डिजिटल डेस्क 13 जून 2026
छात्रों का भविष्य और देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG को लेकर उपजा विवाद थमा नहीं था कि आगामी 21 जून को होने वाली दोबारा परीक्षा (री-एग्जाम) के लिए केंद्र सरकार ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। 3 मई को हुई परीक्षा में पेपर लीक के गंभीर आरोपों के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी, जिसकी जांच अभी भी सीबीआई (CBI) कर रही है। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती साख बचाने और परीक्षा को पूरी तरह ‘लीक-प्रूफ’ बनाने की है।
शुक्रवार को कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में सरकार का सख्त और निर्भीक रुख साफ देखने को मिला। आइए, इस पूरे घटनाक्रम को ‘मेरा विचार, मेरा दर्शन’ की दृष्टि से समझने का प्रयास करते हैं।
प्रशासनिक बिसात: अर्धसैनिक बलों का पहरा और सख्त कानून
आगामी 21 जून की परीक्षा को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था का ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया है, जिसे भेदना किसी भी शिक्षा माफिया के लिए नामुमकिन हो।
सख्त कानूनी कार्रवाई का अल्टीमेटम: कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन ने साफ चेतावनी दी है कि परीक्षा की निष्पक्षता को प्रभावित या बाधित करने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, उसके खिलाफ कानून के तहत कठोरतम कार्रवाई होगी।
सुरक्षा का अभेद्य किला: गृह मंत्रालय ने परीक्षा पत्रों (एग्जाम पेपर्स) के ट्रांसपोर्टेशन और सुरक्षा के लिए CRPF और CISF जैसी केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को मैदान में उतार दिया है।
एजेंसियों का समन्वय: केंद्र सरकार, राज्य सरकारों के मुख्य सचिव और जिला प्रशासन मिलकर इस परीक्षा के सफल आयोजन के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं। इस समीक्षा बैठक में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के महानिदेशक अभिषेक सिंह भी मौजूद थे।
साख की बहाली और लाखों छात्रों का भविष्य
एक पत्रकार और विचारक के रूप में, मेरा मानना है कि यह केवल एक परीक्षा का आयोजन नहीं है, बल्कि देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था और उसकी विश्वसनीयता की अग्निपरीक्षा है।
विचार का बिंदु:


