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Friday, June 5, 2026

आज अपरा एकादशी : सर्वार्थसिद्धि योग का दुर्लभ संयोग में व्रत-पूजन का विशेष महत्व

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व्रत धर्म पर्व 13/05/2026

आज ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अपरा एकादशी है। इस बार एकादशी पर सर्वार्थसिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसे शास्त्रों में अत्यंत फलदायी माना गया है।

मान्यता है कि अपरा एकादशी का व्रत रखने से अपार पुण्य की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होता है। भक्त आज भगवान विष्णु का पीले पुष्प, तुलसी और धूप-दीप से पूजन कर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करेंगे।

धार्मिक पुराने के अनुसार ब्रह्म पुराण में भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को अपरा एकादशी का महत्व के बारे में विस्तार से बताया था। इस व्रत को रखने से मनुष्य के बड़े से बड़े पापों से मुक्ति मिल सकती हैं और तीर्थ स्नान, दान और यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है। जानें अपरा एकादशी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और पारण का समय

आज ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अपरा एकादशी पर सर्वार्थसिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन व्रत की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्यकर्म से निवृत्त होकर स्नान के बाद भगवान श्री विष्णु का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लेना जरूरी है। माना जाता है कि बिना संकल्प के रखा गया व्रत पूर्ण नहीं होता। संकल्प के बाद तांबे के लोटे में जल, पुष्प और लाल सिंदूर मिलाकर सूर्यदेव को अर्घ्य देना चाहिए।

इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा शुरू की जाती है। पूजा के लिए कुश के आसन या किसी साफ आसन पर बैठकर विधि-विधान से आराधना की जाती है। तुलसी, पीले फूल और धूप-दीप से पूजन कर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करना शुभ माना गया है। अपरा एकादशी का व्रत करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

पारण समय: व्रत का पारण 14 मई, गुरुवार को द्वादशी तिथि में सूर्योदय के पश्चात किया जाएगा।ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ– 12 मई को दोपहर 02 बजकर 52 मिनट पर हो रही है।ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि समाप्त- 13 मई को दोपहर 01 बजकर 29 मिनट तक
तिथि- 13 मई 2026, बुधवार।
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