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एक श्रमिक ‘मानसून वारियर’ की कर्तव्यनिष्ठा को सलाम: नीतू कोठारी

बेमेतरा/छत्तीसगढ़ – 04 जुलाई 2026

खबर बेमेतरा से है, जहाँ भाजपा महिला मोर्चा जिला प्रभारी (खैरागढ़-छुई खदान-गंडई) नीतू कोठारी ने आज नगर में हुई मूसलाधार बारिश के बीच संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा की एक अनूठी मिसाल पेश की।

आज नगर में तेज बारिश के कारण कई वार्डों में भारी जल भराव की स्थिति निर्मित हो गई थी। ऐसे मुश्किल समय में नीतू कोठारी ने खुद जमीन पर उतरकर मोर्चा संभाला।

उन्होंने वार्ड पार्षद की महती भूमिका निभाते हुए नगर पालिका के सफाई मित्र पीताम्बर के साथ खुद भी बारिश में भीगते हुए बंद नालियों को साफ कराया और जल निकासी का रास्ता साफ किया।

“संकट के समय केवल घरों में बैठकर निर्देश देने के बजाय, जमीन पर उतरकर अपनों के साथ खड़े होना ही सच्ची जनसेवा है।”

संकट में बने संकटमोचक: सराहनीय प्रयास
इस आपदा प्रबंधन के दौरान स्थानीय निवासियों ने भी दोनों के इस जज्बे की खुलकर तारीफ की। जहाँ अमूमन लोग भारी बारिश में घरों से बाहर निकलने से बचते हैं, वहीं घुटनों तक भरे पानी के बीच सफाई मित्र और जनप्रनिधि को एक साथ काम करते देख वार्ड वासियों को बड़ी राहत मिली।

समय रहते नालियों की सफाई होने से गंदा पानी लोगों के घरों में घुसने से बच गया, जिससे एक बड़ा नुकसान होने से टल गया।

नीतू कोठारी ने इस पूरी सफलता का सारा श्रेय नगर पालिका के श्रमिक को देते हुए कहा, “पीताम्बर भाई की कड़ी मेहनत और ईमानदारी की वजह से ही आज वार्ड के लोग सुरक्षित रहे। इतनी तेज बारिश और विपरीत परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य से पीछे न हटने वाले हमारे कर्मवीर भाई पीताम्बर का मैं हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ।”

उन्होंने श्रमिक पीताम्बर को “मानसून वारियर” का दर्जा देते हुए भावुक शब्दों में कहा, “आप जैसे कर्मवीर ही हमारे समाज की असली ताकत हैं। जिस तरह संकट काल में कोरोना योद्धाओं ने देश को बचाया था, उसी तरह आज इस भीषण बारिश में आप हमारे असली ‘मानसून योद्धा’ बनकर सामने आए हैं।”

ना सूर्योदय, ना सूर्यास्त… बस आदमी कहीं शिकस्त, तो कहीं परास्त!

डिजिटल डेस्क -04 जुलाई 2026

“शुरुआत में ही एक बात साफ़ कर देना ज़रूरी है—यहाँ किसी ‘मैं’ का अहंकार नहीं है, बल्कि यह इस दौर का देखा और भोगा हुआ कड़वा सच है। लिखने वाले और भी हैं, इस दौर में बुद्धिजीवियों और महाज्ञानियों की कोई कमी नहीं है, जो किताबी बातें करते हैं, तकनीकी उलझनों को सुलझाते हैं या केवल शब्दों को सजाने-संवारने की कलाबाज़ी दिखाते हैं। मुमकिन है कि वे समाज की सिर्फ ऊपरी सतह को देख पाते हों। लेकिन ईमानदारी से बात कहने वाले, जो गहरे, बेबाक और ज़मीन से जुड़े विचार लेकर आ सकें… ऐसे लोग तो आज के दौर में बहुत ही कम, उंगलियों पर गिनने लायक बचे हैं।”

अंधेरे का भ्रम और उजाले की हकीकत

किताबों में लिखा है और ज़माने ने देखा है कि जिसे हम ‘अंधेरा’ कहते हैं, उसका अपना कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता। अंधेरा केवल एक परिस्थितिजन्य घटना है, जबकि उजाला ही एकमात्र वास्तविकता है। सच तो यह है कि जहाँ उजाले का अभाव होता है, वहीं अंधेरा पैर पसारता है। जहाँ उजाले का प्रभाव होगा, वहाँ अंधकार टिक ही नहीं सकता। इसलिए जीवन में नकारात्मकता या निराशा से डरने की ज़रूरत नहीं है, वह केवल सकारात्मक सोच की कमी है। अपने भीतर उम्मीद का दीया जलाते ही भ्रम का हर अंधेरा खुद-ब-खुद गायब हो जाता है।

चरैवेति: सुख-दुख से परे निरंतर बहती जिंदगी

सच्चा राही न तो अंधेरे की चिंता करता है और न ही प्रकाश के वशीभूत होकर अपनी रफ्तार धीमी करता है। उसके लिए अनुकूल और प्रतिकूल परिस्थितियाँ मायने नहीं रखतीं। सुख मिले या दुख, वह तो बस चलता है, चलता है और चलता जाता है। यही जिंदगी का असली नाम है। परिस्थितियों के गुलाम बनने के बजाय कर्मयोगी की तरह हर हाल में आगे बढ़ते रहना ही इंसान को उसकी मंज़िल तक पहुँचाता है। जिंदगी ठहरने का नहीं, बल्कि निरंतर चलते रहने का नाम है।

गुलाब, कांटे और सियासत: संगति का कड़वा सच

दुनिया कहती आ रही है कि संगति का असर होता है, लेकिन ज़माने का तजुर्बा कुछ और ही गवाही देता है। एक ही डाल पर बबूल या गुलाब के साथ कांटे रात-दिन रहते हैं, पर कांटों को कभी गुलाब सा महकते नहीं देखा गया। कांटा चाहे बबूल का हो या गुलाब का, चुभने पर दर्द एक सा ही होता है। इस कांटों के जंजाल से दामन बचाकर निकल जाना ही समझदारी है। दुनिया की इस बनावटी अच्छाई यानी ‘फूलों की सियासत’ से कोई बेगाना नहीं है। इस दोगलेपन को पहचानकर अपनी मौलिकता बचाना ही असल सच है।

समय की उफनती नदी और गर्मियों का सन्नाटा

समय की धारा बड़ी तेज़ और निर्मम होती है। जिन नदियों में बारिश का पानी समाता नहीं और वे अहंकार में उफनती हुई अपनी मर्यादा भूल जाती हैं, वही नदियां गर्मियों के आते ही सूखी नज़र आती हैं और पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसती हैं। वक्त का यह चक्र हर किसी पर लागू होता है। कामयाबी या अच्छे दिनों के अति-उत्साह में उफनने के बजाय इंसान को हमेशा मर्यादित और ज़मीन से जुड़ा रहना चाहिए, क्योंकि समय बदलते देर नहीं लगती।

मरुस्थल के टीले जैसा: पैसा, रुतबा जैसे रेत की चाल

पैसा और रुतबा इस मरुस्थल में रेत के समान हैं। जब समय की हवाएं चलती हैं, तो रेत के टीले कभी इस तरफ बनते हैं तो कभी उस तरफ। हवा का एक झोंका बड़े से बड़े टीले को तोड़ देता है और छोटे टीले को बड़ा बना देता है। धन, पद और प्रतिष्ठा की नश्वर चाल को देखना हो, तो मरुस्थल की इस रेत को देख लीजिए। आज जो शिखर पर है, कल वह शून्य पर हो सकता है। इस अस्थायी रुतबे पर अहंकार करना नासमझी के सिवाय कुछ नहीं है।

कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में चिरायु टीम ने 100 छात्राओं का किया स्वास्थ्य परीक्षण

बेमेतरा/छत्तीसगढ़ – 03 जुलाई 2026

शिविर में हीमोग्लोबिन-सिकल सेल जांच के साथ बाँटे सैनिटरी पैड। विद्यालय में निवासरत सभी 100 बालिकाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का उद्देश्य 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों की बीमारियों का शीघ्र पहचान, उपचार एवं रेफरल कर बच्चों को स्वस्थ बनाना है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमृत लाल रोहलेडर के निर्देश तथा बीएमओ खंडसरा डॉ. शरद कोहाड़े के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चिरायु टीम ‘सी’ खंडसरा ने बुधवार 02 जुलाई को शासकीय कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय बेमेतरा में स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किया।

इस दौरान सभी छात्राओं की हीमोग्लोबिन, ब्लड ग्रुप और सिकल सेल की जांच की गई। सामान्य बीमारियों से पीड़ित पाई गई बालिकाओं को मौके पर ही जरूरी दवाइयाँ उपलब्ध कराई गईं। साथ ही किशोरियों को स्वास्थ्य जागरूकता की जानकारी देते हुए सैनिटरी पैड का वितरण भी किया गया, ताकि माहवारी स्वच्छता को लेकर कोई झिझक न रहे।

स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा विद्यालय में निवासरत समस्त किशोरी बालिकाओं को निःशुल्क सैनिटरी पैड का भी वितरण किया गया। टीम ने माहवारी स्वच्छता प्रबंधन एवं व्यक्तिगत साफ-सफाई के संबंध में बालिकाओं को जानकारी दी।

इस अवसर पर चिरायु टीम से डॉ. दिलीप चंद्रवंशी, डॉ. प्रीति ठाकुर, फार्मासिस्ट बलवंत बंजारे, लैब टेक्नीशियन मनीष साहू उपस्थित थे। कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की अधीक्षिका श्रीमती भारती घृतलहरे सहित विद्यालय के अन्य स्टाफ ने सहयोग प्रदान किया।

बरसात में ग्रामीणों के घर तोड़े: भाजपा सरकार संवेदनहीन हो चुकी है – आशीष छाबड़ा

बेमेतरा/छत्तीसगढ़ 03 जुलाई 2026

आशीष छाबड़ा ने कहा, “भरी बरसात में लोगों के सिर से छत छीनी जा रही है। बदले में नया रायपुर सेक्टर-30 में जो अस्थायी व्यवस्थापन किया गया है, वह सिर्फ खानापूर्ति है। सेक्टर-30 में 1 BHK के फ्लैट में संयुक्त परिवारों को रहने के लिए जगह दी गई है, जबकि एक संयुक्त परिवार में कई दंपती होते हैं। ऐसे में एक कमरे में गुजारा कर पाना संभव नहीं है।”

जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक आशीष छाबड़ा ने धरसीवां विधानसभा क्षेत्र के ग्राम नकटी में विधायक निवास बनाने के लिए प्रशासन द्वारा खाली कराए जा रहे मकानों पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि भाजपा की यह सरकार मानवता को भूल चुकी है और पूरी तरह संवेदनहीन हो चुकी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक निवास बनाने के लिए शासन के पास अन्य जगह भी उपलब्ध थी, किंतु मानवता से मुंह मोड़ लेने वाली भाजपा सरकार को लोगों की संवेदना से कोई लेना-देना नहीं है। “इन्हें मात्र इससे मतलब है कि प्रदेश को कैसे लूटा जा सकता है, आम जनता को कैसे परेशान किया जा सकता है। यही इस सरकार का मकसद है। यही कारण है कि बरसात में लोगों को उनके घरों से विस्थापित किया गया है और लोगों के खून-पसीने की कमाई पर बुलडोजर चलाया गया है।”

छाबड़ा ने कहा कि एक भी भाजपा जनप्रतिनिधि या विधायक इस कार्रवाई को रोकने के लिए सामने नहीं आया। “लोगों को इससे नुकसान हो रहा है। आशियाना छिन जाने से न केवल उनके दैनिक कार्यों पर प्रभाव पड़ रहा है, बल्कि स्कूल जाने वाले बच्चे भी ऐसी स्थिति में स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।”

उन्होंने भाजपा सरकार को “अमीरों की सरकार” बताते हुए कहा कि उसे गरीब और आम जनता से कोई लेना-देना नहीं है। “इन्हें सिर्फ अपने कमीशन और दिखावे की जल्दी है। पूर्व में धरसीवां के जनप्रतिनिधियों ने कहा था कि नकटी में किसी प्रकार से विस्थापन की कार्रवाई नहीं की जाएगी, किंतु आज वही जनप्रतिनिधि नकटी में हो रहे विस्थापन और लोगों के घरों पर चल रहे बुलडोजर से कोई सरोकार नहीं रख रहे।”

आशीष छाबड़ा ने कहा कि आम जनता अपने दर्द से परेशान है। बरसात में आशियाना उजड़ने से लोग अपनी व्यवस्था कैसे करेंगे, यह भाजपा सरकार ने नहीं सोचा। “यही स्थिति भाजपा सरकार द्वारा किसानों, कर्मचारियों एवं आम जनता के साथ लगातार पिछले कई वर्षों से की जा रही है। भाजपा की सरकार संवेदनहीन सरकार है और भाजपा के जनप्रतिनिधियों की आत्माएं मर चुकी हैं।”

बारिश के मौसम में सेहत, स्वाद और सुकून का सही संगम जरूरी

लाइफ स्टाइल डेस्क – 04 जुलाई 2026

संक्रमण का खतरा

भारी तपीश और गर्मी के बाद एक मौसम आता है बारिश का।बारिश का मौसम अपने साथ ठंडक और हरियाली तो लाता ही है, साथ ही नमी और संक्रमण का खतरा भी बढ़ा देता है। ऐसे में लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव करके आप बारिश का पूरा आनंद ले सकते हैं और सेहतमंद भी रह सकते हैं।

खानपान

इस मौसम में खाना-पीना हल्का और सुपाच्य रखें। घर का बना गर्मागर्म सूप, अदरक-तुलसी वाली चाय, भुने हुए चने, मक्के का भुट्टा और हल्दी वाला दूध इम्यूनिटी बढ़ाते हैं। बाहर का कटा फल, चाट-पकौड़ी और ज्यादा तला-भुना खाने से बचें क्योंकि नमी में बैक्टीरिया जल्दी पनपते हैं। पानी उबालकर या फिल्टर करके ही पिएं और मौसमी फल जैसे जामुन, नाशपाती और अनार जरूर शामिल करें।

पहनावा

कपड़ों के मामले में सूती, लिनेन या क्विक-ड्राई फैब्रिक सबसे अच्छे रहते हैं। हल्के रंग के ढीले-ढाले कपड़े पहनें ताकि पसीना और नमी से फंगल इंफेक्शन न हो। पैरों के लिए वॉटरप्रूफ सैंडल या रबर की चप्पल चुनें। चमड़े के जूते और बंद शूज गीले होकर बदबू और फंगस की वजह बन सकते हैं। छाता या रेनकोट हमेशा साथ रखें और एक छोटा तौलिया भी बैग में रखें ताकि भीगने पर तुरंत पोंछ सकें।

बारिश का आनंद

बारिश का मजा लेने के लिए घर की बालकनी में गर्म पकोड़े और अदरक वाली चाय के साथ किताब पढ़ना सबसे सुकूनभरा लगता है। खिड़की से आती मिट्टी की सौंधी खुशबू और हल्का संगीत मूड फ्रेश कर देता है। दोस्तों के साथ इनडोर गेम्स, कैरम, लूडो या पुराने गानों की महफिल जमा सकते हैं। अगर बाहर निकलना हो तो वाटरप्रूफ जैकेट पहनकर किसी पास के पार्क या झील पर जाएं, भीगती हरियाली और ठंडी हवा दिन बना देगी। बच्चों के साथ कागज की नाव बनाना और गड्ढों में तैराना आज भी उतना ही मजेदार है।

सावधानियां

बस इतना ध्यान रखें कि भीगने के बाद तुरंत सूखे कपड़े पहनें, बाल सुखा लें और पैर साफ करके पाउडर लगा लें। छींक-जुकाम से बचने के लिए विटामिन सी वाले आहार और गुनगुना पानी लेते रहें। थोड़ी सावधानी और सही प्लानिंग के साथ बारिश का मौसम सेहत, स्वाद और सुकून तीनों दे सकता है।

अमरनाथ यात्रा प्रारंभ : पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी की प्रथम पूजा संपन्न, प्रशासन के कड़े इंतजाम

न्यूज डेस्क 04 जुलाई 2026

03 जुलाई से आरंभ हुआ बर्फानी बाबा अमरनाथ यात्रा।जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा सुरक्षा और यात्रा की सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं।

भारत की आस्था और परंपरा का प्रतीक अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2026 से आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। यात्रा शुरू होने से पहले पवित्र अमरनाथ गुफा में बाबा बर्फानी की प्रथम पूजा विधि-विधान से संपन्न कराई गई। हर साल की तरह इस बार भी देशभर से लाखों श्रद्धालु बर्फानी बाबा के दर्शन के लिए जम्मू-कश्मीर पहुंच रहे हैं।

अमरनाथ यात्रा के लिए अब तक 3.90 लाख से ज्यादा श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। यात्रा शुरू होने के साथ ही जम्मू में ऑन-द-स्पॉट (तुरंत) रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी शुरू कर दी गई है।

प्रशासन और श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। मार्ग में सुरक्षा बलों की तैनाती, मेडिकल कैंप, ऑक्सीजन बूथ और आपदा प्रबंधन टीमें तैनात की गई हैं।

पहलगाम और बालटाल दोनों रूटों पर जगह-जगह लंगर, टेंट सिटी और पेयजल की व्यवस्था की गई है। मौसम विभाग ने यात्रा अवधि के दौरान बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है, इसलिए श्रद्धालुओं से मौसम अपडेट लेकर चलने और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।

अमरनाथ यात्रा न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि कश्मीर की अर्थव्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द का भी प्रतीक मानी जाती है। यात्रा सुचारू रूप से चलाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं।

नदी में डूबी पूरी जिंदगी”घमंड कोई भी हो, इंसान को अंदर से खाली कर देता है”

डिजिटल डेस्क- 02/07/2026

“भगवद्गीता 2.47 में कहा है – कर्म करो, फल की चिंता नहीं। शास्त्री जी के पास ज्ञान था, कर्म नहीं। नाविक के पास कर्म था, इसलिए बच गया।”

गंगा का किनारा। यात्रियों से भरी एक नाव दूसरे पार जा रही थी। उस नाव में एक विद्वान पंडित मोहन शास्त्री भी बैठे थे। नदी की लहरों से ज्यादा उफान उनके ज्ञान के अहंकार में था।

उन्होंने नाव खेते हुए भोले-भाले नाविक से पूछा, “भूगोल पढ़ी है?”
नाविक ने सिर हिलाया, “बाबूजी, भूगोल क्या होता है, मैं नहीं जानता।”
शास्त्री जी मुस्कुराए, “तब तो तुम्हारी पाव भर जिंदगी पानी में गई।”

थोड़ी देर बाद दूसरा सवाल आया, “इतिहास जानते हो? लक्ष्मीबाई कौन थीं?”
नाविक फिर चुप। शास्त्री जी बोले, “आधी जिंदगी पानी में गई।”

अहंकार यहीं नहीं रुका। तीसरा वार हुआ, “महाभारत का भीष्म-नाविक संवाद या रामायण में केवट-राम का संवाद सुना है?”
नाविक ने न में सिर हिलाया। शास्त्री जी खिलखिला उठे, “तुम्हारी तो पौनी जिंदगी पानी में गई।”

तूफान कभी भी आ सकता है
तभी गंगा का बहाव तेज हो गया। आसमान में बादल गरजे। नाव डगमगाने लगी। नाविक ने यात्रियों को संभलने को कहा और शास्त्री जी से पूछा, “पंडित जी, तैरना आता है?”
अब शास्त्री जी का चेहरा फीका पड़ गया। डरते हुए बोले, “नहीं… तैरना नहीं आता।”
नाविक ने शांत स्वर में कहा, “तब तो पंडित जी, आपकी पूरी जिंदगी पानी में गई।”

अगले ही पल नाव पलटी। सबको बचाने वाला नाविक बच गया, पर किताबी ज्ञान पर इतराने वाले शास्त्री जी गंगा की गोद में समा गए।

नाव जीवन, नदी संसार, तूफान संकट, तैरना व्यवहारिक ज्ञान/कर्म

कहानी के पीछे की सच्चाई
हम कितने भी बड़े हो जाएं, कितनी भी डिग्रियां बटोर लें, कितना भी पैसा कमा लें – सुबह पहनने वाली चप्पल से लेकर रात को ओढ़ने वाली चादर तक सब किसी न किसी मजदूर के हाथों से बनकर आती है।

सहयोगी कौन
जिस दफ्तर में AC में बैठकर हम बड़ी-बड़ी मीटिंग करते हैं, उसे सुंदर बनाने वाला, साफ करने वाला, चाय पिलाने वाला भी वही ‘अनपढ़’ वर्ग होता है जिसे हम अक्सर दरवाजे पर रोक देते हैं। हमारे सूट को सिलने वाला दर्जी, जूते पॉलिश करने वाला मोची, बाल काटने वाला नाई – इनके बिना हमारी पर्सनालिटी अधूरी है।

जब हम सफल हो जाते हैं तो बनाने वालों को भूल जाते हैं। यही घमंड है। और घमंड की उम्र बहुत छोटी होती है।

शिक्षा क्या कहती है(उद्देश्य)
विद्या विवाद के लिए नहीं, समाधान के लिए है। शास्त्र शस्त्र बन जाएं तो ज्ञान अभिशाप बन जाता है।
‘विद्या विनयेन शोभते’ – विद्या विनम्रता से ही सुंदर लगती है। जिस तरह फल से लदा पेड़ झुक जाता है, उसी तरह ज्ञानी व्यक्ति और विनम्र हो जाता है।

धन दान के काम
कोई काम छोटा-बड़ा नहीं होता। समाज एक शरीर है। मजदूर उसके पैर हैं। पैर के बिना सिर कितना भी बड़ा हो, चल नहीं सकता।

इसलिए अगली बार किसी को कमतर आंकने से पहले सोचिए – क्या मुझे तैरना आता है? क्योंकि जिंदगी की नदी में तूफान कभी भी आ सकता है। और उस वक्त डिग्री नहीं, हुनर और इंसानियत ही काम आती है।

घमंड पानी है – जिसमें सब डूब जाता है। विनम्रता नाव है – जो सबको पार लगा देती है।

सवाल? “आज रात सोने से पहले सोचिए – मेरी जिंदगी की नाव में तैरने वाला हुनर कौन सा है?”



बुजुर्ग महिला से सोने की चेन लूटने वाले दो आरोपी को बेमेतरा पुलिस ने किया गिरफ्तार

बेमेतरा/छत्तीसगढ़- 02/07/2026

घटना
बेमेतरा जिले के थाना खम्हरिया पुलिस ने 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला से सोने की चेन लूटकर फरार हुए मुख्य आरोपी और लूट का माल खरीदने वाले दूसरे आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लूटी गई करीब 3 तोला 20 मिलीग्राम सोने की चेन, जिसकी कीमत लगभग 3 लाख 60 हजार रुपये है, बरामद कर ली है।

रिपोर्ट
प्रार्थिया पार्वती लोधी, उम्र 70 वर्ष, निवासी ग्राम गडुवा ने 01 जुलाई 2026 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 30 जून की दोपहर करीब 12 बजे वह अपने घर की बाड़ी में बोर चालू कर नहा रही थी। इसी दौरान गांव का भुलउ सेन उसके घर में घुस आया और पानी मांगने लगा। पानी देने के बाद आरोपी ने उसके मुंह पर कपड़ा फेंक दिया और सिर व पीठ पर मारपीट कर उसे गिरा दिया। कुछ देर के लिए अचेत होने पर आरोपी उसके गले से तीन तोले की सोने की चेन खींचकर भाग गया। रिपोर्ट पर पुलिस ने धारा 309(6), 331(2) BNS के तहत मामला दर्ज किया।

कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस उप महानिरीक्षक रामकृष्ण साहू (भा.पु.से.) ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश यादव एवं एसडीओपी बेमेतरा भूषण एक्का के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी खम्हरिया उप निरीक्षक ओंकार साहू की टीम ने जांच शुरू की। पूछताछ में आरोपी 19 वर्षीय आनंद सेन उर्फ भुलउ, निवासी गडुवा ने अपराध कबूल कर लिया। उसने बताया कि लूटी गई चेन को देवरबीजा निवासी धर्मेन्द्र निर्मलकर के पास 5,000 रुपये में गिरवी रख दिया था और उस रकम को दोस्तों के साथ खाने-पीने में खर्च कर दिया।

गिरफ्तार
लूट की संपत्ति खरीदने के आरोप में पुलिस ने धर्मेन्द्र निर्मलकर, उम्र 18 वर्ष, निवासी देवरबीजा के खिलाफ धारा 317(2) BNS जोड़ी। दोनों आरोपियों की निशानदेही पर सोने की चेन बरामद की गई। दोनों को 01 जुलाई 2026 को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर माननीय न्यायालय में पेश किया गया।

प्रमुख भूमिका
इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी ओंकार साहू, प्रशिक्षु उपनिरीक्षक सुरेश चौहान, आरक्षक अशरफी खान, बलदेव निषाद, मुकेश चंद्रवंशी सहित थाना खम्हरिया स्टाफ की अहम भूमिका रही।

” हीटवेव का कहर: यूरोप में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पारा 40°C पार , 2300+ मौतें ,WHO ने बताया क्लाइमेट क्राइसिस”

डिजिटल डेस्क 02 जुलाई 2026

यूरोप इस साल भीषण हीटवेव की चपेट में है। जून-जुलाई 2025 में चली लू ने पश्चिमी और दक्षिणी यूरोप से लेकर आर्कटिक तक रिकॉर्ड तोड़ दिए। फ्रांस, स्पेन, जर्मनी, पुर्तगाल और इटली में पारा 40°C से 46°C तक पहुंच गया।

स्पेन के सिलोपी में 25 जुलाई को 50.5°C तापमान दर्ज हुआ – यह देश के इतिहास में पहली बार 50°C से ऊपर गया। फ्रांस में एविन्योन में 11 दिन और टूलूज़, नीम में 9 दिन तक लगातार 35°C से ज्यादा तापमान रहा। यूरोपियन कॉपरनिकस क्लाइमेट सर्विस के मुताबिक जुलाई 2025 यूरोप का चौथा सबसे गर्म जुलाई रहा, जो 1991-2020 औसत से 1.30°C ज्यादा था।

इस हीटवेव ने भारी मानवीय नुकसान पहुंचाया है। Imperial College London और London School of Hygiene and Tropical Medicine की स्टडी के मुताबिक 10 दिनों की हीटवेव में 12 यूरोपीय शहरों में करीब 2300 लोगों की मौत हुई, जिनमें से 1500 मौतों के लिए सीधे क्लाइमेट चेंज जिम्मेदार है। WHO ने भी बताया कि 2025 की हीटवेव से यूरोप में 1300 से ज्यादा अतिरिक्त मौतें हुईं। फ्रांस में ही 40 बच्चों की डूबने से मौत हुई और 2 बच्चों की कार में छोड़ने से जान गई। स्पेन में अकेले 327 मौतें दर्ज की गईं।

अमेरिका भी आया लू की चपेट में

अमेरिका में भीषण हीटवेव ने करोड़ों लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नेशनल वेदर सर्विस (NWS) ने 18 राज्यों में खतरनाक गर्मी की चेतावनी जारी की है। ‘हीट डोम’ यानी उच्च दबाव का सिस्टम पूरे मिडवेस्ट से ईस्ट कोस्ट तक फैल गया है, जिससे तापमान 38°C से ऊपर जा रहा है। उमस इतनी ज्यादा है कि हीट इंडेक्स यानी ‘फील्स लाइक’ तापमान 115°F यानी करीब 46°C तक पहुंच रहा है। 6 करोड़ से ज्यादा लोग हीट अलर्ट के दायरे में हैं और ये लू जुलाई 4 के स्वतंत्रता दिवस वीकेंड तक जारी रहेगी।

‘हीट डोम’ यानी उच्च दबाव का सिस्टम इस गर्मी की बड़ी वजह बना। यह सहारा रेगिस्तान से गर्म हवा खींचकर यूरोप पर जमता रहा। इसकी वजह से न सिर्फ जंगल की आग भड़की – स्पेन, ग्रीस, पुर्तगाल, साइप्रस में रिकॉर्ड वाइल्डफायर हुए- बल्कि बिजली ग्रिड, अस्पताल और ट्रांसपोर्ट भी चरमरा गए। जर्मनी में राइन नदी का जलस्तर गिरने से जहाज 50% क्षमता पर ही चल पाए। विंबलडन में खिलाड़ियों के लिए हीट ब्रेक लागू करने पड़े।

सबसे बड़ी चुनौती यूरोप का इन्फ्रास्ट्रक्चर है। BBC के मुताबिक यूरोप के सिर्फ 20% घरों में AC है, जबकि अमेरिका में 90% घरों में। GeoNewz की रिपोर्ट बताती है कि 80% यूरोपीय घर सर्दियों के लिए बने हैं, गर्मी रोक नहीं पाते। WHO और WMO ने चेतावनी दी है कि यूरोप दुनिया के औसत से दोगुनी तेजी से गर्म हो रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्रीनहाउस गैसें नहीं रोकी गईं तो ऐसी गर्मी आम हो जाएगी।

कभी भारत पर कमेंट्स करने वालो ने यह नहीं सोचा था कि हमने कभी कहा,भारत के लोग कैसे तालाब में एक साथ नहाते है साफ सफाई करते हैं।आज न्यूज चैनलों में वही स्थिति विदेशों में देखने मिला की लोग सामूहिक स्नान कर रहे है ताल सरोवर जैसी जगह तलाश रहे।

सोशल मीडिया रिएक्शन:
सोशल मीडिया पर बहस तेज है। कई यूजर्स कह रहे हैं कि यूरोप के घर AC के बिना “ओवन” बन गए हैं। वहीं कुछ लोग इसे भारत की गर्मी से तुलना कर रहे हैं – “दिल्ली में 48°C पर क्रिकेट खेलते हैं”। WHO के आंकड़ों पर भी शक जताया जा रहा है।

राम मंदिर लूट कांड: “चढ़ावा चोरी या हेराफेरी 40 दिन में 70 बार” अब बोलेगा बुलडोजर

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अयोध्या न्यूज/ 02 जुलाई 2026

“आस्था पर बुलडोजर वार: राम मंदिर चढ़ावा घोटाले में SIT का शिकंजा, लव कुश मिश्रा के घर पर कार्रवाई तय”

पब्लिक कमेंट्स:
“जहाँ राम का नाम, वहाँ दाग कैसा? चढ़ावे की चोरी पर अब चलेगा कानून का बुलडोजर”
“रामराज्य कोष या लूट का कोष? भक्तों की आस्था पर डाका, SIT करेगी हिसाब”

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक बार फिर विवादों के घेरे में है। एक तरफ ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को तबीयत बिगड़ने पर लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है, तो दूसरी तरफ राम मंदिर में चढ़ावे और दान में कथित गड़बड़ी को लेकर SIT ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जनवरी में भी महंत की तबीयत बिगड़ी थी।

खबर अनुसार ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय एकांतवास में हैं, जिससे सवाल और गहरे हो गए हैं।

चढ़ावा चोरी मामले में सबसे बड़ा एक्शन आरोपी लव कुश मिश्रा के घर पर होने जा रहा है। अथॉरिटी ने उसके घर बुलडोजर चलाने का नोटिस थमा दिया है। SIT और पुलिस की संयुक्त छापेमारी में आरोपियों के घरों से नकदी और लेन-देन के दस्तावेज मिले हैं। CCTV फुटेज से खुलासा हुआ है कि सिर्फ 40 दिन में 70 चोरियां हुईं, तो साढ़े पांच साल में आंकड़ा क्या होगा, यह सोचकर ही भक्त सन्न हैं।
कुंभ के वक्त सबसे ज्यादा चोरी की बात भी जांच में सामने आई है। पुलिस को ‘रामराज्य कोष’ और नकली QR कोड के जरिए चंदा वसूली का बड़ा सुराग भी मिला है।

इस पूरे घोटाले में 400 सुरक्षाकर्मियों वाली एक प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी की भूमिका भी संदिग्ध है। यह एजेंसी RSS से जुड़े बिहार के एक पूर्व सांसद की बताई जा रही है, जिसे सालाना 12 करोड़ रुपए दिए जाते थे। सवाल यह है कि जब केंद्र और राज्य के सुरक्षाबल पहले से तैनात हैं, तो ये 400 गार्ड्स ‘लूट के माल के रूट’ पर क्या कर रहे थे? SIT की जांच अब अनिल मिश्रा तक भी पहुंच रही है, जिन पर मंदिर में नौकरियों के लिए कमीशन खाने के आरोप हैं।

मामले पर सियासत भी तेज हो गई है। AICC सोशल मीडिया चेयरपर्सन Supriya Shrinate ने आरोप लगाया कि SIT की रिपोर्ट तैयार है पर सार्वजनिक नहीं की गई। उनका कहना है कि “SIT का काम प्यादों को पकड़ना और बड़े लोगों को छोड़ना था, ताकि माल ठिकाने लग जाए।”

वहीं धीरेंद्र शास्त्री ने भोपाल में कहा कि “महादंड मिलेगा”। देश भर के भक्तों ने आस्था से दान दिया, लेकिन अब पारदर्शिता की मांग उठ रही है। निष्पक्ष जांच के बाद ही सच सामने आएगा।