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“बस्तर आइडल 2026”: बेमेतरा की 10 साल की अरुणिमा शर्मा ने जूनियर कैटेगरी में जीता दूसरा स्थान!

बेमेतरा/छत्तीसगढ़ 11/05/2026

राग द म्यूजिकल ग्रुप, जगदलपुर द्वारा आयोजित “बस्तर आइडल 2026” का ग्रैंड फिनाले 9 मई को निर्मल विद्यालय प्रांगण में धूमधाम से संपन्न हुआ।

छत्तीसगढ़ के रायपुर, दुर्ग, बस्तर संभाग और ओडिशा के सैकड़ों प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

जूनियर कैटेगरी में बेमेतरा की नन्हीं गायिका अरुणिमा शर्मा ने “पिया तोसे नैना लागे रे” गाकर द्वितीय रनर अप का खिताब जीता। उन्हें ₹11,000 नकद, ट्रॉफी, प्रशस्ति पत्र और गिफ्ट वाउचर से सम्मानित किया गया।

प्रतिभावानअरुणिमा शर्मा ने अपनी बेमिसाल गायकी और आत्मविश्वास से न केवल जजेस बल्कि हजारों दर्शकों का दिल जीता। उनकी इस उपलब्धि पर बेमेतरा,रायपुर सहित पूरे बस्तर संभाग में हर्ष का माहौल है।

निर्णायक मंडल में लोकगायक सुनील सोनी गायिका प्रज्ञा त्रिवेदी और संगीतकार अतीक रहमान शामिल थे। मुख्य अतिथि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव और जगदलपुर महापौर संजय पांडेय ने पुरस्कार वितरित किए।

राग द म्यूजिकल ग्रुप के संचालकों/आयोजकों का कहना है कि यह प्रतियोगिता छत्तीसगढ़ की छुपी प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच देगी। अरुणिमा की जीत पर बेमेतरा से बस्तर तक खुशी की लहर दौड़ गई।

*🏆 बेमेतरा का परचम लहराया बस्तर आइडल में! 🏆*

किसानों के साथ अत्याचार कर रही है भाजपा सरकार : आशीष छाबड़ा

बेमेतरा 10/05/2026

जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष एवं बेमेतरा के पूर्व विधायक ने राज्य की भाजपा सरकार पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि किसान विरोधी भाजपा सरकार अब छत्तीसगढ़ के किसानों के साथ अत्याचार करने पर तुल गई है।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा पूर्व में सुनियोजित तरीके से धान खरीदी प्रभावित करने के लिए तरह-तरह के रोडे अटकाए गए। इसके बावजूद जब बात नहीं बनी तो अब सरकार ऐसी व्यवस्था लागू कर रही है जिससे किसानों का उत्पादन ही प्रभावित हो जाए।

उन्होंने सहकारी समितियों के माध्यम से कृषकों को प्रति एकड़ एक बोरी यूरिया प्रदान करने, उर्वरक विक्रय हेतु पीओएस मशीन की अनिवार्यता लागू करने तथा किसानों द्वारा एक माह में प्राप्त की जाने वाली अधिकतम मात्रा निर्धारित किए जाने के फैसले को किसानों पर कुठाराघात बताया।

आशीष छाबड़ा ने कहा कि भाजपा सरकार अपनी जिम्मेदारियों से बचना चाहती है और इसके लिए लगातार षड्यंत्र कर रही है। यदि किसानों तक समय पर उर्वरक और यूरिया नहीं पहुंचेगा तो निश्चित रूप से इसका असर खेतों में होने वाले उत्पादन पर पड़ेगा। उत्पादन घटेगा और सरकार यही चाहती है ताकि उसे किसानों से धान खरीदना न पड़े। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार किसानों को मिलने वाले पैसों का उपयोग अपना खजाना भरने में करना चाहती है।

जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक ने कहा कि कांग्रेस पार्टी शुरू से भाजपा सरकार को किसान विरोधी सरकार बताती रही है। यह सरकार अमीरों और पूंजीपतियों की सरकार है, जिसे किसानों के सुख-दुख से कोई लेना-देना नहीं है।

उन्होंने कहा कि शासन द्वारा जारी किए गए इस आदेश का कांग्रेस पार्टी पुरजोर विरोध करेगी। कांग्रेस किसानों की आवाज बनकर सरकार को इस तुगलकी फरमान को वापस लेने के लिए विवश करेगी। आवश्यकता पड़ने पर कांग्रेस पार्टी किसानों के हित में सड़क की लड़ाई लड़ने के लिए भी तैयार है।

सशक्त मां सशक्त परिवार:मातृ दिवस पर मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने दी शुभकामनाएँ

रायपुर 10/5/2026

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने मातृ दिवस के पावन अवसर पर प्रदेश की समस्त माताओं को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई दी है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि माँ जीवन की प्रथम गुरु, सबसे बड़ी प्रेरणा और हर विपरीत परिस्थिति में अटूट संबल होती हैं। माँ का निस्वार्थ प्रेम, असीम त्याग और स्नेहिल आशीर्वाद ही परिवार, समाज और राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है।

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि मातृशक्ति के संस्कारों और संवेदनाओं से ही समाज में नैतिकता, मानवता और सहिष्णुता का विकास होता है। एक सशक्त माँ ही सशक्त परिवार, सशक्त समाज और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है। इसीलिए माताओं का सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में सदैव शामिल रहा है।

इस दिशा में शासन द्वारा अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर उनके स्वास्थ्य और पोषण को सुनिश्चित किया जा रहा है। वहीं छत्तीसगढ़ की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना सहित अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से माताओं को आर्थिक एवं सामाजिक संबल देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहा है।

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने अपने संदेश के अंत में कहा कि मातृशक्ति का उत्थान और सम्मान केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि शासन की निरंतर चलने वाली साधना है। प्रदेश सरकार हर माँ के जीवन को सुरक्षित, सम्मानित और स्वावलंबी बनाने के लिए पूर्ण समर्पण के साथ कार्यरत है।

मदर्स डे पर महिला जेल में ममता की सौगात : रायपुर में वीडियो कॉलिंग सिस्टम का शुभारंभ

रायपुर 10/05/2026

मदर्स डे के इस ममतामयी अवसर पर रायपुर की महिला जेल में बंदिनियों के जीवन में एक नई उम्मीद की किरण जगी है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की घोषणा के अनुरूप जेल विभाग और बीएसएनएल के संयुक्त अनुबंध के तहत “प्रिजन इनमेट वीडियो कॉलिंग सिस्टम” का शुभारंभ किया गया। यह सुविधा उन बंदिनियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं, जो अपने परिजनों की एक झलक के लिए तरसती थीं।

इस प्रणाली के माध्यम से महिला बंदी अब अपने परिजनों और अधिवक्ताओं से सीधे वीडियो कॉल के जरिए संवाद कर सकेंगी। इससे न केवल उनका मानसिक संबल मजबूत होगा, बल्कि कानूनी परामर्श भी सुलभ होगा। यह पहल जेल सुधार की दिशा में तकनीकी समावेश का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो बंदिनियों के मानवाधिकारों की रक्षा को नई परिभाषा देती है।

इस अवसर को और अधिक सार्थक बनाते हुए “निश्चय कार्यक्रम” के अंतर्गत कौशल विकास प्रशिक्षण पूर्ण करने वाली 38 महिला बंदिनियों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया — जो उनके स्वावलंबन और पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही, जेल में अपनी माताओं के साथ रह रहे 14 मासूम बच्चों को विशेष उपहार वितरित किए गए, जिससे जेल परिसर का पूरा वातावरण उत्सवमय और भावपूर्ण हो उठा।

इस संवेदनशील आयोजन में डीजी जेल हिमांशु गुप्ता, जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री, महिला जेल प्रभारी सुश्री गरिमा पांडेय सहित प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और समस्त जेल स्टाफ उपस्थित रहे। यह पहल इस बात का प्रमाण है कि संवेदनशील प्रशासन और आधुनिक तकनीक मिलकर उन जीवनों में भी उजाला ला सकते हैं, जो चारदीवारी के भीतर अपनों की आस में जी रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के पेंड्रा में 500 साल पुरानी दुर्लभ पांडुलिपि मिली

रायपुर 10/05/2026

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के “ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान” के तहत छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई है। पेंड्रा नगर की पुरानी बस्ती के वार्ड क्रमांक 4 में सदियों पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियाँ और अमूल्य दस्तावेज खोजे गए हैं, जो भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध धरोहर के जीवंत प्रमाण हैं।

सर्वेक्षण दल को दो प्रमुख स्थानों से अत्यंत मूल्यवान सामग्री प्राप्त हुई। पंडित मोहन दत्त शर्मा के निवास से 500 वर्ष पुरानी हस्तलिखित श्रीमद्भागवत गीता सहित अनेक धार्मिक ग्रंथ मिले, जिन पर कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने श्रद्धापूर्वक मत्था टेका। वहीं जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह के निवास से लगभग 200 वर्ष पुरानी हस्तलिखित जमींदारी वंशावली तथा पेंड्रागढ़ क्षेत्र के दुर्लभ राजस्व एवं वन विभाग के ऐतिहासिक नक्शे प्राप्त हुए। इन पांडुलिपियों की भाषा, लेखन शैली और विषय-वस्तु — जिनमें लग्न चन्द्रिका, श्रीभागवत महात्म्य और सारस्वत तद्वित प्रक्रिया जैसे ग्रंथ शामिल हैं — संस्कृत साहित्य और प्राचीन भारतीय विद्या की अप्रतिम परंपरा को सजीव करती हैं।

इन अनमोल धरोहरों को ज्ञानभारतम एप के माध्यम से जियो-टैगिंग तकनीक से डिजिटल रूप में संरक्षित किया गया है। विशेष बात यह है कि पांडुलिपियाँ उनके मूल परिवारों के पास ही रहेंगी — डिजिटलीकरण का उद्देश्य केवल इनके ज्ञान को सुरक्षित करना है, ताकि पारिवारिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान अक्षुण्ण बनी रहे।

कलेक्टर डॉ. देवांगन ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि ये पांडुलिपियाँ केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि हमारी ज्ञान परंपरा और इतिहास की अमूल्य धरोहर हैं, जिन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना हमारा दायित्व है। जिला पंचायत सीईओ मुकेश रावटे, एसडीएम विक्रांत अंचल और जिला समन्वयक डॉ. राहुल गौतम की उपस्थिति में संपन्न यह अभियान, जिले में सांस्कृतिक चेतना जगाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।

आज ऐतिहासिक दिन है: प्रधानमंत्री मोदी का बेंगलुरु में जोरदार संबोधन

बेंगलुरु, 10 मई 2026

— प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया, जिसमें भारी संख्या में लोग उमड़े।

ऐतिहासिक तारीख का जिक्र
पीएम मोदी ने 10 मई की ऐतिहासिक अहमियत याद दिलाते हुए कहा कि 1857 में आज ही के दिन स्वतंत्रता संग्राम की पहली चिंगारी भड़की थी, जो आगे चलकर आजादी की ज्वाला बन गई।

चुनावी सफलता पर जोर देकर उन्होंने भाजपा की हालिया जीत गिनाई —पुडुचेरी में लगातार दूसरी बार NDA सरकार।असम में लगातार तीसरी बार NDA सरकार।बंगाल में अब तक का सबसे बड़ा जनसमर्थन।गुजरात पंचायत व निकाय चुनाव में रिकॉर्ड तोड़ जीत।

कांग्रेस पर हमला
पीएम ने कहा कि कर्नाटक और देश की महिलाएं कांग्रेस को कभी माफ नहीं करेंगी, क्योंकि उसने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में बाधा डाली।

ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख

उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ का जिक्र करते हुए साहस और शक्ति की विरासत को देश की सबसे बड़ी ताकत बताया।

बीजेपी की सरकारों के लिए लोक कल्याण सर्वोपरि है। हमारा मंत्र है सबका साथ-सबका विकास और हमारा मॉडल गुड गवर्नेंस का है।
पीएम मोदी कल 11 मई को गुजरात के सोमनाथ में मंदिर पुनर्निर्माण उत्सव में शामिल होंगे।

पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “एक भाजपा कार्यकर्ता होने के नाते, मैं जानता हूं कि इतनी बड़ी संख्या में, इतने संगठित तरीके से, सुबह-सुबह केवल भाजपा कार्यकर्ता ही एकत्रित हो सकते हैं। इतनी बड़ी संख्या में यहां आने के लिए मैं आप सभी का हार्दिक आभारी हूं।”

स्वास्थ्य का आधार: धड़कता हुआ इंजन,हार्ट हेल्थ विज्ञान

रविवारीय – 10/05/2026

चिकित्सा विज्ञान कहता है कि मनुष्य का जन्म उसके दिल की पहली धड़कन से शुरू होता है और अंत आखिरी धड़कन पर। हम अक्सर कहते हैं ‘Health is Wealth’ (स्वास्थ्य ही धन है), लेकिन इस धन का असली ‘बैंक’ हमारा दिल है। जब तक यह बैंक सुरक्षित है, जीवन की पूंजी बची हुई है।

दिल: शरीर का पावरहाउस
विज्ञान भी मानता है कि शरीर का असली इंजन ‘दिल’ ही है।जैविक रूप से दिल केवल एक मांसपेशी नहीं है, बल्कि एक ऐसा पंप है जो बिना रुके शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन और ऊर्जा पहुँचाता है। जब तक दिल मजबूत है, हमारा रक्तचाप (Blood Pressure) और मेटाबॉलिज्म सही रहता है। विज्ञान के अनुसार, एक स्वस्थ दिल ही एक लंबी उम्र की गारंटी है।

मानसिक तनाव और ‘कार्डियक’ बोझ
हम जिसे “दुनियादारी और दौलत की चाह” कहते हैं, उसे चिकित्सा की भाषा में ‘क्रोनिक स्ट्रेस’ (Chronic Stress)कहा जाता है। जब हम बाहरी बातों से परेशान होते हैं, तो हमारा शरीर ‘कोर्टिसोल’ और ‘एड्रेनालिन’ जैसे हार्मोन छोड़ता है।

दौलत की दौड़: यह हमारे दिल पर ‘सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम’ का दबाव बढ़ा देती है।

परिणाम: जिस दिल को शांति से धड़कना था, वह मजबूरी में तेज और अनियमित धड़कने लगता है। हम दिल को उन चिंताओं से ‘रंगीला’ या परेशान करते हैं जिनका शारीरिक रूप से कोई अस्तित्व नहीं है, पर वे दिल की धमनियों (Arteries) को सिकोड़ देती हैं।

‘ब्रोकन हार्ट’ और फिजिकल फेल्योर
अत्यधिक भावनात्मक बोझ और भौतिकवादी चिंताएं दिल को इस कदर ‘मजबूर’ कर देती हैं कि इसकी कार्यक्षमता घटने लगती है। जिसे हम ‘दिल टूटना’ कहते हैं, वह चिकित्सकीय रूप से ‘कार्डियोमायोपैथी’ जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। एक दिन यह मजबूत इंजन जवाब दे देता है, और वह इंसान—जो कल तक दुनिया और दौलत के बड़े सपने देख रहा था—अचानक इस संसार से विदा हो जाता है।

निष्कर्ष: असली दौलत क्या है?
चिकित्सा जगत अब यह स्वीकार कर चुका है कि केवल दवाइयां दिल को नहीं बचा सकतीं। दिल की मजबूती के लिए ‘मानसिक शांति’ और ‘संतोष’ अनिवार्य है।

स्वास्थ्य का राज: अगर दिल मजबूत है, तो आप दुनिया जीत सकते हैं।हकीकत यही है कि अगर दिल ही थक गया, तो सारी दौलत सिर्फ एक आंकड़ा बनकर रह जाएगी।

युवाओं को संदेश (जन चौपाल 36)
जिम जाकर शरीर बनाना ही काफी नहीं, दिल को तनावमुक्त रखना भी असली ‘हेल्थ’ है।


कलाकार बनाम राजनीति: एक दुविधा या विडंबना

रविवारीय -10/05/2026

जब एक कलाकार समाज के दुखों को पर्दे पर जीवंत कर सकता है, तो वह समाज को चला क्यों नहीं सकता?
तमिलनाडु की राजनीति में विजय (थलपति विजय) के प्रवेश और उन्हें ‘सिर्फ एक कलाकार’ कहकर कम आंकने की कोशिश पर नजरिया एक गहरी बहस के साथ।

दोहरा मापदंड: यह बड़ी विडंबना है कि जब एक नेता मंच पर खड़े होकर झूठे वादे और अभिनय करता है, तो उसे ‘चाणक्य नीति‘ कहा जाता है। लेकिन जब एक कलाकार, जो भावनाओं और जनता की नब्ज को समझता है, व्यवस्था सुधारने आता है, तो उसे ‘महज एक अभिनेता‘ कहकर खारिज करने की कोशिश की जाती है।

भावशून्यता बनाम संवेदनशीलता: जैसा कि हमने समझा, अभिनय वही कर सकता है जिसके अंदर मानवता के भाव हों। एक राजनेता को अक्सर कठोर और कूटनीतिक होना पड़ता है, जबकि एक कलाकार ‘संवेदनशील‘ होता है। शायद व्यवस्था इसी संवेदनशीलता से डरती है।

इतिहास का गवाह: तमिलनाडु की भूमि तो खुद इस बात की गवाह रही है कि कलाकारों ने ही वहां की राजनीति को दिशा दी है। एम.जी. रामचंद्रन (MGR) और जयललिता इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। उन्होंने साबित किया कि एक कलाकार की संवेदनशीलता जब सत्ता के साथ मिलती है, तो वह जन-कल्याण का बड़ा माध्यम बनती है।

सत्ता का मंच और कलाकार की चुनौती
नेताओं को लगता है कि राजनीति उनका ‘मंच’ है, लेकिन वे भूल जाते हैं कि जनता जनार्दन ही इस नाटक की असली निर्णायक है। अगर विजय को एक कलाकार कहकर रोका जा रहा है, तो यह उनकी कला का अपमान नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों की उम्मीदों का अपमान है जो उस कलाकार में अपना अक्स देखते हैं।
“जिसने हर किरदार को जिया हो, वह जनता के दर्द के किरदार को सबसे बेहतर निभा सकता है।”

यह देश कोई “मंच” या ‘रंगमंच’ नहीं है जिसे बर्बाद किया जाए। यह एक जिम्मेदारी है। अगर एक कलाकार इस जिम्मेदारी को उठाने की ‘कोशिश’ कर रहा है, तो उसे मौका मिलना ही चाहिए, क्योंकि हर इंसान के अंदर एक कला है हर आदमी कलाकार है।


जीवन का महा-रंगमंच:नेता और अभिनेता दोनों समाज की दिशा तय करते हैं

रविवारीय – 10/05/2026

इस सृष्टि का कण-कण एक दिव्य लीला का हिस्सा है। जिसे हम संसार कहते हैं, वह वास्तव में आत्मा और परमात्मा का एक अद्भुत खेल है। जैसे प्रकृति अपने मौसमों के जरिए अपना खेल दिखाती है, वैसे ही यह जीवन एक वृहद रंगमंच है जहाँ हम सब अपनी भूमिका निभाने आए हैं।

जीवन को एक रंगमंच और मनुष्य को एक कलाकार के रूप में देखना न केवल प्राचीन भारतीय दर्शन का हिस्सा है, बल्कि यह जीवन की जटिलताओं को समझने का एक सुंदर दृष्टिकोण भी है।

अभिनय: मानवता का रस और कलाकार का कौशल
अभिनय करना कोई बुरी बात नहीं है। वास्तव में, अभिनय वही कर सकता है जिसके भीतर मानवता के सभी भाव जीवंत हों और जो जीवन के सभी नौ रसों को आत्मसात कर चुका हो। एक सच्चा कलाकार ही भावनाओं की गहराइयों को छू सकता है।
“दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई, काहे को दुनिया बनाई…”

यह पंक्तियाँ उस विधाता की ओर संकेत करती हैं जो पर्दे के पीछे रहकर इस रंगमंच का संचालन कर रहा है। हम सब उस ऊपर वाले के हाथ की कठपुतलियां हैं। यदि हमारा यह ‘अभिनय’ एक ‘अभिनव’ (नया और श्रेष्ठ) रूप ले ले, तो जीवन सफल हो जाता है। स्वयं ईश्वर भी जब धरती पर अवतार लेते हैं, तो वे एक रूप बदलकर आते हैं—वह भी तो परमात्मा का एक दिव्य अभिनय ही है।

इतिहास और कलाकार का सम्मान
इतिहास गवाह है कि समाज में कलाकारों का स्थान सदैव ऊंचा रहा है। मुगल काल में सम्राट अकबर के नवरत्नों में शामिल तानसेन इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। वे संगीत के ऐसे सम्राट थे जिन्हें राजा के समतुल्य सम्मान प्राप्त था। भाव-वेदना को सुरों में पिरोना कोई तानसेन से सीखे। कलाकार अपनी कला से निर्जीव भावों में भी जान फूँक देता है।

राजनीति, अभिनय और आज का परिवेश
आज के दौर में ‘नेता’ और ‘अभिनेता’ के बीच की रेखा धुंधली पड़ती जा रही है। जहाँ एक को मंच चाहिए, तो दूसरे को रंगमंच।

चुनाव का अभिनय: राजनेता जनता के बीच आकर वादे करते हैं, लेकिन अक्सर उन वादों के पीछे की सच्चाई और जनता के दर्द से उनका नाता टूट जाता है।

कोशिश और वादे: जैसा कि कहा गया है—”वादे अक्सर टूट जाया करते हैं, कोशिशें कामयाब रहती हैं।”
इसलिए इंसान को सदैव नेक कोशिश करनी चाहिए।
एक श्रेष्ठ अभिनेता वही है जो समाज के दुख-दर्द को समझे और अपने किरदार के माध्यम से उसमें जान डाल दे। चार्ली चैपलिन जैसे महान कलाकार, जिन्होंने महात्मा गांधी से मुलाकात की थी, उन्होंने बिना शब्दों के संसार के दर्द और हंसी को पर्दे पर उतारा।

निष्कर्ष: मेरी दृष्टि
जैसा कि मैंने अपनी पुस्तक “दीप प्रवाह’ में लिखा है कि नेता और अभिनेता को यह समझना होगा कि यह देश न कोई साधारण मंच है और न ही महज मनोरंजन का रंगमंच। यह करोड़ों संवेदनाओं का घर है।

जनचौपाल 36
“मेरा नाम राजू (कोई सियासत का राजा नहीं), घराना अनाम, बहती है गंगा जहाँ (दुनिया) मेरा धाम।”

देवर्षि नारद जयंती: सृष्टि के आदि पत्रकार और आज की पत्रकारिता का नैरेटिव -आर. कृष्णा दास

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बेमेतरा/रायपुर | 9 मई 2026

नारद जयंती के पावन अवसर पर देशभर में, विशेषकर विश्व संवाद केंद्र के सहयोग से विभिन्न संगोष्ठियों और पत्रकार वार्ताओं का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों में देवर्षि नारद को ब्रह्मांड का ‘प्रथम पत्रकार’ मानते हुए निष्पक्ष, सकारात्मक और जनहितकारी पत्रकारिता के मूल्यों पर गहन मंथन हुआ। इस अवसर पर समाज में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानित भी किया गया।

नकारात्मक नैरेटिव और ऐतिहासिक संदर्भ: आर. कृष्णा दास
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार और वरिष्ठ पत्रकार आर. कृष्णा दास (कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त) ने वर्तमान पत्रकारिता के स्वरूप पर बेबाकी से विचार रखे।
नैरेटिव का खेल: उन्होंने कहा कि आज की पत्रकारिता ‘नैरेटिव’ (विमर्श) के आधार पर संचालित हो रही है। उन्होंने बंगाल चुनाव के उदाहरणों और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कैसे तथ्यों को एक विशेष चश्मे से पेश किया जाता है।

छवि के साथ खिलवाड़: श्री दास ने इस बात पर चिंता जताई कि फिल्मों और नाटकों में देवर्षि नारद को अक्सर एक ‘कलहकारी’ या ‘खल’ चरित्र के रूप में दिखाया गया, जो कि एक नकारात्मक नैरेटिव का हिस्सा है। जबकि वास्तविकता में नारद जी पत्रकारिता की आत्मा हैं।

सत्य की उपेक्षा: उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि जिस तरह समाज में राजा हरिश्चंद्र या सती सावित्री जैसे आदर्श चरित्रों को व्यंग्यात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाने लगा है, वही स्थिति डॉ. मुखर्जी के साथ भी की गई थी। यह सब समाज को भ्रमित करने की एक सोची-समझी कला है।

पत्रकार का दायित्व और सोशल मीडिया की चुनौतियां
सच्ची पत्रकारिता का उद्देश्य भ्रम फैलाना नहीं, बल्कि समाज और सरकार को सच्चाई का आईना दिखाना है। श्री दास ने सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक चैनलों के दौर में सजगता पर जोर दिया।

तीनों लोकों के सेतु थे देवर्षि नारद: जितेंद्र शुक्ला
श्रमजीवी पत्रकार संघ के जिलाध्यक्ष जितेंद्र शुक्ला ने नारद जी के आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि:
“नारद जी मात्र एक संवाद वाहक नहीं बल्कि एक ‘समाधान कर्ता’ थे। उन्होंने असुरों और देवताओं के बीच संवाद का सेतु बनाया ताकि सत्य की जीत हो सके। मीडिया का स्वरूप भले बदला हो, लेकिन सत्य की खोज का आधार नारद जी के मूल्यों पर ही टिका है।”

निर्भीकता और निष्पक्षता का महत्व: सुजीत शर्मा
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जिलाध्यक्ष सुजीत शर्मा ने एकतरफा रिपोर्टिंग से बचने की सलाह दी। उन्होंने जोर दिया कि एक पत्रकार को निर्भीकता के साथ अपने विचार स्पष्ट रखने चाहिए और खबर की निष्पक्षता से कभी समझौता नहीं करना चाहिए।

कार्यक्रम आयोजक बोधि राम निषाद ने संबोधन में कहा
पत्रकार की जिम्मेदारी बहुत बड़ी है ,बिना जांचे-परखे किसी भी तथ्य को प्रकाशित न करें।भ्रामक और निराधार खबरों के प्रति विशेष सावधानी बरतें।पत्रकारिता का मूल धर्म लोक-कल्याण होना चाहिए जो नारद जी ने किया।

निष्कर्ष: जन चौपाल 36 खबर सार
आज पत्रकारिता के क्षेत्र में कुछ विद्रूपताएं भी देखने को मिल रही हैं। जब पत्रकारिता सत्ता की चाटुकारिता में उलझ जाती है, तो जनता की पुकार दब जाती है।
चौथा स्तंभ की गरिमा: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का असली अर्थ स्वतंत्र पत्रकारिता से है, जहाँ देशहित सर्वोपरि हो।
सच्चाई का मोती: सच्चा पत्रकार वही है जो सूचनाओं के अथाह समंदर में गोता लगाकर ‘सत्य का मोती’ बाहर निकाल लाए।नारद जी एक ऐसे पत्रकार थे जो स्वयं भगवान विष्णु को भी धरती की पीड़ा दिखाने के लिए विवश कर देते थे। आज के पत्रकारों को भी इसी अदम्य साहस और सत्यनिष्ठा की आवश्यकता है।