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Tuesday, September 15, 2026

प्याज का ‘आंसू गैस’ फॉर्मूला: खेत खाली, मंडी में आग और थाली से गायब!

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NEWS_DESK -15 सितंबर 2026

सितंबर 2026 के आंकड़े साफ़ बता रहे हैं कि प्याज एक बार फिर देश की रिटेल महंगाई का ‘हीरो’ बनने की होड़ में है। केवल एक महीने में थोक भाव 3,235 रुपये से छलांग लगाकर 4,249 रुपये प्रति क्विंटल (31.3% की बढ़त) पर पहुँच गए हैं। अगर पिछले साल सितंबर 2025 (1,837 रुपये/क्विंटल) से तुलना करें, तो यह उछाल 131.3% की रिकॉर्ड तोड़ तेजी दर्शाता है।
राज्यवार तेजी का मिजाज:

  • उत्तरी व मध्य भारत: उत्तर प्रदेश (50.7%), गुजरात (51.4%) और छत्तीसगढ़ (46.4%) में मासिक आधार पर सबसे बड़ी बढ़त देखी गई।
  • पूर्वोत्तर व सुदूर राज्य: मेघालय (6,117 रुपये/क्विंटल), मणिपुर (6,044 रुपये) और केरल (6,072 रुपये) में परिवहन खर्च के चलते कीमतें 6,000 के पार पहुँच चुकी हैं।
  • उत्पादक राज्य: महाराष्ट्र खुद 41.6% की बढ़ोतरी के साथ 3,950 रुपये प्रति क्विंटल पर खड़ा है।
  • बाज़ार का गणित बनाम किसान का गणित:
    मंडी के इस ‘हॉट स्पॉट’ के पीछे तीन मुख्य विलेन हैं—खरीफ फसल की सुस्त आवक, बेमौसम बारिश की अनिश्चितता और ट्रांसपोर्ट का बढ़ता खर्च। लेकिन इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा मोड़ यह है कि मंडी की इस गर्माहट की मलाई किसान नहीं, बल्कि बिचौलिए और लॉजिस्टिक्स चेन काट रहे हैं। लागत, भंडारण का नुकसान और मंडी तक पहुँचने का किराया निकालने के बाद किसान का मुनाफा जस का तस है।

  • आगे की राह:
    त्योहारी सीज़न सामने है। अगर नई फसल की आवक में हफ़्ते-दस दिन की और देरी हुई, तो आम उपभोक्ता की रसोई का बजट और बिगड़ेगा। फिलहाल प्याज न सिर्फ किचन का जायका बिगाड़ रहा है, बल्कि कृषि बाज़ार के नीति-निर्माताओं की भी नींद उड़ा रहा है।
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