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Wednesday, August 19, 2026

” हीटवेव का कहर: यूरोप में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पारा 40°C पार , 2300+ मौतें ,WHO ने बताया क्लाइमेट क्राइसिस”

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डिजिटल डेस्क 02 जुलाई 2026

यूरोप इस साल भीषण हीटवेव की चपेट में है। जून-जुलाई 2025 में चली लू ने पश्चिमी और दक्षिणी यूरोप से लेकर आर्कटिक तक रिकॉर्ड तोड़ दिए। फ्रांस, स्पेन, जर्मनी, पुर्तगाल और इटली में पारा 40°C से 46°C तक पहुंच गया।

स्पेन के सिलोपी में 25 जुलाई को 50.5°C तापमान दर्ज हुआ – यह देश के इतिहास में पहली बार 50°C से ऊपर गया। फ्रांस में एविन्योन में 11 दिन और टूलूज़, नीम में 9 दिन तक लगातार 35°C से ज्यादा तापमान रहा। यूरोपियन कॉपरनिकस क्लाइमेट सर्विस के मुताबिक जुलाई 2025 यूरोप का चौथा सबसे गर्म जुलाई रहा, जो 1991-2020 औसत से 1.30°C ज्यादा था।

इस हीटवेव ने भारी मानवीय नुकसान पहुंचाया है। Imperial College London और London School of Hygiene and Tropical Medicine की स्टडी के मुताबिक 10 दिनों की हीटवेव में 12 यूरोपीय शहरों में करीब 2300 लोगों की मौत हुई, जिनमें से 1500 मौतों के लिए सीधे क्लाइमेट चेंज जिम्मेदार है। WHO ने भी बताया कि 2025 की हीटवेव से यूरोप में 1300 से ज्यादा अतिरिक्त मौतें हुईं। फ्रांस में ही 40 बच्चों की डूबने से मौत हुई और 2 बच्चों की कार में छोड़ने से जान गई। स्पेन में अकेले 327 मौतें दर्ज की गईं।

अमेरिका भी आया लू की चपेट में

अमेरिका में भीषण हीटवेव ने करोड़ों लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नेशनल वेदर सर्विस (NWS) ने 18 राज्यों में खतरनाक गर्मी की चेतावनी जारी की है। ‘हीट डोम’ यानी उच्च दबाव का सिस्टम पूरे मिडवेस्ट से ईस्ट कोस्ट तक फैल गया है, जिससे तापमान 38°C से ऊपर जा रहा है। उमस इतनी ज्यादा है कि हीट इंडेक्स यानी ‘फील्स लाइक’ तापमान 115°F यानी करीब 46°C तक पहुंच रहा है। 6 करोड़ से ज्यादा लोग हीट अलर्ट के दायरे में हैं और ये लू जुलाई 4 के स्वतंत्रता दिवस वीकेंड तक जारी रहेगी।

‘हीट डोम’ यानी उच्च दबाव का सिस्टम इस गर्मी की बड़ी वजह बना। यह सहारा रेगिस्तान से गर्म हवा खींचकर यूरोप पर जमता रहा। इसकी वजह से न सिर्फ जंगल की आग भड़की – स्पेन, ग्रीस, पुर्तगाल, साइप्रस में रिकॉर्ड वाइल्डफायर हुए- बल्कि बिजली ग्रिड, अस्पताल और ट्रांसपोर्ट भी चरमरा गए। जर्मनी में राइन नदी का जलस्तर गिरने से जहाज 50% क्षमता पर ही चल पाए। विंबलडन में खिलाड़ियों के लिए हीट ब्रेक लागू करने पड़े।

सबसे बड़ी चुनौती यूरोप का इन्फ्रास्ट्रक्चर है। BBC के मुताबिक यूरोप के सिर्फ 20% घरों में AC है, जबकि अमेरिका में 90% घरों में। GeoNewz की रिपोर्ट बताती है कि 80% यूरोपीय घर सर्दियों के लिए बने हैं, गर्मी रोक नहीं पाते। WHO और WMO ने चेतावनी दी है कि यूरोप दुनिया के औसत से दोगुनी तेजी से गर्म हो रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्रीनहाउस गैसें नहीं रोकी गईं तो ऐसी गर्मी आम हो जाएगी।

कभी भारत पर कमेंट्स करने वालो ने यह नहीं सोचा था कि हमने कभी कहा,भारत के लोग कैसे तालाब में एक साथ नहाते है साफ सफाई करते हैं।आज न्यूज चैनलों में वही स्थिति विदेशों में देखने मिला की लोग सामूहिक स्नान कर रहे है ताल सरोवर जैसी जगह तलाश रहे।

सोशल मीडिया रिएक्शन:
सोशल मीडिया पर बहस तेज है। कई यूजर्स कह रहे हैं कि यूरोप के घर AC के बिना “ओवन” बन गए हैं। वहीं कुछ लोग इसे भारत की गर्मी से तुलना कर रहे हैं – “दिल्ली में 48°C पर क्रिकेट खेलते हैं”। WHO के आंकड़ों पर भी शक जताया जा रहा है।

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