डिजटल न्यूज डेस्क 03 जून 2026
अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर आ गया है। आज ईरान ने कुवैत और बहरीन पर मिसाइलें और ड्रोन दागे। जवाब में अमेरिका ने ईरान के केशम द्वीप पर हमला किया।
यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल के हमलों से शुरू हुआ था। तब से अब तक हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं और लाखों बेघर हो गए हैं। बीच-बीच में शांति वार्ता की कोशिशें होती रहती हैं लेकिन लड़ाई रुक नहीं रही।
भारत के लिए यह चिंता की बात इसलिए है क्योंकि मध्य-पूर्व में युद्ध जारी रहने से कच्चे तेल की कीमतें ऊपर चढ़ती हैं। इसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल पर पड़ता है। डीजल महंगा होने से ट्रक और माल ढुलाई महंगी होती है, जिससे दाल, चावल, सब्ज़ी और रोज़मर्रा की घरेलू ज़रूरत की चीज़ें भी महंगी हो जाती हैं।
जिससे आम आदमी की थाली पर सीधा बोझ पड़ता है।
छत्तीसगढ़ में असर
छत्तीसगढ़ जैसे राज्य भी इससे अछूते नहीं रहेंगे। राज्य में खेती और परिवहन दोनों डीजल पर निर्भर हैं। फसल बोने से लेकर मंडी तक सामान पहुँचाने तक — हर कदम पर ईंधन की लागत जुड़ी है। अगर तेल महंगा हुआ तो किसान से लेकर शहर के दुकानदार तक सबको असर झेलना पड़ेगा।
यातायात प्रभावित
छत्तीसगढ़ में हालात और भी नाज़ुक हो सकते हैं। राज्य के बस और यातायात परिवहन संगठन पहले से ही डीजल की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं और सरकार को अल्टीमेटम दे चुके हैं कि अगर राहत नहीं मिली तो हड़ताल की जाएगी। ऐसे में अगर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल और महंगा हुआ तो यह हड़ताल टलना मुश्किल हो जाएगी। हड़ताल हुई तो आम यात्री सबसे ज़्यादा परेशान होंगे और ज़रूरी सामान की आवाजाही भी प्रभावित होगी।


