मोंटेसरी स्कूल असली है या सिर्फ बोर्ड पर नाम?बच्चे की फीस भरने से पहले इन 3 बातों को जरूर जांचें
न्यूज डेस्क/30 जुलाई 2026
विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल का दौरा करते समय क्लासरूम पर ध्यान दें। क्या वहां लकड़ी के ओरिजिनल मोंटेसरी मटेरियल हैं, क्या बच्चे खुद अलमारी से सामान ले रहे हैं, क्या वहां वर्कशीट या स्टिकर चार्ट जैसी चीजें तो नहीं हैं। असली मोंटेसरी स्कूल में ये चीजें नहीं होतीं।
आजकल हर दूसरे प्राइवेट प्री-स्कूल के बोर्ड पर मोंटेसरी लिखा मिल जाता है। माता-पिता अपने बच्चों की अच्छी शुरुआत के लिए मोटी फीस भी देने को तैयार रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मोंटेसरी शब्द पर किसी का कॉपीराइट नहीं है।
यानी कोई भी स्कूल, चाहे वह मोंटेसरी पद्धति से पढ़ाता हो या नहीं, अपने नाम के आगे यह शब्द लगा सकता है। ऐसे में जरूरी है कि एडमिशन से पहले असली और नकली की पहचान की जाए।
असली मोंटेसरी स्कूल की पहचान के तीन बड़े संकेत हैं। पहला है शिक्षकों की ट्रेनिंग। असली स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों के पास AMI या AMS जैसी मान्यता प्राप्त संस्थाओं का सर्टिफिकेट होता है। वे अपनी ट्रेनिंग की जगह का नाम खुलकर बताते हैं।
अगर स्कूल गोल-मोल जवाब दे तो सतर्क हो जाएं। दूसरा है तीन घंटे का वर्क साइकिल। असली मोंटेसरी में बच्चों को लगातार तीन घंटे तक बिना टोके अपना काम चुनने की आजादी मिलती है।
अगर हर आधे घंटे में घंटी बजती है और विषय बदल जाता है तो वह मोंटेसरी पद्धति नहीं है। तीसरा है मिक्स्ड एज क्लासरूम। इसमें तीन से छह साल तक के बच्चे एक ही कक्षा में साथ सीखते हैं, जिससे छोटा बच्चा बड़े से सीखता है और बड़ा बच्चा लीडरशिप सीखता है।
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