भाजपा के गढ़ में कांग्रेस की सेंध! पचभईया के 50 लोगों ने थामा कांग्रेस का हाथ, चुनाव से पहले बदलते समीकरणों के संकेत
बेमेतरा – 09 सितम्बर 2026
आज पूर्व उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता टी.एस. सिंहदेव का बेमेतरा आगमन भी हो रहा है। ऐसे समय में नवागढ़ विधानसभा के ग्राम पचभईया के करीब 50 किसानों, बुजुर्गों और युवाओं का कांग्रेस में शामिल होना पार्टी के लिए राजनीतिक और संगठनात्मक रूप से उत्साह बढ़ाने वाला अवसर माना जा रहा है।
कांग्रेस के लिए यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वरिष्ठ नेता के दौरे के बीच स्थानीय स्तर पर नए लोगों का पार्टी से जुड़ना संगठन के बढ़ते जनसंपर्क और सक्रियता के संकेत के तौर पर प्रस्तुत किया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में बेमेतरा जिला हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है। जिले की तीन विधानसभा सीटें—साजा, बेमेतरा और नवागढ़—2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के खाते में गई थीं। साजा से ईश्वर साहू, बेमेतरा से दीपेश साहू और नवागढ़ से दयालदास बघेल निर्वाचित हुए।
2023 में भाजपा ने कांग्रेस के मजबूत चेहरों को हराकर जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर कब्जा जमाया था। साजा में ईश्वर साहू ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तत्कालीन मंत्री रविंद्र चौबे को हराकर सबसे बड़ा उलटफेर किया, जबकि बेमेतरा में दीपेश साहू ने तत्कालीन विधायक आशीष छाबड़ा को और नवागढ़ में दयालदास बघेल ने कांग्रेस प्रत्याशी को शिकस्त दी।
अब बदलते क्रम में नवागढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पचभईया में करीब 50 किसानों, बुजुर्गों और युवाओं के कांग्रेस में शामिल होने की खबर सामने आई है।
कांग्रेस की ओर से इसे संगठन के विस्तार और भाजपा से मोहभंग का संकेत बताया जा रहा है। पार्टी के मुताबिक जिला महामंत्री मोंटू तिवारी और मंडल अध्यक्ष मुरित मांडवी के नेतृत्व में इन लोगों ने कांग्रेस की नीतियों और जिला कांग्रेस अध्यक्ष आशीष छाबड़ा के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए कांग्रेस का दामन थामा।
कांग्रेस के अनुसार पार्टी में शामिल होने वाले लोगों ने भाजपा सरकार की नीतियों को लेकर असंतोष जताया और विशेष रूप से किसानों से जुड़े मुद्दों को उठाया।
उनका कहना था कि भाजपा सरकार किसान विरोधी है और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।हालांकि किसी राजनीतिक दल में कुछ लोगों का शामिल होना अपने आप में चुनावी तस्वीर बदलने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
लेकिन जब ऐसी घटनाएं उस जिले में हों जहां तीनों विधानसभा सीटों पर सत्तारूढ़ दल के विधायक हों, तो उनका राजनीतिक महत्व जरूर बढ़ जाता है। खासकर तब, जब अगला विधानसभा चुनाव अभी काफी दूर हो।
- Advertisement -
- Advertisement -