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Friday, October 30, 2026
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कांग्रेस ने किया 80वें स्वतंत्रता दिवस पर राजीव भवन बेमेतरा में ध्वजारोहण, मंच लोकार्पण, मूर्ति अनावरण एवं सावन महोत्सव

बेमेतरा – 16 अगस्त 2026

जिला कांग्रेस ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर बेमेतरा में विभिन्न स्थानों पर आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रमों में राष्ट्रध्वज को नमन किया गया। पूर्व विधायक कार्यालय, राम मंदिर प्रांगण, बाजार पारा, कांग्रेस भवन सहित राजीव भवन बेमेतरा में आयोजित कार्यक्रमों में माननीय पूर्व कैबिनेट मंत्री पूर्व विधायक साजा रवीन्द्र चौबे,पूर्व विधायक बेमेतरा आशीष छाबड़ा एवं पूर्व विधायक नवागढ़ गुरुदयाल सिंह बंजारे की गरिमामयी उपस्थिति रही।

इस अवसर पर कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में कांग्रेसजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान स्वर्गीय दशरथ लाल मिश्रा की पुण्य स्मृति में निर्मित मंच का लोकार्पण एवं उनकी मूर्ति का अनावरण भी किया गया। यह मंच स्वर्गीय दशरथ लाल मिश्रा के सामाजिक एवं सार्वजनिक जीवन में किए गए योगदान और उनकी स्मृतियों को सदैव जीवंत रखने का माध्यम बनेगा।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले वीर सेनानियों तथा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले महापुरुषों को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया।

उपस्थित लोगों ने उनके आदर्शों, त्याग, समर्पण एवं देशप्रेम से प्रेरणा लेते हुए राष्ट्रहित, लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक सद्भाव और जनसेवा के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

पूर्व कैबिनेट मंत्री रवीन्द्र चौबे , पूर्व विधायक बेमेतरा आशीष छाबड़ा पूर्व विधायक गुरुदयाल सिंह बंजारे की उपस्थिति एवं मार्गदर्शन से कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ी।

इस दौरान कांग्रेसजनों ने जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने तथा संगठन को और अधिक मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

इसी क्रम में महिला कांग्रेस कमेटी द्वारा राजीव भवन, बेमेतरा में सावन महोत्सव का आयोजन भी उत्साह एवं उल्लास के साथ किया गया।

महिला कांग्रेस की बहनों ने पारंपरिक रंग-रूप और उत्सवी वातावरण में सावन महोत्सव मनाया। कार्यक्रम में सांस्कृतिक परंपराओं की सुंदर झलक देखने को मिली और आपसी भाईचारे, सामाजिक समरसता एवं सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का संदेश दिया गया।

स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में कांग्रेस के सम्मानित पदाधिकारी, महिला कांग्रेस की पदाधिकारी एवं सदस्यगण, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

स्वतंत्रता दिवस पर शुक्ल भवन में ध्वजारोहण, अमितेश शुक्ल बोले—आजादी के आंदोलन में इस भवन की रही महत्वपूर्ण भूमिका

रायपुर -16 अगस्त 2026

स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर अंचल में स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख केंद्र स्थली रहे छत्तीसगढ़ संघर्ष परिषद के केंद्रीय कार्यालय शुक्ल भवन, बूढ़ापारा में स्वतंत्रता दिवस समारोह गरिमापूर्ण एवं देशभक्तिपूर्ण वातावरण में मनाया गया।

प्रातः 9:30 बजे पूर्व मंत्री अमितेश शुक्ल ने ध्वजारोहण किया।ध्वजारोहण के बाद झंडा गान, राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान हुआ।

इस दौरान भारत माता की जय और अमर शहीदों की जय के उद्घोष से पूरा परिसर देशभक्ति की भावना से गूंज उठा।

समारोह को संबोधित करते हुए अमितेश शुक्ल ने कहा कि शुक्ल भवन में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण करना उनके लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के आंदोलन में शुक्ल भवन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित रविशंकर शुक्ल ने इसी स्थान से स्वतंत्रता आंदोलन की अलख जगाई थी।

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, डॉ. राजेंद्र प्रसाद और पंडित मदनमोहन मालवीय जैसी महान विभूतियां भी शुक्ल भवन में आकर रुकी थीं और स्वतंत्रता आंदोलन को गति देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

श्री शुक्ल ने कहा कि देश को आजाद हुए 80 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन आज भी हमें सांप्रदायिक ताकतों और देश विरोधी गतिविधियों के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है।

स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान से मिली आजादी की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।

ये रहे प्रमुख रूप से मौजूद
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से रमेशचंद शुक्ल, महामंत्री रामअवतार देवांगन, प्रवक्ता नितिन कुमार झा, डॉ. उदयभान सिंह चौहान, प्रमोद तिवारी, मनोज कंदोई, उषा रज्जन श्रीवास्तव, आभा मरकाम, गंगा यादव, विकास गुप्ता, शिरीष अवस्थी, सुनील बाजारी, किशन बाजारी, नीलाद्रीशंकर शुक्ल, मनोज सोनकर, रवि शर्मा, डॉ. अजय शर्मा, राघवेन्द्र पाठक, सतीश शर्मा, जानकी सोनी, सुषमा पटनायक, अंकित मिश्रा, परमजीत सिंह सलूजा, धन सिंह यादव, विनोद कुमार साहू और हमीद खान सहित परिषद के बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।नितिन कुमार झा ,प्रवक्ता छत्तीसगढ़ संघर्ष परिषद।


इंडोनेशिया में भीषण भूकंप से तबाही 7.7 तीव्रता -51 लोगों की मौत, 100 से ज्यादा घायल

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न्यूज डेस्क -16 अगस्त 2026

हजारों लोग विस्थापित राहत-बचाव अभियान तेज इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसियां, सेना और पुलिस राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हैं। मलबे में फंसे लोगों की तलाश की जा रही है। प्रभावित इलाकों में चिकित्सा सहायता, भोजन, पानी और अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराने का काम भी चल रहा है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक राहत कार्य में 3,500 से अधिक सैन्य और पुलिसकर्मियों को लगाया गया है।

अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती दूरदराज के गांवों तक पहुंचना और भूस्खलन से बंद सड़कों को खोलना है।

खबर सूत्रों पर – इंडोनेशिया के पूर्वी हिस्से में शनिवार सुबह आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचा दी। फ्लोरेस द्वीप और आसपास के इलाकों में इमारतें ढह गईं, भूस्खलन से सड़कें बंद हो गईं और कई गांवों का संपर्क टूट गया। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 51 लोगों की मौत हो चुकी है और 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं। घायलों में कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। राहत और बचाव अभियान अभी जारी है, इसलिए मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

सुबह 5:58 बजे आया शक्तिशाली भूकंप

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप स्थानीय समयानुसार शनिवार सुबह करीब 5:58 बजे आया। इसका केंद्र पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में फ्लोरेस द्वीप के पास समुद्र के नीचे करीब 10 किलोमीटर की गहराई में था। इसका केंद्र एंडे शहर से लगभग 68 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में बताया गया।

भूकंप की तीव्रता और कम गहराई के कारण इसका असर बड़े इलाके में महसूस किया गया। कई स्थानों पर मकान और अन्य इमारतें ढह गईं, जबकि भूस्खलन के कारण प्रमुख सड़क मार्ग भी बाधित हो गए।

भूकंप के बाद सुनामी का खतरा

भूकंप के तुरंत बाद अधिकारियों ने ईस्ट नुसा तेंगारा, वेस्ट नुसा तेंगारा, दक्षिण सुलावेसी और दक्षिण-पूर्व सुलावेसी के कुछ हिस्सों के लिए सुनामी चेतावनी जारी की। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को ऊंचे स्थानों पर जाने तथा समुद्र तट और नदी किनारे से दूर रहने की सलाह दी गई।

बाद में समुद्र के जलस्तर में बड़े बदलाव का खतरा नहीं पाए जाने पर सुनामी चेतावनी हटा दी गई। हालांकि, कुछ तटीय इलाकों में छोटी सुनामी लहरें दर्ज की गईं।

रिउंग में 1.61 मीटर ऊंची लहर
भूकंप के बाद समुद्र में उठी लहरों ने भी तटीय इलाकों में नुकसान पहुंचाया। रिउंग गांव में करीब 1.61 मीटर ऊंची लहर दर्ज की गई। इससे मछली पकड़ने वाली नावें किनारे पर फंस गईं और कुछ घरों तथा बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा।

अन्य तटीय इलाकों में भी समुद्री लहरें दर्ज की गईं। इससे लोगों में दहशत फैल गई और बड़ी संख्या में लोगों ने सुरक्षित स्थानों की ओर रुख किया।

लगातार आ रहे भूकंप के झटके

मुख्य भूकंप के बाद क्षेत्र में लगातार आफ्टरशॉक्स यानी भूकंप के बाद आने वाले झटके महसूस किए गए। शुरुआती रिपोर्टों में 235 से अधिक झटकों की जानकारी सामने आई थी, जबकि बाद की रिपोर्टों में आफ्टरशॉक्स की संख्या करीब 341 तक पहुंचने की बात कही गई है। सबसे शक्तिशाली आफ्टरशॉक की तीव्रता करीब 6.2 रही।

लगातार झटकों के कारण लोग घरों में लौटने से डर रहे हैं। कई लोगों ने खुले स्थानों और अस्थायी शिविरों में रात बिताई।

हजारों लोग घर छोड़ने को मजबूर

भूकंप के बाद करीब 5,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, जबकि बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से बाहर खुले में रहने को मजबूर हैं। सिका इलाके में एक खेल परिसर को भी अस्थायी आश्रय स्थल के रूप में इस्तेमाल किया गया।

कई इलाकों में बिजली आपूर्ति और संचार व्यवस्था प्रभावित हुई है। कुछ पेट्रोल पंप भी बिजली कटौती के कारण प्रभावित हुए।

सैकड़ों घर और सार्वजनिक इमारतें क्षतिग्रस्त

भूकंप से बड़े पैमाने पर आवासीय और सार्वजनिक ढांचे को नुकसान पहुंचा है।स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, चर्च और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं भी प्रभावित हुई हैं।

भूस्खलन ने बढ़ाई मुश्किलें
भूकंप के बाद कई इलाकों में भूस्खलन हुआ। मलबे और चट्टानों के सड़क पर गिरने से गांवों और कस्बों का संपर्क टूट गया। ट्रांस-फ्लोरेस हाईवे के प्रभावित होने से राहत सामग्री और बचाव दलों को दूरदराज के इलाकों तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है।

कुछ प्रभावित गांवों तक पहुंचने के लिए बचाव दलों को वैकल्पिक मार्गों और समुद्री रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है।


80वें स्वतंत्रता दिवस पर सीएम योगी का संदेश: ‘उपद्रव प्रदेश’ से ‘उत्सव प्रदेश’ बना उत्तर प्रदेश

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न्यूज डेस्क/16 अगस्त 2026

80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर ध्वजारोहण कर प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इसके बाद मुख्यमंत्री विधान भवन में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 1947 में लंबे संघर्ष, त्याग और बलिदान के बाद देश को स्वतंत्रता मिली। स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव और समारोह का अवसर नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करने की प्रेरणा देने वाला दिन भी है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने असमानता, पिछड़ेपन, गरीबी और अशिक्षा को दूर करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम आज प्रदेश में दिखाई दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज केवल बदल नहीं रहा है, बल्कि देश के विकास और परिवर्तन की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश ने ‘उपद्रव प्रदेश’ की छवि से निकलकर ‘उत्सव प्रदेश’ के रूप में नई पहचान बनाई है।

बजट, अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले 9 वर्षों में प्रदेश के बजट, अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय और महिला कार्यबल की भागीदारी में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है। सरकार का लक्ष्य ऐसा उत्तर प्रदेश बनाना है, जहां समृद्ध विरासत के साथ भविष्य की तकनीक भी हो और सांस्कृतिक गौरव के साथ आधुनिक विकास की गति भी दिखाई दे।

युवा शक्ति को बताया प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा शक्ति है। प्रदेश का युवा प्रतिभा, परिश्रम और संकल्प से समृद्ध है। यही युवा ‘नए उत्तर प्रदेश’ की शक्ति और ‘विकसित भारत’ की प्रगति का आधार बनेगा।

उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि उनकी प्रतिभा में ही उत्तर प्रदेश की शक्ति निहित है। युवाओं की इच्छाशक्ति और मेहनत प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

बलिदानी वीरों के परिजनों और सैन्य कार्मिकों का सम्मान

विधान भवन में आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रम के दौरान मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले बलिदानी वीरों के परिजनों तथा राष्ट्ररक्षा में अदम्य शौर्य और साहस का प्रदर्शन करने वाले वीर सैन्य कार्मिकों को सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता हमें बलिदानों की लंबी परंपरा के बाद मिली है। इसलिए राष्ट्र की एकता, अखंडता और विकास के लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

विरासत के साथ आधुनिक तकनीक का संकल्प

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार ऐसा उत्तर प्रदेश बनाने की दिशा में काम कर रही है, जहां परंपराओं की जड़ें और अधिक मजबूत होंगी और विकास के पंख नई ऊंचाइयों को छूते दिखाई देंगे। सांस्कृतिक गौरव, आधुनिक तकनीक और विकास के समन्वय से प्रदेश को नई दिशा देने का संकल्प लिया गया है।


एक ध्वज, एक हृदय, एक भारत 🇮🇳मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर स्थित निवास में फहराया तिरंगा

रायपुर 16 अगस्त 2026

80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर स्थित अपने निवास में तिरंगा फहराया और प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वतंत्रता संग्राम के वीर सपूतों के त्याग, संघर्ष और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि तिरंगे में हमारे सपने, शहीदों की कुर्बानी और भारत की शान समाहित है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि देश की एकता और अखंडता से प्रेरणा लेते हुए विकसित भारत के संकल्प को मजबूत करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक की सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। वहीं बस्तर में माओवाद से मुक्ति के बाद विकास और तिरंगा यात्रा के जरिए स्वतंत्रता दिवस का उत्साह दिखाई दे रहा है।

‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ के तहत 34 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई है। इसके अलावा बस्तर के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का काम जारी है।

तकनीक के क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ आगे बढ़ रहा है। राज्य में 500 करोड़ रुपये के ‘छत्तीसगढ़ राज्य एआई मिशन’ को मंजूरी दी गई है। इसके तहत 100 एआई डेटा लैब, 5 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और 50 से अधिक एआई आधारित सेवाएं विकसित की जाएंगी।


प्रधानमंत्री ने लाल किले से फहराया तिरंगा: 2047 तक विकसित भारत का संकल्प, युवाओं से लेकर परमाणु ऊर्जा तक कई बड़े ऐलान

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नई दिल्ली, 15 अगस्त 2026

140 करोड़ भारतीयों की शक्ति, सामर्थ्य और संकल्प से विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया और देशवासियों को संबोधित किया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि 140 करोड़ भारतीयों की शक्ति, सामर्थ्य और संकल्प से विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री के संबोधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, शिक्षा, खेल, नागरिक सुरक्षा, सेमीकंडक्टर निर्माण, परमाणु ऊर्जा और महिला सशक्तीकरण प्रमुख विषय रहे। उन्होंने देश के विकास को गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं।

एक साल में एक करोड़ युवाओं को AI प्रशिक्षण

प्रधानमंत्री ने अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का कौशल प्रशिक्षण देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में भारत के युवाओं को नई तकनीक में दक्ष बनाना जरूरी है, ताकि वे वैश्विक स्तर पर नेतृत्व कर सकें।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग

प्रधानमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग नेटवर्क तैयार करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर महंगी कोचिंग का आर्थिक बोझ कम करने के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, प्रतिभाशाली शिक्षकों और उपलब्ध संसाधनों को एक मंच पर लाया जाएगा।

5 से 15 वर्ष के बच्चों में खेल प्रतिभा की तलाश

देश में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए राष्ट्रव्यापी खेल प्रतिभा खोज अभियान शुरू करने की घोषणा की गई। गांवों, शहरों और स्कूलों में प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे भविष्य में देश का प्रतिनिधित्व कर सकें।

आधुनिक चुनौतियों के लिए नागरिक सुरक्षा नेटवर्क

प्रधानमंत्री ने बदलते युद्ध और सुरक्षा परिदृश्य का उल्लेख करते हुए सशक्त नागरिक सुरक्षा नेटवर्क विकसित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में खतरे केवल सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रिफाइनरी, बैंकिंग, डेटा सेंटर, कारखानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए नागरिकों को प्रशिक्षित करने और विशाल स्वयंसेवी नागरिक सुरक्षा बल विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।

2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य

ऊर्जा सुरक्षा को विकसित भारत की आधारशिला बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करना है। उन्होंने इस दशक में पांच नए परमाणु रिएक्टर शुरू करने की योजना का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि परमाणु ऊर्जा तकनीक में आत्मनिर्भरता भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

सेमीकंडक्टर निर्माण में आत्मनिर्भरता पर जोर

प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर को आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि भारत इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि देश में तीन सेमीकंडक्टर संयंत्र शुरू हो चुके हैं और इनके उत्पादों का निर्यात भी प्रारंभ हो गया है। आने वाले सात-आठ वर्षों में पांच से आठ और सेमीकंडक्टर संयंत्र स्थापित करने की दिशा में काम किया जाएगा।

छह करोड़ लखपति दीदियों का नया लक्ष्य

महिला नेतृत्व वाले विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री ने छह करोड़ लखपति दीदियों का नया लक्ष्य रखा। उन्होंने कहा कि तीन करोड़ लखपति दीदियों का पहले का लक्ष्य हासिल किया जा चुका है। अब तीन करोड़ और महिलाओं को लखपति दीदी बनाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला शक्ति को नई मजबूती मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आत्मनिर्भर भारत, तकनीकी क्षमता, युवाओं की शक्ति, महिला नेतृत्व और ऊर्जा सुरक्षा को विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने देशवासियों से राष्ट्र निर्माण के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ने और ‘शक्ति की सप्तधारा’ को अपनाने का आह्वान किया।

मजदूर एकता जिंदाबाद: श्रमिकों के हक और सम्मान की लड़ाई चौथे दिन भी जारी

पंडरिया/कवर्धा – 15 अगस्त 2026

जब तक तुम्हारे नेता का फोन नहीं आएगा,काम पर वापस नहीं करूंगा” — प्रबंध संचालक के कथित बयान से श्रमिकों में आक्रोश

कारखाना में कार्यरत श्रमिकों की जायज मांगों, लंबे समय से लंबित समस्याओं और मौलिक अधिकारों की रक्षा को लेकर भारतीय मजदूर संघ के तत्वावधान में जारी ‘टूल-डाउन’ आंदोलन शुक्रवार को चौथे दिन भी पूरी एकजुटता और दृढ़ता के साथ जारी रहा। प्रबंधन द्वारा चार दिन बीत जाने के बाद भी कोई सार्थक हल न निकालने से श्रमिकों के बीच भारी असंतोष और आक्रोश व्याप्त है।

भारतीय मजदूर संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का न होकर कारखाना के सभी श्रमिकों के अधिकार, आत्मसम्मान और सुरक्षित भविष्य का है। संगठन ने प्रबंधन के तानाशाही रवैये और श्रमिकों के दमन की कड़ी निंदा की है।

प्रमुख मुद्दे एवं मांगें:

👉बकाया वेतन का भुगतान: पिछले 7 महीनों से अधिक समय से लंबित वेतन का त्वरित एवं पूर्ण भुगतान किया जाए।

👉हड़ताल अवधि का बकाया: बीते 2 वर्षों के दौरान हड़ताल अवधि के रोके गए पैसे का अविलंब भुगतान हो।

👉अवैध निष्कासन पर रोक: अपनी जायज मांगों एवं जानकारी मांगने वाले श्रमिकों की आईडी डिलीट कर उन्हें नौकरी से निकाले जाने की दमनात्मक कार्रवाई तुरंत रद्द की जाए।

👉श्रमिक ललित की सकुशल काम पर वापसी: प्रबंधन की व्यक्तिगत दुर्भावना और मनमाने बयानों पर रोक लगाते हुए निष्कासित श्रमिक ललित को तत्काल प्रभाव से सम्मानपूर्वक काम पर वापस लिया जाए।

प्रबंधन के तानाशाही रवैये का कड़ा विरोध

संगठन ने प्रबंध संचालक के उस गैर-जिम्मेदाराना बयान पर गहरा आक्रोश जताया है, जिसमें कहा गया कि “जब तक तुम्हारे नेता का फोन नहीं आएगा, ललित को काम पर वापस नहीं करूंगा।”

भारतीय मजदूर संघ का दोटूक संदेश: “श्रमिकों का रोजगार और उनके अधिकार किसी व्यक्ति विशेष की मर्जी या फोन कॉल के मोहताज नहीं हैं। अपनी वाजिब समस्याओं पर सवाल पूछना श्रमिक का लोकतांत्रिक अधिकार है, और उसका जवाब देना प्रबंधन का वैधानिक कर्तव्य है। डरा-धमकाकर या अनुचित दबाव बनाकर श्रमिकों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।”

आंदोलन जारी रखने का संकल्प

चार दिन के लगातार संघर्ष के बाद भी भारतीय मजदूर संघ और तमाम श्रमिक पूरी मजबूती से मैदान में डटे हुए हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि जब तक सभी मांगों का सम्मानजनक एवं स्थाई समाधान नहीं निकल जाता, तब तक यह लड़ाई पीछे नहीं हटेगी और आंदोलन पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा।

जारीकर्ता: भारतीय मजदूर संघ पंडरिया इकाई

आजादी के 80 साल: उपलब्धियां, बदलाव और हमारी चुनौतियां

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आजादी पर्व -15 अगस्त 2026

1.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन (15 अगस्त)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली में लाल किले की प्राचीर से 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित करेंगे। इस बार के आयोजन का मुख्य आकर्षण राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे होने का जश्न और 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने में युवाओं की भूमिका होगी। इस ऐतिहासिक मौके पर लाल किले पर पहली बार ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया जाएगा।

चलिए, अब हम अतीत की ओर चलते हैं और वर्तमान को देखते हैं कि इन आठ दशकों में भारत ने किस प्रकार का सफर तय किया है..

2.
देश की आजादी
15 अगस्त 1947 को हमारा देश आजाद हुआ था। आजादी के इन लगभग 80 सालों में भारत ने एक लंबा सफर तय किया है। एक पुरानी सभ्यता से निकलकर भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और एक मजबूत अर्थव्यवस्था बना है। हमने धीरे-धीरे और समझदारी से विकास का रास्ता चुना।

3.
बंटवारे की आजादी
आजादी के साथ ही देश के बंटवारे का दर्द भी मिला। लाखों लोगों की जान गई और करोड़ों लोगों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा। उसी ऐतिहासिक रात पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था— “जब दुनिया सो रही होगी, भारत जीवन और आजादी के लिए जाग उठेगा।” ये शब्द भारत की नई शुरुआत के प्रतीक बन गए।

4.
जेन-जी (Gen-Z) की आजादी
आज की युवा पीढ़ी (Gen-Z) अपनी जिंदगी के फैसले खुद ले रही है।

पारिवारिक आजादी:
पुरानी पीढ़ी अक्सर ‘लोग क्या कहेंगे’ के डर में जीती थी, लेकिन आज के युवा शादी, करियर और रिश्तों के फैसले खुद करते हैं। वे जबरदस्ती के समझौतों की जगह मानसिक शांति को चुनते हैं।

क्रिएटिविटी की आजादी:
इंटरनेट, सोशल मीडिया और AI की मदद से युवाओं को किसी बड़ी कंपनी या मीडिया हाउस पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। वे अपनी कला और काम के दम पर खुद अपनी पहचान बना रहे हैं।

5.
औरत की आजादी
आज की पढ़ी-लिखी और कमाने वाली महिला पर दोहरी जिम्मेदारी का बोझ है। उसे ऑफिस में काम भी करना पड़ता है और घर आकर ‘अच्छी बहू और मां’ की उम्मीदों को भी पूरा करना पड़ता है। समाज उसे ‘सुपरवुमन’ कहकर तारीफ तो कर देता है, लेकिन उसकी थकान और मानसिक दबाव को अनदेखा कर देता है। सिर्फ कमाने से महिला आजाद नहीं हो जाती, जब तक कि उसे घर के कामों और सोच से बराबरी न मिले।

6.
किसानों की आजादी
गुलामी से लेकर आज तक देश को खाना खिलाने वाला किसान ही भारत की असली ताकत रहा है। आजादी के आंदोलनों में किसानों ने लाठियां और गोलियां खाई थीं। लेकिन दुख की बात यह है कि वही किसान आज भी अपनी फसलों का सही दाम (MSP) पाने के लिए सड़कों पर बैठने को मजबूर है।

7.
शिक्षा की आजादी
आजादी के तुरंत बाद 1948 में पहला शिक्षा आयोग बनाया गया था, ताकि देश को काबिल और जिम्मेदार नागरिक मिल सकें। समय-समय पर कई समितियां बनीं ताकि पढ़ाई का स्तर सुधारे। आज शिक्षा का विस्तार तो हुआ है, लेकिन हर बच्चे को अच्छी और सस्ती शिक्षा मिलना अभी भी एक बड़ा लक्ष्य है।

8.
धर्म की आजादी
बंटवारे के समय धर्म के नाम पर बहुत हिंसा हुई। पाकिस्तान ने खुद को एक धर्म से जोड़ा, लेकिन भारत ने सभी धर्मों को समान दर्जा देने का रास्ता चुना। हमारे देश के सामने हमेशा से यह चुनौती रही है कि हम सभी धर्मों के लोगों को साथ लेकर एक मजबूत और शांतिपूर्ण समाज बनाएं।

9.
अभिव्यक्ति की आजादी
हमारे लोकतंत्र की असली ताकत यह है कि देश का कोई भी नागरिक सरकार से सवाल पूछ सकता है। संसद, अदालतें, चुनाव आयोग और मीडिया लोकतंत्र के पहरेदार हैं। जब देश में खुलकर बात करने और सवाल पूछने की आजादी होती है, तभी लोकतंत्र सुरक्षित रहता है।

10.
सिनेमा की आजादी
भारतीय सिनेमा ने देश के साथ-साथ अपना सफर तय किया है। फिल्मों ने सिर्फ लोगों का मनोरंजन नहीं किया, बल्कि समाज की कमियों, गरीबी, महिलाओं की स्थिति और सरकार से जुड़े सवालों को भी पर्दे पर दिखाया है। सिनेमा हमारे समाज का आईना रहा है।

11.
आरक्षण की आजादी
आरक्षण को लेकर आज देश में दो बातें देखने को मिलती हैं— कुछ लोग इसे सामाजिक न्याय का जरिया मानते हैं, तो कुछ इसे राजनीति और फायदे का हथियार। आज यह बहस बहुत जरूरी हो गई है कि आरक्षण का आधार सिर्फ जाति होना चाहिए या फिर गरीब और जरूरतमंद लोगों को भी आर्थिक आधार पर इसका फायदा मिलना चाहिए।

12.
जातिवाद की आजादी
आजादी के 80 साल बाद भी हमारे समाज में जातिवाद एक बहुत बड़ी बुराई है। आज भी चुनावों में जाति के नाम पर वोट मांगे जाते हैं। पुरानी वर्ण व्यवस्था, जो कभी काम पर आधारित थी, अब जन्म के आधार पर भेदभाव का जरिया बन चुकी है। जब तक जातिगत भेदभाव खत्म नहीं होगा, तब तक सही मायनों में आजादी अधूरी है।
13.
वर्ण-वाद बनाम जातिवाद
पुराने समय में ‘वर्ण व्यवस्था’ इंसान के काम (कर्म) के आधार पर तय होती थी। लेकिन समय के साथ यह जातिवाद में बदल गई। आज राजनीति में वोट बैंक के लिए जातिवाद का खूब इस्तेमाल किया जाता है, जिससे समाज आपस में बंट रहा है।

14.
कर्ज की आजादी
देश का विकास तो हुआ है, लेकिन इसके साथ ही विदेशी कर्ज भी बहुत बढ़ गया है।
मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार भारत पर विदेशी कर्ज बढ़कर लगभग 762.8 अरब डॉलर (करीब 72.14 लाख करोड़ रुपये) हो गया है।
अगर इसे देश की पूरी आबादी में बराबर बांटा जाए, तो हर भारतीय पर लगभग ₹2,05,000 से ₹2,06,000 तक का कर्ज बैठता है।
विदेशी कर्ज के मामले में भारत का नाम दुनिया के शीर्ष कर्जदार देशों में आता है, जिसे कम करना अर्थव्यवस्था के लिए बहुत जरूरी है।

15.
प्रजातंत्र और पूंजीवाद की आजादी (धनतंत्र)
आज के समय में चुनाव लड़ना इतना महंगा हो चुका है कि आम और ईमानदार आदमी के लिए चुनाव जीतना बहुत मुश्किल हो गया है। इसे ‘धनतंत्र’ कहा जाता है, जहां पैसा राजनीति को चलाने लगता है।

समस्याएं:
रैलियों और विज्ञापनों में करोड़ों रुपये खर्च होते हैं।बड़े व्यापारी पार्टियों को चंदा देते हैं और जीतने के बाद सरकारें उन्हीं के फायदे की नीतियां बनाती हैं।

भ्रष्टाचार का जन्म
चुनाव में पैसे की वजह से भ्रष्टाचार बढ़ता है।
सुधार के उपाय:चुनाव में होने वाले कुल खर्च पर सख्त कानूनी सीमा लगे।
चुनाव का खर्च सरकार खुद उठाए (State Funding), ताकि गरीब और योग्य उम्मीदवार भी चुनाव लड़ सकें।

राजनीतिक दलों को मिलने वाले हर चंदे का हिसाब-किताब जनता के सामने पारदर्शी होना चाहिए।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी, ऐतिहासिक संदर्भों और आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है। इसका उद्देश्य विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और ऐतिहासिक पहलुओं पर एक निष्पक्ष विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

कवच का तेज नहीं आत्म बल चाहिए- जब समर भूमि में जागा त्रेता का महातेज

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पौराणिक कथा 14 अगस्त 2026

कुरुक्षेत्र का मैदान… जहाँ रक्त की नदियाँ बह रही थीं, जहाँ लोहे से लोहा टकरा रहा था और जहाँ हर क्षण मृत्यु का अट्ठाहास गूँज रहा था। पर उस विशाल युद्धक्षेत्र में एक ऐसा सच भी था जिसे देख कौंतेय और कौरव, दोनों ही थर्रा उठते थे।

गांडीवधारी अर्जुन के दिव्य रथ के ध्वज पर विराजित थे स्वयं पवनपुत्र हनुमानजी। जब भी युद्ध के मध्य महाबली हनुमान खड़े होकर कौरव सेना की ओर अपने आग्नेय नेत्रों से घूरकर देखते, तो सेना में ऐसा हाहाकार मचता मानो कोई प्रचंड जलजला आ गया हो। कौरव सैनिक प्रलयकारी तूफ़ान की गति से रणभूमि छोड़कर भाग खड़े होते। किसी भी योद्धा में इतना साहस न था जो कपिध्वज पर विराजमान महातेज की दृष्टि का भी सामना कर सके।

फिर वह क्षण आया जब नियति का सबसे भीषण संग्राम छिड़ा—कर्ण और अर्जुन का युद्ध।
कर्ण उस दिन रुद्र रूप धारण किए हुए था। उसके धनुष से बाणों की ऐसी प्रलयंकारी वर्षा हो रही थी कि स्वयं जगदाधार भगवान श्रीकृष्ण भी उससे अछूते न रहे। बाणों की तीखी बौछार से माधव का दिव्य कवच कटकर भूमि पर गिर पड़ा। कर्ण के तीक्ष्ण शर पुरुषोत्तम के अत्यंत कोमल, श्री-अंगों को बिंधने लगे।

रथ की छत पर शांत बैठे महावीर हनुमान एकटक अपने आराध्य स्वामी की ओर ही देख रहे थे।

जब उन्होंने देखा कि उनके स्वामी, उनके प्रभु का कवच छिन्न-भिन्न हो चुका है और कर्ण का बाण निरंतर उनके श्री-अंगों को क्षत-विक्षत कर रहा है, तो त्रेतायुग के महाबली का धैर्य टूट गया। भक्ति का बांध क्रोध के ज्वार में बह गया।

अचानक… ब्रह्मांड को कँपा देने वाली एक उग्रतर गर्जना गूंजी!
हनुमानजी अपने दोनों हाथों को उठाकर, कर्ण को क्षण मात्र में भस्म कर देने के लिए रथ की ध्वजा पर खड़े हो गए। उनकी वह हुंकार ऐसी थी मानो सहस्रों बिजलियां एक साथ कौंध गई हों, मानो दसों दिशाएं फट पड़ी हों।

जो कौरव सेना पहले ही सहमी हुई थी, वह तो भागी ही, परंतु हनुमानजी के इस विकराल रूप को देखकर पांडव पक्ष के योद्धा भी थर-थर कांपते हुए समर भूमि छोड़कर भागने लगे। हनुमानजी के इस कल्पान्तकारी क्रोध को देखकर कर्ण के हाथों से उसका धनुष छूटकर गिर पड़ा।

यह दृश्य देखते ही भगवान श्रीकृष्ण तुरंत उठे। उन्होंने अपना दाहिना हाथ बढ़ाया और महाबली हनुमान का स्पर्श करते हुए अत्यंत गंभीर स्वर में कहा—

“रुक जाओ पवनपुत्र! संभलो! यह तुम्हारे क्रोध का समय नहीं है।”
प्रभु के स्पर्श मात्र से हनुमानजी रुक तो गए, परंतु उनका क्रोध शांत न हुआ। उनकी विशाल पूंछ आकाश में तनी हुई लहरा रही थी। दोनों हाथों की मुट्ठियाँ कस चुकी थीं, दांत कटकटा रहे थे और उनकी जलती हुई लाल आँखें कर्ण पर टिकी थीं। त्रेतायुग के उस अमर महावीर का ऐसा प्रलयंकर रूप देखकर कर्ण और उसका सारथि थर-थर कांप रहे थे।

हनुमानजी को शांत न होते देख, श्रीकृष्ण ने कड़े और आदेशात्मक स्वर में कहा—
“हनुमान! मेरी ओर देखो! यदि तुमने कुछ क्षण और कर्ण की ओर इस दृष्टि से देख लिया, तो वह तुम्हारे तेजोबल से ही भस्म हो जाएगा। यह त्रेतायुग नहीं, द्वापर है। यहाँ तुम्हारे पराक्रम को तो छोड़ो, तुम्हारे तेज की एक झलक भी सहने की सामर्थ्य किसी में नहीं है। मैंने तुम्हें इस महासमर में शांत रहकर केवल साक्षी बनने को कहा है।”

प्रभु के इन शब्दों को सुनते ही महाबली ने अपने आग्नेय नेत्रों को नीचे मोड़ा, अपने आराध्य परमेश्वर के श्रीचरणों की ओर देखा और चुपचाप, शांत होकर पुनः ध्वजपट पर विराजमान हो गए।

निर्माण श्रमिकों के हितों के प्रति सरकार प्रतिबद्ध, पंजीयन, ई-केवाईसी और योजनाओं का लाभ लगातार जारी

रायपुर, 14 अगस्त 2026

श्रमिकों की सुविधा के लिए पंजीयन प्रक्रिया ऑनलाइन है। श्रमिक लोक सेवा केंद्र, श्रम संसाधन केंद्र, जिला श्रम कार्यालय अथवा ‘श्रमेव जयते’ मोबाइल एप के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

प्रदेश में 9.17 लाख से अधिक निर्माण श्रमिक पंजीकृत, 14.44 लाख से अधिक हितग्राहियों को डीबीटी के माध्यम से सहायता।

छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल ने कहा है कि प्रदेश में निर्माण श्रमिकों के पंजीयन, ई-केवाईसी, पंजीयन नवीनीकरण तथा विभिन्न श्रमिक कल्याणकारी योजनाओं के तहत हितलाभ वितरण की प्रक्रिया सुचारु रूप से जारी है। मंडल ने कहा कि पात्र श्रमिकों को योजनाओं का लाभ पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है।

मंडल के अनुसार वर्ष 2024-25 से अब तक प्रदेश में 9 लाख 17 हजार 738 निर्माण श्रमिकों का पंजीयन किया गया है। इसी अवधि में 6 लाख 13 हजार 930 श्रमिकों के पंजीयन का नवीनीकरण भी किया गया है।

ई-केवाईसी प्रक्रिया भी लगातार जारी

राज्य सरकार के निर्देशानुसार ई-केवाईसी अभियान निरंतर संचालित किया जा रहा है। अब तक 93 हजार 433 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 65 हजार 894 प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है। शेष आवेदनों की नियमानुसार जांच की जा रही है। जिन श्रमिकों ने अभी तक पंजीयन का नवीनीकरण नहीं कराया है, उन्हें भी लगातार प्रेरित किया जा रहा है।

डीबीटी के माध्यम से सीधे खातों में पहुंच रही सहायता

मंडल ने बताया कि 17 सितंबर 2024 से पात्र श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं की सहायता राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सीधे उनके आधार लिंक बैंक खातों में भेजी जा रही है।

मुख्यमंत्री साइकिल सहायता योजना, औजार सहायता योजना, सिलाई सहायता योजना और सुरक्षा उपकरण सहायता योजना सहित सामग्री आधारित योजनाओं के माध्यम से अब तक 1 लाख 99 हजार 626 श्रमिकों को लाभान्वित किया जा चुका है।

इसके अलावा महतारी जतन योजना, नौनीहाल छात्रवृत्ति योजना, मेधावी शिक्षा सहायता योजना, मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना, श्रमिक सियान सहायता योजना, बच्चों के लिए निःशुल्क गणवेश एवं पुस्तक-कॉपी सहायता, आवास सहायता और पेंशन सहायता सहित विभिन्न योजनाओं का लाभ भी पात्र हितग्राहियों को दिया जा रहा है। वर्ष 2024-25 से अब तक 14 लाख 44 हजार 870 निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिवार के सदस्यों को डीबीटी के माध्यम से सहायता राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है।

पंजीयन और ई-केवाईसी बंद नहीं

मंडल ने स्पष्ट किया है कि निर्माण श्रमिकों के पंजीयन, नवीनीकरण और ई-केवाईसी की प्रक्रिया बंद नहीं हुई है। ऑनलाइन पोर्टल पर तकनीकी समस्या आने की स्थिति में उसका त्वरित निराकरण किया जा रहा है। जिन पंजीकृत श्रमिकों की ई-केवाईसी लंबित है, उनके आवेदन लगातार स्वीकार किए जा रहे हैं। ई-केवाईसी पूर्ण होने के बाद पात्रता के अनुसार संबंधित योजनाओं का लाभ प्रदान किया जाएगा।

मंडल ने निर्माण श्रमिकों से अपील की है कि वे समय पर अपना पंजीयन एवं नवीनीकरण कराएं, ई-केवाईसी पूर्ण करें और शासन द्वारा संचालित श्रमिक कल्याणकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाएं।