रायपुर- 10 सितंबर 2026
जशपुर के दुलदुला विकासखंड के जैकुदर गांव की 8 वर्षीय स्वर्णि बाई अब सामान्य जिंदगी की ओर लौट रही है। लंबे समय से सांस फूलने, छाती में संक्रमण और तेज धड़कन की शिकायत रहने वाली स्वर्णि के दिल में जन्मजात विकार पाया गया, जिसका इलाज रायपुर में बिना ओपन हार्ट सर्जरी के सफलतापूर्वक किया गया।
लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
स्वर्णि को लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां थीं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) के तहत उसकी स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें हृदय संबंधी रोग का पता चला। जांच में उसके दिल में Large Type-A PDA (Patent Ductus Arteriosus) पाया गया। PDA का आकार करीब 5.4 मिलीमीटर था और हृदय में रक्त का असामान्य प्रवाह हो रहा था।
कैथेटर से हुआ सफल इलाज
विशेषज्ञ उपचार के लिए स्वर्णि को रायपुर स्थित निजी अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल में भर्ती करने के बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों ने आवश्यक जांच की और बिना ओपन हार्ट सर्जरी के कैथेटर आधारित डिवाइस क्लोजर से PDA को बंद करने का निर्णय लिया।
इस दौरान “8/10 mm Lifetech Heart R PDA Occluder” डिवाइस की मदद से प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई। प्रक्रिया के बाद की जांच में डिवाइस सही स्थिति में पाया गया और किसी तरह का लीकेज या रेजिडुअल शंट नहीं मिला। हृदय की कार्यक्षमता भी सामान्य पाई गई। स्थिति संतोषजनक होने पर स्वर्णि को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
समय पर पहचान से बदली जिंदगी
समय पर हुई पहचान, उचित रेफरल और विशेषज्ञ उपचार ने स्वर्णि को गंभीर जन्मजात हृदय रोग से राहत दिलाई। यह मामला इस बात का भी उदाहरण है कि बच्चों में बार-बार छाती में संक्रमण, सांस लेने में परेशानी, जल्दी थकान या असामान्य तेज धड़कन जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
चिकित्सकों का कहना है कि समय पर स्क्रीनिंग और उपचार से जन्मजात हृदय रोग से प्रभावित बच्चों को स्वस्थ और सामान्य जीवन की ओर लौटाया जा सकता है। स्वर्णि अब अपने गांव में परिवार के साथ सामान्य जीवन जी रही है और स्कूल जाने लगी है।


