मानसून में देव स्थान दर्शन का अपना ही जादू है,4 सुरक्षित और 3 असुरक्षित मंदिर
तीर्थाटन-न्यूज/ 22 जुलाई 2026
बारिश में कुछ मंदिर एकदम स्वर्ग जैसे लगते हैं और वहाँ जाना भी सुरक्षित रहता है।
सुरक्षित 4 मंदिरों में पहला है तलकावेरी मंदिर, कर्नाटक। कावेरी नदी का उद्गम स्थल, ब्रह्मगिरी पहाड़ियों पर। मानसून में यहाँ कोहरा, हरियाली और हल्की फुहारें रहती हैं, रास्ता भी ठीक रहता है।
दूसरा है कुक्के सुब्रमण्यम मंदिर, कर्नाटक। पश्चिमी घाट के बीच, कुमारधारा नदी के किनारे। बारिश में यहाँ स्नान और दर्शन का अनुभव बहुत पवित्र माना जाता है और खतरा कम है।
तीसरा है त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, महाराष्ट्र, नासिक के पास। काले पत्थर का मंदिर बारिश में और भी सुंदर लगता है, मौसम सुहावना रहता है और पहुँच आसान है।
चौथा है मीनाक्षी अम्मन मंदिर, मदुरै, तमिलनाडु। ये मैदानी इलाके में है, इसलिए भूस्खलन या बाढ़ का डर नहीं। बारिश के बाद गोपुरम के रंग और भी निखर जाते हैं और दर्शन आराम से हो जाता है।
अब 3 मंदिर जहाँ जुलाई में जाने से बचना चाहिए।
केदारनाथ, बद्रीनाथ और यमुनोत्री, तीनों उत्तराखंड के हिमालय में हैं। जुलाई अगस्त में यहाँ भारी बारिश, भूस्खलन, रास्ते बंद होना और नदियों में अचानक बाढ़ का खतरा बहुत ज्यादा रहता है। जोशीमठ से आगे का रास्ता अक्सर हफ्तों तक बंद रह जाता है। बेहतर है इनकी यात्रा मई जून या सितंबर अक्टूबर में करें।
अगर आप मानसून में ही निकल रहे हैं तो मौसम विभाग का अलर्ट रोज चेक करें, पहाड़ी रास्तों पर रात में सफर न करें, हल्का रेनकोट, फिसलन रोधी चप्पल और लोकल प्रशासन के नियमों का ध्यान जरूर रखें।
अगले भाग में हम आपको छत्तीसगढ़ में बारिश के मौसम में अमरकंटक, महामाया या दंतेवाड़ा जैसे पास के हरियाली वाले धाम के साथ अन्य स्थानों के बारे में बताएंगे।
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