कैसा होगा ठंड का मौसम ,क्या ‘गॉडजिला अल नीनो’ करेगा कड़ाके की ठंड गायब ?
न्यूज डेस्क – 04 सितंबर 2026
खबर है कि वैज्ञानिकों को आशंका है कि दिसंबर-जनवरी में पड़ने वाली पारंपरिक हाड़ कंपाने वाली ठंड और शीत लहरें कमजोर पड़ सकती हैं।
प्रशांत महासागर में बन रहा एक शक्तिशाली अल नीनो इस साल दुनिया भर के मौसम चक्र को हिला सकता है, और भारत के लिए भी यह चिंता का विषय बन गया है।
मौसम एजेंसियों की मानें तो यह घटना इतनी तीव्र हो सकती है कि इसे “सुपर अल नीनो” या “गॉडजिला अल नीनो” तक कहा जा रहा है — यह वही नाम है जो 1997-98 के ऐतिहासिक अल नीनो के लिए गढ़ा गया था।
भारत की सर्दी पर क्या असर पड़ सकता है
अल नीनो के दौरान आमतौर पर भारतीय उपमहाद्वीप में तापमान सामान्य से ऊपर रहने की प्रवृत्ति देखी जाती है, जिससे उत्तर और मध्य भारत में सर्दी के मौसम की तीव्रता घट सकती है। इतिहास गवाह है कि 1982, 1987, 2002, 2009 और 2015 जैसे प्रमुख अल नीनो वर्षों में भारत में सूखे और असामान्य मौसम की स्थितियां देखी गई थीं।
तो क्या इस बार सर्दी नहीं पड़ेगी?
पूरी तरह से “नहीं” कहना गलत होगा।
इतना जरूर तय है कि इस बार सर्दी अपने सामान्य रूप में नहीं आएगी — कड़ाके की ठंड और शीत लहरों की तीव्रता व अवधि, दोनों में कमी आने की संभावना जताई जा रही है। लेकिन IOD जैसे स्थानीय कारकों के चलते सर्दी पूरी तरह बेअसर होगी, यह कहना अभी संभव नहीं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन हर तिमाही में अपडेट जारी करता है, और सितंबर 2026 का अगला अपडेट इस तस्वीर को और स्पष्ट कर देगा।
क्या हो रहा है प्रशांत महासागर में
साल की शुरुआत में प्रशांत महासागर में हल्की ला नीना की स्थिति थी, जो धीरे-धीरे न्यूट्रल हुई और मई 2026 तक तेजी से अल नीनो में बदलने लगी।
अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA ने जून 2026 में आधिकारिक तौर पर अल नीनो के बनने की पुष्टि कर दी, और अनुमान है कि यह पतझड़ (फॉल) के दौरान मध्यम से तेज स्तर तक पहुंच सकता है।
कुछ पूर्वानुमान मॉडल तो प्रशांत महासागर में तापमान विसंगति 3-4°C तक जाने की बात कह रहे हैं, जो इसे अब तक का सबसे तेज अल नीनो बना सकता है।
हालांकि, यह तस्वीर उतनी सीधी भी नहीं है। भारतीय मौसम विशेषज्ञ एक और अहम कारक — इंडियन ओशन डायपोल (IOD) — पर भी करीब से नजर रखे हुए हैं। अगर आने वाले महीनों में पॉजिटिव IOD मजबूत होता है, तो यह अल नीनो के असर को काफी हद तक संतुलित कर सकता है और भारत में नमी व सर्दी दोनों को बनाए रखने में मदद कर सकता है।
यही वजह है कि अभी से यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस बार सर्दी बिल्कुल गायब हो जाएगी — असल तस्वीर आने वाले हफ्तों में साफ होगी।
वैश्विक स्तर पर भी बड़ा असर
यह सिर्फ भारत की चिंता नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब यह शक्तिशाली अल नीनो पहले से गर्म हो रही जलवायु प्रणाली पर असर डालेगा, तो 2026 और संभवतः 2027 अब तक के सबसे गर्म वर्षों में शुमार हो सकते हैं।
ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस और दक्षिणी अफ्रीका में सूखे की आशंका है, जबकि पेरू, इक्वाडोर और पूर्वी अफ्रीका में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है।
भारतीय महासागर भी वैश्विक औसत से तेज गति से गर्म हो रहा है, जो बारिश के पैटर्न, समुद्री तापमान और चक्रवाती गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।
(यह न्यूज आर्टिकल उपलब्ध मौसम पूर्वानुमानों और वैज्ञानिक विश्लेषणों पर आधारित है। स्थिति लगातार बदल रही है, इसलिए ताजा जानकारी के लिए भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आधिकारिक अपडेट देखते रहें।)
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