‘तुपकी’ की सलामी और भक्ति भाव के बीच संपन्न हुआ बस्तर का प्रसिद्ध गोंचा पर्व
रायपुर -25 जुलाई 2026
बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का प्रतीक प्रसिद्ध गोंचा पर्व आज भगवान जगन्नाथ की बाहुड़ा रथयात्रा के साथ श्रद्धा और उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और भगवान बलभद्र जनकपुरी (गुंडिचा मंदिर) से रथ पर सवार होकर अपने मुख्य मंदिर लौटे।लगभग 600 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा बस्तर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का अहम हिस्सा मानी जाती है।
भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और भगवान बलभद्र की बाहुड़ा रथयात्रा के साथ मंदिर वापसी।
जनप्रतिनिधियों ने की पूजा-अर्चना, क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना।
बाहुड़ा गोंचा के इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप, बस्तर सांसद महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव और चित्रकोट विधायक विनायक गोयल सहित कई जनप्रतिनिधि रथयात्रा में शामिल हुए ।
‘तुपकी’ की सलामी रही मुख्य आकर्षण
रथयात्रा के दौरान बस्तर की सदियों पुरानी परंपरा ‘तुपकी’ सलामी ने सबका ध्यान खींचा। बांस से बनी इस विशेष नाल में पेंग यानी मलकांगनी के बीज भरकर श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ को पारंपरिक सलामी दी। तुपकी से गूंजती आवाज़ और श्रद्धालुओं के उत्साह से पूरा जगदलपुर भक्तिमय हो उठा। बड़ी संख्या में लोगों ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और रथयात्रा में हिस्सा लिया।
लोक परंपराओं के संरक्षण पर जोर
गोंचा पर्व को बस्तर की प्राचीन लोक परंपराओं और आस्था का जीवंत प्रतीक माना जाता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक उत्सवों के संरक्षण के लिए लगातार प्रयासरत है।
वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में बस्तर की इन परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयासों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
भगवान जगन्नाथ की बाहुड़ा रथयात्रा के साथ ही बस्तर के इस ऐतिहासिक लोक पर्व गोंचा का विधिवत समापन हो गया।
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