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मिट्टी की गंध और बारिश की फुहार से उपजा विचार ,आषाढ़ के दिन और सावन का इंतजार

आध्यात्म डेस्क – 06 जुलाई 2026

घाट के पत्थर और ‘प्यास’ का दर्शन
“अगर जीवन में बिना प्यास के रहना है तो घाट के पत्थर बन जाओ।”

वैज्ञानिक व दार्शनिक राय पर आधारित यह लेख पंक्ति बहुत गहरा है क्योंकि जहां पानी है वहां गहराई तो होगी ही।

विज्ञान की भाषा में कहें तो ठोस (पत्थर) के भीतर अणु इतने मजबूती से बंधे होते हैं कि वे खुद में बदलाव नहीं चाहते, वे स्थिर हैं, तटस्थ हैं। लेकिन नदी का पानी (द्रव) निरंतर गतिशील है, उसमें जीवन है, प्रवाह है।

अगर इंसान बिना किसी इच्छा, बिना किसी ‘प्यास’ (जिज्ञासा या भावना) के रहेगा, तो वह जड़ यानी पत्थर जैसा हो जाएगा। जीवन का आनंद तो नदी की तरह बहने में और वर्षा की बूंदों को महसूस करने में है।

ठोस और द्रव का संबंध: बारिश, शिव और शक्ति
“सृष्टि का निर्माण तीन द्रव्यों से हुआ है… जिसमें ठोस और द्रव का संबंध बहुत प्रबल है।”

वैज्ञानिक व दार्शनिक राय:
विज्ञान भी मानता है कि पृथ्वी पर जीवन तभी संभव हुआ जब ‘ठोस’ (धरती/चट्टान) और ‘द्रव’ (पानी) का मिलन हुआ।

शक्ति (सृजन):
बारिश का पानी ऊर्जा और जीवन का प्रतीक है, जो सूखी धरती को हरा-भरा करता है। यह ‘शक्ति’ है।
शिव (संतुलन):
अगर केवल बारिश ही होती रहे, तो प्रलय आ जाएगी। लेकिन धरती के पहाड़ और चट्टानें (ठोस) उस वेग को संभालती हैं, नदियों को रास्ता देती हैं। यह ‘शिव’ यानी संतुलन है।

विज्ञान
विज्ञान की नजर से देखें तो यह जल चक्र (Water Cycle) और पारिस्थितिक संतुलन (Ecological Balance) है, जिसे हमने बहुत ही सुंदर तरीके से ‘शिव-शक्ति’ का संतुलन कहा है।

अब बात करते है गैस की,जिसके लिए रामायण में तुलसीदास ने लंका दहन हनुमान प्रकरण में कहा है ‘चले मरुत उनचास’ और गैस रूप ” 49 गैस.. इसकी खोज धर्म ने कर ही लिया था।”

वैज्ञानिक व दार्शनिक राय:
वेदों और रामायण में वर्णित ’49 मरुत’ (हवा के प्रकार) और आज के विज्ञान में बहुत समानता है। विज्ञान कहता है कि हमारे वायुमंडल में केवल एक हवा नहीं है, बल्कि नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड जैसी कई गैसों की परतें हैं, और गति के आधार पर चक्रवात, व्यापारिक पवनें (Trade Winds), और जेट स्ट्रीम जैसी विभिन्न हवाएं चलती हैं।

सनातन बोध ने इसे ‘मरुत गण’ के रूप में बहुत पहले पहचान लिया था।

अब गैस है तो उसकी दुनिया भी होगी उसका एक प्रबल स्त्रोत भी होगा,
सूर्य केवल गैसों का लावा है?
“सूर्य पर धरातल नहीं होगी केवल गैसों का लावा हो सकता है…”मेरे विचार

वैज्ञानिक राय:
यह विचार वैज्ञानिक रूप से बिल्कुल सटीक है! विज्ञान ने यह प्रमाणित किया है कि सूर्य पर कोई ठोस धरातल (जमीन) नहीं है।
सूर्य मुख्य रूप से हाइड्रोजन (लगभग 74%) और हीलियम (लगभग 24%) गैसों से बना है।
अत्यधिक तापमान और गुरुत्वाकर्षण के कारण वहाँ ये गैसें सामान्य रूप में नहीं हैं, बल्कि वे ‘प्लाज्मा’ (गैसों का अत्यंत गर्म, आवेशित और खौलता हुआ रूप, जिसे हम गैसों का लावा कह रहे हैं) के रूप में हैं।

तो यह धारणा विज्ञान के बिल्कुल अनुकूल है।मिट्टी की गंध और वर्षा की फुहार से उपजा विचार ,आषाढ़ के दिन और बारिश की रिमझिम का एक अनूठा अहसास से है, जो धरती के कण-कण को तृप्त करता है।


पुरानी रंजिश में वारदात:घर में घुसकर युवक पर प्राणघातक हमला करने वाले दो आरोपी गिरफ्तार

बेमेतरा छत्तीसगढ़ – 05 जुलाई 2026

विवेचना के दौरान सीन ऑफ क्राइम यूनिट का भी सहयोग लिया गया।

बेमेतरा जिले के खम्हरिया थाना क्षेत्र में घर में घुसकर एक युवक पर हॉकी स्टिक और धारदार हथियार से जानलेवा हमला करने के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों समेत एक महिला आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर न्यायालय में पेश किया है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वारदात को पुरानी रंजिश और आपसी विवाद के चलते अंजाम दिया गया था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त हॉकी स्टिक सहित अन्य साक्ष्य भी बरामद किए हैं।

पुलिस के अनुसार ग्राम कोपेडबरी निवासी मालिक राम साहू ने खम्हरिया थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 2 जुलाई की रात करीब 1.20 बजे उनके पास फोन आया, जिसमें बताया गया कि उनके भाई मनोहर साहू के घर में दो अज्ञात व्यक्ति घुस गए हैं और हॉकी स्टिक से उनके सिर पर प्राणघातक हमला कर दिया है।

सूचना मिलने पर परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे तथा गंभीर रूप से घायल मनोहर साहू को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।पीड़ित की शिकायत पर खम्हरिया पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस 109 (1), 331(2), 3(5) BNS पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया।

घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल अवगत कराया गया। पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) रामकृष्ण साहू के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश यादव और एसडीओपी भूषण एक्का के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी उपनिरीक्षक ओंकार साहू के नेतृत्व में विशेष टीम गठित कर आरोपियों की तलाश शुरू की गई।

जांच के दौरान पुलिस ने संदेह के आधार पर योगेंद्र चौहान उर्फ बादल और कन्हैया लाल यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में दोनों ने अपना जुर्म स्वीकार करते हुए बताया कि पुरानी रंजिश और निजी विवाद के चलते उन्होंने मनोहर साहू पर हमला किया था। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त हॉकी स्टिक और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए।
पुलिस ने इस मामले में योगेंद्र चौहान उर्फ बादल (24 वर्ष) और कन्हैया लाल यादव (33 वर्ष), दोनों निवासी ग्राम कोसमंदा, थाना पिपरिया, जिला कबीरधाम, के साथ एक महिला आरोपी को भी गिरफ्तार किया है।

तीनों आरोपियों को रविवार को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर न्यायालय में पेश किया गया।

इस कार्रवाई में थाना प्रभारी उपनिरीक्षक ओंकार साहू, प्रशिक्षु उपनिरीक्षक सुरेश चौहान, आरक्षक अशरफी खान, बलदेव निषाद, मुकेश चंद्रवंशी, अनिल सोनकर, महिला आरक्षक सुशीला ध्रुव सहित खम्हरिया थाना स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना अभी जारी है और आवश्यकतानुसार आगे भी कार्रवाई की जाएगी।

नया लाइफ़ स्टाइल ट्रेंड, स्क्रीन से दूरी बनाकर लोग तलाश रहे मानसिक सुकून

डिजिटल_डेस्क 05/07/2026

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि लगातार नोटिफिकेशन, रील्स और ऑनलाइन कंटेंट दिमाग को हर समय सक्रिय बनाए रखते हैं। इससे मस्तिष्क को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता और व्यक्ति मानसिक रूप से थका हुआ महसूस करता है। स्क्रीन से कुछ समय की दूरी लेने पर लोगों की एकाग्रता, नींद की गुणवत्ता और पारिवारिक संवाद में सकारात्मक सुधार देखा गया है। कई शोध भी संकेत देते हैं कि नियंत्रित स्क्रीन उपयोग मानसिक स्वास्थ्य और ध्यान क्षमता के लिए लाभदायक हो सकता है।

सुबह उठते ही मोबाइल देखना, दिनभर सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करना और रात को फोन हाथ में लेकर सो जाना आज करोड़ों लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। लेकिन अब इसी आदत से छुटकारा पाने के लिए बड़ी संख्या में लोग ‘डिजिटल डिटॉक्स’ को अपना रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ता स्क्रीन टाइम न केवल आंखों और नींद को प्रभावित कर रहा है, बल्कि मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याओं को भी बढ़ा रहा है। यही वजह है कि युवाओं से लेकर नौकरीपेशा लोगों तक में डिजिटल डिटॉक्स का चलन तेजी से बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल डिटॉक्स का मतलब तकनीक से हमेशा के लिए दूरी बनाना नहीं, बल्कि मोबाइल, लैपटॉप और सोशल मीडिया के उपयोग पर सीमाएं तय करना है। कई लोग सप्ताह में एक दिन सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रहने, भोजन के समय मोबाइल का उपयोग बंद करने या सोने से एक घंटे पहले स्क्रीन बंद करने जैसे छोटे-छोटे नियम अपनाकर शुरुआत कर रहे हैं। हाल के महीनों में डिजिटल वेलबीइंग और स्क्रीन टाइम कम करने को लेकर जागरूकता में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।

दिलचस्प बात यह है कि डिजिटल डिटॉक्स अब केवल व्यक्तिगत आदत नहीं रह गया है। कुछ संस्थान, स्कूल और समुदाय भी समय-समय पर ‘नो स्क्रीन आवर’ जैसी पहल शुरू कर रहे हैं ताकि लोग परिवार और समाज के साथ अधिक समय बिता सकें। विशेषज्ञ मानते हैं कि तकनीक आज की जरूरत है, लेकिन उसका संतुलित उपयोग ही बेहतर जीवनशैली की कुंजी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दिन में कम से कम 30 से 60 मिनट ऐसा समय जरूर निकालें जब मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरण पूरी तरह बंद हों। इस दौरान टहलना, किताब पढ़ना, योग करना, परिवार के साथ बातचीत करना या किसी रचनात्मक गतिविधि में समय बिताना मानसिक स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभदायक साबित हो सकता है। बदलती जीवनशैली के बीच डिजिटल डिटॉक्स अब केवल एक ट्रेंड नहीं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन की नई जरूरत के रूप में उभर रहा है।

शिव_मास: सावन 2026 विशेष–भगवान शिव की आराधना का पवित्र महीना शुरू होने को तैयार

धार्मिक डेस्क 05 जुलाई 2026

सावन केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और प्रकृति के साथ जुड़ने का अवसर भी है। श्रद्धा, अनुशासन और सद्भाव के साथ मनाया गया यह पावन महीना व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मक सोच का संचार करने वाला माना जाता है।

भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र माने जाने वाले सावन मास का इंतजार अब समाप्ति की ओर है। देशभर के शिव मंदिरों में तैयारियां तेज हो गई हैं। मंदिरों की साफ-सफाई, विशेष सजावट और जलाभिषेक की व्यवस्थाएं शुरू हो चुकी हैं। श्रद्धालु भी व्रत, रुद्राभिषेक और कांवड़ यात्रा की तैयारियों में जुट गए हैं।

धार्मिक मान्यता है कि सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इस पूरे मास में सच्चे मन से की गई पूजा-अर्चना से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। इसके बाद देवताओं ने उन्हें शीतल रखने के लिए जल अर्पित किया। तभी से सावन में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है।

धार्मिक विद्वानों का कहना है कि जलाभिषेक केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति, जल और जीवन के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक भी है।

धार्मिक आधार पर सावन का महीना

आध्यात्मिक साधना, आत्मसंयम और सकारात्मक ऊर्जा का समय माना जाता है। इस दौरान भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का नियमित जाप मानसिक शांति और आत्मबल प्रदान करता है।

मान्यता है कि जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा, शनि या राहु से जुड़े दोष हों, वे सावन में शिव उपासना, रुद्राभिषेक और दान-पुण्य के माध्यम से शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि ज्योतिषीय उपायों को आस्था का विषय माना जाता है और इन्हें व्यक्तिगत विश्वास के आधार पर ही अपनाना चाहिए।

सावन के सोमवार का विशेष महत्व बताया गया है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं। अविवाहित युवक-युवतियां योग्य जीवनसाथी की कामना से व्रत रखते हैं, जबकि विवाहित महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और पति की दीर्घायु के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं।

मंदिरों में रुद्राभिषेक, शिव महापुराण कथा, भजन-कीर्तन और भंडारों का आयोजन भी किया जाता है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।
धर्माचार्यों का कहना है कि सावन का वास्तविक संदेश केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। भगवान शिव का जीवन सादगी, करुणा, समभाव, संयम और प्रकृति संरक्षण की प्रेरणा देता है।

इसलिए इस महीने में क्रोध, अहंकार और नकारात्मक विचारों से दूर रहकर सेवा, दान, स्वच्छता, वृक्षारोपण और जरूरतमंदों की सहायता जैसे कार्य भी उतने ही महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

देश के प्रमुख शिवधामों—, , , और में भी सावन को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। अनुमान है कि इस वर्ष भी लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक और दर्शन के लिए इन मंदिरों में पहुंचेंगे।


बारिश- मानसून में बढ़ जाता है इन बीमारियों का खतरा, समय रहते बरतें सावधानी तो रहेंगे सुरक्षित

हेल्थ डेस्क 05 जुलाई 2026

विशेषज्ञों के अनुसार मानसून में सबसे अधिक खतरा मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का रहता है। बारिश का पानी घरों की छतों, गमलों, कूलर, टायरों और अन्य खुले बर्तनों में जमा हो जाता है, जो मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है। डेंगू और चिकनगुनिया फैलाने वाले एडीज मच्छर साफ पानी में पनपते हैं, जबकि मलेरिया फैलाने वाले एनोफिलीज मच्छर गंदे पानी में भी विकसित हो सकते हैं।

देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून सक्रिय हो चुका है। बारिश ने जहां लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी है, वहीं यह मौसम कई संक्रामक और जलजनित बीमारियों के फैलने का कारण भी बनता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, टाइफाइड, वायरल फीवर और फूड पॉइजनिंग जैसी बीमारियों को न्योता दे सकती है। ऐसे में व्यक्तिगत स्वच्छता, खानपान और आसपास के वातावरण की सफाई पर विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी है।

इसलिए सप्ताह में कम से कम एक बार कूलर और पानी की टंकियों की सफाई करना तथा आसपास पानी जमा नहीं होने देना सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।

मानसून के दौरान दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन के कारण पेट संबंधी बीमारियों के मामले भी तेजी से बढ़ते हैं। दस्त, उल्टी, टाइफाइड, हैजा और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं अक्सर बाहर का खुला भोजन या दूषित पानी पीने से होती हैं।

डॉक्टरों की सलाह है कि इस मौसम में केवल उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही पीएं और ताजा तथा गर्म भोजन का सेवन करें। सड़क किनारे खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचना भी संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि बारिश के मौसम में वायरल संक्रमण भी तेजी से फैलता है। बदलते तापमान और बढ़ी हुई नमी के कारण सर्दी, खांसी, बुखार, गले में संक्रमण और फ्लू के मामले बढ़ जाते हैं। कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों, बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

यदि तेज बुखार, लगातार उल्टी, सांस लेने में तकलीफ या शरीर पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून में स्वस्थ रहने के लिए नियमित हाथ धोना, घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखना, पर्याप्त नींद लेना और संतुलित आहार का सेवन करना बेहद जरूरी है।

विटामिन-सी युक्त फल, हरी सब्जियां और पर्याप्त मात्रा में पानी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। बारिश में भीगने के बाद गीले कपड़े तुरंत बदलना और शरीर को सूखा रखना भी संक्रमण से बचाव के लिए आवश्यक है।

स्वास्थ्य विभाग भी हर वर्ष मानसून के दौरान लोगों से सतर्क रहने की अपील करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश मौसमी बीमारियों से बचाव केवल दवाइयों से नहीं, बल्कि जागरूकता और सावधानी से संभव है।

यदि समय रहते साफ-सफाई, सुरक्षित खानपान और मच्छरों की रोकथाम पर ध्यान दिया जाए तो मानसून का आनंद बिना बीमारी के डर के लिया जा सकता है।

रेत माफिया शिकंजा:धमतरी में बड़ा प्रहार: 8 ट्रैक्टर जब्त, कोलियारी मार्ग पर अवैध परिवहन का भंडाफोड़

रायपुर – 04 जुलाई 2026

धमतरी में ‘सख्त’ प्रशासन: रेत माफिया के 8 ट्रैक्टर जब्त, कोलियारी मार्ग पर चला घेराबंदी अभियान।रेत माफिया पर कलेक्टर का डंडा। धमतरी में बिना रॉयल्टी के दौड़ रहे 8 ट्रैक्टर जब्त।

मिली जानकारी के अनुसार, प्रशासन को लगातार कोलियारी-धमतरी मार्ग पर अवैध रेत परिवहन की शिकायतें मिल रही थीं। इस पर त्वरित एक्शन लेते हुए राजस्व और खनिज विभाग की एक संयुक्त जांच टीम का गठन किया गया।
टीम ने जब मार्ग पर घेराबंदी कर रेत ले जा रहे ट्रैक्टरों को रोका और उनसे खनिज परिवहन से संबंधित वैध दस्तावेज यानी रॉयल्टी पर्ची या अनुमति की मांग की, तो वाहन चालक कोई भी संतोषजनक कागजात पेश नहीं कर सके।
वैध दस्तावेज नहीं मिलने पर टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी 8 ट्रैक्टरों को जब्त कर लिया। इन सभी वाहनों को सुरक्षित अभिरक्षा में रखवा दिया गया है और खनिज अधिनियम के तहत अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

धमतरी जिले में अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन करने वाले माफियाओं के खिलाफ जिला प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है।

कलेक्टर के कड़े निर्देश पर आज राजस्व और खनिज विभाग की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से रेत का परिवहन कर रहे 8 ट्रैक्टरों को रंगे हाथों जब्त किया है। इस अचानक हुई कार्रवाई से रेत माफिया में हड़कंप मच गया है।
प्रशासन की चेतावनी: आगे भी जारी रहेगा अभियान
जिला प्रशासन ने इस कार्रवाई के बाद रेत और अन्य खनिज माफियाओं को कड़ा संदेश दिया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन या भंडारण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह अभियान आगे भी इसी तरह बिना रुके जारी रहेगा और पकड़े जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने वाहन संचालकों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और केवल वैध अनुमति के साथ ही खनिजों का परिवहन करें।

वन्यजीव शिकार: कवर्धा में चीतल के शिकारी गिरफ्तार, 7 आरोपी जेल भेजे गए

रायपुर _ 04 जुलाई 2026

मुखबिर की सूचना पर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, बोड़ला के जंगल में जाल बिछाकर किया था शिकार।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार वन, वन्यजीव और जैव विविधता के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा अवैध शिकार के विरुद्ध विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।

इन अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में कवर्धा परियोजना मंडल ने नर चीतल के अवैध शिकार के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने के बाद जेल भेज दिया गया।

मुखबिर की सूचना पर योजनाबद्ध कार्रवाई
वन विकास निगम के बोड़ला परियोजना परिक्षेत्र के भलपहरी बीट स्थित जंगल में शिकारियों ने जाल बिछाकर लगभग तीन वर्ष के नर चीतल का शिकार किया।

इसके बाद उसके मांस को पकाकर आपस में बांटने की तैयारी की जा रही थी। मुखबिर से मिली सूचना पर वन विकास निगम की टीम ने तत्काल योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी कर दबिश दी और सभी सात आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

शिकार में प्रयुक्त सामग्री और चीतल का मांस जब्त
कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से लगभग 500 ग्राम पका हुआ चीतल का मांस, नायलॉन की रस्सी, तीन कुल्हाडि़यां, स्टील के तार एवं लकड़ी से बने फंदे तथा खून से सना थैला बरामद कर जब्त किया गया।

आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की गई।

सघन निगरानी और गश्त से मिल रही सफलता
वन विभाग और वन विकास निगम द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त, सूचना तंत्र को मजबूत करने तथा विशेष निगरानी अभियान चलाने के कारण वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो रहा है।

वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन विभाग आधुनिक निगरानी व्यवस्था, नियमित गश्त और प्रभावी सूचना तंत्र के माध्यम से वन्यजीव अपराधों पर अंकुश लगाने का कार्य कर रहा है।

सरकार का स्पष्ट संदेश है कि वन्यजीवों का अवैध शिकार करने या प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। 

सरकार की अपील वन्यजीवों के संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाएं।अवैध शिकार, वन अपराध की जानकारी पर तत्काल सूचनावन दें।


धमतरी में अल नीनो से निपटने की तैयारी, कृषक मित्रों को मिली कम बारिश में खेती की ट्रेनिंग

धमतरी/छत्तीसगढ़ 04 जुलाई 2026

वैज्ञानिक खेती, सीधी बुवाई और फसल बीमा से सुरक्षित होगी किसानों की उपज, गांव-गांव फैलेगा जागरूकता का संदेश ।

जलवायु परिवर्तन और ‘सुपर अल नीनो’ के कारण संभावित अल्प एवं अनियमित वर्षा की चुनौती से निपटने के लिए शुक्रवार को धमतरी के कृषि विभाग में एक जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

एक्सटेंशन रिफॉर्म्स ‘आत्मा’ योजना के तहत आयोजित इस विशेष सत्र में जिलेभर के कृषक मित्रों को आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक खेती और फसल बीमा के प्रति जागरूक किया गया, ताकि वे इस ज्ञान को गांव-गांव तक पहुंचा सकें।

विपरीत मौसम में भी बेहतर प्रबंधन: विशेषज्ञों की सलाह

प्रशिक्षण में कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय अधिकारियों ने कम वर्षा की स्थिति में फसलों को बचाने के लिए कई महत्वपूर्ण रणनीतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कृषक मित्रों को प्रेरित किया गया कि वे अपने क्षेत्रों में जाकर किसानों को समय रहते जागरूक करें।

     वैज्ञानिकों ने विपरीत मौसम की परिस्थितियों से निपटने के लिए पारंपरिक फसलों के स्थान पर कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों, दलहनी (दालें) और तिलहनी फसलों को प्राथमिकता देने की सलाह दी।

पानी की बचत के लिए वैज्ञानिक तरीके से ‘डायरेक्ट सीडेड राइस’ (धान की सीधी बुवाई) तकनीक अपनाने पर जोर दिया गया। इसी तरह खेतों में उपलब्ध पानी का सही उपयोग, संतुलित पोषण प्रबंधन और मिट्टी की नमी को लंबे समय तक बनाए रखने के व्यावहारिक उपाय बताए गए।

      प्राकृतिक आपदाओं और सूखे के जोखिम से किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। योजना के जिला प्रबंधक ने धान, उड़द, मूंग, कोदो, कुटकी और रागी जैसी अधिसूचित फसलों की बीमा प्रक्रिया, पात्रता और अंतिम तिथि की विस्तृत जानकारी दी।

उन्होंने कृषक मित्रों से अपील की कि वे अंतिम तिथि से पहले अधिक से अधिक किसानों का फसल बीमा सुनिश्चित कराएं ताकि किसी भी नुकसान की भरपाई हो सके।

उत्पादन और आय बढ़ाना मुख्य लक्ष्य
          कार्यक्रम के समापन पर अधिकारियों ने कृषक मित्रों का आह्वान किया कि वे इस प्रशिक्षण में सीखी गई आधुनिक कृषि तकनीकों और शासकीय योजनाओं की जानकारी को ग्रामीण स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रसारित करें। जब किसान वैज्ञानिक सलाह के अनुरूप खेती करेंगे, तभी विपरीत मौसम में भी जिले का कृषि उत्पादन और किसानों की आय सुरक्षित रह सकेगी।

एक श्रमिक ‘मानसून वारियर’ की कर्तव्यनिष्ठा को सलाम: नीतू कोठारी

बेमेतरा/छत्तीसगढ़ – 04 जुलाई 2026

खबर बेमेतरा से है, जहाँ भाजपा महिला मोर्चा जिला प्रभारी (खैरागढ़-छुई खदान-गंडई) नीतू कोठारी ने आज नगर में हुई मूसलाधार बारिश के बीच संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा की एक अनूठी मिसाल पेश की।

आज नगर में तेज बारिश के कारण कई वार्डों में भारी जल भराव की स्थिति निर्मित हो गई थी। ऐसे मुश्किल समय में नीतू कोठारी ने खुद जमीन पर उतरकर मोर्चा संभाला।

उन्होंने वार्ड पार्षद की महती भूमिका निभाते हुए नगर पालिका के सफाई मित्र पीताम्बर के साथ खुद भी बारिश में भीगते हुए बंद नालियों को साफ कराया और जल निकासी का रास्ता साफ किया।

“संकट के समय केवल घरों में बैठकर निर्देश देने के बजाय, जमीन पर उतरकर अपनों के साथ खड़े होना ही सच्ची जनसेवा है।”

संकट में बने संकटमोचक: सराहनीय प्रयास
इस आपदा प्रबंधन के दौरान स्थानीय निवासियों ने भी दोनों के इस जज्बे की खुलकर तारीफ की। जहाँ अमूमन लोग भारी बारिश में घरों से बाहर निकलने से बचते हैं, वहीं घुटनों तक भरे पानी के बीच सफाई मित्र और जनप्रनिधि को एक साथ काम करते देख वार्ड वासियों को बड़ी राहत मिली।

समय रहते नालियों की सफाई होने से गंदा पानी लोगों के घरों में घुसने से बच गया, जिससे एक बड़ा नुकसान होने से टल गया।

नीतू कोठारी ने इस पूरी सफलता का सारा श्रेय नगर पालिका के श्रमिक को देते हुए कहा, “पीताम्बर भाई की कड़ी मेहनत और ईमानदारी की वजह से ही आज वार्ड के लोग सुरक्षित रहे। इतनी तेज बारिश और विपरीत परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य से पीछे न हटने वाले हमारे कर्मवीर भाई पीताम्बर का मैं हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ।”

उन्होंने श्रमिक पीताम्बर को “मानसून वारियर” का दर्जा देते हुए भावुक शब्दों में कहा, “आप जैसे कर्मवीर ही हमारे समाज की असली ताकत हैं। जिस तरह संकट काल में कोरोना योद्धाओं ने देश को बचाया था, उसी तरह आज इस भीषण बारिश में आप हमारे असली ‘मानसून योद्धा’ बनकर सामने आए हैं।”

ना सूर्योदय, ना सूर्यास्त… बस आदमी कहीं शिकस्त, तो कहीं परास्त!

डिजिटल डेस्क -04 जुलाई 2026

“शुरुआत में ही एक बात साफ़ कर देना ज़रूरी है—यहाँ किसी ‘मैं’ का अहंकार नहीं है, बल्कि यह इस दौर का देखा और भोगा हुआ कड़वा सच है। लिखने वाले और भी हैं, इस दौर में बुद्धिजीवियों और महाज्ञानियों की कोई कमी नहीं है, जो किताबी बातें करते हैं, तकनीकी उलझनों को सुलझाते हैं या केवल शब्दों को सजाने-संवारने की कलाबाज़ी दिखाते हैं। मुमकिन है कि वे समाज की सिर्फ ऊपरी सतह को देख पाते हों। लेकिन ईमानदारी से बात कहने वाले, जो गहरे, बेबाक और ज़मीन से जुड़े विचार लेकर आ सकें… ऐसे लोग तो आज के दौर में बहुत ही कम, उंगलियों पर गिनने लायक बचे हैं।”

अंधेरे का भ्रम और उजाले की हकीकत

किताबों में लिखा है और ज़माने ने देखा है कि जिसे हम ‘अंधेरा’ कहते हैं, उसका अपना कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता। अंधेरा केवल एक परिस्थितिजन्य घटना है, जबकि उजाला ही एकमात्र वास्तविकता है। सच तो यह है कि जहाँ उजाले का अभाव होता है, वहीं अंधेरा पैर पसारता है। जहाँ उजाले का प्रभाव होगा, वहाँ अंधकार टिक ही नहीं सकता। इसलिए जीवन में नकारात्मकता या निराशा से डरने की ज़रूरत नहीं है, वह केवल सकारात्मक सोच की कमी है। अपने भीतर उम्मीद का दीया जलाते ही भ्रम का हर अंधेरा खुद-ब-खुद गायब हो जाता है।

चरैवेति: सुख-दुख से परे निरंतर बहती जिंदगी

सच्चा राही न तो अंधेरे की चिंता करता है और न ही प्रकाश के वशीभूत होकर अपनी रफ्तार धीमी करता है। उसके लिए अनुकूल और प्रतिकूल परिस्थितियाँ मायने नहीं रखतीं। सुख मिले या दुख, वह तो बस चलता है, चलता है और चलता जाता है। यही जिंदगी का असली नाम है। परिस्थितियों के गुलाम बनने के बजाय कर्मयोगी की तरह हर हाल में आगे बढ़ते रहना ही इंसान को उसकी मंज़िल तक पहुँचाता है। जिंदगी ठहरने का नहीं, बल्कि निरंतर चलते रहने का नाम है।

गुलाब, कांटे और सियासत: संगति का कड़वा सच

दुनिया कहती आ रही है कि संगति का असर होता है, लेकिन ज़माने का तजुर्बा कुछ और ही गवाही देता है। एक ही डाल पर बबूल या गुलाब के साथ कांटे रात-दिन रहते हैं, पर कांटों को कभी गुलाब सा महकते नहीं देखा गया। कांटा चाहे बबूल का हो या गुलाब का, चुभने पर दर्द एक सा ही होता है। इस कांटों के जंजाल से दामन बचाकर निकल जाना ही समझदारी है। दुनिया की इस बनावटी अच्छाई यानी ‘फूलों की सियासत’ से कोई बेगाना नहीं है। इस दोगलेपन को पहचानकर अपनी मौलिकता बचाना ही असल सच है।

समय की उफनती नदी और गर्मियों का सन्नाटा

समय की धारा बड़ी तेज़ और निर्मम होती है। जिन नदियों में बारिश का पानी समाता नहीं और वे अहंकार में उफनती हुई अपनी मर्यादा भूल जाती हैं, वही नदियां गर्मियों के आते ही सूखी नज़र आती हैं और पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसती हैं। वक्त का यह चक्र हर किसी पर लागू होता है। कामयाबी या अच्छे दिनों के अति-उत्साह में उफनने के बजाय इंसान को हमेशा मर्यादित और ज़मीन से जुड़ा रहना चाहिए, क्योंकि समय बदलते देर नहीं लगती।

मरुस्थल के टीले जैसा: पैसा, रुतबा जैसे रेत की चाल

पैसा और रुतबा इस मरुस्थल में रेत के समान हैं। जब समय की हवाएं चलती हैं, तो रेत के टीले कभी इस तरफ बनते हैं तो कभी उस तरफ। हवा का एक झोंका बड़े से बड़े टीले को तोड़ देता है और छोटे टीले को बड़ा बना देता है। धन, पद और प्रतिष्ठा की नश्वर चाल को देखना हो, तो मरुस्थल की इस रेत को देख लीजिए। आज जो शिखर पर है, कल वह शून्य पर हो सकता है। इस अस्थायी रुतबे पर अहंकार करना नासमझी के सिवाय कुछ नहीं है।