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Friday, October 30, 2026
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नौकरशाह या प्रजातंत्र-सीएचओ स्वास्थ्य विभाग ने किया कलेक्ट्रेट का घेराव

बेमेतरा -19 अगस्त 2026

(चौपाल पर नीम के पेड़ के नीचे ज्योतिपति अखबार पढ़ रहे हैं। तभी ज्वाला गुस्से में आता है और हाथ में पकड़ी एक खबर की ओर इशारा करता है)

जन चौपाल संवाद
ज्वाला: (आक्रोशित होकर) ज्योतिपति भैया! ज़रा यह खबर देखिए बेमेतरा की। स्वास्थ्य विभाग की महिला कर्मचारियों (CHO) को कलेक्टोरेट का घेराव करना पड़ रहा है! आरोप है कि अधिकारी उनके साथ अभद्र व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना कर रहे हैं। महिला सुरक्षा की बातें सिर्फ कागज़ों पर रह गई हैं क्या? आखिर लोकतंत्र में नौकरशाह जनता के मालिक कैसे बन बैठे?

ज्योतिपति: (अखबार को समेटकर चश्मा उतारते हुए) शांत हो जाओ ज्वाला। गुस्सा होना स्वाभाविक है, लेकिन किसी भी मुद्दे पर विचार कानून और संविधान की कसौटी पर रखकर करना चाहिए। बेमेतरा में महिलाओं ने जो प्रदर्शन किया है, वह लोकतंत्र में अपनी बात रखने का उनका संवैधानिक अधिकार है।

ज्वाला: अधिकार तो ठीक है भैया, लेकिन सवाल यह है कि जब जनप्रतिनिधियों को जनता चुनती है, तो फिर ये अधिकारी खुद को ‘वायसराय’ क्यों समझने लगते हैं? यहाँ तक कि सांसद-विधायक भी कहते हैं कि अफ़सर फोन नहीं उठाते। जंतर-मंतर पर छात्र, युवा और किसान आंदोलन कर रहे हैं,यह सब कहीं नौकरशाही पर निर्भर रहने का नतीजा तो नहीं!?

जब हर वर्ग सड़क पर है, तो क्या यह प्रजातंत्र है या अफ़सरशाही?या कोई समानांतर व्यवस्था चल रही है।

ज्योतिपति: देखो ज्वाला, हमें ‘नौकरशाही’ (ब्यूरोक्रेसी) और ‘प्रजातंत्र’ (डेमोक्रेसी) के फर्क और संबंध को समझना होगा।

हमारे संविधान ने एक समानांतर व्यवस्था नहीं, बल्कि एक पूरक व्यवस्था बनाई है। जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि यानी ‘विधायिका’ नीतियाँ बनाती है, और उस नीति को लागू करने की ज़िम्मेदारी ‘कार्यपालिका’ यानी नौकरशाही की होती है। बिना प्रशासनिक ढाँचे के कोई भी सरकार काम नहीं कर सकती।

ज्वाला: बात तो आपकी ठीक है भैया, लेकिन जब यही अफ़सर अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल करने लगें, छोटे कर्मचारियों को नौकरी से निकालने या CR खराब करने की धमकी देने लगें, तो न्याय कहाँ मिलेगा? पत्रकार तक नौकर शाही के दफ्तरों में जाते हैं तो बैठने तक को नहीं कहा जाता!

ज्योतिपति: अगर कोई भी अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग करता है या मातहत कर्मचारियों के साथ अभद्रता करता है, तो वह कानूनन अपराध और सेवा नियमों का उल्लंघन है। बेमेतरा वाले मामले में ही देखो—कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ‘विशाखा समिति’ का गठन किया है।

कानून ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए यह स्पष्ट व्यवस्था बनाई है कि कार्यस्थल पर यौन या मानसिक उत्पीड़न की निष्पक्ष जाँच हो।

ज्वाला: पर भैया, आरोप लगने पर अधिकारी तो सीधा मुकर जाते हैं, जैसे यहाँ भी CMHO ने आरोपों को निराधार बता दिया। जब तक जाँच होगी, तब तक पीड़ित कर्मचारियों का क्या?

ज्योतिपति: नियम और कानून की नज़र में “जब तक दोष सिद्ध न हो, तब तक हर व्यक्ति निर्दोष है।” इसलिए निष्पक्ष जाँच ज़रूरी है।
अगर जाँच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो अनुशासनात्मक कार्रवाई भी होती है और निलंबन भी। हमारी व्यवस्था में कोई भी अफ़सर कानून से ऊपर नहीं है।

लोकतंत्र की ताकत यही है कि यहाँ एक आम नागरिक भी कानून के रास्ते से बड़े से बड़े अधिकारी को जवाबदेह बना सकता है।

ज्वाला: आप सही कह रहे हैं भैया, लेकिन सुधार की ज़रूरत तो है ना? चाहे शिक्षा में असमानता हो या दफ्तरों में अफ़सरों का रवैया, जनता और प्रशासन के बीच का यह फासला खत्म होना चाहिए।

ज्योतिपति: बिल्कुल! सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है। प्रजातंत्र तभी मजबूत होगा जब:
प्रशासन में पारदर्शिता और संवेदनशीलता हो।जनप्रतिनिधि और अफ़सरशाही जनता के प्रति जवाबदेह रहें।
नागरिक भी अपने अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक रहें।

आंदोलन और प्रदर्शन शासन को उसकी ज़िम्मेदारी याद दिलाने का ज़रिया हैं, लेकिन समाधान हमेशा कानून, संविधान और संवाद के दायरे में ही निकलता है।

ज्वाला: (सोचते हुए) आपकी बात से समझ आया भैया। अफ़सरशाही को व्यवस्था से मिटाया नहीं जा सकता, लेकिन कानून के सही इस्तेमाल से उसे जनता का सेवक बनाए रखा जा सकता है। चलिए, देखते हैं बेमेतरा मामले में विशाखा समिति की रिपोर्ट में क्या निकलकर आता है।

ज्योतिपति: (मुस्कुराते हुए) बिल्कुल ज्वाला, जागरूक नागरिक ही एक मजबूत लोकतंत्र की पहचान हैं!

शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय में पुलिस की ‘साइबर जागरूकता’ कार्यशाला

रायपुर- 18 अगस्त 2026

छात्रों ने साइबर क्राइम-निवारी संकल्प लिया।

पुलिस अधिकारियों ने कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को हाल के साइबर अपराधों के नए तरीकों, ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के उपाय और बुनियादी साइबर सुरक्षा के सिद्धांतों के बारे में बताया।

इस महाभियान का उद्घाटन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने किया था, तथा राज्य पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने भी नागरिकों से सहयोग की अपील की है।

छत्तीसगढ़ पुलिस के “साइबर जागृति अभियान” के अंतर्गत आज रायपुर के शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय में छात्रों और इंटर्न्स के लिए एक विशेष साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

अभियान का उद्देश्य प्रदेशवासियों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने और जागरूक करना है।

कार्यक्रम के दौरान युवाओं को अभियान की मुख्य थीम “साइबर जागृति की एक सेल्फी” से जोड़ा गया और उन्हें छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा जारी लिंक क्लिक करने या QR कोड स्कैन करके विशेष “सेल्फी फ्रेम” में सेल्फी लेने के लिए प्रेरित किया गया। उपस्थित छात्रों ने अपनी सेल्फी सोशल मीडिया पर भी साझा की, ताकि जागरूकता संदेश उनके नेटवर्क तक पहुँचे।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह सात सप्ताह का “साइबर जागृति अभियान” 15 अगस्त से 02 अक्टूबर 2026 तक पूरे प्रदेश में चल रहा है। पहले सप्ताह में विशेष रूप से स्कूल और कॉलेजों में डिजिटल सतर्कता और बुनियादी सुरक्षा पर सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम के समापन पर महाविद्यालय के सभी छात्रों और इंटर्न्स ने पुलिस के साथ मिलकर छत्तीसगढ़ को साइबर क्राइम मुक्त बनाने का संकल्प लिया।

छत्तीसगढ़ में अवैध कॉलोनी पर अब 7 साल की जेल, खरीदने से पहले ये जांच जरूरी

रायपुर- 18 अगस्त 2026

दरअसल, प्रदेश में धड़ल्ले से कट रही अवैध कॉलोनियों को लेकर सरकार ने अब सख्ती दिखाई है। छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम के तहत साफ नियम है – कोई भी व्यक्ति जमीन को टुकड़ों में बांटकर कॉलोनी बसाएगा, तो उसे पहले नगर पालिका या नगर पंचायत में कॉलोनाइजर के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराना ही होगा। यही नियम बिल्डर और अपार्टमेंट बनाने वालों पर भी लागू है।

अगर आप रायपुर समेत किसी भी शहर में कॉलोनी में प्लॉट या बिल्डर से फ्लैट लेने की सोच रहे हैं, तो जेब ढीली करने से पहले एक बार कागज जरूर टटोल लीजिए। नहीं तो सस्ते के चक्कर में आप अवैध कॉलोनी में फंस सकते हैं।


नियम तोड़ा तो 7 साल जेल और 1 लाख जुर्माना

अगर कोई बिना रजिस्ट्रेशन और बिना ले-आउट पास कराए कॉलोनी काटता पकड़ा गया, तो उसे 3 से 7 साल तक की जेल और कम से कम एक लाख रुपये जुर्माना भरना पड़ सकता है। साथ ही कोर्ट पीड़ित खरीदार को हर्जाना दिलाने का आदेश भी दे सकता है।

नियम के मुताबिक -कॉलोनाइजर का लाइसेंस सिर्फ 5 साल के लिए वैध होता है।हर नई कॉलोनी के लिए अलग से विकास अनुमति लेनी पड़ती है।

कॉलोनी की 15% जमीन EWS (गरीब वर्ग) के लिए रिजर्व रखनी होती है।कुछ प्लॉट नगर पालिका के पास बंधक रखने पड़ते हैं, ताकि कॉलोनाइजर सड़क-नाली-बिजली का काम पूरा किए बिना भाग न जाए।

खरीदार क्या करें?

इसी को लेकर सूरजपुर जिला प्रशासन ने भी खरीदारों को आगाह किया है। प्रशासन ने कहा है – किसी भी दलाल या बिल्डर के कहने पर मत आइए। खरीदने से पहले सीधे नगर पालिका में जाकर चार चीजें जरूर चेक करें –

कॉलोनाइजर का पंजीयन वैध है या नहीं
कॉलोनी का नक्शा (ले-आउट) पास है या नहीं
विकास अनुमति मिली है या नहीं
प्लॉट बंधक तो नहीं है।


अधिकारियों का कहना है, थोड़ी सी जागरूकता आपको अवैध निर्माण और भविष्य के बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है। अगर कहीं नियम टूटता दिखे तो प्रशासन कार्रवाई करेगा।

जिला महिला कांग्रेस का भव्य सावन मिलन एवं सम्मान समारोह संपन्न

बेमेतरा- 18 अगस्त 2026

बेमेतरा जिला महिला कांग्रेस द्वारा भव्य सावन मिलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, पूर्व जिला अध्यक्षों, वरिष्ठ महिला कांग्रेस पदाधिकारियों एवं संगठन के प्रति समर्पित कार्यकर्ताओं का शाल, श्रीफल एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली समाजसेवी महिलाओं को भी सम्मानित कर उनके योगदान की सराहना की गई।

कार्यक्रम में पूर्व कृषि मंत्री रविंद्र चौबे, पूर्व विधायक एवं जिला कांग्रेस अध्यक्ष आशीष छाबड़ा, पूर्व विधायक नवागढ़ गुरुदयाल बंजारे, किसान कांग्रेस अध्यक्ष मंगत साहू, यूथ कांग्रेस अध्यक्ष प्रांजल तिवारी सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में महिला कांग्रेस की कार्यकर्ता उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया।
सावन के रंग में रंगा आयोजन
सावन मिलन समारोह में महिलाओं ने पूरे उत्साह और उमंग के साथ विभिन्न पारंपरिक खेलों एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लिया।

कार्यक्रम में सावन झूला, घेड़ी, कबड्डी, थाली सजाओ, फुगड़ी एवं नृत्य सहित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।

गीत-संगीत, नृत्य और पारंपरिक खेलों के बीच महिलाओं ने जमकर आनंद लिया। पूरे आयोजन स्थल पर सावन की उमंग और उत्साह का माहौल देखने को मिला।

आशीष छाबड़ा ने महिलाओं के साथ खेलों में लिया हिस्सा

कार्यक्रम की खास बात यह रही कि जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक श्री आशीष छाबड़ा ने भी महिलाओं के साथ विभिन्न खेलों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। उन्होंने खेलों में सहभागिता करते हुए महिला कांग्रेस की कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया।
अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं एवं पदाधिकारियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की और महिला कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन किया।

महिलाओं को जोड़ने और संस्कृति को आगे बढ़ाने का अवसर

कार्यक्रम में उपस्थित कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सावन मिलन जैसे आयोजन महिलाओं को आपस में जुड़ने, अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं, वरिष्ठ कांग्रेस महिलाओं और संगठन के प्रति समर्पित कार्यकर्ताओं का सम्मान उनके योगदान के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक है।

सैकड़ों महिलाओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता से पूरा आयोजन सावन की उमंग, उत्साह और खुशियों के रंग में रंगा नजर आया। उपस्थित अतिथियों एवं कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बेमेतरा जिला महिला कांग्रेस की पूरी टीम को सफल एवं भव्य आयोजन के लिए बधाई दी।

ये प्रमुख रूप से रहीं उपस्थित
कार्यक्रम में महिला कांग्रेस की जिला अध्यक्ष श्रीमती कविता साहू, जनपद अध्यक्ष बेरला श्रीमती माधुरी रवि परघनिया, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती शकुंतला मंगत साहू, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती सुशीला जोशी, श्रीमती शशि प्रभा गायकवाड़ एवं श्रीमती बालकुमारी ध्रुव, शहर अध्यक्ष श्रीमती रीता पांडे एवं श्रीमती रश्मि मिश्रा, मंडल अध्यक्ष श्रीमती जनता साहू, पूर्व जनपद अध्यक्ष श्रीमती रीना मिथलेश शर्मा, पूर्व पार्षद बेरला श्रीमती नेहा सुराणा, ब्लॉक अध्यक्ष श्रीमती रामा साहू, जिला उपाध्यक्ष श्रीमती आरती पटेल एवं श्रीमती अर्चना परघनिया, उपाध्यक्ष श्रीमती भारती पटेल, जनपद सदस्य बेरला श्रीमती हीरा वर्मा, श्रीमती सीमा टिकरिया एवं श्रीमती अर्चना देशलहरे, पूर्व अध्यक्ष नगर पंचायत बेरला श्रीमती सविता हिरवानी सहित बड़ी संख्या में महिला कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहीं।

इसके अलावा श्रीमती रेहाना रवानी, श्रीमती ममता साहू, श्रीमती सीमा साहू, श्रीमती लता सोनवानी, श्रीमती राधा बघेल, श्रीमती इंद्रावती, श्रीमती हेमिन यादव, श्रीमती बिकु मानिकपुर, श्रीमती प्रतिभा गिर, श्रीमती रूबी सलूजा, श्रीमती शशि सेन, श्रीमती सुहद्रा बंजारे, श्रीमती नीलम टंडन एवं श्रीमती रीना साहू सहित सैकड़ों की संख्या में महिलाएं एवं कांग्रेस कार्यकर्ता कार्यक्रम में शामिल हुए।

लंबित मांग: भारतीय मजदूर संघ ने घेरा कलेक्ट्रेट, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

कबीरधाम -18 अगस्त 2026

श्रमिकों की विभिन्न लंबित मांगों और समस्याओं को लेकर भारतीय मजदूर संघ जिला कबीरधाम के नेतृत्व में जिला कलेक्ट्रेट का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में पंडरिया शक्कर कारखाना के श्रमिकों, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं, स्कीम वर्करों सहित जिले के विभिन्न श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रमिक शामिल हुए।

प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों ने रोजगार सुरक्षा, वेतन, सामाजिक सुरक्षा और लंबित भुगतान सहित विभिन्न मांगों को लेकर शासन-प्रशासन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। प्रदर्शनकारियों ने मांगों का शीघ्र निराकरण किए जाने की मांग की।

पंडरिया शक्कर कारखाना के श्रमिकों की प्रमुख मांगें

भारतीय मजदूर संघ ने बताया कि लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना, पंडरिया में प्रत्येक वर्ष जुलाई माह में श्रमिकों की कार्य पर वापसी होती रही है, लेकिन इस वर्ष बड़ी संख्या में श्रमिकों को अब तक काम पर वापस नहीं लिया गया है। संगठन ने सभी पात्र श्रमिकों को तत्काल कार्य पर वापस लेने तथा उनकी रोजगार सुरक्षा और सेवा निरंतरता सुनिश्चित करने की मांग की।
इसके साथ ही समान काम के लिए समान वेतन लागू करने और श्रमिकों का न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग भी उठाई गई।

ललित चन्द्रवंशी की आईडी डिलीट करने का विरोध

प्रदर्शन के दौरान पंडरिया शक्कर कारखाना के इकाई महामंत्री ललित चन्द्रवंशी की आईडी डिलीट किए जाने का मामला भी प्रमुखता से उठाया गया। भारतीय मजदूर संघ ने उनकी आईडी तत्काल बहाल करने और उन्हें पूर्ववत कार्य पर लिए जाने की मांग की।

संगठन का कहना है कि श्रमिक प्रतिनिधि के साथ इस तरह की कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी और श्रमिकों के अधिकारों से जुड़े मामलों में संगठन मजबूती से आवाज उठाता रहेगा।

लंबित वेतन और सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा

भारतीय मजदूर संघ ने श्रमिकों के लंबित वेतन, बोनस, एरियर्स और अन्य वैधानिक भुगतानों का तत्काल निराकरण करने की मांग की। इसके अलावा श्रमिकों को EPF, ESI, बोनस, ग्रेच्युटी सहित अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का पूर्ण लाभ दिलाने की मांग भी रखी गई।

आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं और स्कीम वर्करों की मांगें

प्रदर्शन में आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं और स्कीम वर्करों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया। स्कीम वर्करों को मजदूर की श्रेणी में शामिल करने, न्यूनतम मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा का लाभ देने तथा न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की गई।
वहीं आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं के लिए सेवानिवृत्ति लाभ, सामाजिक सुरक्षा, पदोन्नति और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई।

मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन के बाद भारतीय मजदूर संघ द्वारा जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में श्रमिकों की विभिन्न मांगों का उल्लेख करते हुए शासन से इनका जल्द निराकरण करने की मांग की गई।

भारतीय मजदूर संघ जिला कबीरधाम के जिला महामंत्री ने कहा कि श्रमिकों के अधिकार, रोजगार, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर संगठन पूरी मजबूती के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि यदि मांगों का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया तो संगठन आगामी दिनों में आंदोलन की नई रणनीति तय करेगा।

बिजली दर और स्मार्ट मीटर के विरोध में कांग्रेस का धरना, आशीष छाबड़ा बोले- जनता पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ

बेमेतरा 17 अगस्त 2026

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार एवं जिला कांग्रेस कमेटी बेमेतरा के नेतृत्व में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बेमेतरा के तत्वावधान में बिजली के बढ़ते दाम, स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं पर पड़ रहे अतिरिक्त आर्थिक बोझ और प्रदेश सरकार की नीतियों के विरोध में प्रदेशव्यापी आंदोलन के तहत ग्राम पंचायत मटका में ब्लॉक स्तरीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया।

धरना-प्रदर्शन में जिला कांग्रेस कमेटी बेमेतरा के अध्यक्ष आशीष छाबड़ा, ब्लॉक प्रभारी सुमन गोस्वामी, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बेमेतरा के अध्यक्ष मिथलेश वर्मा, जिला पंचायत सदस्य शशि प्रभा गायकवाड सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और क्षेत्रवासी शामिल हुए।

धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए आशीष छाबड़ा ने कहा कि बिजली आम जनता की मूलभूत आवश्यकता है, कोई विलासिता नहीं। प्रदेश में बिजली के दाम लगातार बढ़ने से गरीब, किसान, मजदूर, मध्यमवर्गीय परिवारों और छोटे व्यवसायियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। पहले से महंगाई की मार झेल रही जनता के लिए बढ़े हुए बिजली बिल दोहरी मार साबित हो रहे हैं।

उन्होंने स्मार्ट मीटर को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। छाबड़ा ने कहा कि स्मार्ट मीटर के नाम पर आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने के बजाय नई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई उपभोक्ताओं में अधिक बिजली बिल आने को लेकर असंतोष है। सरकार को उपभोक्ताओं की शिकायतों का तत्काल निराकरण करना चाहिए।
आशीष छाबड़ा ने बिजली के बढ़े हुए दाम वापस लेने, स्मार्ट मीटर पर रोक लगाने तथा पुराने सामान्य मीटर लगाने की दिशा में निर्णय लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह आंदोलन किसी राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि आम जनता के हक, अधिकार और आर्थिक हितों की लड़ाई है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस बिजली के बढ़े हुए दाम वापस लेने, 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना पुनः लागू करने, स्मार्ट मीटर पर रोक लगाने और उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग को लेकर अपना संघर्ष आगे भी जारी रखेगी। जब तक आम जनता को राहत नहीं मिलती, कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक जनता की आवाज मजबूती से उठाती रहेगी।
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बेमेतरा के अध्यक्ष मिथलेश वर्मा ने कहा कि बिजली के बढ़ते दाम और स्मार्ट मीटर को लेकर आम जनता में व्यापक असंतोष है। कांग्रेस इस जनहित के मुद्दे को गांव-गांव तक ले जाएगी और बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
ब्लॉक प्रभारी सुमन गोस्वामी ने कहा कि प्रदेश सरकार को आम जनता की परेशानियों को गंभीरता से लेना चाहिए। बिजली के बढ़े हुए दाम वापस लेने और स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों का तत्काल निराकरण किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने का आह्वान किया।
जिला पंचायत सदस्य शशि प्रभा गायकवाड ने भी धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए बिजली के बढ़ते दाम और स्मार्ट मीटर की व्यवस्था से उपभोक्ताओं पर पड़ रहे आर्थिक बोझ पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता की समस्याओं का समाधान करते हुए बिजली उपभोक्ताओं को तत्काल राहत देनी चाहिए।
इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने बिजली के बढ़े हुए दाम वापस लेने, स्मार्ट मीटर पर रोक लगाने और आम उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग उठाई।
कार्यक्रम में ललित विश्वकर्मा, ऋषि वर्मा, मोहित वर्मा, राजेंद्र वर्मा, शिव वर्मा, योगिता साहू, प्रज्वल वर्मा, अमित वर्मा, अनिल दुबे, चित्रेन्द्र वर्मा, बसंत जोशी, महानंद वर्मा, अनिल यदु, पवन साहू, राजकुमार बंजारे, संजय वर्मा, नरेंद्र निषाद, छोटू साहू, सूरज कोसले, सुखराम वर्मा, हीरालाल यदू, राजू रजक सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

रात 12 बजे वैद्य फूड में राजस्व, खाद्य औषधि एवं पुलिस की संयुक्त टीम की दबिश, 200 किलो पनीर जब्त

रायपुर _ 17 अगस्त 2026


एनालॉग पनीर के निर्माण एवं विक्रय पर प्रतिबंध के उल्लंघन की आशंका को देखते हुए राजस्व, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने महासमुंद के भलेसर रोड स्थित वैद्य फूड में बीती देर रात दबिश दी। इस कार्रवाई के दौरान लगभग तीन घंटे तक संस्थान की जांच की गई।

रात्रि करीब 12 बजे राजस्व तथा खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों की संयुक्त टीम वैद्य फूड पहुंची। जांच के दौरान मध्य रात्रि में पनीर का निर्माण किए जाने की स्थिति सामने आई। मौके पर उपलब्ध पनीर की गुणवत्ता एवं निर्माण में प्रयुक्त सामग्री को लेकर संदेह उत्पन्न होने पर लगभग 200 किलोग्राम पनीर को जब्त किया गया। अधिकारियों द्वारा मौके पर उपलब्ध खाद्य सामग्री एवं निर्माण प्रक्रिया से संबंधित आवश्यक जानकारी भी संकलित की गई। आज सुबह कार्रवाई के दौरान विभाग द्वारा सील किए गए कोल्ड स्टोरेज में रखी खाद्य सामग्री को नियमानुसार खोलकर उसकी जांच की गई। खाद्य सामग्री की पुष्टि एवं गुणवत्ता परीक्षण के लिए पनीर का नमूना लिया गया, जिसे जांच हेतु राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, रायपुर भेजा गया है।

खराब, बासी और नकली पनीर सेहत के लिए बेहद खतरनाक: विशेषज्ञों के अनुसार खराब और बासी पनीर खाने से फूड पॉइजनिंग, उल्टी-दस्त, पेट में ऐंठन, बुखार और डिहाइड्रेशन जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, क्योंकि इसमें हानिकारक बैक्टीरिया जैसे साल्मोनेला और लिस्टेरिया तेजी से पनपते हैं। वहीं बाजार में बिकने वाला नकली या एनालॉग पनीर, जो दूध की जगह पाम ऑयल, मिल्क पाउडर, स्टार्च, डिटर्जेंट और हानिकारक केमिकल्स से बनाया जाता है, वह और भी ज्यादा घातक है। इसके लगातार सेवन से लिवर और किडनी पर बुरा असर पड़ता है, कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है, पाचन तंत्र कमजोर होता है और बच्चों व बुजुर्गों में रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है।
‘रिपोर्ट के आधार पर होगी आगामी कार्रवाई’
अभिहित अधिकारी उमेश कुमार ने बताया कि जब्त पनीर का नमूना राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला रायपुर भेजा गया है। प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं संबंधित प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की इस कार्रवाई का उद्देश्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना तथा प्रतिबंधित अथवा मिलावटी खाद्य पदार्थों के निर्माण एवं विक्रय पर प्रभावी नियंत्रण रखना है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के निर्देश अनुसार खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

अबूझमाड़ की पारंपरिक स्वास्थ्य और भोजन परंपरा पर विदेशों से शोध

रायपुर 17 अगस्त 2026

छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा नारायणपुर वनमंडल कार्यालय सभागार में 14 अगस्त को वैद्य सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और वनौषधियों के संवर्धन को बढ़ावा देना था।

छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी स्वास्थ्य परंपरा और वनौषधीय ज्ञान को अब वैश्विक पहचान मिल रही है। अबूझमाड़ की पारंपरिक स्वास्थ्य और भोजन परंपरा पर शोध करने के लिए विदेशों से भी शोधार्थी आ रहे हैं। यह बात नारायणपुर में आयोजित जिला स्तरीय वैद्य सम्मेलन में सामने आई।

वैद्यों ने साझा किया अनुभव, हर्बल गार्डन की मांग

बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। वनमंडल अधिकारी श्री वेंकटेश एम. जी. ने उनका स्वागत किया। सम्मेलन में वैद्य रतन रंजन धर, कज्जाराम गोटा, रूपसिंह, सुखदेव, सोमनाथ, फूलसिंह, अमृतलाल और हरिचंद सहित नारायणपुर जिले के 25 वैद्यों ने हिस्सा लिया और पारंपरिक जड़ी-बूटियों से उपचार के अपने अनुभव साझा किए। वैद्यों ने जिले में वनौषधियों के संरक्षण और जन-जागरूकता के लिए हर्बल गार्डन विकसित करने की मांग रखी।

मुख्यमंत्री और वन मंत्री के मार्गदर्शन में वैद्यों के लिए योजनाएं

बोर्ड अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल और वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वैद्यों के उत्थान के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है।

बोर्ड के कंसल्टेंट अमित गुप्ता ने बताया कि –

  • आर्थिक रूप से कमजोर वैद्य समूहों को उच्च गुणवत्ता की जड़ी-बूटी पीसने के लिए निःशुल्क पल्वराइजर मशीन दी जा रही है। • हीलर हर्बल गार्डन योजना के तहत वैद्य अपनी बाड़ी में औषधीय पौधों का उद्यान लगा सकते हैं, जिसके लिए बोर्ड आर्थिक और तकनीकी मदद दे रहा है। • स्कूल हर्बल गार्डन के विकास और रखरखाव में भी सहयोग दिया जा रहा है। • पारंपरिक उपचार पद्धतियों का प्रमाणीकरण QCI के माध्यम से किया जा रहा है।

  • 3 हजार हेक्टेयर में होगा वनौषधियों का रोपण

वनमंडल अधिकारी श्री वेंकटेश एम. जी. ने वैद्यों की मांग पर नारायणपुर में हर्बल गार्डन विकसित करने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि नारायणपुर वनमंडल में लगभग 3 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वनौषधियों का रोपण किया जा रहा है। साथ ही वनौषधियों की रिपॉजिटरी और वैद्यों के ज्ञान का दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा।

विलुप्तप्राय रसना और दहीमन का होगा संरक्षण

श्री मरकाम ने कहा कि विलुप्ति की कगार पर पहुंची रसना जड़ी नारायणपुर के छोटे डोंगर और बेनूर के जंगलों में पाई जाती है, इसी तरह लगभग विलुप्तप्राय दहीमन भी यहां उपलब्ध है। ऐसी दुर्लभ 50 वनौषधियों की पहचान कर उनके संरक्षण का कार्य बोर्ड द्वारा किया जा रहा है। यह सरकार और वैद्यों की साझा जिम्मेदारी है।

मेरी बेटी, मेरा अभिमान : बालिकाओं के सम्मान और शिक्षा के लिए जरूरी है सुरक्षित वॉशरूम

रायपुर 17 अगस्त 2026

मेरी बेटी, मेरा अभिमान : स्कूल में बालिका शौचालय सुविधा नहीं तो अनुमति क्यों?
“मेरी बेटी, मेरा अभिमान”—यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि उस जिम्मेदारी का नाम होना चाहिए, जिसमें हमारी बेटियां सुरक्षित माहौल में पढ़ें, आगे बढ़ें और अपने सपनों को पूरा करें। इसके लिए अच्छी शिक्षा के साथ स्कूल में स्वच्छ, सुरक्षित और अलग बालिका शौचालय होना भी उतना ही जरूरी है।

प्रदेश में इसी सोच के साथ ‘मेरी बेटी, मेरा अभिमान’ अभियान शुरू किया जा रहा है। इसके तहत 6,500 से अधिक विद्यालयों में बेटियों के लिए शौचालयों का निर्माण किया जाएगा। सरकार की यह पहल निश्चित रूप से स्वागत योग्य है, लेकिन अब सवाल इससे आगे का है—क्या बालिकाओं के लिए शौचालय की सुविधा हर स्कूल के लिए अनिवार्य नहीं होनी चाहिए?

स्कूल में बालिका शौचालय सुविधा नहीं तो अनुमति क्यों?

एक बच्ची सुबह घर से स्कूल जाती है और कई घंटे वहां बिताती है। ऐसे में उसके लिए सुरक्षित और स्वच्छ शौचालय कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि बुनियादी जरूरत है।

विशेषकर किशोरावस्था में पहुंचने वाली छात्राओं के लिए यह सुविधा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। मासिक धर्म के दौरान यदि स्कूल में साफ-सुथरा शौचालय, पानी और स्वच्छता की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है तो छात्राओं को परेशानी होती है। कई बार वे स्कूल जाने से बचती हैं या छुट्टी लेती हैं। इसका असर उनकी पढ़ाई और आत्मविश्वास पर पड़ता है।

इसलिए सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जिस स्कूल में बालिकाओं के लिए अलग और उपयोग योग्य शौचालय नहीं है, उसे मान्यता या संचालन की अनुमति ही न मिले।

केवल शौचालय बनाना काफी नहीं

यह भी ध्यान रखना होगा कि शौचालय बनाकर फोटो खिंचवा लेना ही पर्याप्त नहीं है। उसमें नियमित सफाई हो, पानी उपलब्ध हो, दरवाजा सुरक्षित हो, पर्याप्त रोशनी हो और उसकी लगातार निगरानी हो—यह भी उतना ही जरूरी है।

सरकार को स्कूलों की मान्यता और निरीक्षण के दौरान इन सुविधाओं की वास्तविक स्थिति की जांच करनी चाहिए। कागज पर शौचालय नहीं, जमीन पर उपयोग योग्य शौचालय चाहिए।

बेटी पढ़ेगी तभी प्रदेश बढ़ेगा

हम बेटी को स्कूल भेजने, उसे पढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने की बात करते हैं। लेकिन इसके लिए स्कूल में उसकी बुनियादी जरूरतों का ध्यान रखना भी जरूरी है।

6,500 से अधिक स्कूलों में बालिका शौचालय निर्माण की पहल एक अच्छी शुरुआत है। अब इसे ऐसी व्यवस्था में बदलने की जरूरत है, जिसमें हर सरकारी और निजी स्कूल में बालिकाओं के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और अलग वॉशरूम अनिवार्य हो।

क्योंकि बेटी को स्कूल भेजना केवल उसे किताब देना नहीं है। उसे सम्मान, सुरक्षा और सुविधा के साथ पढ़ने का अधिकार देना भी हमारी जिम्मेदारी है।

‘मेरी बेटी, मेरा अभिमान’ तभी सच में सार्थक होगा, जब प्रदेश की हर बेटी स्कूल में पढ़ते समय यह महसूस करे—यह जगह मेरी भी है, यहां मेरी सुरक्षा और सम्मान की भी चिंता की जाती है।

बेटियां सुरक्षित होंगी, पढ़ेंगी और आगे बढ़ेंगी—तभी छत्तीसगढ़ आगे बढ़ेगा।

छत्तीसगढ़ी साहित्य का गौरवपूर्ण उत्सव:साहित्यकारों का सम्मान और 26 पुस्तकों का विमोचन

रायपुर – 17 अगस्त 2026

छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य के संरक्षण, संवर्धन एवं विकास को समर्पित राजभाषा आयोग के कार्यालय स्थापना दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर में गरिमामय साहित्यिक आयोजन हुआ। कार्यक्रम में प्रदेशभर से साहित्यकार, कवि, रचनाकार, भाषा-सेवी, विद्वान और साहित्यप्रेमी शामिल हुए।

आयोजन में छत्तीसगढ़ी भाषा के प्रचार-प्रसार, साहित्य सृजन और भाषा को जनमानस तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले वरिष्ठ साहित्यकारों एवं भाषा-सेवियों का सम्मान किया गया। वहीं, राजभाषा आयोग द्वारा प्रकाशित 26 पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और साहित्यिक समृद्धि को लेकर साहित्यकारों एवं विद्वानों ने अपने विचार साझा किए।

भाषा-सेवियों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए लंबे समय से कार्य कर रहे भाषा-सेवियों के योगदान को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में सेवानिवृत्त उद्घोषक, आकाशवाणी संजय पाण्डेय, वरिष्ठ दूरदर्शन उद्घोषक एवं पत्रकार श्रीमती ज्योति सिंह, सेवानिवृत्त कार्यक्रम अधिकारी, आकाशवाणी समीर शुक्ला, साहित्यकार चेतन भारती, रायपुर तथा साहित्यकार चोवाराम वर्मा ‘बादल’ शामिल रहे।

वक्ताओं ने कहा कि किसी भी भाषा की वास्तविक शक्ति उसके साहित्य, लोक परंपराओं और उसे अपने जीवन का हिस्सा बनाने वाले लोगों से निर्मित होती है। छत्तीसगढ़ी भाषा को समृद्ध बनाने में साहित्यकारों, कवियों, पत्रकारों, कलाकारों और भाषा-सेवियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

राजभाषा आयोग की 26 पुस्तकों का विमोचन

समारोह का प्रमुख आकर्षण राजभाषा आयोग द्वारा प्रकाशित 26 पुस्तकों का विमोचन रहा। इन पुस्तकों के माध्यम से छत्तीसगढ़ी भाषा, साहित्य, लोकभाषा और लोकसंस्कृति से जुड़े विविध पक्षों को दस्तावेज के रूप में संरक्षित करने की दिशा में पहल की गई है।

वक्ताओं ने कहा कि पुस्तकों का प्रकाशन केवल साहित्य के संरक्षण का कार्य नहीं है, बल्कि यह नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और जड़ों से जोड़ने का माध्यम भी है। आयोग की प्रकाशित पुस्तकों से छत्तीसगढ़ी साहित्य के अलग-अलग पक्षों को सामने लाने और प्रदेश के रचनाकारों को व्यापक मंच देने में मदद मिलेगी।

प्रो. राजन यादव ने भाषा और संस्कृति पर दिया प्रस्तुतिकरण

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के अधिष्ठाता कला संकाय एवं विभागाध्यक्ष प्रो. राजन यादव ने ज्ञानवर्धक प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने भाषा, साहित्य और संस्कृति के आपसी संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए छत्तीसगढ़ी भाषा की साहित्यिक परंपरा और उसकी समृद्ध अभिव्यक्ति पर चर्चा की।

उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि किसी समाज की पहचान, इतिहास, संस्कृति, संवेदनाओं और सामूहिक स्मृतियों को अपने भीतर संजोए रखती है। ऐसे में छत्तीसगढ़ी भाषा के साहित्य को समृद्ध करना प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने के समान है।

वरिष्ठ साहित्यकारों की रही गरिमामयी उपस्थिति

आयोजन में विधायक मोतीलाल साहू, विधायक पुरन्दर मिश्रा, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति मनोज दयाल, संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, संस्कृति एवं राजभाषा संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा तथा राजभाषा आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार सहित प्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकार एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

वरिष्ठ साहित्यकार परदेशी राम वर्मा, अरुण निगम, मीर अली मीर, वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती शशिकला दुबे, वीर अजीत शर्मा, श्रीमती शकुंतला तरार और श्रीमती सीमा निगम सहित प्रदेश के विभिन्न अंचलों से पहुंचे साहित्यकारों ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।

एक मंच पर दिखी साहित्य की पीढ़ियों की सहभागिता

राजभाषा आयोग के कार्यालय स्थापना दिवस समारोह में प्रदेश के अलग-अलग अंचलों से आए साहित्यकारों ने एक-दूसरे से संवाद किया और छत्तीसगढ़ी भाषा के भविष्य, साहित्य सृजन, संरक्षण तथा प्रचार-प्रसार से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए।