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Monday, August 17, 2026

मेरी बेटी, मेरा अभिमान : बालिकाओं के सम्मान और शिक्षा के लिए जरूरी है सुरक्षित वॉशरूम

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रायपुर 17 अगस्त 2026

मेरी बेटी, मेरा अभिमान : स्कूल में बालिका शौचालय सुविधा नहीं तो अनुमति क्यों?
“मेरी बेटी, मेरा अभिमान”—यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि उस जिम्मेदारी का नाम होना चाहिए, जिसमें हमारी बेटियां सुरक्षित माहौल में पढ़ें, आगे बढ़ें और अपने सपनों को पूरा करें। इसके लिए अच्छी शिक्षा के साथ स्कूल में स्वच्छ, सुरक्षित और अलग बालिका शौचालय होना भी उतना ही जरूरी है।

प्रदेश में इसी सोच के साथ ‘मेरी बेटी, मेरा अभिमान’ अभियान शुरू किया जा रहा है। इसके तहत 6,500 से अधिक विद्यालयों में बेटियों के लिए शौचालयों का निर्माण किया जाएगा। सरकार की यह पहल निश्चित रूप से स्वागत योग्य है, लेकिन अब सवाल इससे आगे का है—क्या बालिकाओं के लिए शौचालय की सुविधा हर स्कूल के लिए अनिवार्य नहीं होनी चाहिए?

स्कूल में बालिका शौचालय सुविधा नहीं तो अनुमति क्यों?

एक बच्ची सुबह घर से स्कूल जाती है और कई घंटे वहां बिताती है। ऐसे में उसके लिए सुरक्षित और स्वच्छ शौचालय कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि बुनियादी जरूरत है।

विशेषकर किशोरावस्था में पहुंचने वाली छात्राओं के लिए यह सुविधा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। मासिक धर्म के दौरान यदि स्कूल में साफ-सुथरा शौचालय, पानी और स्वच्छता की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है तो छात्राओं को परेशानी होती है। कई बार वे स्कूल जाने से बचती हैं या छुट्टी लेती हैं। इसका असर उनकी पढ़ाई और आत्मविश्वास पर पड़ता है।

इसलिए सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जिस स्कूल में बालिकाओं के लिए अलग और उपयोग योग्य शौचालय नहीं है, उसे मान्यता या संचालन की अनुमति ही न मिले।

केवल शौचालय बनाना काफी नहीं

यह भी ध्यान रखना होगा कि शौचालय बनाकर फोटो खिंचवा लेना ही पर्याप्त नहीं है। उसमें नियमित सफाई हो, पानी उपलब्ध हो, दरवाजा सुरक्षित हो, पर्याप्त रोशनी हो और उसकी लगातार निगरानी हो—यह भी उतना ही जरूरी है।

सरकार को स्कूलों की मान्यता और निरीक्षण के दौरान इन सुविधाओं की वास्तविक स्थिति की जांच करनी चाहिए। कागज पर शौचालय नहीं, जमीन पर उपयोग योग्य शौचालय चाहिए।

बेटी पढ़ेगी तभी प्रदेश बढ़ेगा

हम बेटी को स्कूल भेजने, उसे पढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने की बात करते हैं। लेकिन इसके लिए स्कूल में उसकी बुनियादी जरूरतों का ध्यान रखना भी जरूरी है।

6,500 से अधिक स्कूलों में बालिका शौचालय निर्माण की पहल एक अच्छी शुरुआत है। अब इसे ऐसी व्यवस्था में बदलने की जरूरत है, जिसमें हर सरकारी और निजी स्कूल में बालिकाओं के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और अलग वॉशरूम अनिवार्य हो।

क्योंकि बेटी को स्कूल भेजना केवल उसे किताब देना नहीं है। उसे सम्मान, सुरक्षा और सुविधा के साथ पढ़ने का अधिकार देना भी हमारी जिम्मेदारी है।

‘मेरी बेटी, मेरा अभिमान’ तभी सच में सार्थक होगा, जब प्रदेश की हर बेटी स्कूल में पढ़ते समय यह महसूस करे—यह जगह मेरी भी है, यहां मेरी सुरक्षा और सम्मान की भी चिंता की जाती है।

बेटियां सुरक्षित होंगी, पढ़ेंगी और आगे बढ़ेंगी—तभी छत्तीसगढ़ आगे बढ़ेगा।
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