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Friday, June 5, 2026

खबर बेमेतरा: बच्चों और महिलाओं के लिए कानून बना ढाल,ओटेबंद में लगा विधिक जागरूकता कैंप

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बेमेतरा – 04 जून 2026

बाल यातना और मानव तस्करी के खिलाफ दुनिया भर में मनाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय दिवस के मौके पर बेमेतरा जिले के छोटे से गांव ओटेबंद में बुधवार को कानून की बड़ी पाठशाला लगी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने यहां एक दिवसीय विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया और ग्रामीणों को सीधे बताया कि संकट में कानून कैसे उनका सबसे बड़ा हथियार बन सकता है।

शिविर में सहायक प्रतिरक्षा अधिवक्ता देवेंद्र साहू ने ग्रामीणों को नालसा की 2015 वाली योजना का मतलब समझाया। उन्होंने कहा कि मानव तस्करी, जबरन देह व्यापार या यौन शोषण के शिकार महिलाओं और बच्चों को अब अकेले लड़ाई नहीं लड़नी पड़ेगी। इस योजना के तहत पीड़ितों को मुफ्त वकील, सुरक्षा, पुनर्वास और कोर्ट-कचहरी की पूरी मदद सरकार कराएगी।
प्रतिरक्षा अधिवक्ता अमन दुबे ने जोड़ा कि पीड़ितों को सिर्फ कानूनी मदद ही नहीं, बल्कि मानसिक और आर्थिक सहारा देकर उन्हें दोबारा सम्मान की जिंदगी तक पहुंचाना भी नालसा का मकसद है। वहीं आयुष शुक्ला ने एसिड अटैक पीड़ितों के लिए बनी विशेष योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एसिड हमले के बाद इलाज, मुआवजा, मुफ्त वकील और अपराधी को सजा दिलाने तक की पूरी जिम्मेदारी विधिक सेवा प्राधिकरण उठाता है।

बच्चों के लिए माहौल बदलने की बात करते हुए अधिवक्ता पी. राजेश्वरी ने नालसा की 2024 की बाल-मित्र कानूनी सेवा योजना खोली। इस योजना के तहत बाल अपराधी हो या बाल पीड़ित, अनाथ हो या संरक्षण मांगने वाला बच्चा — कानूनी प्रक्रिया के दौरान उसे डर नहीं, दोस्त जैसा माहौल मिलेगा और उसके हर अधिकार की रक्षा होगी।

अधिवक्ता गीता दास और दुर्गा साहू ने ग्रामीणों को बताया कि गांव-गांव में खुलने वाले विधिक क्लीनिक ही अब सबसे नजदीक की अदालत हैं। यहां कानूनी सलाह से लेकर आवेदन लिखवाने तक हर काम मुफ्त होता है। स्कूल, कॉलेज, जेल और कोर्ट परिसर में भी ये क्लीनिक चल रहे हैं ताकि जरूरतमंद को वकील तलाशने दूर न जाना पड़े।

शिविर में मौजूद मजदूरों और ग्रामीणों ने कानून की इन बारीकियों को गौर से सुना और खुलकर सवाल भी पूछे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव के निर्देश पर लीगल एड डिफेंस काउंसिल की पूरी टीम ने इस कैंप को अंजाम तक पहुंचाया। गांव वालों की भीड़ और उनकी जिज्ञासा बता रही थी कि कानून की जानकारी अब सिर्फ किताबों में नहीं, चौपाल तक पहुंच रही है।

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