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Sunday, July 19, 2026

स्पेशल लोक अदालत में चेक बाउंस के 12 प्रकरण निपटे, 81.98 लाख का अवार्ड पारित

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बेमेतरा-छत्तीसगढ़/ 18 जुलाई 2026

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा), नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के मार्गदर्शन तथा माननीय श्रीमती सरोज नंद दास, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बेमेतरा के निर्देशन में शनिवार को जिला न्यायालय परिसर, बेमेतरा में “स्पेशल लोक अदालत” का सफल आयोजन किया गया।

मुख्य अतिथि माननीय न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधिपति, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर रहे। इस अवसर पर जिला न्यायालय बेमेतरा से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती सरोज नंद दास सहित अन्य न्यायिक अधिकारीगण भी वर्चुअली समारोह से जुड़े।

लोक अदालत में परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के कुल 12 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण हुआ, जिनमें 81 लाख 98 हजार 960 रुपये की राशि के अवार्ड पारित किए गए। चेक अनादरण से संबंधित लंबित मामलों का निराकरण आपसी समझौते, सौहार्दपूर्ण, सरल, त्वरित एवं कम खर्चीली प्रक्रिया के माध्यम से किया गया।

इस दौरान न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, बैंक प्रतिनिधियों, न्यायालयीन कर्मचारियों, पैरालीगल वॉलेंटियर्स तथा पक्षकारों की सक्रिय सहभागिता रही।

अपील प्रकरण में 11.50 लाख का विवाद 2.50 लाख रुपये में सुलझा

खण्डपीठ क्रमांक-01 (पीठासीन अधिकारी श्री देवेंद्र कुमार, प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश) के समक्ष लंबित अपील प्रकरण क्रमांक 95/2024 में विचारण न्यायालय द्वारा पूर्व में अभियुक्त को 11.50 लाख रुपये प्रतिकर अदा करने का आदेश दिया गया था, जिसमें भुगतान न करने पर तीन माह के कारावास का प्रावधान भी था।

स्पेशल लोक अदालत में समझाइश के बाद यह राशि घटाकर 2.50 लाख रुपये में राजीनामा हुआ और अवार्ड पारित किया गया। इसी तरह दो अन्य अपील प्रकरण भी आपसी समझौते से निपटाए गए।

इलेक्ट्रॉनिक कांटा मशीन व कपड़ा दुकान हेतु ली गई राशि का विवाद भी सुलझा

खण्डपीठ क्रमांक-02 में लंबित प्रकरण क्रमांक 3922/2022 में अभियुक्त ने परिचय के आधार पर इलेक्ट्रॉनिक कांटा मशीन व कपड़ा दुकान का सामान खरीदने हेतु परिवादी से उधार राशि ली थी, जिसे समय पर न लौटाने पर चेक बैंक से अनादरित हो गया और मामला अदालत पहुंचा। लोक अदालत में समझाइश पर दोनों पक्षों ने स्वतंत्र सहमति से राजीनामा किया, जिससे विवाद सौहार्दपूर्ण ढंग से समाप्त हो गया।

इससे यह फिर सिद्ध हुआ कि आपसी सहमति से लंबित विवादों का त्वरित व प्रभावी समाधान संभव है।
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