जशपुर में जनजातीय पर्यटन को बड़ी सौगात, क्लस्टर होमस्टे परियोजना को मिली मंजूरी
रायपुर- 16 सितंबर 2026
सरकार की यह पहल जशपुर को छत्तीसगढ़ के प्रमुख जनजातीय एवं ग्रामीण पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
छत्तीसगढ़ में जनजातीय पर्यटन को नई ऊंचाई देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान (पीएम-जुगा) के अंतर्गत जशपुर जिले के बगीचा-मयाली-जशपुर क्लस्टर में क्लस्टर आधारित होमस्टे परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई है।
परियोजना के तहत किंकेल, कमतरा, डंगरी, महनई, सरुधाप और पंडरापाठ सहित 6 जनजातीय गांवों में कुल 30 नए होमस्टे विकसित किए जाएंगे, प्रत्येक गांव में 5 होमस्टे के हिसाब से। इस क्लस्टर के विकास पर लगभग 1.80 करोड़ रुपये व्यय प्रस्तावित है, जिसमें होमस्टे निर्माण के साथ सामुदायिक सुविधाओं का भी प्रावधान है।
यह परियोजना पारंपरिक होटल आधारित पर्यटन से आगे बढ़कर कम्यूनिटी बेस्ड टूरिज्म को प्रोत्साहित करेगी। पर्यटकों को स्थानीय परिवारों के बीच रहकर जशपुर की जनजातीय संस्कृति, खान-पान और ग्रामीण जीवन को करीब से अनुभव करने का अवसर मिलेगा। प्रत्येक गांव में सामुदायिक सुविधाओं के लिए 5 लाख रुपये तक के कार्य भी प्रस्तावित हैं।
चयनित गांव कैलाश गुफा, खुड़ियारानी गुफा, बादलखोल अभयारण्य, रानीदाह जलप्रपात, देशदेखा पहाड़ और लोरोघाट जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों के निकट हैं, जिससे पर्यटकों के ठहरने की अवधि बढ़ने की संभावना है। परियोजना से स्थानीय युवाओं और महिलाओं को आतिथ्य सेवा, गाइडिंग, परिवहन और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में रोजगार मिलेगा।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि जनजातीय व ग्रामीण संस्कृति की विरासत संरक्षित रखते हुए स्थानीय समुदायों को पर्यटन से प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिले।
उन्होंने कहा कि यह क्लस्टर होमस्टे परियोजना पर्यटन को गांवों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जिससे पर्यटक जशपुर की प्रकृति के साथ जनजातीय जीवन और परंपराओं को भी करीब से अनुभव करेंगे।
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे ने कहा कि पर्यटन का लाभ केवल बड़े पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि गांव और स्थानीय परिवारों को भी इसका सीधा भागीदार बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह क्लस्टर स्थानीय संस्कृति, प्रकृति और आजीविका को जोड़ने वाला मॉडल बनेगा।
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