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Sunday, November 1, 2026
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तमिलनाडु सीएम संशय:”TVK को 10 विधायकों की कमी, DMK-AIADMK गठबंधन भी बहुमत से 6 दूर”

डिजिटल खबर – 09/05/2026

जारी खबर सूत्रों पर तमिलनाडु में थलपति विजय (TVK प्रमुख) ने राज्यपाल को सरकार बनाने का दावा पेश किया है, लेकिन अभी तक शपथ के लिए आधिकारिक आमंत्रण नहीं मिला।राज्यपाल ने 118 विधायकों के समर्थन पत्र मांगे हैं, जबकि विजय फ्लोर टेस्ट पर बहुमत साबित करने को तैयार हैं।

राज्यपाल का रुख
TVK ने 108 सीटें जीती हैं, बहुमत (118) से 10 कम। राज्यपाल ने दो बार दावा लौटाया और पूछा कि 113 विधायकों से स्थिर सरकार कैसे चलेगी। विजय ने फ्लोर टेस्ट की पेशकश की, लेकिन राज्यपाल समर्थन पत्र पर अड़े हैं। 15 दिन का स्पष्ट उल्लेख नहीं, पर तत्काल बहुमत साबित करने का दबाव है।

DMK-AIADMK गठबंधन की अटकलें
धुर विरोधी DMK और AIADMK के बीच विजय को रोकने के लिए बातचीत की खबरें हैं।AIADMK ने दावा किया कि चर्चा चल रही, इससे तमिलनाडु राजनीति में उलटफेर संभव। छोटे दल (VCK, वामपंथी) किंगमेकर बन सकते हैं।

थलापति विजय नेता टीवीके(TVK)की बढ़ती लोकप्रियता ने राज्य के स्थापित द्रविड़ दलों को असुरक्षित कर दिया है।दिनाकरण जानते हैं कि अगर विजय सत्ता में आते हैं तो पारंपरिक दलों (AIADMK और AMMK) का वजूद खतरे में पड़ सकता है। ऐसे में ईपीएस को समर्थन देना ‘दुश्मन का दुश्मन दोस्त’ वाली कहावत को चरितार्थ करता है।

वर्तमान स्थिति
9 मई दोपहर तक कोई अंतिम फैसला नहीं। कानूनी विकल्प खुले हैं अगर राज्यपाल दावा खारिज करें। राजनीतिक हलचल तेज, कांग्रेस समर्थन के बावजूद अस्पष्टता बरकरार।

मंथन केरल सीएम: UDF की ऐतिहासिक जीत, मुख्यमंत्री पद के लिए तीन नाम सबसे आगे

डिजिटल खबर – 09 मई 2026

केरल विधानसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस नीत UDF गठबंधन ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। UDF ने 140 में से 102 सीटें जीतीं, जो 1977 के बाद सबसे बड़ा जनादेश है। इससे एक दशक से चले आ रहे वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (LDF) के शासन का अंत हो गया। अकेले कांग्रेस ने 63 सीटें हासिल कीं, जबकि LDF महज 35 सीटों पर सिमट गई।

अब सबकी नजर मुख्यमंत्री पद पर है। कांग्रेस ने चुनाव से पहले कोई CM चेहरा घोषित नहीं किया था, बल्कि सामूहिक नेतृत्व को आगे रखा था।अब तीन नाम सबसे प्रमुख हैं:

वी.डी. सतीशन — विपक्ष के पूर्व नेता सतीशन को मुख्यमंत्री पद का सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा है। UDF की 2016 और 2021 की लगातार हार के बाद उन्होंने पार्टी संगठन को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभाई। वे पारावूर सीट से जीते हैं।

रमेश चेन्निथला — वरिष्ठ नेता चेन्निथला 2016-2021 के बीच विपक्ष के नेता रह चुके हैं और पार्टी संगठन में उनकी मजबूत पकड़ है। वे हरिपद सीट से विजयी हुए।

के.सी. वेणुगोपाल — AICC महासचिव वेणुगोपाल ने चुनाव प्रचार में अहम भूमिका निभाई, लेकिन वे विधानसभा चुनाव नहीं लड़े। अलप्पुझा से सांसद होने के कारण उनकी राह जटिल है।

पार्टी पर्यवेक्षकों अजय माकन और मुकुल वासनिक ने विधायकों से मुलाकात के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को रिपोर्ट सौंप दी है।

बंगाल में भाजपा सरकार की तैयारी सीएम बनेंगे शुभेंदु अधिकारी

डिजिटल डेस्क – 09/05/2026

बंगाल की राजनीति में बदलती तस्वीर के साथ सीएम के लिए शुभेंदु की ताजपोशी तय।भारतीय जनता पार्टी की बढ़ती जनाधार और ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का बहुमत से खिसकना यह बंगाल की राजनीति के लिए एक दिलचस्प मोड़ है। अब बंगाल की राजनीति नई दिशा और नई सोच के साथ आगे बढ़ने को तैयार है । बंगाल में सत्ता परिवर्तन राष्ट्रीय राजनीति को एक नई दिशा दे रही है कि जनता अब चाहती क्या है।

पश्चिम बंगाल में भाजपा की हालिया जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुना गया है, जो उन्हें अगले मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ करता है। शुभेंदु ममता के पूर्व करीबी थे, लेकिन अभिषेक बनर्जी के प्रभाव से नाराज हो पार्टी छोड़ी। भाजपा ने हालिया 2026 चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल कर तृणमूल के 15 साल के शासन को उखाड़ फेंका।

शुभेंदु का भाजपा में प्रवेश होना ही सत्ता परिवर्तन का इशारा था।दिसंबर 2020 में तृणमूल कांग्रेस से नाराजगी के चलते शुभेंदु अधिकारी ने सभी पदों से इस्तीफा दिया और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा जॉइन की। 2021 चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हराकर विपक्षी नेता बने।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार राज्य में पहली बार भाजपा में सरकार बनाने की तैयारी चल रही है ।राज्य में चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है।

कई जगहों पर जश्न मनाया जा रहा है, वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव आने वाले समय में पूर्वी भारत की राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है। हालांकि विपक्षी दलों ने चुनाव परिणाम और सरकार गठन को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

पीएम मोदी बोले: “सोमनाथ केवल मंदिर नहीं, भारत की अमर चेतना का प्रतीक”

डिजिटल डेस्क – 08/05/2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर को भारतीय सभ्यता, आत्मबल और सांस्कृतिक स्वाभिमान का प्रतीक बताते हुए कहा कि सदियों के संघर्ष और आक्रमणों के बावजूद सोमनाथ की आस्था कभी समाप्त नहीं हुई। 11 मई को पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 2026 की शुरुआत में उन्हें “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” में शामिल होने का सौभाग्य मिला था और अब वे एक बार फिर उस ऐतिहासिक क्षण को जीने जा रहे हैं, जब भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर का लोकार्पण किया था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की शाश्वत चेतना और अटूट संकल्प का प्रतीक है। समुद्र तट पर स्थित यह धाम सदियों से यह संदेश देता आया है कि तूफान कितने भी बड़े क्यों न हों, मानव साहस और आत्मबल हर बार फिर उठ खड़ा होता है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ की लहरें मानवीय चेतना के अमर होने का उद्घोष करती हैं।

पीएम मोदी ने अपने संदेश में उन महान विभूतियों को भी नमन किया, जिन्होंने सोमनाथ की रक्षा और पुनर्निर्माण में योगदान दिया। उन्होंने राजा भोज, भीम प्रथम, कर्णदेव सोलंकी, जयसिंह सिद्धराज और अनेक वीर शासकों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महापुरुषों ने भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए संघर्ष किया। वहीं अहिल्या बाई होलकर के योगदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने कठिन समय में भी भक्ति और परंपरा की ज्योति जलाए रखी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास विध्वंस से सृजन तक की यात्रा का प्रतीक है और यह 75वीं वर्षगांठ भारत की सांस्कृतिक शक्ति और पुनर्जागरण का प्रेरणादायी उत्सव बनेगी।

ईरान-अमेरिका तनाव का भारत पर असर: तेल कीमतों से व्यापार तक बढ़ सकती हैं चुनौतियां

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डिजिटल डेस्क – 08/05/2026

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत पर भी दिखाई देने की आशंका जताई जा रही है। खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज होने और समुद्री मार्गों पर खतरा बढ़ने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात लंबे समय तक तनावपूर्ण रहे तो देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों से लेकर महंगाई तक पर असर पड़ सकता है।

दरअसल, भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में खाड़ी देशों से आयात करता है। फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल हैं। ऐसे में यदि वहां सैन्य संघर्ष बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार तेल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिससे खाद्य पदार्थों समेत रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। इससे महंगाई दर पर दबाव बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा शेयर बाजार में भी अस्थिरता देखने को मिल सकती है, क्योंकि वैश्विक निवेशक ऐसे समय सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं।

भारत का खाड़ी देशों के साथ व्यापारिक और रणनीतिक संबंध भी काफी मजबूत हैं। लाखों भारतीय नागरिक यूएई, सऊदी अरब, कतर और अन्य खाड़ी देशों में काम करते हैं। यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है, तो वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा और रोजगार को लेकर भी चिंता बढ़ सकती है।

हालांकि भारत सरकार हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय और संबंधित एजेंसियां खाड़ी क्षेत्र की स्थिति की निगरानी कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत फिलहाल संतुलित कूटनीतिक रुख अपनाते हुए अपने आर्थिक हितों और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देगा।

सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट:खाड़ी में बढ़ा तनाव: अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने दी कड़ी चेतावनी

डिजिटल डेस्क – 08/05/2026

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक महत्व वाले केशम द्वीप और बंदर अब्बास पोर्ट के आसपास सैन्य कार्रवाई की है। इन हमलों के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात को लेकर चिंता बढ़ गई है।

बताया जा रहा है कि अमेरिकी कार्रवाई का उद्देश्य क्षेत्र में कथित सैन्य गतिविधियों और समुद्री सुरक्षा खतरों को रोकना था। हालांकि, ईरान ने इस हमले को अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसी कार्रवाई दोबारा हुई तो उसका “कड़ा और निर्णायक जवाब” दिया जाएगा।

तनाव बढ़ने के बाद फारस की खाड़ी में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। कई अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी कंपनियों ने अपने जहाजों के रूट की समीक्षा शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर विवाद जारी है। हालिया घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच टकराव की आशंकाओं को और बढ़ा दिया है। संयुक्त राष्ट्र समेत कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की है।

इधर, वैश्विक बाजारों में भी इस तनाव का असर दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है, जबकि निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ने से कई शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कुछ दिन मध्य पूर्व की स्थिति के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

दिल दुनिया और दौलत:”दिल की दस्तक चाहत से आह तक”

लेख/आलेख – 08/05/2026

हम खाली हाथ आते हैं, पर एक धड़कता हुआ ‘दिल’ साथ लाते हैं। बचपन में यह दिल साफ होता है, इसे बस प्यार की भाषा समझ आती है। लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, समाज और दुनियादारी की दौड़ हमें ‘भौतिकता’ के बाजार में खड़ा कर देती है।

मासूमियत का विदाई समारोह

जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही हम दिल पर ‘चाहत’ का एक अदृश्य बोझ डालना शुरू कर देते हैं। जिसे हम ‘तरक्की’ या ‘दौलत’ कहते हैं, असल में वह दिल के ऊपर रखी गई एक ऐसी भारी ईंट है, जो उसकी स्वाभाविक धड़कन को दबा देती है।

चाहत की आह

इंसान की त्रासदी देखिए—दौलत की ‘चाह’ ही अंत में उसकी ‘आह’ बन जाती है। हम महल तो खड़ा कर लेते हैं, पर उस घर में सुकून से धड़कने वाला दिल कहीं खो जाता है। हमने अपनी चाहतों के महल इतनी ऊंचाइयों पर बना लिए हैं कि अब वहां तक दिल की आवाज पहुँच ही नहीं पाती।

वह राज, जो राज ही रह गया

पुरानी कहावतों में छिपा वह राज आज की पीढ़ी भूल चुकी है कि:

“दिल की नजर से, नजरों के दिल से, यह बात क्या है, यह राज क्या है… कोई हमें बता दे।”

वह राज बड़ा सरल था—कि दिल देखने के लिए नहीं, महसूस करने के लिए बना था। जब नजरें सिर्फ दौलत और रुतबा देखने लगें, तो दिल अंधा हो जाता है। हमें वापस उस दौर की ओर देखना होगा जहाँ इंसान की पहचान उसके बैंक बैलेंस से नहीं, बल्कि उसके दिल की अमीरी से होती थी।

छत्तीसगढ़ी अंचल में कहावत —

“सोना-चांदी तो कोठार में रह जाही, संग मा खाली मया और ये दिल के धड़कन जाही।” (सोना-चांदी तो कोठार में रह जाएगा, साथ में सिर्फ प्रेम और दिल की धड़कन जाएगी)।

एक सवाल मै करूं “क्या आज आपने अपने दिल से पूछा कि वह बोझ तले दबा है या सुकून में?”

दौलत की दौड़ में दिल को पीछे न छोड़ें।


दिल दुनिया और दौलत : एक अनकही हकीकत

लेख/आलेख- 08/05/2026

जीवन में तीन चीज ही है दिल दुनिया और दौलत चौथा अगर है तो वह इन तीनों के पीछे ही रहेगा। यही जिंदगी के धरती,स्वर्ग और नरक है।

असल चाहत: कटी पतंग नहीं, खुला आसमान है।
दिल तो बस आजाद रहना चाहता है—हवाओं में उड़ना, नीले आकाश में तैरना और उमंगों की गलियों में अपनी खुशबू बिखेरना। लेकिन जब हम इसे दुनियादारी की बेड़ियों में जकड़ देते हैं और हमारी उम्मीदें टूटती हैं, तब यही दिल मायूस होकर कहने लगता है:


“ना कोई उमंग है, ना कोई तरंग है, मेरी जिंदगी क्या… एक कटी पतंग है।”


लेकिन क्या कभी किसी ने गौर किया है कि दिल क्या चाहता है कभी दिल की सुनो “दिल क्या चीज़ है जान लीजिए, बस एक बार मेरा कहा मान लीजिए।”


अगर हम इस पूरी सृष्टि को गौर से देखें, तो धरती, स्वर्ग और नरक की सारी परिकल्पनाएं हमारे भीतर ही सिमटी हैं। मानव जीवन की शुरुआत ‘दिल’ से होती है, क्योंकि जब तक यह धड़कता है, तभी तक अस्तित्व है। दिल वह उपजाऊ ज़मीन है, जहाँ विचारों के बीज बोए जाते हैं; जैसा बीज आप इसमें डालेंगे, फसल वैसी ही लहलहाएगी।

जब चाहत ‘दौलत’ बन जाती है


जब तक हम दिल की सुनते हैं, हम जीवित और जीवंत हैं। लेकिन जैसे ही हम ‘दौलत’ और भौतिकता की बात करने लगते हैं, तो समझ लीजिए कि दिल पर किसी बाहरी ताकत का कब्जा हो गया है। दिल कभी नहीं बदलता, वह तो अपनी सहज लय में धड़कता रहता है, लेकिन उसमें ‘चाहत’ के बीज बाहरी दुनिया डाल देती है। “जैसी चाह, वैसी राह”—जब दौलत आती है, तो भोग की इच्छा जागती है, फिर महफिलें सजती हैं, पराए अपने बनते हैं और यहीं से ‘दुनियादारी’ का जन्म होता है।

दिल की अपनी कोई भाषा नहीं


दिल बचपन में भी वही था, जवानी में भी वही है और बुढ़ापे में भी वही रहेगा। वह तो बस धड़कना जानता है। हम अक्सर धोखा खा जाते हैं कि दिल क्या चाहता है। असल में, खुशी और गम दिल की उपज नहीं हैं, ये तो हमारे अपने दिए हुए नाम हैं। हम अपनी उम्मीदों और चिंताओं का बोझ इस मासूम दिल पर डाल देते हैं और इसे उन बातों से परेशान करते हैं जिनका इससे कोई सरोकार ही नहीं।
हम जैसा सोचते है

सच तो यह है कि दिल को कटी पतंग हमने बनाया है। अगर इसे इसकी सहजता में रहने दिया जाए, तो यह आज भी वही ‘स्वर्ग’ पैदा कर सकता है जिसका सपना हम बाहर ढूंढते हैं।


जल,थल,नभ में महिला शक्ति से बढ़ेगी राष्ट्र की शक्ति: समुद्री क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी 340% बढ़ी

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डिजिटल डेस्क, 08 मई 2026/नई दिल्ली/रायपुर:

देश के विकास में नारी शक्ति अब केवल घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि समंदर की लहरों पर भी अपनी कामयाबी के झंडे गाड़ रही है। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने नई दिल्ली में आयोजित ’10वें हिंद महासागर संवाद’ में एक चौंकाने वाला और सुखद आंकड़ा पेश किया है। उन्होंने बताया कि साल 2020 के बाद से भारत के समुद्री क्षेत्र (Maritime Sector) में महिलाओं की भागीदारी में 340 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि हुई है।

नारी शक्ति: समुद्री विकास का मुख्य स्तंभ

केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘नारी शक्ति’ को भारत के समुद्री विकास का केंद्रीय स्तंभ माना गया है। ‘सागर में सम्मान’ जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं के लिए गरिमा और समावेशिता के नए द्वार खुले हैं। यह बदलाव न केवल आर्थिक है, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण का भी एक बड़ा उदाहरण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी देश अकेले समुद्री चुनौतियों का सामना नहीं कर सकता, इसके लिए महिलाओं सहित समाज के हर वर्ग की सामूहिक भागीदारी जरूरी है।

छत्तीसगढ़ का गौरव: राजनीति से लेकर समाज सेवा तक बढ़ता प्रभाव,छत्तीसगढ़ की बेटियाँ भी नहीं हैं पीछे।
जब हम राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं की इस कामयाबी को देखते हैं, तो हमारे छत्तीसगढ़ की महिलाओं का योगदान भी गर्व करने लायक है। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और शहरी इलाकों में महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक स्तर पर प्रभाव तेजी से बढ़ा है। आज प्रदेश की महिलाएँ केवल खेती-किसानी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं।

इतना ही नहीं, छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी महिलाएँ अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं। पंचायती राज से लेकर विधानसभा तक, नीति निर्धारण में उनकी आवाज अब पहले से कहीं ज्यादा बुलंद है। “महिला शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है” का नारा आज छत्तीसगढ़ की गलियों में हकीकत बनता दिख रहा है।

क्या है ‘हिंद महासागर संवाद’?
बता दें कि भारत साल 2025-27 के लिए हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (IORA) की अध्यक्षता कर रहा है। इस मंच का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी और आपदा प्रबंधन के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। भारत इस क्षेत्र में एक ‘नेट सुरक्षा प्रदाता’ की भूमिका निभा रहा है, जहाँ विकास के साथ-साथ मानवीय पहलू को प्राथमिकता दी जाती है।

जन चौपाल 36 सार:हिंद की बेटियां
समुद्री क्षेत्र में 340% की वृद्धि यह दर्शाती है कि भारत की बेटियाँ अब हर कठिन चुनौती के लिए तैयार हैं। चाहे वह समंदर की लहरें हों या छत्तीसगढ़ की राजनीतिक और सामाजिक जमीन, महिलाओं का बढ़ता दखल एक उज्जवल और सुरक्षित भारत की नींव रख रहा है।






भारत खेलों का देश-खेलों से बदलेगी समाज की सूरत: खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया

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डिजिटल डेस्क, 08 मई 2026

केंद्रीय खेल मंत्री ‘बिचारपुर’ के फुटबॉल जुनून को सराहा।
नई दिल्ली: केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने जमीनी स्तर पर खेलों के बढ़ते प्रभाव और सामाजिक बदलाव पर गहरा भरोसा जताया है। दिल्ली में आयोजित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘बिचारपुर – जुनून फुटबॉल का’ की विशेष स्क्रीनिंग के दौरान उन्होंने कहा कि खेल अब केवल मैदान की हार-जीत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये समाज को एक सूत्र में पिरोने और युवाओं को नई दिशा देने का सशक्त माध्यम बन चुके हैं।

फिल्म देखने के बाद अपने संबोधन में डॉ. मांडविया ने पुरानी यादें साझा करते हुए कहा कि करीब 25 साल पहले जो युवा गलत रास्तों पर भटक रहे थे, खेल ने उनका जीवन पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि खेल से अनुशासन, मानसिक मजबूती और टीम भावना पैदा होती है, जो युवाओं को एक जिम्मेदार नागरिक और नेता के रूप में तैयार करती है।

मंत्री जी ने कर्नाटक के कूर्ग (कोडवा समुदाय) की हॉकी संस्कृति का जिक्र करते हुए बताया कि जब समाज खुद खेल अभियानों का नेतृत्व करता है, तो उससे राष्ट्र के प्रति गौरव और आपसी भाईचारे की भावना बढ़ती है। उन्होंने कहा कि एक खिलाड़ी भले ही निजी उपलब्धि के लिए खेलता हो, लेकिन उसका हर प्रयास अंततः तिरंगे की शान बढ़ाता है।

डॉक्यूमेंटेशन और सम्मान पर जोर
उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि खेल जगत की ऐसी प्रेरक कहानियों का दस्तावेजीकरण (Documentation) होना बेहद जरूरी है। जब किसी संघर्ष और सफलता को फिल्म या लेख के जरिए सहेजा जाता है, तो वह आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बन जाता है। साथ ही, उन्होंने स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं को सम्मानित करने की बात कही, ताकि युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ सके।

जनचौपाल-36
“…मंत्री जी ने कूर्ग के कोडवा समुदाय का उदाहरण दिया, लेकिन हमारे छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में भी फुटबॉल का ऐसा ही जुनून देखा जाता है। बस्तर से लेकर सरगुजा तक, मैदानों में युवाओं की ऊर्जा देखते ही बनती है। रायपुर के मैदानों में तो हमने कई बार गार्जियन के साथ फुटबॉल मैच देखे हैं, जहाँ खिलाड़ियों का उत्साह किसी अंतरराष्ट्रीय मैच से कम नहीं होता। यह इस बात का प्रमाण है कि यदि हमारे स्थानीय खिलाड़ियों को सही मंच मिले, तो वे देश का नाम रोशन कर सकते हैं।”