नेवनारा में ‘अरहम इस्पात’ के खिलाफ उठी विरोध की बुलंद आवाज। “अगर आज हम नहीं जागे, तो हमारी उपजाऊ भूमि और पानी दोनों जहरीले हो जाएंगे। हमें अपनी खेती और सेहत बचाने के लिए 22 दिसंबर को एकजुट होना ही होगा।” — ग्रामीण प्रतिनिधि।
बेमेतरा | 19 दिसंबर 2025
बेमेतरा जिले के नेवनारा में प्रस्तावित ‘अरहम इस्पात प्राइवेट लिमिटेड’ के खिलाफ जन-आक्रोश फूट पड़ा है। प्रदूषणकारी संयंत्र की स्थापना को रोकने के लिए क्षेत्र के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। आगामी 22 दिसंबर को होने वाली जनसुनवाई को लेकर क्षेत्र के 8 गांवों के सरपंचों और प्रबुद्ध नागरिकों ने रणनीति तैयार की है।
जल संकट और पर्यावरण पर गहराता खतरा
बैठक में ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त की कि बेमेतरा जिला पहले से ही जल संकट से जूझ रहा है। जिले की जीवनदायिनी शिवनाथ नदी पिछले वर्ष सूख गई थी, जिससे भूजल स्तर 400 फीट से नीचे गिर चुका है। वनाच्छादित क्षेत्र न होने के कारण यहाँ हरियाली की भारी कमी है। ऐसे में भारी उद्योग लगने से न केवल जलस्तर और गिरेगा, बल्कि वायु प्रदूषण से ग्रामीणों के स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर खतरा मंडराने लगेगा।
8 पंचायतों के सरपंचों ने भरी हुंकार
नेवनारा में डॉ. शिरीष शर्मा के निवास पर आयोजित विशेष बैठक में आसपास की 8 पंचायतों के सरपंचों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में बेरला ब्लॉक पर्यावरण बचाओ सर्वदलीय समिति के नेतृत्व में जनसुनवाई के दिन भारी भीड़ जुटाने और लाउडस्पीकर के माध्यम से पुरजोर विरोध दर्ज कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
बैठक में प्रमुख रूप से शामिल रहे:
सरपंचगण: देवनारायण परगनीहा (देवादा), रोहित यादव (लाता), रोहित शिवारे (कोहड़िया), प्रहलाद सारथी (खमतराई), कमल बघेल (खंगारपाठ), घनाराम निषाद (राका), और सरपंच देशलहरे।अन्य गणमान्य: पूर्व सरपंच राघवेंद्र (सत्तू) परगनिहा, कल्याणी संतोष परगनिहा, भीखम साहू, डॉ. शिरीष शर्मा, अजीताभ मिश्र, और कई पंच व ग्रामीण।



