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रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, जगन्नाथ रथ यात्रा और ओणम के लिए रेलवे 100 विशेष ट्रेनें चलाएंगी

न्यूज डेस्क_08 जुलाई 2026

देश में आगामी जगन्नाथ रथ यात्रा और ओणम पर्व के दौरान यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 100 विशेष ट्रेनों के संचालन की घोषणा की है।

जगन्नाथ रथ यात्रा और ओणम पर्व विशेष पर रेलों की संख्या में इजाफा।

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को घोषणा की कि भारतीय रेलवे ओडिशा में भगवान जगन्नाथ के सालाना रथ उत्सव के लिए 300 से ज़्यादा और केरल में ओणम त्योहार के दौरान 100 से ज़्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाएगी।

यात्रियों की सुगम एवं सुरक्षित यात्रा

रेल मंत्री ने कहा कि त्योहारों के दौरान यात्रियों को सुगम और सुरक्षित यात्रा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भारतीय रेलवे ने यह निर्णय लिया है। इन विशेष ट्रेनों से विशेष रूप से ओडिशा में आयोजित जगन्नाथ रथ यात्रा और दक्षिण भारत में मनाए जाने वाले ओणम पर्व के दौरान यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं एवं यात्रियों को राहत मिलेगी।

यात्रियों का दबाव कम

रेल मंत्रालय के अनुसार, विशेष ट्रेनों के संचालन से नियमित ट्रेनों पर यात्रियों का दबाव कम होगा और त्योहारों के दौरान यात्रा व्यवस्था अधिक सुचारु रहेगी। ट्रेनों के रूट, समय-सारिणी और बुकिंग से जुड़ी जानकारी जल्द जारी की जाएगी।

धार्मिक यात्रियों की सुविधा और संकट को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है जिससे यात्रियों की आस्था कमजोर ना हो और वे दर्शन का संतोष जनक लाभ ले पाएं।




जनजातीय कला और संस्कृति के संरक्षण के लिए ‘ट्राइबएक्स’ डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म लॉन्च

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न्यूज डेस्क 08 जुलाई 2026

जनजातीय शिक्षा को डिजिटल स्वरूप देने और भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जनजातीय कार्य मंत्रालय ने ‘ट्राइबएक्स’ (Tribex) डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया। जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) की राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान इसका उद्घाटन किया।

“ट्राइबएक्स’ देश का अपनी तरह का पहला डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो जनजातीय कला, संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान और कौशल विकास पर आधारित निःशुल्क ऑनलाइन पाठ्यक्रम उपलब्ध कराएगा। शुरुआती चरण में इस प्लेटफॉर्म पर चित्रकला, हस्तशिल्प, हथकरघा, कलाकृतियां और पारंपरिक वाद्ययंत्र जैसे विषयों पर 20 मुफ्त सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किए गए हैं। भविष्य में इनकी संख्या बढ़ाकर 100 से अधिक करने की योजना है।

इस अवसर पर जुएल ओराम ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय विरासत को संरक्षित करने, उसे वैश्विक पहचान दिलाने और पारंपरिक ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जनजातीय अनुसंधान संस्थानों तथा विश्वविद्यालयों से इस प्लेटफॉर्म का व्यापक प्रचार-प्रसार करने का आग्रह किया।

कार्यक्रम के दौरान जनजातीय कार्य मंत्रालय और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी हस्ताक्षरित किया गया। इसके तहत ‘ट्राइबएक्स’ के माध्यम से यूजीसी-मान्यता प्राप्त पांच एक-वर्षीय हाइब्रिड डिप्लोमा कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे।

मंत्रालय के अनुसार, ‘ट्राइबएक्स’ जनजातीय ज्ञान के अध्ययन, दस्तावेजीकरण और संरक्षण के लिए एक व्यापक डिजिटल मंच बनेगा, जो भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

केंद्रीय मंत्री अमित शाह : नर्मदा अवॉर्ड विवाद का ऐतिहासिक समाधान, चार राज्यों के बीच लंबित भुगतान पर हुआ समझौता

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डिजिटल डेस्क 08 जुलाई 2026

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरदार सरोवर परियोजना से विशेष रूप से मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान को सिंचाई, पेयजल और बिजली के क्षेत्र में व्यापक लाभ मिला है।

उन्होंने यह भी कहा कि पानी देश की साझा संपत्ति है और इसका लाभ अंततः देश के किसानों एवं नागरिकों को ही मिलता है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री सी आर पाटिल की उपस्थिति में आज नई दिल्ली में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। बैठक में केन्द्र एवं चारों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

केन्द्रीय गृह मंत्री की पहल पर महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच दशकों से जारी विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान हुआ।⁠चाहे किशाऊ बांध परियोजना का मुद्दा हो या राजस्थान, हरियाणा के बीच जल विवाद हो या आज का यह समझौता, ये सभी सहकारी संघवाद के स्वर्णिम उदाहरण हैं

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच नर्मदा अवॉर्ड से जुड़े वर्षों पुराने लंबित भुगतान विवाद का ऐतिहासिक समाधान हो गया। नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।

यह समझौता सरदार सरोवर परियोजना की लागत साझाकरण और लंबित देयों के अंतिम निपटारे से संबंधित है। वन-टाइम सेटलमेंट (एकमुश्त भुगतान) के माध्यम से लंबे समय से चले आ रहे वित्तीय विवाद का समाधान किया गया।

इस अवसर पर अमित शाह ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा को मजबूत करने और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार ऐतिहासिक पहल की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्यों के बीच संवाद और सहयोग बढ़ने से लंबे समय से लंबित विवादों का तेजी से समाधान संभव हो रहा है।

केंद्रीय मंत्री श्री शाह ने हाल ही में हरियाणा-राजस्थान जल विवाद के समाधान का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे समझौते सहकारी संघवाद के मजबूत उदाहरण हैं और राष्ट्रीय हित में राज्यों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ावा देते हैं।

छत्तीसगढ़ के सिंचाई जलाशयों में बढ़ा जलस्तरप्रमुख बांधों में लाइव स्टोरेज 56.63 प्रतिशत तक पहुंचा

रायपुर/छत्तीसगढ़ 07 जुलाई 2026

मानसून की निरंतर सक्रियता को देखते हुए आने वाले दिनों में जलाशयों के जलस्तर में और वृद्धि की संभावना है।

प्रदेश में मानसून की सक्रियता का असर अब जलाशयों में साफ दिखाई देने लगा है। लगातार हो रही बारिश से राज्य के प्रमुख और मध्यम सिंचाई जलाशयों में जलभराव की स्थिति में इजाफा हुआ है।

जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 12 प्रमुख जलाशयों में कुल लाइव स्टोरेज 56.63 प्रतिशत तथा 34 मध्यम जलाशयों में 42.13 प्रतिशत दर्ज किया गया है।

कुल मिलाकर राज्य के प्रमुख एवं मध्यम जलाशयों में 54.34 प्रतिशत जल भंडारण उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में काफी बेहतर है।

राज्य के प्रमुख जलाशयों में दुधावा बांध 72.74 प्रतिशत, मनियारी जलाशय 76.97 प्रतिशत, खारंग जलाशय 67.10 प्रतिशत तथा सोंढूर जलाशय 65.89 प्रतिशत क्षमता के साथ बेहतर स्थिति में हैं।

प्रदेश के सबसे बड़े मिनीमाता बांगो जलाशय का लाइव स्टोरेज अब 59.42 प्रतिशत हो गया है। वहीं रविशंकर सागर (गंगरेल) में 47.66 प्रतिशत, तांदुला में 43.93 प्रतिशत तथा सिकासार में 41.10 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया है।

मध्यम जलाशयों में छिरपानी जलाशय 78.13 प्रतिशत, सूखा नाला बैराज 77.92 प्रतिशत, सुतियापाठ 73.28 प्रतिशत तथा पिपरिया नाला 70.19 प्रतिशत भर चुके हैं।

हालांकि कुछ जलाशयों में जलभराव अभी अपेक्षाकृत कम है, जिनमें परलकोट, कुम्हारी, केशवा और मयाना प्रमुख हैं।

जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में राज्य के प्रमुख एवं मध्यम जलाशयों में कुल 3456.14 मिलियन घन मीटर पानी संग्रहित है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा लगभग 2084.08 मिलियन घन मीटर था।

सड़कों पर केज व्हील वाले ट्रैक्टर दौड़े तो कटेगा चालान

रायपुर/छत्तीसगढ़ – 07 जुलाई 2026

विभाग ने किसानों से आग्रह किया है कि जुताई या मिट्टी पलटने का कार्य पूरा होने के बाद ट्रैक्टर से केज व्हील हटाकर सामान्य रबर के टायर लगाएं और उसके बाद ही सार्वजनिक सड़कों पर वाहन चलाएं। इससे सड़कें सुरक्षित रहेंगी और हादसों की आशंका भी कम होगी।

खेतों में जुताई और मिट्टी पलटने के लिए इस्तेमाल होने वाले लोहे के केज व्हील (पिंजरा पहिया) लगे ट्रैक्टर अब सार्वजनिक सड़कों और सीमेंट रोड पर नहीं चल सकेंगे।

ऐसे ट्रैक्टर सड़क पर चलते पाए जाने पर परिवहन विभाग मोटरयान अधिनियम के तहत चालानी कार्रवाई करेगा। जिला परिवहन विभाग ने किसानों और ट्रैक्टर संचालकों को इस संबंध में चेतावनी जारी करते हुए नियमों का पालन करने की अपील की है।

परिवहन विभाग के अनुसार छत्तीसगढ़ शासन के निर्देश पर सभी जिला परिवहन अधिकारियों को सार्वजनिक सड़कों पर केज व्हील लगे ट्रैक्टरों का संचालन रोकने तथा उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

यह फैसला उच्च न्यायालय, बिलासपुर में दायर एक जनहित याचिका के बाद लिया गया है। याचिका में कहा गया था कि कृषि कार्यों के लिए बनाए गए केज व्हील का उपयोग केवल खेतों तक सीमित होना चाहिए, लेकिन कई स्थानों पर इन्हें सड़कों और राजमार्गों पर भी चलाया जा रहा है, जिससे सड़कें क्षतिग्रस्त होती हैं और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है।

परिवहन विभाग का कहना है कि सार्वजनिक मार्गों पर ऐसे ट्रैक्टरों का संचालन मोटरयान अधिनियम और प्रचलित नियमों के अनुरूप नहीं है।

परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि अपील के बावजूद यदि कोई ट्रैक्टर चालक केज व्हील लगे ट्रैक्टर के साथ सार्वजनिक सड़क पर चलता पाया गया, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार चालान सहित विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

कृषि खाद वितरण में गड़बड़ी पर बड़ी कार्रवाई महालक्ष्मी कृषि केंद्र का लाइसेंस 15 दिन के लिए निलंबित

छत्तीसगढ़/बेमेतरा 07 जुलाई 2026

कृषि विभाग के अनुसार संचालनालय कृषि, छत्तीसगढ़ के निर्देश पर जिले में उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी, डायवर्सन, अधिक कीमत पर बिक्री तथा नकली और अमानक उर्वरकों की रोकथाम के लिए लगातार निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है।

खरीफ सीजन में किसानों को समय पर और निर्धारित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने सख्ती तेज कर दी है।

30 जून को नवागढ़ विकासखंड के रनबोड़ स्थित महालक्ष्मी कृषि केंद्र का औचक निरीक्षण किया गया, जिसमें उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के कई प्रावधानों का उल्लंघन सामने आया।

बेमेतरा जिले में उर्वरक वितरण में अनियमितता पाए जाने पर ग्राम रनबोड़ स्थित मेसर्स महालक्ष्मी कृषि केंद्र का उर्वरक लाइसेंस 15 दिनों के लिए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में प्रतिष्ठान किसी भी प्रकार के उर्वरक का भंडारण, विक्रय अथवा उर्वरक व्यवसाय से जुड़ी गतिविधियां नहीं कर सकेगा।

जांच के दौरान कैश मेमो पर किसानों के हस्ताक्षर नहीं मिले, भंडारण एवं विक्रय पंजी का संधारण अपूर्ण पाया गया, निर्धारित प्रारूप में मासिक जानकारी प्रस्तुत नहीं की गई थी तथा बिक्री स्थल पर उर्वरकों का स्टॉक और निर्धारित विक्रय दर भी प्रदर्शित नहीं की गई थी।

जांच में यह भी सामने आया कि बड़ी संख्या में अन्य जिलों के किसानों को उर्वरक बेचे गए। इसके अलावा पीओएस सिस्टम में दर्ज स्टॉक और मौके पर उपलब्ध भौतिक स्टॉक में भी अंतर पाया गया।

इन अनियमितताओं पर प्रतिष्ठान को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया था, किंतु विभाग को दिया गया स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया।

इसके बाद उर्वरक निरीक्षक एवं सह प्रभारी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी नवागढ़ की अनुशंसा पर प्राधिकृत अधिकारी एवं उप संचालक कृषि, बेमेतरा ने उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के तहत प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए प्रतिष्ठान का उर्वरक प्राधिकार पत्र 15 दिनों के लिए निलंबित कर दिया।9

जिले में किसान हित को ध्यान रखते हुए उर्वरक वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन पर संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

जलालाबाद तहसील का नाम बदलकर होगा ‘भगवान परशुराम पुरी’, यूपी कैबिनेट ने दी मंजूरी

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लखनऊ/उत्तर प्रदेश 07 जुलाई 2026

उत्तर प्रदेश सरकार की सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में शाहजहांपुर जिले की जलालाबाद तहसील का नाम बदलने का बड़ा फैसला लिया गया। कैबिनेट ने तहसील का नया नाम ‘भगवान परशुराम पुरी’ रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार के इस निर्णय के बाद अब नाम परिवर्तन से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

स्टार्टअप और डेटा सेंटर नीति को मंजूरी

बैठक में प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई अहम नीतिगत फैसले भी लिए गए। आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील शर्मा ने जानकारी दी कि कैबिनेट ने ‘उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026’ और ‘उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2026’ को स्वीकृति दे दी है। इसके साथ ही निवेश और नवाचार को प्रोत्साहन देने के मकसद से एक अलग ‘स्टार्टअप मिशन’ गठित करने का भी निर्णय लिया गया।

पशुधन बीमा योजना को हरी झंडी

पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि कैबिनेट ने ‘मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना’ को भी मंजूरी दे दी है, जिससे प्रदेश के पशुपालकों को जोखिम की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी।

तीन नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना

बैठक में प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार को लेकर तीन नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को भी मंजूरी दी गई, जिससे राज्य में शिक्षा के अवसर और बढ़ेंगे।

मदरसा शिक्षकों की ग्रेच्युटी का प्रस्ताव फिलहाल टला

हालांकि, मदरसा शिक्षकों की ग्रेच्युटी से जुड़े प्रस्ताव पर इस बैठक में कोई फैसला नहीं हो सका और इसे फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। माना जा रहा है कि इस पर आगामी बैठकों में विचार किया जाएगा।

कुल मिलाकर सोमवार की कैबिनेट बैठक में प्रशासनिक, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी, जिनका असर आने वाले समय में प्रदेश की नीतियों पर दिखेगा।

(यह रिपोर्ट राज्य सरकार की कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों पर आधारित है।)

ताजमहल में मंदिर होने का दावा: हाईकोर्ट ने केंद्र और ASI से मांगा जवाब

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आगरा/इलाहाबाद 07 जुलाई 2026

ताजमहल परिसर में प्राचीन शिव मंदिर होने के विवादित दावे को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सोमवार को अहम सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने इस मामले में दाखिल एक रिट याचिका पर केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह याचिका 3 जुलाई को “अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय” मंदिर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरि शंकर जैन सहित पांच लोगों ने दायर की थी। याचिका में मांग की गई है कि ताजमहल परिसर के भीतर उक्त मंदिर के अस्तित्व की न्यायिक घोषणा की जाए।

अदालत में क्या दलीलें दी गईं

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता हरि शंकर जैन ने कोर्ट को बताया कि विवादित परिसर की फोटोग्राफी कराने और एक एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने के लिए निचली अदालत में आवेदन दिया गया था, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद दाखिल पुनर्विचार याचिका को भी सुनवाई योग्य न मानते हुए रद्द कर दिया गया। जैन ने अदालत के समक्ष कहा कि विवाद के निष्पक्ष निपटारे के लिए परिसर का सर्वे और फोटोग्राफी अनिवार्य है।

हाईकोर्ट का रुख

पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और ASI को अपना पक्ष स्पष्ट करने का आदेश दिया। साथ ही अदालत ने याचिका में प्रतिवादी नंबर 4 पंकज कुमार वर्मा को भी नोटिस जारी किया। गौरतलब है कि आगरा की सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अदालत और अतिरिक्त जिला जज दोनों ने पहले ही परिसर सर्वे के लिए एडवोकेट कमीशन गठित करने से इनकार कर दिया था, और मौजूदा याचिका उन्हीं आदेशों को चुनौती देने के लिए दायर की गई है।

2015 से चल रहा है मूल मुकदमा

इस विवाद की जड़ें 2015 में दायर एक मुकदमे से जुड़ी हैं, जो अब भी आगरा की सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अदालत में लंबित है। मूल मुकदमे में भी यही मांग की गई थी कि ताजमहल परिसर में तेजो महालय मंदिर मौजूद होने की घोषणा की जाए। इसी मामले की सुनवाई के दौरान एडवोकेट कमिश्नर नियुक्ति की अर्जी दाखिल हुई थी, जिसे जिला अदालतों ने अस्वीकार कर दिया था। अब इसी फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट का रुख किया है।

मामले की अगली सुनवाई में केंद्र सरकार और ASI के जवाबी हलफनामे के बाद कोर्ट आगे की कार्यवाही तय करेगा।

(यह रिपोर्ट न्यायालयी कार्यवाही और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है।)

अंतस की सोच का अत्यंत उच्च और दार्शनिक स्वरूप : एक बहुत गहरे त्रिकोण (धर्म-विज्ञान-अध्यात्म)

अध्यात्म डेस्क – 06 जुलाई 2026

“जहां धर्म और विज्ञान का पूर्ण सामंजस्य होगा, वहीं अध्यात्म का वास होगा।”—यह मौलिक सोच, सृष्टि के उद्गम और उसकी चेतना पर लिखे इस विशेष लेख का एक अद्भुत और वैचारिक त्रिवेणी संगम है।

पहला पक्ष: धर्म (The Discipline & Ritual)
धर्म का अर्थ केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि ‘धारणा’ और ‘कर्तव्य’ है।

बूंदों के संदर्भ में:
धर्म हमें सिखाता है कि हम प्रकृति के प्रति कृतज्ञ रहें। नदियों को देवी मानना, पौधों (तुलसी/बिल्वपत्र) को पूजना, और शिव का अभिषेक करना—यह सब प्रकृति के संरक्षण का धार्मिक तरीका है।

इसका स्वरूप यह है कि हमें अनुशासन, मर्यादा और समाज को जोड़े रखने के नियम देता है।

दूसरा पक्ष: विज्ञान (The Reason & Matter)
विज्ञान तत्वों के गुण, उनके मिलाप और भौतिक सत्यों को परखता है।विज्ञान मैटर पे जाता है और हम मैटिरियल पे।

वर्षा के संदर्भ में:
विज्ञान बताता है कि कैसे सूर्य की गर्मी (गैसों का लावा) समुद्र के पानी (द्रव) को भाप बनाती है, कैसे 49 प्रकार की हवाएं (मरुत) उसे बादलों में बदलती हैं, और कैसे वह पानी ठोस पहाड़-चट्टानों से टकराकर बरसता है।
इसका स्वरूप_ यह कार्य-कारण (Cause and Effect) पर चलता है। यह प्रयोग और प्रमाण मांगता है।

“सृष्टि का हर एक भौतिक तत्व (Matter) अकेला नहीं है। जब सावन में ठोस (चट्टान) और द्रव (पानी) मिलते हैं, और गैस (हवा) उन्हें गति देती है, तो यह सब मिलकर एक सामूहिक संतुलन (Collective Balance) बनाते हैं। यही कलेक्टिव मैटेरियलिज्म है, जिसे धर्म में ‘शिव-शक्ति’ माना गया ।”

तीसरा पक्ष: अध्यात्म (The Ultimate Confluence)
यह वह बिंदु है जिसकी बात साफ है__जहां धर्म और विज्ञान का मिलन होता है, वहीं से अध्यात्म का जन्म होता है।

जब हम धर्म के अनुशासन (नदियों को पूजना) को मानते हैं और विज्ञान के सत्य (पानी ही जीवन का आधार है) को जान लेते हैं, तब जो आंतरिक बोध पैदा होता है, उसे अध्यात्म कहते हैं।

अध्यात्म में ‘ठोस, द्रव और गैस’ केवल वैज्ञानिक तत्व नहीं रह जाते, वे सच्चिदानंद (सत्-चित्-आनंद)का रूप ले लेते हैं।

शिव और शक्ति का संतुलन ही अध्यात्म है। धर्म ने शिव को माना, विज्ञान ने संतुलन (Balance) को समझा, और अध्यात्म ने इन दोनों को अपने भीतर महसूस किया।

त्रिकोण यह पूरा_प्राचीन भारतीय ज्यामिती है,

धर्म
व्रत, नियम, अभिषेक और लोक-गीत के साथ मन को पवित्र और अनुशासित करना।

विज्ञान
जल-चक्र, गैसों का लावा, मरुत (हवाएं) और ठोस-द्रव का मिलन | बुद्धि को तार्किक और जागरूक बनाना।

अध्यात्म
सृष्टि के सृजन और संतुलन को स्वयं में महसूस करना | आत्मा को तृप्त और शांत करना।

हम आडंबर नहीं निष्कर्ष पर है
“विज्ञान के बिना धर्म अंधा है, और धर्म के बिना विज्ञान लंगड़ा है। लेकिन जब ये दोनों हाथ मिलाते हैं, तो वर्षा की फुहारों की तरह ‘अध्यात्म’ का अमृत बरसता है।”

विज्ञान मैटर (Matter) पे जाता है_

विज्ञान का काम है बुनियादी तत्वों, परमाणुओं, अणुओं और उनके रासायनिक व भौतिक गुणों को खोजना। वह यह देखता है कि कोई चीज़ किससे बनी है (जैसे पानी हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बना है, सूर्य हाइड्रोजन-हीलियम का लावा है)।

हम मैटिरियल (Material) पे जाते हैं_

‘हम’ यानी हमारा अध्यात्म और सनातन सोच उस मैटर से बने संसार (Material World) और उसके पीछे के चैतन्य को देखती है। हम केवल पानी के फॉर्मूले को नहीं देखते, हम उस पानी से लहलाती हुई ‘धरती की हरियाली’ और ‘सावन के झूलों’ के आनंद को महसूस करते हैं।





10 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का ‘रेड अलर्ट’, बिलासपुर-बस्तर में मानसून मेहरबान

मौसम समाचार- 06 जुलाई 2026

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ में बन रहे मजबूत सिस्टम के कारण अगले 48 घंटों में बारिश का दायरा और बढ़ेगा, जिससे तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को उमस भरी गर्मी से निजात मिलेगी।

छत्तीसगढ़ में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान बिलासपुर और बस्तर संभाग के कई जिलों में झमाझम भारी बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, राज्य में अब तक चालू सीजन की मौसमी बारिश सामान्य से 46 फीसदी कम रही है, लेकिन आगामी दिनों में इस कमी के दूर होने की पूरी संभावना है।

मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, अगले 2 दिनों के दौरान मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ के अनेक जिलों में मानसूनी गतिविधियां और तेज होने का अनुमान है। इसी के चलते विभाग ने प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

10 जिलों में ‘रेड अलर्ट’ जारी, प्रशासन मुस्तैद
मौसम विभाग ने आगामी 24 घंटों के भीतर प्रदेश के 10 प्रमुख जिलों में एक-दो स्थानों पर भारी से अत्यंत भारी बारिश होने की आशंका जताते हुए रेड अलर्ट‘ जारी किया है। इन जिलों में शामिल हैं:
रायपुर,दुर्ग,बलौदाबाजार,राजनांदगांव,बेमेतरा, महासमुंद,बालोद,धमतरी,गरियाबंद,सारंगढ़-बिलाईगढ़।

👉 रेड अलर्ट को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को अलर्ट पर रहने और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

जिलों के लिए संभावित’ऑरेंज अलर्ट’
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान राज्य के कई अन्य हिस्सों में गरज-चमक के साथ जोरदार बारिश का ‘ऑरेंज अलर्ट’ भी जारी किया है। इन क्षेत्रों में वज्रपात (आकाशीय बिजली) गिरने की भी आशंका है।

प्रभावित होने वाले मुख्य जिले और संभाग इस प्रकार हैं –
कवर्धा (कबीरधाम), खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी,कांकेर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर, दंतेवाड़ा, बिलासपुर संभाग के अन्य जिले

सामान्य से 46% कम है बारिश, किसानों को राहत की उम्मीद

छत्तीसगढ़ में इस साल मानसून की शुरुआत धीमी रही है, जिसके कारण अब तक सामान्य से 46 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इस सूखे जैसे हालात से चिंतित किसानों के लिए मौसम विभाग का यह ताजा अनुमान एक बड़ी राहत लेकर आया है। बिलासपुर और बस्तर संभाग में शुरू हुई इस भारी बारिश से कृषि कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।