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Sunday, June 14, 2026

विकसित भारत @2047 का रास्ता खेतों और गांवों से होकर ही गुजरेगा: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

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नई दिल्ली: 13 जून 2026

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प की सफलता कृषि, ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार (इन्नोवेशन) के सशक्त तालमेल पर टिकी हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की कृषि केवल हमारी अर्थव्यवस्था का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक चेतना, खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण समृद्धि और सामाजिक स्थिरता की आधारशिला भी है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला नई दिल्ली में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।

इस सम्मेलन का मुख्य विषय “Sustainable Agriculture for Viksit Bharat@2047: Tradition, Technology and Tangible Outcomes” (विकसित भारत @2047 के लिए सतत कृषि: परंपरा, प्रौद्योगिकी और मूर्त परिणाम) रखा गया है।

परंपरा और आधुनिक विज्ञान का समन्वय जरूरी
वैश्विक चुनौतियों का जिक्र करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, “आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है, तब यह बेहद जरूरी हो गया है कि हम अपने पारंपरिक कृषि ज्ञान को आधुनिक विज्ञान, अत्याधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जलवायु-अनुकूल (Climate-Resilient) नवाचारों के साथ जोड़ें।”

केवल उत्पादन बढ़ाना लक्ष्य नहीं
श्री बिरला ने कहा कि कृषि का भविष्य अब केवल ज्यादा उत्पादन करने तक सीमित नहीं रह गया है।
इसका असली मकसद संसाधनों का सही उपयोग, पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना, किसानों की आय में वृद्धि करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित एवं समृद्ध कृषि व्यवस्था तैयार करना है।यही वजह है कि आज देश की कृषि यात्रा में कृषि शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और तकनीक आधारित समाधानों को प्रमुख आधार बनाया जा रहा है।


“विकसित भारत की यात्रा हमारे खेतों, खलिहानों और गांवों से होकर ही गुजरेगी। इस बड़े बदलाव के मुख्य वाहक हमारे किसान, वैज्ञानिक, शिक्षक, शोधकर्ता, नीति-निर्माता और युवा शक्ति होंगे।”
ओम बिरला, लोकसभा अध्यक्ष

सम्मेलन से निकलेगा आत्मनिर्भरता का रास्ता
संबोधन के अंत में उन्होंने विश्वास जताया कि इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन से जो भी विचार, नवाचार और संकल्प सामने आएंगे, वे देश के किसानों की समृद्धि, ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण को एक नई रफ्तार देंगे। साथ ही, ये निष्कर्ष कृषि को राष्ट्र की प्रगति, पर्यावरण संतुलन और जनकल्याण का एक बेहद मजबूत जरिया बनाएंगे।

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