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Friday, October 30, 2026
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टूल-डाउन का 7वां दिन: आखिर कब जागेगा प्रशासन?

श्रमिक 7 दिन से आंदोलनरत, फिर भी न अधिकारी पहुंचे, न जनप्रतिनिधियों ने ली सुध

पंडरिया/कबीरधाम-19 अगस्त 2026

भारतीय मजदूर संघ के आह्वान पर श्रमिकों का टूल-डाउन आंदोलन बुधवार को सातवें दिन भी जारी रहा। लगातार सात दिनों से श्रमिक अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन संगठन का आरोप है कि अब तक प्रशासन की ओर से न तो कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही किसी जनप्रतिनिधि या नेता ने श्रमिकों से संवाद करने की पहल की है।

श्रमिकों का कहना है कि वे अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर श्रमिकों की आवाज प्रशासन तक पहुंचने के लिए उन्हें और कितने दिनों तक आंदोलन करना पड़ेगा?

भारतीय मजदूर संघ ने प्रशासन की कथित उदासीनता पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सात दिनों से श्रमिक काम से दूर रहकर अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से बातचीत तक की पहल नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
संगठन का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक श्रमिक की व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि कारखाने में काम करने वाले श्रमिकों के रोजगार, वेतन, अधिकार और सम्मान से जुड़ा मामला है। श्रमिकों का आरोप है कि उनकी समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए किया जा सकता है, लेकिन अब तक प्रशासन और प्रबंधन की ओर से सार्थक पहल नहीं हुई है।
भारतीय मजदूर संघ ने स्पष्ट किया कि आंदोलन को समाप्त करने के लिए केवल इंतजार करना समाधान नहीं है। संगठन ने प्रशासन और कारखाना प्रबंधन से जल्द श्रमिकों के साथ वार्ता कर उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लेने की मांग की है।

संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही श्रमिकों से बातचीत कर उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को अगले चरण में ले जाया जाएगा और चक्का जाम किया जाएगा।

अब देखना यह है कि सातवें दिन भी जारी टूल-डाउन आंदोलन के बाद प्रशासन श्रमिकों की मांगों पर बातचीत के लिए आगे आता है या आंदोलन के अगले चरण का इंतजार करता है।

ACB समूह की कोल वाशरियों की 1999 से जांच की मांग, दीपका में भारतीय जनाधिकार पार्टी का धरना

कोरबा/दीपका | 19 अगस्त 2026

ACB समूह की कोल वाशरियों, संबद्ध ताप विद्युत परियोजनाओं, कोयला परिवहन और अन्य औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े मामलों की वर्ष 1999 से वर्तमान तक CBI और SIT से स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर भारतीय जनाधिकार पार्टी, छत्तीसगढ़ ने दीपका में धरना-प्रदर्शन किया।

धरना समाप्त होने के बाद राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, केंद्रीय कोयला मंत्री, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सहित केंद्र एवं राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

पार्टी ने कोयला आवक-जावक, वाशरी संचालन, रिजेक्ट कोयला, तौल कांटा, GPS, FASTag, RFID, रेलवे रेक, पर्यावरणीय प्रभाव, जल उपयोग, प्रदूषण, श्रमिकों के अधिकार तथा संबंधित औद्योगिक परियोजनाओं के वित्तीय एवं नियामकीय मामलों की स्वतंत्र जांच की मांग की।

ACB समूह की कोयला वाशरियों, संबद्ध ताप विद्युत परियोजनाओं, कोयला परिवहन और अन्य औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े तकनीकी, पर्यावरणीय, वित्तीय एवं नियामकीय मामलों की वर्ष 1999 से वर्तमान तक स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर भारतीय जनाधिकार पार्टी, छत्तीसगढ़ ने मंगलवार को दीपका में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया। आंदोलन के बाद कार्यपालन दंडाधिकारी एवं तहसीलदार दीपका अभिजीत राज भानु के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, कोयला मंत्री, ऊर्जा मंत्री सहित केंद्र एवं राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

पार्टी ने कहा कि जांच के दौरान सभी डिजिटल एवं वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं, ताकि किसी भी संभावित साक्ष्य से छेड़छाड़ न हो सके।

पार्टी ने घोषणा की है कि मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने पर 11 सितंबर 2026 को SECL मुख्यालय बिलासपुर में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद 2 अक्टूबर को दीपका-गेवरा में इंसानियत सभा आयोजित करने की बात कही गई है।

नोट: इस वीडियो में व्यक्त आरोप एवं मांगें संबंधित संगठन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित हैं। संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

रामदास अठावले ने अभिजीत दीपके को दिया RPI(A) में शामिल होने का न्योता, दीपके का तीखा तंज

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मुंबई/नागपुर:19 अगस्त 2026

केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (A) के प्रमुख रामदास आठवले ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को NDA के घटक दल RPI में शामिल होने का प्रस्ताव दिया है। आठवले ने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के सपनों को पूरा करने, समाज को दिशा देने और संगठन को मजबूत करने के लिए दीपके जैसे सक्रिय और युवा आंबेडकरवादी को RPI(A) के साथ आना चाहिए।

​प्रस्ताव पर दीपके की प्रतिक्रिया

रामदास आठवले के इस ऑफर पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दीपके ने हैरानी जताई और तंज कसा। दीपके ने याद दिलाया कि कुछ ही समय पहले जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलनों के दौरान उन्हें और उनकी टीम को सत्तापक्ष के नेताओं द्वारा ‘राष्ट्रविरोधी’ (anti-national) कहा गया था, और अब उन्हें अपनी पार्टी में शामिल होने का न्योता दिया जा रहा है।

​सक्रिय राजनीति से दूरी का निर्णय

अभिजीत दीपके और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि फिलहाल उनका चुनावी या सक्रिय राजनीति में उतरने का कोई विचार नहीं है। CJP पहले ही साफ कर चुकी है कि इसे किसी राजनीतिक दल में बदलने के बजाय एक ‘प्रेशर ग्रुप’ (दबाव समूह) के रूप में ही काम में लाया जाएगा, जो जनता और छात्रों से जुड़े सामाजिक मुद्दों को उठाता रहेगा।

​महाराष्ट्र में RPI का अतीत और वर्तमान

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में एक दौर में RPI (रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया) एक सशक्त और प्रभावकारी राजनीतिक मंच हुआ करती थी। हालांकि, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के महापरिनिर्वाण के बाद दलित नेतृत्व में निजी महत्वाकांक्षाओं और मतभेदों के चलते RPI कई गुटों में बंट गई। विश्लेषकों का मानना है कि अन्य युवाओं को पार्टी में जोड़ने से पहले RPI नेताओं को बंटे हुए गुटों को एकजुट करने की दिशा में ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

पीएम केयर फंड की ऑडिट रिपोर्ट पर CJP का हमला, अभिजीत दीपके ने खर्च और पारदर्शिता पर उठाए सवाल

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मुंबई/नागपुर- 19 अगस्त 2026

सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने पीएम केयर फंड पर सवाल उठाया कि इतनी बड़ी राशि बैंक में जमा रहने के बावजूद फंड से जनहित के कार्यों पर कितना खर्च किया जा रहा है।

वित्तीय वर्ष 2024-25 की PM CARES Fund की ऑडिट रिपोर्ट को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने फंड में जमा राशि, बैंक एफडी से मिलने वाले ब्याज और जनहित की योजनाओं में किए गए खर्च को लेकर चिंता जताते हुए फंड के संचालन में अधिक पारदर्शिता की मांग की है।

उन्होंने विशेष रूप से वित्त वर्ष 2024-25 में करीब ₹87.85 लाख के खर्च का उल्लेख करते हुए इसे कुल कोष की तुलना में बेहद कम बताया। दीपके ने इसी आधार पर फंड के उपयोग और प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए हैं।

PM CARES for Children Scheme पर भी सवाल

अभिजीत दीपके ने PM CARES for Children Scheme पर हुए खर्च को भी मुद्दा बनाया। उनका कहना है कि पिछले वर्षों में इस योजना पर करीब ₹15.37 करोड़ खर्च किए गए थे, जबकि 2024-25 में खर्च करीब ₹87.84 लाख बताया गया है। उन्होंने पूछा कि बच्चों के लिए बनाई गई योजना में खर्च में इतनी कमी क्यों आई।

RTI और पारदर्शिता का मुद्दा

दीपके ने PM CARES Fund की पारदर्शिता और सूचना के अधिकार (RTI) को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जब सार्वजनिक महत्व के दूसरे मामलों में नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जानकारी हासिल करने के लिए प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, तो PM CARES Fund से जुड़े लेनदेन और निर्णयों की जानकारी को लेकर स्पष्टता क्यों नहीं है।

उन्होंने सरकार से फंड की राशि, उसके निवेश, ब्याज से होने वाली आय और विभिन्न योजनाओं पर किए गए खर्च का विस्तृत एवं सार्वजनिक ब्यौरा उपलब्ध कराने की मांग की।

हालांकि, दीपके द्वारा उठाए गए सवालों और आंकड़ों को उनके वक्तव्य के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। PM CARES Fund की ऑडिट रिपोर्ट में दर्ज आंकड़ों और उनकी व्याख्या के बीच अंतर हो सकता है।

वीडियो में क्या कहा?

अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी वीडियो में PM CARES Fund की ऑडिट रिपोर्ट में बताए गए आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार की प्राथमिकताओं और फंड के उपयोग पर सवाल उठाए हैं। वीडियो में उन्होंने फंड में बड़ी राशि जमा होने और अपेक्षाकृत कम खर्च का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है।

नौकरशाह या प्रजातंत्र-सीएचओ स्वास्थ्य विभाग ने किया कलेक्ट्रेट का घेराव

बेमेतरा -19 अगस्त 2026

(चौपाल पर नीम के पेड़ के नीचे ज्योतिपति अखबार पढ़ रहे हैं। तभी ज्वाला गुस्से में आता है और हाथ में पकड़ी एक खबर की ओर इशारा करता है)

जन चौपाल संवाद
ज्वाला: (आक्रोशित होकर) ज्योतिपति भैया! ज़रा यह खबर देखिए बेमेतरा की। स्वास्थ्य विभाग की महिला कर्मचारियों (CHO) को कलेक्टोरेट का घेराव करना पड़ रहा है! आरोप है कि अधिकारी उनके साथ अभद्र व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना कर रहे हैं। महिला सुरक्षा की बातें सिर्फ कागज़ों पर रह गई हैं क्या? आखिर लोकतंत्र में नौकरशाह जनता के मालिक कैसे बन बैठे?

ज्योतिपति: (अखबार को समेटकर चश्मा उतारते हुए) शांत हो जाओ ज्वाला। गुस्सा होना स्वाभाविक है, लेकिन किसी भी मुद्दे पर विचार कानून और संविधान की कसौटी पर रखकर करना चाहिए। बेमेतरा में महिलाओं ने जो प्रदर्शन किया है, वह लोकतंत्र में अपनी बात रखने का उनका संवैधानिक अधिकार है।

ज्वाला: अधिकार तो ठीक है भैया, लेकिन सवाल यह है कि जब जनप्रतिनिधियों को जनता चुनती है, तो फिर ये अधिकारी खुद को ‘वायसराय’ क्यों समझने लगते हैं? यहाँ तक कि सांसद-विधायक भी कहते हैं कि अफ़सर फोन नहीं उठाते। जंतर-मंतर पर छात्र, युवा और किसान आंदोलन कर रहे हैं,यह सब कहीं नौकरशाही पर निर्भर रहने का नतीजा तो नहीं!?

जब हर वर्ग सड़क पर है, तो क्या यह प्रजातंत्र है या अफ़सरशाही?या कोई समानांतर व्यवस्था चल रही है।

ज्योतिपति: देखो ज्वाला, हमें ‘नौकरशाही’ (ब्यूरोक्रेसी) और ‘प्रजातंत्र’ (डेमोक्रेसी) के फर्क और संबंध को समझना होगा।

हमारे संविधान ने एक समानांतर व्यवस्था नहीं, बल्कि एक पूरक व्यवस्था बनाई है। जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि यानी ‘विधायिका’ नीतियाँ बनाती है, और उस नीति को लागू करने की ज़िम्मेदारी ‘कार्यपालिका’ यानी नौकरशाही की होती है। बिना प्रशासनिक ढाँचे के कोई भी सरकार काम नहीं कर सकती।

ज्वाला: बात तो आपकी ठीक है भैया, लेकिन जब यही अफ़सर अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल करने लगें, छोटे कर्मचारियों को नौकरी से निकालने या CR खराब करने की धमकी देने लगें, तो न्याय कहाँ मिलेगा? पत्रकार तक नौकर शाही के दफ्तरों में जाते हैं तो बैठने तक को नहीं कहा जाता!

ज्योतिपति: अगर कोई भी अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग करता है या मातहत कर्मचारियों के साथ अभद्रता करता है, तो वह कानूनन अपराध और सेवा नियमों का उल्लंघन है। बेमेतरा वाले मामले में ही देखो—कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ‘विशाखा समिति’ का गठन किया है।

कानून ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए यह स्पष्ट व्यवस्था बनाई है कि कार्यस्थल पर यौन या मानसिक उत्पीड़न की निष्पक्ष जाँच हो।

ज्वाला: पर भैया, आरोप लगने पर अधिकारी तो सीधा मुकर जाते हैं, जैसे यहाँ भी CMHO ने आरोपों को निराधार बता दिया। जब तक जाँच होगी, तब तक पीड़ित कर्मचारियों का क्या?

ज्योतिपति: नियम और कानून की नज़र में “जब तक दोष सिद्ध न हो, तब तक हर व्यक्ति निर्दोष है।” इसलिए निष्पक्ष जाँच ज़रूरी है।
अगर जाँच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो अनुशासनात्मक कार्रवाई भी होती है और निलंबन भी। हमारी व्यवस्था में कोई भी अफ़सर कानून से ऊपर नहीं है।

लोकतंत्र की ताकत यही है कि यहाँ एक आम नागरिक भी कानून के रास्ते से बड़े से बड़े अधिकारी को जवाबदेह बना सकता है।

ज्वाला: आप सही कह रहे हैं भैया, लेकिन सुधार की ज़रूरत तो है ना? चाहे शिक्षा में असमानता हो या दफ्तरों में अफ़सरों का रवैया, जनता और प्रशासन के बीच का यह फासला खत्म होना चाहिए।

ज्योतिपति: बिल्कुल! सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है। प्रजातंत्र तभी मजबूत होगा जब:
प्रशासन में पारदर्शिता और संवेदनशीलता हो।जनप्रतिनिधि और अफ़सरशाही जनता के प्रति जवाबदेह रहें।
नागरिक भी अपने अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक रहें।

आंदोलन और प्रदर्शन शासन को उसकी ज़िम्मेदारी याद दिलाने का ज़रिया हैं, लेकिन समाधान हमेशा कानून, संविधान और संवाद के दायरे में ही निकलता है।

ज्वाला: (सोचते हुए) आपकी बात से समझ आया भैया। अफ़सरशाही को व्यवस्था से मिटाया नहीं जा सकता, लेकिन कानून के सही इस्तेमाल से उसे जनता का सेवक बनाए रखा जा सकता है। चलिए, देखते हैं बेमेतरा मामले में विशाखा समिति की रिपोर्ट में क्या निकलकर आता है।

ज्योतिपति: (मुस्कुराते हुए) बिल्कुल ज्वाला, जागरूक नागरिक ही एक मजबूत लोकतंत्र की पहचान हैं!

शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय में पुलिस की ‘साइबर जागरूकता’ कार्यशाला

रायपुर- 18 अगस्त 2026

छात्रों ने साइबर क्राइम-निवारी संकल्प लिया।

पुलिस अधिकारियों ने कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को हाल के साइबर अपराधों के नए तरीकों, ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के उपाय और बुनियादी साइबर सुरक्षा के सिद्धांतों के बारे में बताया।

इस महाभियान का उद्घाटन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने किया था, तथा राज्य पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने भी नागरिकों से सहयोग की अपील की है।

छत्तीसगढ़ पुलिस के “साइबर जागृति अभियान” के अंतर्गत आज रायपुर के शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय में छात्रों और इंटर्न्स के लिए एक विशेष साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

अभियान का उद्देश्य प्रदेशवासियों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने और जागरूक करना है।

कार्यक्रम के दौरान युवाओं को अभियान की मुख्य थीम “साइबर जागृति की एक सेल्फी” से जोड़ा गया और उन्हें छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा जारी लिंक क्लिक करने या QR कोड स्कैन करके विशेष “सेल्फी फ्रेम” में सेल्फी लेने के लिए प्रेरित किया गया। उपस्थित छात्रों ने अपनी सेल्फी सोशल मीडिया पर भी साझा की, ताकि जागरूकता संदेश उनके नेटवर्क तक पहुँचे।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह सात सप्ताह का “साइबर जागृति अभियान” 15 अगस्त से 02 अक्टूबर 2026 तक पूरे प्रदेश में चल रहा है। पहले सप्ताह में विशेष रूप से स्कूल और कॉलेजों में डिजिटल सतर्कता और बुनियादी सुरक्षा पर सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम के समापन पर महाविद्यालय के सभी छात्रों और इंटर्न्स ने पुलिस के साथ मिलकर छत्तीसगढ़ को साइबर क्राइम मुक्त बनाने का संकल्प लिया।

छत्तीसगढ़ में अवैध कॉलोनी पर अब 7 साल की जेल, खरीदने से पहले ये जांच जरूरी

रायपुर- 18 अगस्त 2026

दरअसल, प्रदेश में धड़ल्ले से कट रही अवैध कॉलोनियों को लेकर सरकार ने अब सख्ती दिखाई है। छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम के तहत साफ नियम है – कोई भी व्यक्ति जमीन को टुकड़ों में बांटकर कॉलोनी बसाएगा, तो उसे पहले नगर पालिका या नगर पंचायत में कॉलोनाइजर के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराना ही होगा। यही नियम बिल्डर और अपार्टमेंट बनाने वालों पर भी लागू है।

अगर आप रायपुर समेत किसी भी शहर में कॉलोनी में प्लॉट या बिल्डर से फ्लैट लेने की सोच रहे हैं, तो जेब ढीली करने से पहले एक बार कागज जरूर टटोल लीजिए। नहीं तो सस्ते के चक्कर में आप अवैध कॉलोनी में फंस सकते हैं।


नियम तोड़ा तो 7 साल जेल और 1 लाख जुर्माना

अगर कोई बिना रजिस्ट्रेशन और बिना ले-आउट पास कराए कॉलोनी काटता पकड़ा गया, तो उसे 3 से 7 साल तक की जेल और कम से कम एक लाख रुपये जुर्माना भरना पड़ सकता है। साथ ही कोर्ट पीड़ित खरीदार को हर्जाना दिलाने का आदेश भी दे सकता है।

नियम के मुताबिक -कॉलोनाइजर का लाइसेंस सिर्फ 5 साल के लिए वैध होता है।हर नई कॉलोनी के लिए अलग से विकास अनुमति लेनी पड़ती है।

कॉलोनी की 15% जमीन EWS (गरीब वर्ग) के लिए रिजर्व रखनी होती है।कुछ प्लॉट नगर पालिका के पास बंधक रखने पड़ते हैं, ताकि कॉलोनाइजर सड़क-नाली-बिजली का काम पूरा किए बिना भाग न जाए।

खरीदार क्या करें?

इसी को लेकर सूरजपुर जिला प्रशासन ने भी खरीदारों को आगाह किया है। प्रशासन ने कहा है – किसी भी दलाल या बिल्डर के कहने पर मत आइए। खरीदने से पहले सीधे नगर पालिका में जाकर चार चीजें जरूर चेक करें –

कॉलोनाइजर का पंजीयन वैध है या नहीं
कॉलोनी का नक्शा (ले-आउट) पास है या नहीं
विकास अनुमति मिली है या नहीं
प्लॉट बंधक तो नहीं है।


अधिकारियों का कहना है, थोड़ी सी जागरूकता आपको अवैध निर्माण और भविष्य के बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है। अगर कहीं नियम टूटता दिखे तो प्रशासन कार्रवाई करेगा।

जिला महिला कांग्रेस का भव्य सावन मिलन एवं सम्मान समारोह संपन्न

बेमेतरा- 18 अगस्त 2026

बेमेतरा जिला महिला कांग्रेस द्वारा भव्य सावन मिलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, पूर्व जिला अध्यक्षों, वरिष्ठ महिला कांग्रेस पदाधिकारियों एवं संगठन के प्रति समर्पित कार्यकर्ताओं का शाल, श्रीफल एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली समाजसेवी महिलाओं को भी सम्मानित कर उनके योगदान की सराहना की गई।

कार्यक्रम में पूर्व कृषि मंत्री रविंद्र चौबे, पूर्व विधायक एवं जिला कांग्रेस अध्यक्ष आशीष छाबड़ा, पूर्व विधायक नवागढ़ गुरुदयाल बंजारे, किसान कांग्रेस अध्यक्ष मंगत साहू, यूथ कांग्रेस अध्यक्ष प्रांजल तिवारी सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में महिला कांग्रेस की कार्यकर्ता उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया।
सावन के रंग में रंगा आयोजन
सावन मिलन समारोह में महिलाओं ने पूरे उत्साह और उमंग के साथ विभिन्न पारंपरिक खेलों एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लिया।

कार्यक्रम में सावन झूला, घेड़ी, कबड्डी, थाली सजाओ, फुगड़ी एवं नृत्य सहित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।

गीत-संगीत, नृत्य और पारंपरिक खेलों के बीच महिलाओं ने जमकर आनंद लिया। पूरे आयोजन स्थल पर सावन की उमंग और उत्साह का माहौल देखने को मिला।

आशीष छाबड़ा ने महिलाओं के साथ खेलों में लिया हिस्सा

कार्यक्रम की खास बात यह रही कि जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक श्री आशीष छाबड़ा ने भी महिलाओं के साथ विभिन्न खेलों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। उन्होंने खेलों में सहभागिता करते हुए महिला कांग्रेस की कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया।
अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं एवं पदाधिकारियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की और महिला कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन किया।

महिलाओं को जोड़ने और संस्कृति को आगे बढ़ाने का अवसर

कार्यक्रम में उपस्थित कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सावन मिलन जैसे आयोजन महिलाओं को आपस में जुड़ने, अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं, वरिष्ठ कांग्रेस महिलाओं और संगठन के प्रति समर्पित कार्यकर्ताओं का सम्मान उनके योगदान के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक है।

सैकड़ों महिलाओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता से पूरा आयोजन सावन की उमंग, उत्साह और खुशियों के रंग में रंगा नजर आया। उपस्थित अतिथियों एवं कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बेमेतरा जिला महिला कांग्रेस की पूरी टीम को सफल एवं भव्य आयोजन के लिए बधाई दी।

ये प्रमुख रूप से रहीं उपस्थित
कार्यक्रम में महिला कांग्रेस की जिला अध्यक्ष श्रीमती कविता साहू, जनपद अध्यक्ष बेरला श्रीमती माधुरी रवि परघनिया, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती शकुंतला मंगत साहू, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती सुशीला जोशी, श्रीमती शशि प्रभा गायकवाड़ एवं श्रीमती बालकुमारी ध्रुव, शहर अध्यक्ष श्रीमती रीता पांडे एवं श्रीमती रश्मि मिश्रा, मंडल अध्यक्ष श्रीमती जनता साहू, पूर्व जनपद अध्यक्ष श्रीमती रीना मिथलेश शर्मा, पूर्व पार्षद बेरला श्रीमती नेहा सुराणा, ब्लॉक अध्यक्ष श्रीमती रामा साहू, जिला उपाध्यक्ष श्रीमती आरती पटेल एवं श्रीमती अर्चना परघनिया, उपाध्यक्ष श्रीमती भारती पटेल, जनपद सदस्य बेरला श्रीमती हीरा वर्मा, श्रीमती सीमा टिकरिया एवं श्रीमती अर्चना देशलहरे, पूर्व अध्यक्ष नगर पंचायत बेरला श्रीमती सविता हिरवानी सहित बड़ी संख्या में महिला कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहीं।

इसके अलावा श्रीमती रेहाना रवानी, श्रीमती ममता साहू, श्रीमती सीमा साहू, श्रीमती लता सोनवानी, श्रीमती राधा बघेल, श्रीमती इंद्रावती, श्रीमती हेमिन यादव, श्रीमती बिकु मानिकपुर, श्रीमती प्रतिभा गिर, श्रीमती रूबी सलूजा, श्रीमती शशि सेन, श्रीमती सुहद्रा बंजारे, श्रीमती नीलम टंडन एवं श्रीमती रीना साहू सहित सैकड़ों की संख्या में महिलाएं एवं कांग्रेस कार्यकर्ता कार्यक्रम में शामिल हुए।

लंबित मांग: भारतीय मजदूर संघ ने घेरा कलेक्ट्रेट, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

कबीरधाम -18 अगस्त 2026

श्रमिकों की विभिन्न लंबित मांगों और समस्याओं को लेकर भारतीय मजदूर संघ जिला कबीरधाम के नेतृत्व में जिला कलेक्ट्रेट का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में पंडरिया शक्कर कारखाना के श्रमिकों, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं, स्कीम वर्करों सहित जिले के विभिन्न श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रमिक शामिल हुए।

प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों ने रोजगार सुरक्षा, वेतन, सामाजिक सुरक्षा और लंबित भुगतान सहित विभिन्न मांगों को लेकर शासन-प्रशासन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। प्रदर्शनकारियों ने मांगों का शीघ्र निराकरण किए जाने की मांग की।

पंडरिया शक्कर कारखाना के श्रमिकों की प्रमुख मांगें

भारतीय मजदूर संघ ने बताया कि लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना, पंडरिया में प्रत्येक वर्ष जुलाई माह में श्रमिकों की कार्य पर वापसी होती रही है, लेकिन इस वर्ष बड़ी संख्या में श्रमिकों को अब तक काम पर वापस नहीं लिया गया है। संगठन ने सभी पात्र श्रमिकों को तत्काल कार्य पर वापस लेने तथा उनकी रोजगार सुरक्षा और सेवा निरंतरता सुनिश्चित करने की मांग की।
इसके साथ ही समान काम के लिए समान वेतन लागू करने और श्रमिकों का न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग भी उठाई गई।

ललित चन्द्रवंशी की आईडी डिलीट करने का विरोध

प्रदर्शन के दौरान पंडरिया शक्कर कारखाना के इकाई महामंत्री ललित चन्द्रवंशी की आईडी डिलीट किए जाने का मामला भी प्रमुखता से उठाया गया। भारतीय मजदूर संघ ने उनकी आईडी तत्काल बहाल करने और उन्हें पूर्ववत कार्य पर लिए जाने की मांग की।

संगठन का कहना है कि श्रमिक प्रतिनिधि के साथ इस तरह की कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी और श्रमिकों के अधिकारों से जुड़े मामलों में संगठन मजबूती से आवाज उठाता रहेगा।

लंबित वेतन और सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा

भारतीय मजदूर संघ ने श्रमिकों के लंबित वेतन, बोनस, एरियर्स और अन्य वैधानिक भुगतानों का तत्काल निराकरण करने की मांग की। इसके अलावा श्रमिकों को EPF, ESI, बोनस, ग्रेच्युटी सहित अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का पूर्ण लाभ दिलाने की मांग भी रखी गई।

आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं और स्कीम वर्करों की मांगें

प्रदर्शन में आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं और स्कीम वर्करों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया। स्कीम वर्करों को मजदूर की श्रेणी में शामिल करने, न्यूनतम मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा का लाभ देने तथा न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की गई।
वहीं आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं के लिए सेवानिवृत्ति लाभ, सामाजिक सुरक्षा, पदोन्नति और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई।

मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन के बाद भारतीय मजदूर संघ द्वारा जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में श्रमिकों की विभिन्न मांगों का उल्लेख करते हुए शासन से इनका जल्द निराकरण करने की मांग की गई।

भारतीय मजदूर संघ जिला कबीरधाम के जिला महामंत्री ने कहा कि श्रमिकों के अधिकार, रोजगार, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर संगठन पूरी मजबूती के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि यदि मांगों का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया तो संगठन आगामी दिनों में आंदोलन की नई रणनीति तय करेगा।

बिजली दर और स्मार्ट मीटर के विरोध में कांग्रेस का धरना, आशीष छाबड़ा बोले- जनता पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ

बेमेतरा 17 अगस्त 2026

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार एवं जिला कांग्रेस कमेटी बेमेतरा के नेतृत्व में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बेमेतरा के तत्वावधान में बिजली के बढ़ते दाम, स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं पर पड़ रहे अतिरिक्त आर्थिक बोझ और प्रदेश सरकार की नीतियों के विरोध में प्रदेशव्यापी आंदोलन के तहत ग्राम पंचायत मटका में ब्लॉक स्तरीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया।

धरना-प्रदर्शन में जिला कांग्रेस कमेटी बेमेतरा के अध्यक्ष आशीष छाबड़ा, ब्लॉक प्रभारी सुमन गोस्वामी, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बेमेतरा के अध्यक्ष मिथलेश वर्मा, जिला पंचायत सदस्य शशि प्रभा गायकवाड सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और क्षेत्रवासी शामिल हुए।

धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए आशीष छाबड़ा ने कहा कि बिजली आम जनता की मूलभूत आवश्यकता है, कोई विलासिता नहीं। प्रदेश में बिजली के दाम लगातार बढ़ने से गरीब, किसान, मजदूर, मध्यमवर्गीय परिवारों और छोटे व्यवसायियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। पहले से महंगाई की मार झेल रही जनता के लिए बढ़े हुए बिजली बिल दोहरी मार साबित हो रहे हैं।

उन्होंने स्मार्ट मीटर को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। छाबड़ा ने कहा कि स्मार्ट मीटर के नाम पर आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने के बजाय नई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई उपभोक्ताओं में अधिक बिजली बिल आने को लेकर असंतोष है। सरकार को उपभोक्ताओं की शिकायतों का तत्काल निराकरण करना चाहिए।
आशीष छाबड़ा ने बिजली के बढ़े हुए दाम वापस लेने, स्मार्ट मीटर पर रोक लगाने तथा पुराने सामान्य मीटर लगाने की दिशा में निर्णय लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह आंदोलन किसी राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि आम जनता के हक, अधिकार और आर्थिक हितों की लड़ाई है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस बिजली के बढ़े हुए दाम वापस लेने, 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना पुनः लागू करने, स्मार्ट मीटर पर रोक लगाने और उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग को लेकर अपना संघर्ष आगे भी जारी रखेगी। जब तक आम जनता को राहत नहीं मिलती, कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक जनता की आवाज मजबूती से उठाती रहेगी।
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बेमेतरा के अध्यक्ष मिथलेश वर्मा ने कहा कि बिजली के बढ़ते दाम और स्मार्ट मीटर को लेकर आम जनता में व्यापक असंतोष है। कांग्रेस इस जनहित के मुद्दे को गांव-गांव तक ले जाएगी और बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
ब्लॉक प्रभारी सुमन गोस्वामी ने कहा कि प्रदेश सरकार को आम जनता की परेशानियों को गंभीरता से लेना चाहिए। बिजली के बढ़े हुए दाम वापस लेने और स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों का तत्काल निराकरण किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने का आह्वान किया।
जिला पंचायत सदस्य शशि प्रभा गायकवाड ने भी धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए बिजली के बढ़ते दाम और स्मार्ट मीटर की व्यवस्था से उपभोक्ताओं पर पड़ रहे आर्थिक बोझ पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता की समस्याओं का समाधान करते हुए बिजली उपभोक्ताओं को तत्काल राहत देनी चाहिए।
इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने बिजली के बढ़े हुए दाम वापस लेने, स्मार्ट मीटर पर रोक लगाने और आम उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग उठाई।
कार्यक्रम में ललित विश्वकर्मा, ऋषि वर्मा, मोहित वर्मा, राजेंद्र वर्मा, शिव वर्मा, योगिता साहू, प्रज्वल वर्मा, अमित वर्मा, अनिल दुबे, चित्रेन्द्र वर्मा, बसंत जोशी, महानंद वर्मा, अनिल यदु, पवन साहू, राजकुमार बंजारे, संजय वर्मा, नरेंद्र निषाद, छोटू साहू, सूरज कोसले, सुखराम वर्मा, हीरालाल यदू, राजू रजक सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।