपील की है। उन्होंने कहा है कि छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को साथ लेकर पुरी न आएं, ताकि उनकी सुरक्षा और सेहत को कोई खतरा न हो। उन्होंने प्रशासन की तरफ से समय-समय पर जारी होने वाली एडवाइजरी का पालन करने का भी अनुरोध किया।

छोटे बच्चों को न लाने की सलाह
मीडिया से बातचीत में डीजीपी खुरानिया ने कहा कि भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु एक-दो साल से छोटे बच्चों को अपने साथ न लाएं। उनका कहना था कि इतनी बड़ी भीड़ में नन्हे बच्चों की सेहत और सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ जाता है।

ग्रैंड रोड पर उमड़ा जनसैलाब
डीजीपी ने बताया कि बड़ा दांडा यानी ग्रैंड रोड पूरी तरह श्रद्धालुओं से भरा हुआ है और पूरे पुरी शहर में लाखों की तादाद में लोग मौजूद हैं। हर दिशा से लगातार श्रद्धालुओं का आना जारी है और पूरे शहर का माहौल उत्सव और भक्ति से भरा हुआ है। उन्होंने एक बार फिर श्रद्धालुओं से प्रशासन के निर्देशों का पूरी सख्ती से पालन करने की गुजारिश की, ताकि रथ यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। इसके लिए इस साल सुरक्षा और यातायात के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

103 झपटमार गिरफ्तार, सैकड़ों मोबाइल बरामद
इसी बीच पुरी पुलिस ने चोरी-झपटमारी रोकने के लिए चलाए गए विशेष अभियान में अब तक 103 झपटमारों को दबोच लिया है। इनके पास से श्रद्धालुओं के 203 चोरी हुए मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं।

हर कोने पर सुरक्षा का पहरा
पुलिस के मुताबिक ग्रैंड रोड, जगन्नाथ मंदिर परिसर, समुद्र तट, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, पार्किंग स्थल और भीड़भाड़ वाली दूसरी जगहों पर पुलिस टीमें चौबीसों घंटे मुस्तैद हैं। सीसीटीवी कैमरों और खुफिया जानकारी की मदद से हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। पुलिस ने श्रद्धालुओं से भीड़ वाले इलाकों में अपने मोबाइल, पर्स, गहने और कीमती सामान की खास हिफाजत करने की अपील भी की है।

चुनाव आयोग की पहली अखिल भारतीय मीडिया कॉन्फ्रेंस: चुनावों में मीडिया की भूमिका पर चर्चा

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नई दिल्ली/डिजिटलडेस्क -18 जुलाई 2026

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि भारत में चुनाव संविधान, संबंधित कानूनों और आयोग के दिशा-निर्देशों के मुताबिक पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न होते हैं।

भारत निर्वाचन आयोग ने 18 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में देश की पहली अखिल भारतीय मीडिया कॉन्फ्रेंस-2026 आयोजित की। “हितधारकों को जोड़ना, लोकतंत्र को मजबूत करना: चुनावों में मीडिया की भूमिका” थीम पर हुए इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 380 से ज्यादा पत्रकार और मीडियाकर्मी शामिल हुए।

हर स्तर पर चल रही निगरानी
आयोग चीफ ज्ञानेश कुमार ने बताया कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा हर पक्ष लगातार इसकी निगरानी करता रहता है। उन्होंने जानकारी दी कि करीब 95 करोड़ मतदाताओं की सूची लगातार अपडेट होने वाला एक जीवंत दस्तावेज है। इस काम में 12 लाख से ज्यादा बूथ लेवल अधिकारी और 15 लाख से अधिक बूथ लेवल एजेंट लगातार निगरानीकर्ता की भूमिका निभा रहे हैं।

मतदान प्रतिशत को बताया भरोसे की मिसाल
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि हाल में हुए विधानसभा चुनावों में जो रिकॉर्ड मतदान हुआ, वह जनता के भरोसे और लोकतंत्र की मजबूती को दिखाता है। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए देशभर के मतदाताओं का धन्यवाद भी किया।

मीडिया को दी गई विस्तार से जानकारी
कॉन्फ्रेंस का मकसद पत्रकारों को चुनाव प्रक्रिया की गहराई से समझ देना था। इस दौरान संविधान, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951, आयोग के दिशा-निर्देश, ईसीआईनेट प्लेटफॉर्म और चुनाव में तकनीक के इस्तेमाल जैसे विषयों पर जानकारी साझा की गई। साथ ही बूथ लेवल एजेंट, पोलिंग एजेंट और काउंटिंग एजेंट किस तरह पारदर्शिता बनाए रखने और राजनीतिक दलों की भागीदारी सुनिश्चित करने में मदद करते हैं, यह भी समझाया गया।

व्यावहारिक प्रदर्शन भी हुआ
प्रतिभागियों को छोटे-छोटे समूहों में बांटकर मतदाता सूची बनाने, वोटिंग और मतगणना की पूरी प्रक्रिया व्यावहारिक तरीके से दिखाई गई। इसके अलावा चुनावी निगरानी में इस्तेमाल होने वाले जरूरी सरकारी फॉर्मों की जानकारी भी दी गई। कार्यक्रम के आखिर में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ सवाल-जवाब का सत्र भी हुआ।



सुरही नदी पर एनीकट स्वीकृत तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिला रिकॉर्ड भुगतान-कवर्धा-खैरागढ़-छुईखदान-गंडई की खबर

रायपुर-17 जुलाई 2026

केसीजी जिले की खबर में छुईखदान की सुरही नदी पर एनीकट कम काजवे का छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा निर्माण किया जाएगा। इसके लिए 10 करोड़ 13 लाख 77 हजार रूपए स्वीकृत किए गए हैं। योजना के निर्माण से भू-जल संवर्धन, निस्तारी, पेयजल और आवागमन के साथ ही स्थानीय किसानों को स्वयं के साधन से 15.50 हेक्टेयर खरीफ फसलों के लिए सिंचाई की सुविधा मिलेगी।

वहीं कवर्धा खबर में
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा तेंदूपत्ता संग्राहकों को देश में सर्वाधिक 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा पारिश्रमिक दिए जाने का लाभ अब वनांचल क्षेत्रों के हजारों परिवारों तक पहुंच रहा है।

जिले में वर्ष 2026 के तेंदूपत्ता संग्रहण सत्र में न केवल निर्धारित लक्ष्य हासिल किया गया, बल्कि 100.34 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज करते हुए 40 हजार 234 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया गया। संग्रहण कार्य में 32 हजार से अधिक संग्राहकों ने भागीदारी निभाई, जिन्हें लगभग 22 करोड़ 5 लाख रुपये का पारिश्रमिक भुगतान किया गया।

जिला लघु वनोपज सहकारी संघ कवर्धा के अंतर्गत 19 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियों के 24 लॉटों में संग्रहण कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। बढ़ी हुई पारिश्रमिक दर और समय पर भुगतान से वनांचल परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

इसका जीवंत उदाहरण है वनांचल ग्राम लोखन की निवासी श्रीमती नंदनी मरावी का परिवार। उनके पति श्री शिवकुमार मरावी खेती और मजदूरी करते हैं। सात सदस्यीय परिवार के पास लगभग तीन एकड़ कृषि भूमि है, जहां धान और चना की खेती होती है।

नंदनी मरावी बताती हैं कि पहले मेहनत के मुकाबले आय कम मिलती थी, लेकिन अब प्रति मानक बोरा 5,500 रुपये मिलने से उनकी आमदनी बढ़ी है और बच्चों की पढ़ाई, घर के खर्च व खेती की जरूरतें आसानी से पूरी हो जाती हैं।

तेंदूपत्ता संग्राहक नन्दनी मरावी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि बढ़ी हुई पारिश्रमिक दर ने वनवासी परिवारों की मेहनत को सम्मानजनक मूल्य दिलाया है।

कृष्ण-उद्धव संवाद: मित्रता, द्रोपदी संकट,कर्म और साक्षी भाव का गूढ़ रहस्य

अध्यात्म डेस्क 17 जुलाई 2026

भूमिका
द्वापर के युगपुरुष श्रीकृष्ण को धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने राजसूय यज्ञ में अग्रपूज्य के रूप में स्वीकार किया था, सर्वप्रिय होने के कारण समस्त जन उन्हें परम आदर की दृष्टि से देखते थे और उनके मित्र-सखाओं की कोई कमी न थी, किंतु उन सबमें उद्धव ही ऐसे थे जो श्रीकृष्ण के साथ गूढ़ आध्यात्मिक विषयों पर संवाद करने की क्षमता रखते थे, इसीलिए अनेक दिव्य प्रसंग आज भी कृष्ण-उद्धव संवाद के रूप में उपलब्ध हैं।

प्रसंग
महाभारत के अत्यंत मार्मिक प्रसंगों में से एक है उद्धव और श्रीकृष्ण के बीच हुआ यह संवाद। यह केवल एक प्रश्नोत्तर नहीं, बल्कि जीवन के सबसे गहरे रहस्य—कर्म, विवेक और ईश्वरीय साक्षित्व—को उजागर करने वाला अध्यात्मिक मंथन है।

उद्धव की जिज्ञासा
उद्धव, जो स्वयं कृष्ण के परम सखा और शिष्य थे, मन में उठे संशय को छिपा न सके। उन्होंने सीधा प्रश्न किया—यदि सच्चा मित्र वह है जो बिना मांगे सहायता करे, तो द्रोपदी के चीरहरण जैसी घोर विपत्ति में भगवान इतनी देर तक मौन क्यों रहे? युधिष्ठिर को जुए से क्यों नहीं रोका? पासों का परिणाम क्यों नहीं बदला?

यह प्रश्न आज भी हर उस व्यक्ति के मन में उठता है जो कठिन समय में ईश्वर की चुप्पी से व्यथित होता है।

कृष्ण का उत्तर: विवेक ही नियति है
श्रीकृष्ण ने स्पष्ट किया कि सृष्टि का नियम है—जो विवेक और स्वतंत्र इच्छा से निर्णय लेता है, फल भी उसी अनुसार भोगता है। दुर्योधन ने अपनी बुद्धि से शकुनि को चुना; युधिष्ठिर चाहते तो कृष्ण को पासे खेलने के लिए बुला सकते थे। यह दर्शाता है कि ईश्वर मनुष्य की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं करते, जब तक मनुष्य स्वयं उन्हें आमंत्रित न करे।

प्रतीक्षा का रहस्य
सबसे मार्मिक बिंदु यह है कि युधिष्ठिर ने स्वयं कृष्ण से प्रार्थना की थी कि वे बिना बुलाए सभा में प्रवेश न करें। भगवान अपने भक्त के वचन के प्रति इतने प्रतिबद्ध थे कि वे बाहर प्रतीक्षा करते रहे—भले ही भीतर अन्याय हो रहा था। यह हमें सिखाता है कि ईश्वर हमारी स्वतंत्र इच्छा और हमारे वचनों का कितना सम्मान करते हैं।

द्रोपदी की पुकार: शरणागति का क्षण
जिस क्षण द्रोपदी ने अपने बल, अपने वस्त्र, अपने कुल—सबकी सीमा को पार कर पूर्ण समर्पण के साथ “हरि, हरि” पुकारा, उसी क्षण भगवान प्रकट हो गए। यह घटना सिखाती है कि सच्ची शरणागति में समय नहीं लगता—जब अहंकार पूर्णतः विसर्जित होता है, कृपा तत्काल बरसती है।

साक्षी भाव: सबसे गहरा सिद्धांत
उद्धव के आगे पूछने पर कि क्या भगवान सदैव प्रतीक्षा ही करेंगे, कृष्ण ने जो कहा वह संपूर्ण अध्यात्म का सार है—वे प्रत्येक क्षण साक्षी रूप में उपस्थित रहते हैं, हर कर्म देखते हैं, पर हस्तक्षेप कर्मफल के नियम को भंग करके नहीं करते।

निष्कर्ष: स्मरण ही मुक्ति है
इस संवाद का सबसे गहरा उपदेश यही है—मनुष्य पाप तभी करता है जब वह भूल जाता है कि कोई उसे देख रहा है। यदि हर पल यह स्मरण बना रहे कि परमात्मा साक्षी रूप में सदैव उपस्थित हैं, तो आचरण स्वतः शुद्ध हो जाता है। यही उद्धव-गीता का मूल भाव भी है, जिसे आगे चलकर कृष्ण ने विस्तार से समझाया।

मानसून का असर, कई राज्यों में हाई अलर्ट, जानें कहां भारी बारिश तो कहां सूखे जैसे हालात

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मानसून/समाचार- 17 जुलाई 2026

पूर्वी और उत्तर भारत में बारिश का तांडव वहीं
पश्चिम भारत में इस बार जून और जुलाई के बीते दिनों में बारिश कम है हालांकि 16 से 18 जुलाई तक अरब सागर के आसपास भरपूर बारिश की संभावना बताई गई है।

कुल मिलाकर, देश का मौसम इस समय दो अलग तस्वीरें पेश कर रहा है — एक तरफ पूर्वी और पहाड़ी राज्यों में बाढ़ जैसे हालात, तो दूसरी तरफ पश्चिमी भारत के कई हिस्सों में मानसून की बेरुखी।

देश में इस समय दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय है। मौसम विभाग ने 17 जुलाई के लिए कई राज्यों में भारी से अत्यंत भारी बारिश, आंधी-तूफान, बिजली गिरने और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है, साथ ही कुछ राज्यों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन की आशंका भी जताई गई है।

सबसे गंभीर स्थिति ओडिशा और छत्तीसगढ़ की बताई जा रही है। विभाग के मुताबिक ओडिशा के कुछ इलाकों में 21 सेंटीमीटर या उससे अधिक बारिश हो सकती है, जिसके चलते ओडिशा के 23 जिलों और छत्तीसगढ़ के 13 जिलों में फ्लैश फ्लड की गंभीर चेतावनी दी गई है। लोगों से नदी-नालों के पास न जाने की अपील की गई है।

बंगाल की खाड़ी में बने एक डिप्रेशन का असर भी साफ दिख रहा है। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तर ओडिशा-पश्चिम बंगाल तट पर बने निम्न दबाव क्षेत्र के असर से अगले 7 दिनों में पूर्वी-पूर्वोत्तर भारत, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है

पश्चिम बंगाल के पहाड़ी इलाकों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी और अलीपुरदुआर जिलों में 16-17 जुलाई को भारी वर्षा का अलर्ट है, और 19-20 जुलाई को इन्हीं जिलों में अत्यंत भारी बारिश के चलते ऑरेंज-रेड अलर्ट जारी किया गया है।

बिहार और उत्तर प्रदेश भी मानसून की मार से अछूते नहीं हैं। इन दोनों राज्यों समेत झारखंड और पूर्वी भारत के कई इलाकों में तेज बारिश, आंधी-तूफान और बिजली गिरने का अलर्ट जारी है, वहीं दिल्ली में भी मौसम अचानक बदल सकता है।

कहां जारी हुआ रेड अलर्ट
राजस्थान में मानसून का असर तेज तूफान के रूप में देखा जा रहा है, जबकि पहाड़ी राज्यों में लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए रेड अलर्ट पहले ही जारी किया जा चुका है।


कहां है सूखे जैसी स्थिति
एक तरफ जहां पूर्वी और उत्तर भारत बारिश से जूझ रहे हैं, वहीं देश के कुछ हिस्सों में हालात बिल्कुल उलट हैं।
महाराष्ट्र: राज्य के अधिकांश जिलों में औसत से करीब 80 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है, रायगड, मुंबई, पालघर और ठाणे जैसे जिलों में यह कमी 94 से 100 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

राष्ट्रीय स्तर पर देशभर में बारिश की कमी फिर बढ़कर 18 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि जुलाई की शुरुआत में यह घटकर 14 प्रतिशत रह गई थी, पर मध्य जुलाई में मानसूनी हवाएं फिर कमजोर पड़ गईं।

मौसम विभाग का आगे का अनुमान
मौसम विभाग के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम अगले 12 घंटों में और मजबूत होकर उत्तर-पश्चिम दिशा में उत्तर ओडिशा और गंगीय पश्चिम बंगाल की तरफ बढ़ेगा। इसके अलावा 19 जुलाई से एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है, जिससे मौसम में और बदलाव देखने को मिलेगा।

घर के ऊपर छत की टंकी साफ करने का अलग एक आसान तरीका

स्वास्थ्य डेस्क – 17 जुलाई 2026

दैनिक ज़रुरत के हिसाब से लोग घरों में छत पर कहीं बड़े तो कहीं छोटे टैंक लगाये रहते हैं जिसकी सफाई की उतनी ही आवश्यकता है जितना पानी ।अगर आपकी टंकी छत पर रखी है और महीनों से साफ नहीं हुई, तो अब वक्त आ गया है। हर 4-6 महीने में सफाई न हो तो अंदर काई, कीचड़ और बैक्टीरिया जमने लगते हैं, और यही गंदा पानी नल तक पहुंचता है।

शुरू करने से पहले सप्लाई बंद कर दीजिए और नल खोलकर जितना पानी इस्तेमाल हो सके, कर लीजिए। पूरा पानी निकालना जरूरी नहीं, 20-30% बचा रहने पर भी काम चल जाता है।

अब बचा हुआ पानी छोटे पंप या बाल्टी से निकाल लीजिए। बड़ी टंकी है तो सबमर्सिबल पंप लगाना आसान पड़ेगा।

इसके बाद टंकी के लिए बना नॉन-टॉक्सिक क्लीनिंग सॉल्यूशन डालिए। घर में मौजूद बेकिंग सोडा और सिरके का घोल भी चल जाता है, पर मार्केट वाला टैंक-सेफ सॉल्यूशन ज्यादा बेहतर काम करता है।

लंबे हैंडल वाले ब्रश से दीवारों, कोनों और तली को रगड़िए। जहां काई ज्यादा जमी दिखे, वहां थोड़ी और मेहनत लगेगी। सॉल्यूशन डालने के बाद 30-45 मिनट का इंतजार कर लीजिए ताकि जमी गंदगी ढीली हो जाए।

फिर वेट वैक्यूम, पंप या बाल्टी-मग से नीचे की कीचड़ और गंदा पानी बाहर निकाल दीजिए। इसके बाद साफ पानी से एक-दो बार धो लीजिए ताकि सॉल्यूशन का कोई अंश न बचे।

आखिर में टंकी को थोड़ी देर खुला छोड़कर सुखा लीजिए, फिर ढक्कन कसकर बंद कर दीजिए — इससे धूल-मिट्टी और कीड़े अंदर नहीं जा पाएंगे।

अगर सोसाइटी या फैक्ट्री की बड़ी टंकी है और मैन्युअल सफाई मुश्किल लगे, तो प्रोफेशनल सर्विस बुलाई जा सकती है। वो पंप, स्लज पंप और हाई-प्रेशर जेट से सफाई करते हैं, कुछ जगह छोटे रोबोट भी उतारे जाते हैं जो अंदर घूमकर दीवारें साफ करते हैं।

एक आखिरी बात — अगर कभी पानी में बदबू या अजीब रंग दिखे, तो 4-6 महीने का इंतजार मत कीजिए, तुरंत सफाई करा लीजिए।