रायपुर/सक्ति, 17 अप्रैल 2026
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल 2026 को हुए भीषण बॉयलर विस्फोट मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। इस हादसे में करीब 20 मजदूरों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू की, जिसमें लापरवाही के संकेत मिलने पर बड़ा कदम उठाया गया है।
मामले में सहित कंपनी प्रबंधन के करीब 8 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करते हुए कहा है कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है और आगे और नाम भी जोड़े जा सकते हैं। यह एफआईआर प्लांट संचालन और सुरक्षा मानकों में कथित लापरवाही को लेकर दर्ज की गई है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, बॉयलर के फर्नेस में अत्यधिक दबाव बनने और तकनीकी गड़बड़ी के कारण विस्फोट हुआ। बताया जा रहा है कि मेंटेनेंस और सेफ्टी प्रोटोकॉल में कमी इस हादसे की बड़ी वजह हो सकती है। फिलहाल तकनीकी विशेषज्ञों की टीम और प्रशासनिक अधिकारी पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहे हैं, ताकि जिम्मेदारी तय की जा सके।
इस घटना के बाद वेदांता समूह की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं और श्रमिक सुरक्षा को लेकर भी बहस तेज हो गई है। हालांकि, हाल ही में अनिल अग्रवाल द्वारा अडानी समूह को लेकर किए गए ट्वीट की चर्चा जरूर रही थी, लेकिन इस हादसे और दर्ज एफआईआर का उस विवाद से कोई सीधा संबंध अब तक सामने नहीं आया है।
छत्तीसगढ़ बॉयलर ब्लास्ट केस: कंपनी प्रबंधन के करीब 8 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज


