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राममंदिर चढ़ावा – राम जी की चिड़िया, राम जी का खेत: चौपाल पर महा-संवाद

डिजिटल न्यूज 27 जून 2026/ अयोध्या

ज्योतिपति: गांव के सीधे-साधे बुजुर्ग पुरुष।
ज्वाला: गांव का ही तेजतर्रार और बेबाक युवा पुरुष।
(दृश्य: गांव की चौपाल पर खाट पर बैठे ज्योतिपति और ज्वाला आपस में चर्चा कर रहे हैं। हाथ में मोबाइल लिए ज्वाला इस नए सनसनीखेज केस की परतें खोल रहा है।)

ज्योतिपति:अरे ज्वाला भैया! ज़रा ये खबर तो सुनो। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी हो गई! वो भी एक-दो बार नहीं, पूरे 47 दिनों में 70 बार हाथ साफ़ किया गया है। हे राम, ये कैसा जमाना आ गया?

ज्वाला:अरे ज्योतिपति काका! इसे जमाना खराब होना नहीं, बल्कि ‘घर की खेती’ समझना कहते हैं। मंदिर बने अभी साल भर ही हुआ है कि वहां ऐसा तगड़ा आर्थिक घोटाला हो गया। हम तो इतिहास में पढ़ते थे कि महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को 17 बार लूटा था, लेकिन यहाँ तो अपने ही लोगों ने सिर्फ 47 दिनों में 70 बार का नया रिकॉर्ड बना दिया!

ज्योतिपति:अरे भाई, 70 बार चोरी? पर वहां तो इतनी सुरक्षा रही होगी। एक हिंदुत्ववादी पार्टी के कारण इतना बड़ा मंदिर खड़ा हुआ, फिर सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गया? कौन-कौन लोग शामिल हैं इसमें?

ज्वाला:काका, सुरक्षा तो सिर्फ दिखाने के लिए रही होगी, असली खेल तो अंदर चल रहा था। पुलिस ने पूरा ‘मंदिर लूटो गिरोह’ पकड़ा है। कुल आठ लोग गिरफ्तार हुए हैं—अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू! इन लोगों के पास से अब तक 79.85 लाख रुपये नकद बरामद हो चुके हैं।

ज्योतिपति:राम-राम-राम… यह तो वही बात हो गई कि ‘राम जी की चिड़िया, राम जी के खेत, खा लो चिड़िया भर-भर पेट’। जिसको जहां जितना मिला, वो बटोरने में लगा रहा। पर ये टिन्नू के पास चाबी कैसे आई?

ज्वाला: यही तो सबसे बड़ा तमाशा है, काका! विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में जो खुलासा हुआ है, उसे सुनकर सिर घूम जाएगा। नियमों की ऐसी धज्जियां उड़ी हैं कि दान पात्र यानी हुंडियों की चाबियां बिना किसी अधिकृत आदेश के टिन्नू के पास रहती थीं। यहाँ तक कि ड्राइवर के पास भी चाबियां घूम रही थीं!

ज्योतिपति: क्या बात कर रहे हो? ड्राइवर और टिन्नू के पास चाबियां? लेकिन पैसे संभालने और गिनने का कोई नियम-कानून नहीं था क्या?

ज्वाला:नियम तो बकायदा कागज पर बना था, काका! स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बीच बाकायदा बैठकर एक SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तय हुई थी। सितंबर 2024 और फरवरी 2025 में बैठकें हुईं, जिस पर एसबीआई की तरफ से गोविंद मिश्र और ट्रस्ट की तरफ से अनिल मिश्रा ने दस्तखत भी किए थे। लेकिन बाद में इस SOP का पालन ही नहीं किया गया। चढ़ावा गिनने वाले कमरे तक कैश ले जाने और उसके रखरखाव में इतनी गंभीर लापरवाही बरती गई कि अब एसबीआई के कुछ कर्मचारी भी जांच के घेरे में आ गए हैं।

ज्योतिपति: यह तो सरासर धोखा है! जब ट्रस्ट को पहले से ही गड़बड़ी की आशंका थी, तो उन्होंने इस व्यवस्था को कड़ाई से लागू क्यों नहीं किया?

ज्वाला: वही तो बात है, काका। आशंका होने के बावजूद आंखें बंद रखी गईं। अब जब पानी सिर से ऊपर चला गया और एसआईटी की सिफारिश पर एफआईआर दर्ज हुई, तब जाकर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने ‘नैतिक आधार’ पर इस्तीफा दे दिया है।

ज्योतिपति: बड़ी विडंबना है भाई। इस देश को हमेशा धर्म के नाम पर ही लूटा गया है। अब तो लोग राम के नाम पर भी परवाह नहीं कर रहे हैं। पर अब आगे क्या होगा? क्या मंदिर का इंतजाम फिर उन्हीं ट्रस्ट वालों के हाथ में रहेगा या सरकार इसकी कोई नई व्यवस्था करेगी?

ज्वाला: सवाल तो यही है, काका। आस्था आम जनता की थी, पैसा भक्तों का था, और डाका अपनों ने ही डाल दिया। अब देखना यह है कि आगे व्यवस्था सुधरती है या फिर चाबियां किसी और ‘टिन्नू’ के हाथ में थमा दी जाती हैं। फिलहाल तो हर चौपाल पर यही चर्चा है कि भगवान के घर में भी ‘लूटतंत्र’ हावी है।


कंक्रीट की दुनिया और मरता हुआ दिल: एक अनकही त्रासदी

संपादकीय/26 जून 2026

हमको आजादी मिली गुलामी गरीबी और बेबसी की बुनियाद पर लेकिन आज हमने देश को उत्तरोत्तर विकास की ओर ले गए और विकास के शिखर पर देश को खड़ा कर दिया। हमने अपनी आजादी का बेदर्दी दुरुपयोग किया हरियाली को पूरी तरीके से खत्म कर कंक्रीटीकरण का पूरा जाल बुन दिए ।

हमने हरियाली पर विकास का अमरबेल चढ़ा दिया

आज हम चारों तरफ जिस ‘विकास’ का शोर सुन रहे हैं, वह असल में ‘कंक्रीटीकरण’ का एक जाल है। हमने सिर्फ जंगलों और खेतों को ही कंक्रीट से नहीं ढका, बल्कि हमने अपने अहसास और अपने दिल को भी इसी ‘कंक्रीट’ की कठोरता से भर दिया है।

दिल की अनदेखी: कंक्रीट का साम्राज्य

जब हमने दिल की कोमल आवाज़ को अनसुना करना शुरू किया और दौलत की खनखनाती फड़फड़ाती आवाज को सुनना शुरू किया तभी से हमने कुदरत (प्रकृति) के साथ खिलवाड़ शुरू कर दिया। आज चारों तरफ बस कंक्रीट ही कंक्रीट की दुनिया है। हमने ज़मीन को सीमेंट से ढंक दिया ताकि वहां धूल न उड़े, लेकिन हम भूल गए कि जब ज़मीन की पोर-पोर बंद हो जाएगी, तो वह आसमान से गिरने वाले अमृत (बारिश के पानी) को पियेगी कैसे?

जल संकट और बंजर भावनाएं

इस साल मानसून रूठ गया और आज जो जल संकट हम देख रहे हैं, वह सीधे तौर पर हमारे ‘पत्थर होते दिल’ का नतीजा है।हमने जिंदगी को गाँवों में नसीब से देखा है और शहरों की जिंदगी बड़े करीब से देखा है।

बाहर का संकट:
ज़मीन पर कंक्रीट की चादर बिछ गई, इसलिए भू-जल का स्तर गिर गया। नदियाँ सूख गईं और प्यास बढ़ गई।

भीतर का संकट:
दिल पर स्वार्थ की कंक्रीट जम गई, इसलिए भावनाओं का जल सूख गया। दया और करुणा की नदियाँ अब समाज में नहीं बहतीं। हमने प्रकृति से उसका पानी छीन लिया, और प्रकृति ने हमारे जीवन से उसकी शांति छीन ली।

पर्यावरण प्रदूषण: दिल की गंदगी का प्रतिबिंब

आज जो पर्यावरण प्रदूषण है, वह असल में हमारी सोच का प्रदूषण है। जब तक दिल में ‘मिट्टी की महक’ थी, हम पेड़ लगाते थे, नदियों को माँ कहते थे। लेकिन जब दिल ‘पत्थर का व्यापारी’ हो गया, तो हमने पेड़ों को सिर्फ लकड़ी और नदियों को सिर्फ नाला समझा।

अगर हमने दिल की बात सुनी होती, तो हम जानते कि कंक्रीट की ये ऊँची इमारतें कभी वो सुकून नहीं दे सकतीं जो एक बरगद की ठंडी छाँव और कल-कल बहते झरने में मिलता है।

कुछ समझे आप कंक्रीट तोड़िए, दिल को जोड़िए,दीवारों में कैद न रहिये

आज की युवा पीढ़ी को यह समझना होगा कि सिर्फ कंक्रीट के शहर बसा लेने से जीवन खुशहाल नहीं होगा। अगर हमें भविष्य बचाना है, तो हमें अपने दिल की ज़मीन से उस कंक्रीट को हटाना होगा। हमें वापस ‘मिट्टी’ से जुड़ना होगा, पर्यावरण की धड़कन को अपनी धड़कन समझना होगा। हमें तो याद है आज भी तालाब के पार में चलते हुए मिट्टी से फिसले गिरे और फिर नहाने गए। कभी मौसम खुलने का इंतजार करते रहे फटफटी (बाइक)निकाली तो बाइक के मडगार्ड में कीचड़ जम गई फिर हमने जाने का इरादा ही बदल दिया था सोचा जमीन में जमे रहो क्योंकि मिट्टी हमे रोक लेती थी ।

फिर क्या गुड़ी में गप्पे मारे और शाम को चौपाल लग गई। बरवट में देखा आरामी कुर्सी में बैठे दादाजी किताब पढ़े जा रहे थे।बातें याद आ गई दादा जी को कहते सुना था कुल बिहाओ और कन्हार जोतो ।मेरा गांव मेरी दुनिया मेरा तो देश बन गया।

“कंक्रीट का जंगल बनाम दिल की ज़मीन”
दिल अब ऐसे ही हो गया ।हम कभी पानी से बचते थे अब पानी हमसे बच रहा है।

“जिस दिन आखिरी पेड़ कटेगा और आखिरी नदी सूखेगी, तब इंसान को समझ आएगा कि वह ‘कंक्रीट’ और ‘नोट’ खाकर जिंदा नहीं रह सकता।”

सूर्यकांत अग्रवाल को BJMTUC का पश्चिम बंगाल प्रदेश महासचिव नियुक्त किया गया

नई दिल्ली/पश्चिम बंगाल 26 जून 2026

भारतीय जनता मज़दूर ट्रेड यूनियन काउंसिल (BJMTUC) ने संगठनात्मक विस्तार करते हुए पश्चिम बंगाल में बड़ा निर्णय लिया है। राष्ट्रीय महासचिव श्री सी.एल. शर्मा की अनुशंसा पर राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रजेश शर्मा ने सूर्यकांत अग्रवाल को तत्काल प्रभाव से BJMTUC का पश्चिम बंगाल प्रदेश महासचिव नियुक्त किया है।

सूर्यकांत अग्रवाल, निवासी MG रोड, बुडगा (M), दक्षिण 24 परगना, पश्चिम बंगाल को संगठन के “ऑल इंडिया कैज़ुअल एंड कॉन्ट्रैक्चुअल वर्कर्स यूनियन” सेक्टर का प्रभारी भी बनाया गया है। वे अगले आदेश तक संगठन द्वारा सौंपे गए समस्त दायित्वों का निर्वहन करेंगे।

नियुक्ति की जानकारी प्रेषित
इस नियुक्ति की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया एवं मुख्य श्रम आयुक्त, भारत सरकार को भी भेजी गई है।

सूर्यकांत अग्रवाल का परिचय
सूर्यकांत अग्रवाल जनसेवा, सामुदायिक विकास और ज़मीनी नेतृत्व के अनुभवी कार्यकर्ता हैं। स्थानीय मुद्दों की गहरी समझ, जन-संपर्क कौशल और संगठनात्मक अनुभव के कारण वे पार्टी में प्रभावी योगदान देते रहे हैं।

अनुभव /संगठन /सक्रियता
वर्ष 2012 से भाजपा से सक्रिय रूप से जुड़े श्री अग्रवाल ने संगठन विस्तार, जन-संपर्क और ज़मीनी कार्यक्रमों में निरंतर योगदान दिया है। उन्होंने दक्षिण 24 परगना ज़िले के लिए भाजपा ऑब्ज़र्वर बनाए जाने का अनुरोध भी किया था। वर्तमान में वे संगठन में आगे बढ़कर चुनौतीपूर्ण कार्य करने की अभिलाषा रखते हैं और प्रगति, सामाजिक कल्याण व समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

राष्ट्रीय नेतृत्व ने दी बधाई
श्री अग्रवाल की नियुक्ति पर BJMTUC के राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रजेश शर्मा, राष्ट्रीय महासचिव तारा पाठक, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी दीपक पाण्डेय सहित समस्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों एवं प्रदेश अध्यक्षों ने हार्दिक बधाई दी है और संगठन में उनका स्वागत किया है।

अंधत्व निवारण अभियान को बड़ी सफलता: 93 मोतियाबिंद मरीजों के जीवन में लौटी रोशनी

नारायणपुर/छत्तीसगढ़ – 26 जून 2026

वित्तीय वर्ष 2026-27 को जिले में मोतियाबिंद उन्मूलन के लिए एक विशेष अभियान के रूप में मनाया जा रहा है। इसके तहत स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें अंदरूनी और दूरदराज के गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों की आंखों की जांच कर रही हैं।

नारायणपुर जिले में मोतियाबिंद मुक्त अभियान के तहत जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को उल्लेखनीय सफलता मिली है। कलेक्टर के कुशल निर्देशन एवं मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय अंधत्व एवं दृष्टिबाधिता नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में व्यापक स्तर पर मोतियाबिंद रोगियों की पहचान और उनका निशुल्क उपचार किया जा रहा है।

चालू वित्तीय वर्ष में माह अप्रैल 2026 से 24 जून 2026 तक रिकॉर्ड समय में जिले के कुल 93 मोतियाबिंद मरीजों का सफल ऑपरेशन किया जा चुका है, जिससे उनके जीवन में नया उजाला आया है।

स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान एक आंख और दोनों आंखों की गंभीर समस्या से जूझ रहे मरीजों को प्राथमिकता दी जा रही है। जिले में चिह्नित दोनों आँखों से प्रभावित 268 मरीजों में से अब तक 47 मरीजों का सफल उपचार किया जा चुका है, जबकि शेष 221 मरीजों का उपचार प्रक्रियाधीन है।

इसी प्रकार एक आंख की समस्या वाले चिह्नित 604 मरीजों में से 46 मरीजों का सफल ऑपरेशन संपन्न हो चुका है और बचे हुए 558 मरीजों का उपचार जल्द किया जाएगा।

इस जमीनी कवायद का मुख्य उद्देश्य मोतियाबिंद के मरीजों की समय पर पहचान कर उन्हें अंधत्व का शिकार होने से बचाना है। जिला प्रशासन के अनुसार शेष बचे सभी चिह्नित मरीजों के ऑपरेशन और उपचार की प्रक्रिया लगातार जारी है।

विभाग का अंतिम लक्ष्य सभी पात्र मरीजों को शीघ्र और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि उनकी दृष्टि वापस लौट सके और वे एक बेहतर जीवन जी सकें।

प्लास्टिक कचरे से कमाई – कोलिहापुरी की महिलाओं ने कमाए 46 हजार से अधिक,

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दुर्ग जिला /कोलिहापुरी – 26 जून 2026

स्वच्छता के साथ आत्मनिर्भरता की लिखी नई इबारत।दुर्ग जिले की ग्राम पंचायत कोलिहापुरी ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का एक अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत किया है।

यहां की महिला स्व-सहायता समूहों ने प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन को आय का सशक्त जरिया बनाकर न केवल गांव को स्वच्छ बनाया, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।

कलेक्टर अभिजीत सिंह एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग कुमार दुबे के मार्गदर्शन में संचालित इस पहल के तहत महिलाओं ने घर-घर से संग्रहित 2730 किलोग्राम प्लास्टिक कचरे का पृथक्करण कर उसे अधिकृत रिसाइक्लिंग इकाई को विक्रय किया, जिससे समूह को कुल 46 हजार 410 रुपए की आय प्राप्त हुई।

कोलिहापुरी में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की प्रक्रिया पूरी तरह सुव्यवस्थित है। महिला समूह की सदस्याएं प्रतिदिन घर-घर जाकर गीला, सूखा और प्लास्टिक कचरा अलग-अलग एकत्र करती हैं तथा ग्रामीणों को स्रोत पर ही कचरा पृथक करने के लिए प्रेरित करती हैं।

इसके पश्चात एकत्रित प्लास्टिक को विकासखंड दुर्ग स्थित एमआरएफ-पीडब्ल्यूएमयू सेंटर भेजा जाता है, जहां पीईटी, एचडीपीई, एलडीपीई सहित विभिन्न श्रेणियों में उसका वर्गीकरण किया जाता है।

गुणवत्ता के आधार पर पृथक किए गए प्लास्टिक को अधिकृत रिसाइक्लिंग इकाइयों को बेचा जाता है और प्राप्त राशि सीधे महिला समूहों के बैंक खातों में जमा की जाती है। इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को स्थायी आजीविका का नया अवसर मिला है और ग्रामीणों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है।

अब महिलाएं प्लास्टिक कचरे को बेकार वस्तु न मानकर आय के संसाधन के रूप में देख रही हैं।

कोलिहापुरी मॉडल की सफलता से प्रेरित होकर विकासखंड धमधा की ग्राम पंचायत लिटिया तथा विकासखंड पाटन की ग्राम पंचायत पतोरा और गाड़ाडीह में भी इसी तर्ज पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का कार्य प्रारंभ किया गया है।

जिला प्रशासन का लक्ष्य आगामी समय में जिले की सभी ग्राम पंचायतों में इस मॉडल का विस्तार करना है, ताकि स्वच्छता के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।

छात्रा महिमा राजपूत चांद के लिए बनाएगी सैटेलाइट,विश्व मिशन ShakthiSAT में नेशनल फाइनलिस्ट

रायपुर छत्तीसगढ़ 26 जून 2026

रायपुर की महिमा राजपूत अंतरराष्ट्रीय छात्र सैटेलाइट मिशन ‘ShakthiSAT’ में नेशनल फाइनलिस्ट चयनित।स्वामी आत्मानंद स्कूल की छात्रा चांद के लिए बनाएगी सैटेलाइट, अक्टूबर 2026 में होगा लॉन्च।

छत्तीसगढ़ की 10वीं कक्षा की छात्रा महिमा राजपूत ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में प्रदेश और देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।

तिलक नगर स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल की छात्रा महिमा का चयन वैश्विक अंतरिक्ष परियोजना ‘Mission ShakthiSAT’ के लिए नेशनल फाइनलिस्ट के रूप में हुआ है। यह एक अंतरराष्ट्रीय छात्र सैटेलाइट मिशन है जिसमें दुनिया के 108 देशों के छात्र-छात्राएं मिलकर चांद के लिए सैटेलाइट विकसित करेंगे।

महिमा को इस मिशन की जानकारी अपने स्कूल के माध्यम से मिली थी। पंजीकरण के बाद उन्हें विज्ञान, उपग्रह तकनीक और अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़े 21 मॉड्यूल और 365 पाठों का गहन ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया। इस कठिन चयन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद उनका चयन फाइनलिस्ट के तौर पर किया गया।
योजना के अनुसार, महिमा अगस्त 2026 में नई दिल्ली में आयोजित होने वाली 8 दिवसीय विशेष कार्यशाला में हिस्सा लेंगी। इस कार्यशाला में 108 देशों के प्रतिभागी वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में स्पेस साइंस और सैटेलाइट निर्माण का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे और उपग्रह निर्माण का कार्य करेंगे। मिशन के तहत तैयार किए गए इन उपग्रहों को अक्टूबर 2026 में श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाना प्रस्तावित है।

महिमा की इस शानदार उपलब्धि पर रायपुर के कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने उनसे मुलाकात कर सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। महिमा की यह सफलता छत्तीसगढ़ के अन्य विद्यार्थियों के लिए भी अंतरिक्ष विज्ञान में करियर बनाने की प्रेरणा बनेगी।

भूकंप त्रासदी:-वेनेजुएला में दो भीषण भूकंपों से तबाही, हजारों मौतों की आशंका

डिजिटल डेस्क/ 26 जून 2026

राहत-बचाव अभियान युद्धस्तर पर:_
दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए लगातार दो शक्तिशाली भूकंपों ने व्यापक तबाही मचा दी है। 7.2 और 7.5 तीव्रता के इन भूकंपों के तेज झटकों ने राजधानी काराकस सहित कई शहरों में भारी विनाश किया है। बहुमंजिला इमारतें धराशायी हो गईं, सड़कें मलबे में तब्दील हो गईं और कई इलाकों में संचार तथा परिवहन व्यवस्था ठप पड़ गई है।

प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार सैकड़ों लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि मलबे में बड़ी संख्या में लोगों के दबे होने के कारण मृतकों की संख्या 10 हजार से अधिक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

बताया गया है कि पहला भूकंप 7.2 तीव्रता का था और लगभग 39 सेकंड बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा शक्तिशाली झटका महसूस किया गया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार दोनों भूकंप अपेक्षाकृत कम गहराई पर आए, जिससे जमीन पर विनाश का स्तर काफी अधिक रहा।

पहला भूकंप कैरेबियाई तट के मोरोन क्षेत्र के पश्चिम में तथा दूसरा राजधानी काराकस के निकट केंद्रित था।
राजधानी काराकस और ला गुएरा शहर सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। कई इमारतें पूरी तरह ढह गई हैं, हवाई अड्डों को नुकसान पहुंचने के कारण उड़ान सेवाएं बंद कर दी गई हैं और मेट्रो सेवा भी बाधित है।

देशभर में आपातकाल लागू कर दिया गया है तथा सेना, राहत एजेंसियां और स्वयंसेवी संगठन मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं।

वेनेजुएला सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहयोग की अपील की है। अमेरिका समेत कई देशों ने राहत सामग्री, चिकित्सा दल और मानवीय सहायता भेजने की घोषणा की है।

भारत ने भी इस प्राकृतिक आपदा पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है।
पीएम मोदी ने कहा है कि हम घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करते हैं और इस मुश्किल समय में सभी प्रभावित लोगों के साथ एकजुटता से खड़े हैं।
भारत हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है।’’

इतिहास गवाह है कि भूकंप मानव सभ्यता के लिए सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में रहे हैं। वर्ष 1556 का चीन का शानक्सी भूकंप, 1976 का तांगशान भूकंप, 2004 का सुमात्रा भूकंप एवं सुनामी और 2010 का हैती भूकंप ऐसी त्रासदियां हैं, जिन्होंने लाखों लोगों का जीवन प्रभावित किया।

विशेषज्ञों के अनुसार पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों के आपसी खिसकने और टकराने से भूकंप उत्पन्न होते हैं। जब यह गतिविधि अधिक ऊर्जा के साथ और कम गहराई पर होती है तो जन-धन की हानि कई गुना बढ़ जाती है।

वेनेजुएला की यह त्रासदी एक बार फिर याद दिलाती है कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए मजबूत आपदा प्रबंधन व्यवस्था, भूकंपरोधी निर्माण और त्वरित राहत तंत्र कितने आवश्यक हैं।

फिलहाल पूरी दुनिया की नजर राहत एवं बचाव कार्यों पर टिकी है और प्रभावित लोगों तक जल्द से जल्द सहायता पहुंचाने के प्रयास जारी हैं।



शीशें का घर और बंजर होता दिल: ज़मीन अब पत्थर हो गई

लेख डेस्क 25 जून 2026

दिल’ वह उपजाऊ मिट्टी है जहाँ संवेदनाओं की फसल उगती है, लेकिन जब यह मिट्टी ‘पत्थर’ बन जाती है, तो इंसान का पूरा अस्तित्व ही बंजर हो जाता है। दिल वह ज़मीन है, जहाँ इंसान के विचार, उसका व्यवहार और उसके संस्कार जन्म लेते हैं। एक किसान अपनी ज़मीन को कोमल रखता है ताकि उसमें बीज अंकुरित हो सकें। लेकिन आज के दौर में, दौलत और अहम् की धूप ने उस गीली मिट्टी को सुखाकर ‘पत्थर’ बना दिया है।

पत्थर में बीज नहीं उगते उपज नहीं होती
पत्थर कितना ही कीमती क्यों न हो—चाहे वह हीरा हो या संगमरमर—उसमें कभी कोई पौधा नहीं उग सकता। जब हमारा दिल पत्थर का हो जाता है, तो उसमें प्रेम, दया और करुणा के बीज दम तोड़ देते हैं। अब वहाँ ‘विचार’ नहीं पैदा होते, बल्कि एक कठोर ‘जड़ता’ पैदा होती है। जिस मिट्टी में कभी अपनों के लिए नमी थी, वह अब कंक्रीट के जंगल की तरह सख्त हो चुकी है।

पत्थर के होठों पर अब शब्द नहीं
जब दिल की कोमलता खत्म होती है, तो उसका सबसे पहला असर हमारी ज़ुबान पर पड़ता है। हमारे होंठ अब शब्द नहीं बोलते, बल्कि पत्थर बरसाते हैं। आज जब कोई किसी से बात करता है, तो संवाद नहीं होता, बल्कि एक हमला होता है। लहजे की कड़वाहट और शब्दों की चोट ऐसी लगती है मानो कोई सामने वाले को पत्थर मार रहा हो।

शीशे के घर और पत्थर का व्यापार
यहाँ वह पुरानी कहावत याद आती है— “जिनके घर शीशे के होते हैं, वो दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंका करते।” लेकिन आज विडंबना देखिए, हमने अपने घरों को तो शीशे का (दिखावे का) बना लिया है, पर अपने दिलों को पत्थर का कर लिया है।हम भूल गए हैं कि अगर दिल कोमल और उपजाऊ न रहा, तो हम दूसरों को जो ‘पत्थर’ मार रहे हैं, उनकी चोट एक दिन हमारे अपने शीशे के वजूद को भी चकनाचूर कर देगी।

वापसी का रास्ता ही भूल गए
सवाल यह है कि जो दिल कभी उपजाऊ था, वह इतना कड़क कैसे हो गया? क्या ‘दौलत’ की चाहत इतनी बड़ी हो गई कि हमने अपनी ‘इंसानियत’ की नमी ही खो दी?
हमें फिर से उस ‘मिट्टी की सोंधी महक’ की ओर लौटना होगा। हमें अपने दिल की ज़मीन को फिर से जोतना होगा ताकि उसमें नफरत के पत्थर नहीं, बल्कि मुहब्बत के पौधे उग सकें। क्योंकि पत्थर बनकर हम दुनिया जीत तो सकते हैं, पर उसमें रह नहीं सकते।

“सीने में धड़कन नहीं, सिक्कों की खनक पाल बैठे हैं; हम मिट्टी के पुतले थे, मगर पत्थर से अब दिल लाल कर बैठे हैं।”

स्वास्थ्य मंत्रालय :-दवाओं पर अब क्यूआर कोड से होगी निगरानी, नकली दवाओं पर लगेगी लगाम

नई दिल्ली 25 जून 2026

केंद्र सरकार ने दवा उद्योग जगत को तैयारी का समय देते हुए इन नियमों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का निर्णय लिया है। टीकों, कैंसर रोधी तथा मादक एवं मनोरोग संबंधी दवाओं के लिए यह व्यवस्था 1 जुलाई 2027 से लागू होगी, जबकि एंटीबायोटिक दवाओं पर क्यूआर कोड अनिवार्यता 1 जुलाई 2028 से प्रभावी होगी।

केंद्र सरकार ने दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में संशोधन करते हुए कई महत्वपूर्ण दवाओं को क्यूआर कोड आधारित ट्रैकिंग व्यवस्था के दायरे में शामिल किया है। इसके तहत अब टीके, एंटीबायोटिक (रोगाणुरोधी), कैंसर रोधी दवाएं तथा मादक एवं मनोरोग संबंधी दवाओं पर क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य होगा।

नई व्यवस्था के अनुसार दवा निर्माताओं को दवा की पैकेजिंग पर बारकोड या क्यूआर कोड अंकित करना होगा। मोबाइल या अन्य सॉफ्टवेयर की मदद से इस क्यूआर कोड को स्कैन कर दवा की वास्तविकता और उसके निर्माण संबंधी जानकारी की जांच की जा सकेगी।

क्यूआर कोड में दवा का नाम, निर्माता का नाम-पता, बैच नंबर, निर्माण और समाप्ति तिथि, लाइसेंस नंबर सहित अन्य आवश्यक जानकारियां उपलब्ध रहेंगी।

सरकार का कहना है कि इस कदम से दवाओं की पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी और नकली या घटिया दवाओं की पहचान आसान होगी। इससे मरीजों को सुरक्षित और प्रमाणित दवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

साथ ही एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग और जीवाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) जैसी बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में भी सहायता मिलेगी।

गौरतलब है कि अभी तक यह व्यवस्था केवल देश के शीर्ष 300 दवा ब्रांडों तक सीमित थी, लेकिन नए संशोधन के बाद इसका दायरा काफी बढ़ा दिया गया है।

सरकार को उम्मीद है कि इससे बाजार में नकली दवाओं की बिक्री पर प्रभावी रोक लगेगी और मादक दवाओं की निगरानी भी मजबूत होगी, जिससे “नशा मुक्त भारत” अभियान को बल मिलेगा।

आजीविका के अवसर और पर्यटन प्रगति की ओर बढ़ता भारत

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दिल्ली 25 जून 2026 —

देश के लिए अब पर्यटन केवल यात्रा का साधन नहीं रह गया, यह आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन और सांस्कृतिक आदान-प्रेषण का प्रमुख इंजन बनकर उभरा है। पिछले दशक में प्रभावशाली नीतिगत पहलों और बुनियादी ढांचे के निवेश के चलते—स्वदेश दर्शन, प्रसाद और स्वदेश दर्शन 2.0 समेत—पर्यटन ने क्षेत्रीय निवेश, स्थानीय उद्यमिता और समावेशी विकास को नया आयाम दिया है।

वर्ष 2014 से 2025 तक दर्ज किए गए लाखों अंतर्राष्ट्रीय आगमन और विदेशी पर्यटक देश की अर्थव्यवस्था में प्रत्यक्ष योगदान के साथ होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और आतिथ्य क्षेत्रों के लिये रोजगार के व्यापक अवसर पैदा कर रहे हैं।

सरकार की रोड, रेल और हवाई कनेक्टिविटी सुधार, डिजिटल पहलें जैसे ई-पर्यटक वीजा और प्लेटफॉर्म-आधारित पंजीकरण व्यवस्था, तथा लक्षित गंतव्य विकास ने पर्यटन को “विकसित भारत@2047” के राष्ट्रीय विजन का सहायक स्तंभ बनाया है।

साथ ही, ओवरटूरिज्म से निपटने और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिये ट्रैवल फॉर लाइफ, चुनौती-आधारित गंतव्य विकास तथा इको- और आध्यात्मिक पर्यटन परियोजनाएं उभरते और कम-प्रचलित स्थलों में निवेश आकर्षित कर रही हैं।

मामल्लापुरम जैसे वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त गंतव्य और प्रसाद के माध्यम से किए गए तीर्थस्थल आधुनिकीकरण ने दर्शाया है कि जिम्मेदार प्रबंधन से सांस्कृतिक संरक्षण और स्थानीय आजीविका एक साथ सुधर सकती हैं, जिससे पर्यटन भारत के दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक पुनर्निर्माण में निर्णायक योगदान देने लगा है।

पर्यटन से व्यक्तियों, समाज और राष्ट्र को व्यापक और कई-आयामी लाभ मिलते हैं: व्यक्तिगत स्तर पर यह लोगों को आय के नए स्रोत, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता देता है—होटल, गाइडिंग, हस्तशिल्प और ट्रांसपोर्ट जैसे छोटे उद्यम जीविकोपार्जन के अवसर पैदा करते हैं; सामाजिक स्तर पर यह स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और हस्तशिल्प को संरक्षित और पुनर्जीवित करता है।