कृष्ण: रहस्य, लीला और 2026 की जन्माष्टमी का सही दिन
धर्म- 03 सितंबर 2026
कृष्ण को आध्यात्म में कृष्णम वंदे जगत गुरु कहा गया है । श्रीराम जो त्रेता युग में 12 कलाओं के साथ अवतार लिए थे ,वहीं कृष्णा द्वापर में 16 कलाओं से परिपूर्ण संसार में अवतरित हुए।
श्रीकृष्ण का जीवन चरित्र वाकई रहस्य और अलौकिक दृश्यों से भरा है—कारागृह में जन्मा बालक जो गोकुल में माखनचोर बना, कंस-शिशुपाल जैसे योद्धाओं को हराया, कुरुक्षेत्र में गीता का उपदेश दिया और द्वारकाधीश बनकर एक ऐसी नगरी बसाई जहाँ “बिना इजाजत परिंदे भी पर नहीं मार सकते” थे।
हमें धर्म उपदेशों में दिखता है कि, कुरुक्षेत्र में गीता का ज्ञान देने वाला बड़े बड़े शूरवीर योद्धाओं के बीच निहत्था सारथी श्रीकृष्ण। भीषण संग्राम, भयंकर युद्ध मैदान में जो निहत्था खड़ा है वही तो है असली वीर_माधव। जब युद्ध की बात हो तो वीर योद्धा हथियार उठा ही लेते हैं, लेकिन यहां पर माधव ने मधुरता का परिचय दिया और कहा मैं हथियार नहीं उठाऊंगा
2026 में जन्माष्टमी: 4 सितंबर या 5 सितंबर?
2026 में कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर (शुक्रवार) को मनाई जाएगी, न कि 5 सितंबर को। भ्रम इसलिए पैदा होता है क्योंकि जन्मोत्सव का मुख्य निशीथ पूजा मुहूर्त रात 11:57 बजे से शुरू होकर 5 सितंबर की सुबह 12:43 बजे तक जाता है, यानी आधी रात के बाद।
परंपरागत रूप से त्योहार की तारीख वह मानी जाती है जिस दिन अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग हो और व्रत-पूजा का मुख्य भाग उसी दिन माना जाता है।
अलग-अलग परंपराओं में एक दिन का अंतर क्यों?
स्मार्त और वैष्णव पंचांग कभी-कभी एक दिन का अंतर दिखाते हैं क्योंकि वे अष्टमी-रोहिणी संयोग और निशीथ काल की प्राथमिकता अलग-अलग देते हैं। इसी वजह से कुछ क्षेत्रों या मंदिरों में उत्सव एक दिन पहले या बाद में भी देखा जा सकता है, पर राष्ट्रीय स्तर पर और अधिकांश मंदिरों/संस्थाओं (जैसे ISKCON) के अनुसार 2026 की मुख्य जन्माष्टमी 4 सितंबर को है।
पूजा और व्रत के प्रमुख मुहूर्त जानकारी पर
व्रत: 4 सितंबर को दिनभर (कुछ परंपराओं में निशीथ के बाद पारण)।
निशीथ पूजा: रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक (स्थान के अनुसार थोड़ा बदल सकता है)।
दही हांडी/नंदोत्सव अक्सर 5 सितंबर को। स्थानीय पंचांग और मंदिर की घोषणा जरूर देखें, क्योंकि निशीथ काल शहर के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।
अपने शहर के अनुसार निशीथ काल और पारण समय का सटीक मुहूर्त जानकर पूजा आराधन करें।
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