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Friday, June 5, 2026

केदारनाथ के बाद धरती के बैकुंठ बद्रीनाथ धाम के कपाट खुले

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डिजिटल डेस्क -23/04/2026

अलकनंदा की कल कल और हिमालय की गोद में बसा उत्तराखंड की पवित्र वादियों में आस्था का अनोखा संगम उमड़ पड़ा है। बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलते ही चारधाम यात्रा 2026 पूर्ण जोश में उतर चुकी है।

धरती का वैकुंठ: बद्रीनाथ धाम की पौराणिक महिमा
उत्तराखंड की गोद में बसे बद्रीनाथ धाम को शास्त्रों में धरती का वैकुंठ कहा गया है—भगवान विष्णु का साक्षात निवास। मान्यता है कि सतयुग में यहां उन्होंने कठोर तपस्या की। पौराणिक कथा के अनुसार, तपस्या के दौरान माता लक्ष्मी ने धूप-वर्षा से रक्षा के लिए बदरी (बेर) वृक्ष का रूप धारण किया, जिससे यह स्थान ‘बद्रीनाथ’ कहलाया।

आदि शंकराचार्य ने इसे पुनर्स्थापित कर प्रमुख तीर्थ बना दिया। शास्त्र गान करते हैं: आकाश, पृथ्वी, पाताल के अनगिनत तीर्थों में बद्रीनाथ का कोई सानी नहीं। दर्शन मात्र से जन्म-मृत्यु के बंधन टूटते हैं, पाप नष्ट हो मोक्ष मिलता है। अलकनंदा तट पर हिमालय की चोटियों से घिरा यह धाम 108 दिव्य वैष्णव तीर्थों में ‘दिव्य देशम’ है।

चारधाम यात्रा की भव्य शुरुआत
यात्रा की नींव अक्षय तृतीया पर यमुनोत्री व गंगोत्री के कपाट खुलने से पड़ी। 22 अप्रैल को केदारनाथ के द्वार खुले, तो भक्तों का जोश चरम पर पहुंचा। अब बद्रीनाथ के कपाट खुलने से चारधाम यात्रा पूर्ण रूप से प्रारंभ। अगले छह माह तक देश-विदेश के श्रद्धालु भगवान बद्रीविशाल के दर्शन कर सकेंगे।

फूलों से सजा बद्री का दरबार
कपाटोद्धाटन पर मंदिर को 25 क्विंटल फूलों—गेंदे से विदेशी प्रजातियों तक—से भव्यतापूर्वक सजाया गया। फूलों की सुगंध में भरे दरबार में आरती उतारी गई, जो आस्था का अनुपम दृश्य रच गया। हिमालयी वादियों में आत्मिक शांति का यह केंद्र लाखों भक्तों को बुलावा दे रहा है।



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