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Friday, June 5, 2026

मैनपाट की तस्वीर: पेंशन के लिए 90 साल की बुजुर्ग सास को पीठ पर लादकर 9 किमी पैदल चली बहू

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न्यूज 25 मई 2026

व्यवस्था को आईना दिखाता एक मामला सामने आया जो छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाले सरगुजा जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मैनपाट से एक ऐसी मार्मिक तस्वीर है, जिसने सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर कर दिया है। यह कहानी एक तरफ जहां भारतीय परिवारों के संस्कारों और एक बहू के अपनी सास के प्रति अगाध समर्पण को दिखाती है, तो वहीं दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में दम तोड़ती बैंकिंग और पेंशन वितरण व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

कच्चे रास्ते, पहाड़ और नाले… फिर भी नहीं थमे कदम

​मामला मैनपाट के सुदूर वनांचल क्षेत्र में स्थित कुनिया ग्राम पंचायत का है। यहाँ रहने वाली 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला सुखमुनिया बाई पिछले कई महीनों से अपनी वृद्धावस्था पेंशन के लिए परेशान थीं। शारीरिक रूप से बेहद कमजोर और दिव्यांग होने के कारण वे चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हैं। पिछले तीन महीनों से उनकी पेंशन की राशि बैंक खाते में तो आ रही थी, लेकिन अंगूठे का निशान (बायोमेट्रिक) लगाने के लिए उनका बैंक पहुंचना अनिवार्य था।

​वनांचल क्षेत्र होने के कारण गांव से मुख्य सड़क तक न तो कोई पक्की सड़क है और न ही परिवहन का कोई साधन। ऐसे में उनकी बहू ने हिम्मत दिखाई। इस भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में बहू अपनी 90 साल की बुजुर्ग सास को अपनी पीठ पर लादकर निकल पड़ी। रास्ते में पड़ने वाले पथरीले रास्तों, पहाड़ी ढलानों और बरसाती नालों को पार करते हुए वह करीब 9 किलोमीटर का सफर पैदल तय करके बैंक पहुंची।

पेंशन तो मिली, पर व्यवस्था पर उठे सवाल

​बैंक पहुंचने के बाद जब अधिकारियों ने इस मंजर को देखा, तो तुरंत बुजुर्ग महिला की कागजी कार्रवाई पूरी की गई और उन्हें पिछले 3 महीने की रुकी हुई पेंशन के रूप में कुल ₹1500 की राशि नगद भुगतान की गई। ₹1500 की इस मामूली रकम को पाने के लिए एक बुजुर्ग और एक महिला को जो यातना झेलनी पड़ी, उसने पूरे इलाके के लोगों को झकझोर कर रख दिया है।

कहां गए ‘बैंक मित्र’ और डिजिटल इंडिया के दावे?

​इस घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी है। सरकार का नियम है कि बुजुर्गों, दिव्यांगों और चलने-फिरने में असमर्थ लोगों को ‘बैंक मित्र’ या पंचायत सचिव के माध्यम से घर पर ही पेंशन की राशि दी जाए। लेकिन मैनपाट के इस वनांचल में यह नियम सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आया। हालांकि, मामला मीडिया में आने के बाद अब बैंक प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन सुध लेने की बात कह रहा है और भविष्य में बुजुर्ग महिला के घर तक ही राशि पहुंचाने का भरोसा दिलाया जा रहा है।

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