मृदा परीक्षण से सुधरेगी मिट्टी की सेहत, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
बेमेतरा -13/05/2026
बेमेतरा जिले में किसानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़ने की दिशा में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना एक प्रभावी पहल बनकर उभरी है। कृषि विभाग द्वारा संचालित मृदा परीक्षण अभियान के तहत अब तक जिले के 24 हजार से अधिक किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जा चुके हैं।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी जमीन की वास्तविक स्थिति से अवगत कराना और संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक करना है, ताकि खेती अधिक लाभकारी और टिकाऊ बन सके।
कृषि विभाग की मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में किसानों द्वारा दिए गए मिट्टी के नमूनों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाता है।
परीक्षण के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्रदान किया जाता है, जिसमें मिट्टी में उपलब्ध नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों की जानकारी दी जाती है। इसके आधार पर किसानों को यह सलाह मिलती है कि उनकी भूमि में किस प्रकार के उर्वरक और कितनी मात्रा में उपयोग किए जाएं।
विशेषज्ञों के अनुसार लगातार रासायनिक उर्वरकों का असंतुलित उपयोग मिट्टी की उर्वरता को धीरे-धीरे कमजोर कर देता है। कई बार किसान अधिक उत्पादन की उम्मीद में जरूरत से ज्यादा यूरिया और रासायनिक खाद का प्रयोग कर लेते हैं, जिससे मिट्टी की प्राकृतिक संरचना प्रभावित होती है।
इससे जमीन “जल” तो नहीं जाती, लेकिन उसकी जैविक क्षमता कमजोर होने लगती है और लंबे समय में उत्पादन घटने लगता है। वहीं मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित खाद और जैविक तत्वों का उपयोग मिट्टी को नया जीवन देने का काम करता है। इससे मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ती है, सूक्ष्म जीव सक्रिय होते हैं और भूमि की जल धारण क्षमता भी बेहतर होती है।
कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि नियमित मृदा परीक्षण किसानों के लिए वैसा ही है जैसे किसी व्यक्ति का स्वास्थ्य परीक्षण। इससे समय रहते मिट्टी की कमी और समस्या का पता चल जाता है और उसी अनुसार उपचार किया जा सकता है। यही कारण है कि कृषि विभाग द्वारा गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाकर किसानों को वैज्ञानिक पद्धति अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
वर्तमान में जिले के 104 गांवों में “विकसित कृषि संकल्प अभियान” के माध्यम से किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व और वैज्ञानिक खेती की जानकारी दी जा रही है। कृषि विभाग का मानना है कि संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन से न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भूमि की उर्वरता भी सुरक्षित रह सकेगी।
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