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बेमेतरा पुलिस की बड़ी कार्रवाई ऑनलाइन IPL सट्टा रैकेट का भंडाफोड़, 10 आरोपी गिरफ्तार

बेमेतरा, 07 मई 2026

पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) रामकृष्ण साहू के निर्देशन में बेमेतरा पुलिस द्वारा अवैध गतिविधियों के खिलाफ लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में थाना सिटी कोतवाली बेमेतरा पुलिस ने मोबाइल के माध्यम से संचालित ऑनलाइन IPL क्रिकेट सट्टा रैकेट का पर्दाफाश करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 10 स्क्रीन टच मोबाइल, नगद राशि सहित कुल 2 लाख 35 हजार रुपये की सामग्री जब्त की गई है।

यह कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश कुमार यादव , एसडीओपी बेमेतरा भूषण एक्का एवं एसडीओपी विनय कुमार बेरला के मार्गदर्शन में संचालित विशेष अभियान के तहत की गई। पुलिस द्वारा जिले में अवैध जुआ, सट्टा एवं अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर सतत निगरानी रखी जा रही है।

पुलिस को 6 मई 2026 को पेट्रोलिंग के दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि बेमेतरा निवासी महेन्द्र सोनी, बीटीआई ग्राउंड कोबिया क्षेत्र में मोबाइल के जरिए ऑनलाइन IPL क्रिकेट सट्टा खेल रहा है और अन्य लोगों को भी सट्टा खिला रहा है। सूचना के आधार पर थाना सिटी कोतवाली पुलिस टीम ने मौके पर दबिश दी, जहां आरोपी को मोबाइल फोन के माध्यम से ऑनलाइन सट्टा संचालित करते रंगे हाथों पकड़ा गया।

पुलिस ने आरोपी महेन्द्र सोनी के कब्जे से एक स्क्रीन टच मोबाइल फोन तथा 40 हजार रुपये नगद जब्त किए। प्रारंभिक कार्रवाई के बाद मामले की विस्तृत विवेचना की गई, जिसमें 9 अन्य आरोपियों की संलिप्तता सामने आई। इसके बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 9 अतिरिक्त मोबाइल फोन बरामद किए।

पूरे प्रकरण में कुल 10 आरोपियों से 10 स्क्रीन टच मोबाइल फोन, जिनकी अनुमानित कीमत 1 लाख 95 हजार रुपये , तथा 40 हजार रुपये नगद सहित कुल 2 लाख 35 हजार रुपये की सामग्री जब्त की गई है।

थाना सिटी कोतवाली बेमेतरा में आरोपियों के विरुद्ध छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम 2022 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई कर गिरफ्तार सभी आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

गिरफ्तार आरोपियों के नाम
महेन्द्र सोनी,भोजराम साहू उर्फ भोजू,अरविंद वर्मा,राहुल वर्मा
राजेश वर्मा,गिरधारी वर्मा,संजय मिर्झा,गौरव वर्मा,तुस्कंद विनायक साहू,नीलेश साहू ।

सराहनीय भूमिका
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी सिटी कोतवाली बेमेतरा निरीक्षक , सहायक उप निरीक्षक सुरेश सिंह, जितेंद्र कश्यप, प्रधान आरक्षक रघुराज यदु तथा थाना स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष पूर्ण: PM मोदी ने सशस्त्र बलों को सलाम किया

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नई दिल्ली – 07/05/2026

ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय सशस्त्र बलों के साहस, सटीकता और दृढ़ संकल्प की सराहना की। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों ने पहलगाम में निर्दोष भारतीयों पर हमला करने वालों को मुंहतोड़ जवाब दिया और पूरा देश उनके शौर्य को नमन करता है।

आतंकवाद के विरुद्ध भारत की अटूट प्रतिबद्धता

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ भारत की कड़ी कार्रवाई और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इस अभियान ने सशस्त्र बलों की पेशेवर क्षमता, तत्परता और समन्वित शक्ति को उजागर किया तथा रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के प्रयासों को भी रेखांकित किया।

संकल्प पर अडिग

श्री मोदी ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद को हराने और उसे पनपने में सहायक पूरे तंत्र को समूल नष्ट करने के संकल्प पर भारत पहले की तरह ही दृढ़ है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक भारतीय को अपने सशस्त्र बलों पर गर्व है।

नागरिकों से सोशल मीडिया पर समर्थन का आग्रह

सशस्त्र बलों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए प्रधानमंत्री ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी डिस्प्ले पिक्चर को उनके द्वारा साझा की गई विशेष तस्वीर से बदलें।

मोबाइल कनेक्टिविटी से अबूझमाड़ में डिजिटल सूर्योदय: ताहकाडोंड में पहली बार गूंजी मोबाइल की घंटी

रायपुर, 7 मई 2026

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग का वह ‘अबूझ’ इलाका, जो दशकों तक संचार से कटा रहा, अब डिजिटल भारत से जुड़ गया है। नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड के सुदूर वनांचल गांव ताहकाडोंड में मोबाइल टावर लगने के बाद पहली बार मोबाइल की घंटी गूंजी। सदियों से सन्नाटे में डूबे इस क्षेत्र के लिए यह सिर्फ सिग्नल नहीं, विकास की मुख्यधारा से जुड़ने की शुरुआत है।

पहाड़ चढ़ने की मजबूरी खत्म
अब तक ग्राम पंचायत मेटानार के आश्रित गांव ताहकाडोंड, कदेर और ब्रेहबेड़ा ‘नो नेटवर्क ज़ोन’ में थे। एक कॉल के लिए ग्रामीणों को ऊंची पहाड़ियों पर चढ़ना पड़ता था या किलोमीटरों पैदल चलकर मुख्य सड़क तक जाना पड़ता था। नए टावर से करीब 400 ग्रामीण सीधे लाभान्वित हुए हैं। अब वे घर बैठे अपनों से जुड़ रहे हैं।

आपात सेवा और ई-गवर्नेंस को मिली रफ्तार
कनेक्टिविटी का असर सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं है। अब आपात स्थिति में ग्रामीण सीधे 108 एंबुलेंस बुला सकते हैं। समय पर इलाज मिलने से मातृ-शिशु मृत्यु दर घटने और गंभीर बीमारियों के बेहतर प्रबंधन की उम्मीद है।

इंटरनेट पहुंचने से ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और सरकारी योजनाओं के आवेदन भी घर बैठे संभव हो गए हैं। इससे पारदर्शिता बढ़ी है, बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई है और शासन की योजनाएं सीधे हितग्राहियों तक पहुंच रही हैं।

बदल रही सामाजिक-आर्थिक तस्वीर
ताहकाडोंड के ग्रामीणों ने इसे ‘नए युग की शुरुआत’ बताया है। मोबाइल नेटवर्क से शिक्षा, स्वास्थ्य में सुधार के साथ स्थानीय उत्पादों के लिए बाजार और युवाओं के लिए सूचना के नए रास्ते खुलेंगे।

अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में टावर की स्थापना साबित करती है कि भौगोलिक बाधाएं अब विकास की राह नहीं रोक सकतीं। ‘नो सिग्नल’ से ‘फुल कनेक्टिविटी’ तक का यह सफर तकनीक से ज्यादा, भरोसे और समावेशी विकास की कहानी है।

छत्तीसगढ़ की बेटियों की शिक्षा में ऊंची उड़ान: साइकिल ने बदली तस्वीर

रायपुर, 07 मई 2026

छत्तीसगढ़ की बेटियां अब सपने देखना ही नहीं, उन्हें पूरा करना भी सीख रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में “संकल्प से सिद्धि” की भावना के साथ चलाई जा रही सरस्वती साइकिल योजना ने प्रदेश की बेटियों की शिक्षा की दिशा ही बदल दी है।

राज्य में उच्च माध्यमिक स्तर पर छात्राओं का नामांकन अब 73.6 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो राष्ट्रीय औसत 58.2 प्रतिशत से कहीं आगे है। यह महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उन हजारों बेटियों के हौसले की कहानी है जो कभी दूरी और संसाधनों की कमी के कारण स्कूल का रास्ता छोड़ देती थीं।

ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में स्कूल की दूरी बालिका शिक्षा की सबसे बड़ी बाधा रही है। कक्षा 9वीं में प्रवेश के साथ ही मुफ्त साइकिल मिलने से यह भौगोलिक रुकावट दूर हो गई। अब दूरदराज के गांवों की छात्राएं भी आत्मविश्वास के साथ उच्च माध्यमिक विद्यालयों तक पहुंच रही हैं। ड्रॉप-आउट दर में भारी कमी और उपस्थिति में उल्लेखनीय सुधार इसका प्रमाण है।

शैक्षणिक सत्र 2025-26 में 1.5 लाख साइकिलों के वितरण का लक्ष्य लगभग पूर्ण हो चुका है।

वर्ष 2010-11 में जहां उच्च माध्यमिक स्तर पर छात्राओं का नामांकन मात्र 33.5 प्रतिशत था, वह 2021-22 तक 68.1 प्रतिशत और अब 73.6 प्रतिशत तक पहुंच गया है। 2004-05 में शुरू हुई यह योजना दिसंबर 2023 में साय सरकार के आते ही नई ऊर्जा के साथ पुनः लागू की गई।

मुख्यमंत्री का संकल्प स्पष्ट है — “छत्तीसगढ़ की बेटियां, विशेषकर आदिवासी अंचलों की छात्राएं, शिक्षा में देश के किसी भी राज्य से पीछे न रहें।”

छत्तीसगढ़ की यह उपलब्धि यह साबित करती है कि संवेदनशील नीति और दृढ़ नेतृत्व मिलें, तो एक साइकिल भी सामाजिक बदलाव की धुरी बन सकती है।


कुष्ठ से जंग चुनौती या कलंक: रायपुर में जुटे विशेषज्ञ, जमीनी हकीकत पर मंथन

रायपुर, 07 मई 2026

कुष्ठ रोग — जिसे दशकों से सामाजिक कलंक और चिकित्सकीय चुनौती दोनों रूपों में देखा जाता रहा है — उसे जड़ से खत्म करने की मुहिम में आज रायपुर एक अहम पड़ाव बना। सर्किट हाउस, सिविल लाइन्स में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यशाला महज एक सरकारी आयोजन नहीं थी, बल्कि यह उस व्यवस्था की परीक्षा भी थी जो कागज पर तो मजबूत दिखती है, लेकिन गांव-गांव तक पहुंचते-पहुंचते कहीं कमजोर पड़ जाती है।

प्रदेशभर से आए जिला कुष्ठ अधिकारी, स्वास्थ्य विशेषज्ञ और WHO तथा ILEP जैसी संस्थाओं के प्रतिनिधि एक ही मेज पर बैठे — और बात सिर्फ उपलब्धियों की नहीं, बल्कि उन जमीनी अड़चनों की भी हुई जो आंकड़ों में नहीं दिखतीं।

असली चिंता: दवा का दुष्प्रभाव और रिपोर्टिंग की खाई
कार्यशाला का सबसे महत्वपूर्ण पहलू रहा फार्माकोविजिलेंस — यानी मल्टी ड्रग थेरेपी (MDT) के दुष्प्रभावों की निगरानी और रिपोर्टिंग। जानकारों के मुताबिक, मैदानी स्तर पर ADR यानी प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं की रिपोर्टिंग अब भी बेहद कमजोर है। मरीज दुष्प्रभाव झेलता है, लेकिन स्वास्थ्य कर्मी उसे दर्ज नहीं करते — और यही खामोशी इलाज की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती है।

AMR: वह खतरा जो दिखता नहीं, लेकिन बढ़ता है
एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस यानी AMR पर हुई चर्चा भी उतनी ही गंभीर रही। जब बैक्टीरिया दवाओं को मात देने लगें, तो कुष्ठ जैसी नियंत्रणीय बीमारी भी फिर से खतरनाक रूप ले सकती है। राष्ट्रीय रणनीतिक योजना 2023-27 के तहत इस पर निगरानी को लेकर प्रतिभागियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

क्षमता निर्माण: सिर्फ प्रमाण पत्र नहीं, जिम्मेदारी भी
दिनभर चले इस प्रशिक्षण के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र तो मिले, लेकिन विशेषज्ञों ने साफ कहा कि असली परीक्षा अब शुरू होती है — जब ये अधिकारी अपने-अपने जिलों में लौटकर इस ज्ञान को व्यवहार में उतारेंगे। रीजनल लेप्रोसी ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट और फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया के विशेषज्ञों ने तकनीकी पहलुओं पर जो मार्गदर्शन दिया, उसकी असली कसौटी जमीन पर होगी।

कुष्ठ उन्मूलन का लक्ष्य दूर नहीं, लेकिन रास्ता आसान भी नहीं है। रायपुर की यह कार्यशाला उस दिशा में एक सचेत कदम जरूर है।

पेट्रोल डीजल गैस की कीमतें नहीं बढ़ीं, पेट्रोलियम मंत्रालय का आश्वासन, उपभोक्ताओं को राहत

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नई दिल्ली | 7 मई 2026

पेट्रोलियम मंत्रालय ने बुधवार को घोषणा की कि पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी और आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। सुनने में यह खबर सीधी-सादी राहत की लगती है — लेकिन इस सफाई के पीछे कुछ सवाल छुपे हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही “मूल्य वृद्धि की अफवाहों” को भ्रामक बताकर खारिज किया। आमतौर पर जब बाजार में वास्तविक अनिश्चितता न हो, तो अफवाहें इतनी तेजी से नहीं फैलतीं।हो सकता है भारत-पाकिस्तान सीमा तनाव के मौजूदा माहौल में उपभोक्ताओं की चिंता स्वाभाविक थी — और मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति दरअसल उसी चिंता की प्रतिक्रिया है।

मंत्रालय का दावा है कि 33 करोड़ से अधिक घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को 100% आपूर्ति मिल रही है और सभी रिफाइनरियां अधिकतम क्षमता पर चल रही हैं।यह दावा बड़ा है — लेकिन इसे साबित करने वाला कोई स्वतंत्र डेटा सार्वजनिक नहीं किया गया। **पिछले हफ्ते उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब के कुछ जिलों से एलपीजी डिलीवरी में देरी की शिकायतें सामने आई थीं। क्या वे शिकायतें अब सुलझ गई हैं?

कच्चे तेल का भंडार ‘पर्याप्त’ —
सरकार ने कहा कि देश के पास कच्चे तेल का “पर्याप्त भंडार” है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार भारत को कम से कम 90 दिनों का रणनीतिक तेल भंडार रखना चाहिए — जबकि वास्तविकता में यह आंकड़ा अक्सर 60-65 दिनों के आसपास रहता है।

स्थिर कीमतें होने पर— विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतें राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय में स्थिर रखना सरकार की पुरानी रणनीति रही है राहत या समीकरण।

“कीमतें न बढ़ाना अच्छी बात है, लेकिन इसके पीछे की आर्थिक लागत तेल कंपनियां उठाती हैं — और वह बोझ अंततः करदाता पर आता है,” — एक वरिष्ठ ऊर्जा विश्लेषक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा।

पेट्रोलियम मंत्रालय का यह जानकारी जनता को शांत करने में कामयाब रहा है — यह सच है। 33 करोड़ परिवारों के लिए एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति और स्थिर कीमतें निश्चित रूप से सकारात्मक हैं।








थलापति की जीत, पर ताज अभी दूर — 10 सीटों का फासला और राजनीति का पूरा खेल

डिजिटल खबर – 7 मई 2026

108 सीटें जीतीं, सबसे बड़ी पार्टी बने — फिर भी CM की कुर्सी ‘दावे’ की शुरुआत ।

तमिलनाडु की राजनीति में बुधवार की शाम एक ऐसा दृश्य बना जो इतिहास की किताबों में दर्ज होगा — एक फिल्म स्टार, जिसने महज तीन साल पहले पार्टी बनाई, राज्यपाल के दरवाजे पर सरकार बनाने का दावा लेकर खड़ा था। लेकिन राजभवन के भीतर से आ रहे संकेत बता रहे हैं कि ‘थलापति’ का असली इम्तिहान अभी शुरू हुआ है — पर्दे पर नहीं, विधायकों की गिनती में।

बहुमत का गणित — जीत बड़ी, बहुमत अधूरा
234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए चाहिए 118 सीटें। TVK के पास हैं 108— यानी 10 का फासला।यह फासला छोटा लगता है, लेकिन तमिलनाडु की जातीय, क्षेत्रीय और वैचारिक राजनीति में हर एक विधायक एक अलग समीकरण है।TVK (विजय) 108 सबसे बड़ी पार्टी, दावेदार |

कांग्रेस ने समर्थन का “संकेत” दिया है — लेकिन शर्तों के साथ। वे शर्तें क्या हैं, यह अभी सार्वजनिक नहीं है। राजनीति में शर्तें अक्सर मंत्रालय, नीति या वैचारिक समझौते की भाषा में बोली जाती हैं।

राज्यपाल की चुप्पी — संवैधानिक सतर्कता या राजनीतिक संदेश?
विजय ने राज्यपाल विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात कर बहुमत साबित करने के लिए दो हफ्ते का समय मांगा है।

खबर चैनल /सूत्रों के अनुसार राज्यपाल अभी संतुष्ट नहीं हैं कि TVK पर्याप्त संख्याबल जुटाने में सक्षम है।यहां एक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न उठता है —क्या राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का मौका देने से इनकार कर सकते हैं?

तमिलनाडु का सिनेमाई राजनीति का इतिहास — और उसका असली सबक “तमिलनाडु में नेता पैदा नहीं होते, बनाए जाते हैं — और यह काम सिनेमा करता है।एमजीआर ने 1977 में AIADMK बनाई और पहले ही चुनाव में सत्ता पाई।जयललिता को वर्षों संघर्ष करना पड़ा। रजनीकांत राजनीति की दहलीज तक आए और पीछे हट गए।

विजय की कहानी इन सबसे अलग है — उन्होंने पार्टी बनाने के तीन साल के भीतर 108 सीटें जीती हैं। यह निस्संदेह असाधारण है।लेकिन एमजीआर को भी पहले चुनाव में बहुमत मिला था — विजय को नहीं मिला। यही फर्क है जीत और सत्ता के बीच।

अगले दो हफ्ते में चलेगी असली परीक्षा
Tvk नेता विजय के सामने तीन रास्ते हैं:
— कांग्रेस और वामपंथी दलों को मिलाकर 118 का जादुई आंकड़ा छू लें। इसके लिए कांग्रेस की शर्तें माननी होंगी।
— किसी निर्दलीय या छोटे दल के विधायक को साथ लाएं। तमिलनाडु में यह प्रक्रिया अक्सर विवादास्पद हो जाती है।
— अगर बहुमत न जुटा सके तो राज्यपाल किसी दूसरे गठबंधन को मौका दे सकते हैं — और उस स्थिति में DMK एक बार फिर प्रासंगिक हो जाती है।

खबर सार: पर्दे पर हीरो, असल में अभी नायक बनना बाकी
थलापति विजय ने तमिलनाडु की राजनीति को हिला दिया है — यह सच है। 108 सीटें कोई छोटी उपलब्धि नहीं। लेकिन तमिलनाडु की सत्ता का दरवाजा हमेशा सिर्फ जनादेश से नहीं खुलता — यहां गठबंधन, समझौते और संख्याबल की तिजोरी का ताला अलग होता है।गुरुवार का शपथ समारोह होना है?




शुभेंदु अधिकारी होंगे बंगाल के नए मुख्यमंत्री — ब्रिगेड परेड ग्राउंड में इतिहास लिखने की तैयारी

पीएम मोदी और 20 राज्यों के CM होंगे साक्षी, शनिवार सुबह 10 बजे शपथ समारोह।

डेस्क खबर – 7 मई 2026

पश्चिम बंगाल की राजनीति में वह पल आने वाला है जिसका इंतजार भाजपा तीन दशकों से कर रही थी। शनिवार को ब्रिगेड परेड ग्राउंड — जो कभी वामपंथी रैलियों और ममता बनर्जी की विजय सभाओं का गवाह रहा है — अब शुभेंदु अधिकारी के शपथ समारोह की भव्य पृष्ठभूमि बनेगा।

कल शाम तय होगा नाम, कल सुबह मिलेगा ताज
शुक्रवार शाम चार बजे केंद्रीय पर्यवेक्षक और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा विधायक दल की बैठक होगी — जहां औपचारिक रूप से नेता का चयन किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार शुभेंदु अधिकारी का नाम लगभग तय है। लगातार दो चुनावों में ममता बनर्जी को चुनौती देने वाले, नंदीग्राम से उन्हें हराने वाले और भाजपा के ‘बंगाल चेहरे’ के रूप में स्थापित हो चुके शुभेंदु के लिए यह सीएम की कुर्सी उनके राजनीतिक संघर्ष का स्वाभाविक पुरस्कार मानी जा रही है।

खबर अनुसार शनिवार सुबह 10 बजे शुभेंदु समेत 30 मंत्री एकसाथ शपथ लेंगे।

समारोह में दिखेगी NDA की पूरी ताकत
यह शपथ समारोह केवल एक राज्य की सरकार बनाने का कार्यक्रम नहीं — यह भाजपा का राष्ट्रीय शक्ति प्रदर्शन के साथ बंगाल विजय अभियान का हिस्सा होगा।

–प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच पर होंगे
NDA शासित सभी 20 राज्यों** के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सहयोगी दलों के अध्यक्ष और वरिष्ठ मंत्री
ब्रिगेड परेड ग्राउंड का चुनाव भी प्रतीकात्मक है — यह मैदान बंगाल की जनता के लिए सत्ता परिवर्तन का सबसे बड़ा दृश्य संदेश होगा।

मंत्रिमंडल में समाजिक संतुलन की कोशिश
भाजपा ने मंत्रिमंडल गठन में तीन स्पष्ट प्राथमिकताएं तय की हैं:
एक तिहाई सीटें महिलाओं को — यह बंगाल की राजनीति में अभूतपूर्व होगा, जहां ममता बनर्जी के शासन में भी महिला प्रतिनिधित्व इस अनुपात तक नहीं पहुंचा था।

आदिवासी और दलित प्रतिनिधित्व पर विशेष ध्यान — बंगाल के जंगलमहल और उत्तरी जिलों में भाजपा की जीत में इन्हीं समुदायों की निर्णायक भूमिका रही है।

यह सामाजिक इंजीनियरिंग भाजपा के उस दीर्घकालिक बंगाल प्रयोग का हिस्सा है जो 2019 के लोकसभा चुनाव से शुरू हुआ था।

शुभेंदु का सफर — विपक्ष के नेता से मुख्यमंत्री तक
शुभेंदु अधिकारी की कहानी बंगाल की राजनीति की सबसे नाटकीय यात्राओं में से एक है। TMC छोड़कर भाजपा में आना, 2021 में नंदीग्राम से ममता को हराना, फिर विपक्ष के नेता के रूप में पांच साल तक आक्रामक संघर्ष — और अब मुख्यमंत्री की कुर्सी।

लेकिन असली परीक्षा शपथ के बाद शुरू होगी।
बंगाल में प्रशासनिक ढांचा, पुलिस तंत्र और स्थानीय निकाय लंबे समय तक TMC के प्रभाव में रहे हैं। इन्हें बदलना और राज्य में कानून-व्यवस्था स्थापित करना शुभेंदु सरकार की पहली और सबसे बड़ी चुनौती होगी।

निष्कर्ष: ब्रिगेड में इतिहास, लेकिन बंगाल बदलना बाकी
शनिवार का समारोह निस्संदेह ऐतिहासिक होगा — भाजपा के लिए, बंगाल के लिए और भारतीय राजनीति के लिए। लेकिन जिस बंगाल को जीतने में दशकों लगे, उस बंगाल को बदलने में उससे भी कठिन राजनीतिक इच्छाशक्ति लगेगी।शुभेंदु अधिकारी के कंधों पर सिर्फ एक राज्य नहीं — भाजपा के पूर्वी भारत के पूरे राजनीतिक भूमि की जिम्मेदारी है।

सही दवा–शुद्ध आहार सघन जांच अभियान तहत बेमेतरा में सख्त कार्रवाई

बेमेतरा, 06 मई 2026:-

बेमेतरा में ‘सही दवा-शुद्ध आहार’ अभियान:
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा 27 अप्रैल से 11 मई 2026 तक चल रहे 15-दिवसीय विशेष अभियान “सही दवा, शुद्ध आहार, यही छत्तीसगढ़ का आधार” के तहत 6 मई को सख्त कार्रवाई हुई। इसका लक्ष्य नागरिकों को सुरक्षित खाद्य पदार्थ और दवाएं उपलब्ध कराना है।

औषधि विभाग की कार्रवाई
कोटपा एक्ट 2003 (सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम) के उल्लंघन पर 51 चालानी कार्यवाही की गईं।
बेमेतरा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सघन जांच अभियान चलाया गया, जो जिला कलेक्टर की टीम के नेतृत्व में था।

दुकानदारों को निर्देश
तंबाकू उत्पादों का नियमों के अनुसार भंडारण करें।
दुकान में धूम्रपान निषेध बोर्ड अनिवार्य रूप से लगाएं।
नाबालिगों को तंबाकू उत्पाद बिल्कुल न बेचें।

नियमित कार्रवाई जारी रहेगी
अधिकारियों ने बताया कि अभियान के अंतर्गत आने वाले दिनों में भी जिले के अन्य क्षेत्रों में इसी प्रकार की सख्त जांच एवं चालानी कार्यवाही जारी रहेगी, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके और आमजन के स्वास्थ्य की रक्षा हो सके।

शासन के निर्देश
शासन के निर्देशानुसार एवं जिला कलेक्टर द्वारा गठित टीम के नेतृत्व में अभियान के तृतीय चरण के तहत 06 मई 2026 को बेमेतरा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में औषधि विभाग द्वारा सघन जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम (कोटपा) 2003 के तहत कुल 51 चालानी कार्यवाही की गई।




माओवादी प्रभाव से पिछड़ा तर्रेम के स्वास्थ्य केंद्र को NQAS प्रमाणन

रायपुर, 06 मई 2026

विकासखंड उसूर का अतिसंवेदनशील ग्राम तर्रेम, जो कभी माओवादी प्रभाव के कारण पिछड़ा क्षेत्र माना जाता था, अब स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई पहचान बना चुका है। जिला मुख्यालय से लगभग 80 किमी दूर स्थित इस ग्राम में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के चलते ग्रामीणों का भरोसा तेजी से बढ़ा है।

राज्य सरकार की पहल से क्षेत्र में पहुंच आसान हुई, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार संभव हो सका। आयुष्मान आरोग्य मंदिर तर्रेम में प्रतिदिन 25 से 30 मरीजों की ओपीडी, सुरक्षित प्रसव सेवाएं और लैब जांच की सुविधाएं नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं।

अस्पताल प्रबंधन, स्वच्छता, मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार और 102 व 108 एम्बुलेंस सेवाओं के प्रभावी संचालन के साथ आयुष्मान भारत योजना सहित अन्य शासकीय योजनाओं का भी सफल क्रियान्वयन किया जा रहा है। कलेक्टर संबित मिश्रा के मार्गदर्शन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बीआर पुजारी के नेतृत्व में आकांक्षी विकासखंड उसूर के आयुष्मान आरोग्य मंदिर तर्रेम को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक $$NQAS$$ प्रमाणन प्राप्त हुआ है।

केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 16 फरवरी 2026 से वर्चुअल मूल्यांकन किया गया, जिसमें 12 सेवाओं के आधार पर कुल 88.19 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए। मूल्यांकन के दौरान स्वास्थ्य केंद्र के समस्त स्टाफ, सीएचओ, आरएचओ महिला एवं पुरुष से राष्ट्रीय कार्यक्रमों और ग्रामीणों को दी जा रही सेवाओं पर विस्तार से जानकारी ली गई, जिसमें सभी कर्मी सफल रहे।

इस उपलब्धि में जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्री वरुण साहू, नर्सिंग ऑफिसर मानसी ताटपल्ली, विकासखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ उमेश ठाकुर, सेक्टर प्रभारी डॉ शिवा गौरी, ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक श्रवण नेताम, डाटा प्रबंधक निरंजन भोई सहित समस्त स्वास्थ्य स्टाफ, सीएचओ, आरएचओ, एएनएम एवं मितानिनों का विशेष योगदान रहा।