चौपाल डेस्क:-01/05/2026
बधाई हो! हम एक ऐसे युग में प्रवेश कर चुके हैं जहाँ अब ‘समस्या’ शब्द डिक्शनरी से बाहर होने वाला है। विकास की गति इतनी तीव्र है कि अब हमें पुरानी और धूल भरी चीजों की जरूरत ही नहीं रही।
स्कूलों का ‘शांति काल’
कुछ लोग कहते हैं कि स्कूल बंद हो रहे हैं। अरे भाई, इसे बंद होना नहीं, ‘ज्ञान का केंद्रीकरण’ (Centralization) कहते हैं। सरकार चाहती है कि बच्चे इधर-उधर भटकने के बजाय एक ही जगह इकट्ठा हों। और फिर, आज के डिजिटल युग में स्कूलों की ऊंची इमारतों की क्या जरूरत? जब हाथ में मोबाइल और जेब में मुफ्त का डेटा हो, तो मास्टर जी को ‘एडजस्ट’ करना ही तो मास्टर स्ट्रोक है! आखिर आत्मनिर्भर बनने की शुरुआत बचपन से ही तो होगी।
राजस्व की ‘पवित्र’ धारा
शराब की दुकानों पर जो लंबी कतारें दिखती हैं, वो केवल भीड़ नहीं, बल्कि ‘देशभक्तों का योगदान’ है। ये वो कर्मयोगी हैं जो अपनी सेहत की चिंता छोड़कर राज्य के राजस्व (Revenue) के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं। सरकार भी कितनी दयालु है—वह जानती है कि शिक्षा और रोजगार की चिंता में युवा तनाव में आ सकता है, इसलिए ‘तनाव मुक्ति’ के केंद्र (शराब काउंटर) हर मोड़ पर खोल दिए गए हैं। यह ‘वेलफेयर स्टेट’ का सबसे आधुनिक मॉडल है।
‘वोट’ वाली उंगली का सम्मान
लोकतंत्र में उंगली का बड़ा महत्व है। सरकार हमारी इस उंगली का इतना सम्मान करती है कि उसे साल में एक बार (चुनाव के दिन) वीआईपी ट्रीटमेंट देती है। बाकी समय वह चाहती है कि हम अपनी उंगलियों का इस्तेमाल केवल ‘ताली बजाने’ और ‘स्मार्टफोन चलाने’ में करें। काम मांगने के लिए हाथ उठाने की मेहनत भला जनता क्यों करे? जब ‘मुफ्त की योजनाओं’ की गंगा बह रही हो, तो पसीना बहाने की दकियानूसी सोच अब पुरानी बात हो गई है।
सड़कों का ‘साहस’
सड़कें अब इतनी चौड़ी और चमकदार हैं कि उन पर चलते हुए डर नहीं, गर्व महसूस होता है। एक्सीडेंट तो बस ‘रफ्तार के रोमांच’ का एक छोटा सा हिस्सा हैं। सरकार ने अपना काम कर दिया—सड़कें चमका दीं। अब अगर उस पर जिंदगी नहीं चमक पा रही, तो यह तो जनता की अपनी ‘मैनेजमेंट स्किल’ की कमी है, है ना?
चौपाल बिंदु:
सरकार का इरादा नेक है—वह हमें ‘चकाचौंध’ की ऐसी आदत डाल देना चाहती है कि हमारी आंखों को अंधेरा देखने की आदत ही न रहे। अभाव में भी ‘भाव’ ढूंढ लेना ही तो असली नागरिक होने की पहचान है। जय हो इस ‘चमकते’ विकास की!
विकास का ‘चमत्कारी’ चश्मा: जनता हुई चकाचौंध है!


