डिजिटल डेस्क खबर चेन्नई:14/05/2026
भारतीय राजनीति में जब भी जातिवाद, तुष्टिकरण और भ्रष्टाचार का बोलबाला बढ़ता है, जनता किसी ऐसे ‘नायक’ की तलाश करती है जो व्यवस्था को जड़ से बदल सके। तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय चंद्रशेखर (थलपति विजय)का मुख्यमंत्री के रूप में उभरना इसी बदलाव का संकेत माना जा रहा है। अपनी पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के साथ उन्होंने न केवल सत्ता हासिल की, बल्कि फ्लोर टेस्ट में 144 विधायकों के समर्थन के साथ अपनी ताकत का लोहा भी मनवा मैदान मार लिया है।
कथनी नहीं, करनी पर जोर: शपथ लेते ही कड़े फैसले
विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही स्पष्ट कर दिया कि उनकी राजनीति ‘काम’ पर आधारित होगी। उन्होंने समाज की दो सबसे बड़ी बुराइयों—महिला असुरक्षा और बढ़ता नशा—पर सीधा प्रहार किया है।
महिला सुरक्षा सर्वोपरि:
उन्होंने आदेश जारी किया है कि महिलाओं के खिलाफ किसी भी अपराध पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी। तत्काल एक्शन के लिए पुलिस प्रशासन को कड़े निर्देश दिए गए हैं।
नशे के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक:
थलपति ने धार्मिक स्थलों और बस अड्डों के 500 मीटर के दायरे में आने वाली शराब दुकानों को हटाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। साथ ही, 717 सरकारी शराब दुकानों (TASMAC) को बंद करने का आदेश देकर उन्होंने समाज सुधार की ओर बड़ा कदम बढ़ाया है।
‘सर्व धर्म सम भाव’: सनातन विरोध की राजनीति का अंत?
तमिलनाडु की राजनीति दशकों से ‘सनातन विरोध’ के इर्द-गिर्द घूमती रही है, लेकिन विजय ने एक अलग राह चुनी है। ईसाई पिता और हिंदू माता की संतान होने के नाते वे चर्च भी जाते हैं और मंदिर भी।
सबसे चौंकाने वाला और बड़ा राजनीतिक संकेत तब मिला जब उन्होंने विख्यात आध्यात्मिक सलाहकार राधन पंडित को अपना OSD (Officer on Special Duty)नियुक्त किया। वैदिक ज्योतिष और अंकशास्त्र के ज्ञाता राधन पंडित की नियुक्ति यह दर्शाती है कि विजय की राजनीति में परंपराओं और अध्यात्म का भी सम्मान होगा। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया है कि वे किसी विशेष समुदाय या जाति का अपमान कर सत्ता पाने के पक्ष में नहीं हैं।
राजनीति में ‘सुपरहिट’ जोड़ी: तृषा कृष्णन की एंट्री की आहट
विजय ने पेरंबूर और तिरुचिरापल्ली दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी। अब चर्चा है कि अपनी खाली की गई सीट पर वे अपनी सह-कलाकार और दोस्त तृषा कृष्णन को चुनाव मैदान में उतार सकते हैं। तृषा की कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि न होने के बावजूद उन्हें मौका देना यह दिखाता है कि विजय राजनीति में नए और विश्वसनीय चेहरों को प्राथमिकता देना चाहते हैं। अगर ऐसा होता है, तो सिनेमा के पर्दे पर राज करने वाली यह जोड़ी अब विधानसभा में भी साथ दिख सकती है।
विशेष विश्लेषण: क्यों खास है विजय की कार्यशैली
आज के दौर में जहाँ राजनेता अक्सर जनता को धर्म, आरक्षण और रेवड़ियों के नाम पर बांटते हैं, वहां विजय का “राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति” का एजेंडा एक ताजी हवा के झोंके जैसा है। स्कूल-कॉलेजों के प्रति पिछली सरकारों की लापरवाही को दूर करना और एक पारदर्शी प्रशासन देना उनकी सबसे बड़ी चुनौती होगी।
जन चौपाल 36
क्या थलापति विजय फिल्मों की तरह राजनीति के भी ‘रियल लाइफ हीरो’ साबित होंगे? उनके शुरुआती कदम तो यही बताते हैं कि वे दक्षिण भारत से निकलकर पूरे देश को ‘जाति-मुक्त‘ और ‘अपराध-मुक्त’ राजनीति का संदेश देना चाहते हैं। जनता की निगाहें अब उनके अगले कार्यकाल पर टिकी हैं।


