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Friday, June 5, 2026

छोटे निर्यातकों और MSME को बड़ी राहत: कूरियर निर्यात पर ₹10 लाख की पुरानी बेड़ी टूटी

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नई दिल्ली, 04 अप्रैल 2026

यह जरूरत क्यों पड़ी?
दशकों पुरानी विदेश व्यापार नीति के तहत कूरियर से निर्यात की सीमा ₹10 लाख प्रति कंसाइनमेंट तय थी। जैसे-जैसे महँगाई बढ़ी और भारतीय उत्पादों की वैश्विक माँग बढ़ी, यह सीमा एक बड़ी बाधा बन गई। जयपुर का जेवर कारीगर हो, बेंगलुरु का D2C स्टार्टअप हो या किसी गाँव का हस्तशिल्पी — सभी को ₹10 लाख की सीमा पार होते ही महँगे हवाई या समुद्री कार्गो की ओर जाना पड़ता था, कागजी प्रक्रिया दोगुनी हो जाती थी और समय तथा धन दोनों बर्बाद होते थे।

कब से लागू हुआ?
केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की घोषणा के बाद केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने 1 अप्रैल 2026 से यह सुधार लागू कर दिया है। विदेश व्यापार नीति 2023 के पैरा 9.05 में संशोधन कर यह बदलाव अधिसूचित किया गया है।

आम जनता और व्यापारियों को क्या मिलेगा?
अब एक छोटा कारीगर या उद्यमी बिना किसी मौद्रिक बंधन के, किसी भी मूल्य का सामान सीधे विदेशी ग्राहक तक कूरियर से भेज सकेगा। उसे न महँगे कार्गो की जरूरत होगी, न जटिल दस्तावेजों की। लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और वैश्विक बाजार तक पहुँच सुगम होगी।

इसके साथ ही 15 दिन से अधिक समय तक अनक्लेयर्ड माल के लिए ‘रिटर्न टू ओरिजिन’ (RTO) प्रणाली लागू की गई है — वापसी का माल ताजा आयात नहीं माना जाएगा, जिससे निर्यातकों को अनावश्यक शुल्क से राहत मिलेगी। खेप-वार जाँच की जगह जोखिम-आधारित जाँच प्रणाली से कूरियर टर्मिनल की भीड़ कम होगी और माल की निकासी तेज होगी।
यह निर्णय उस हर भारतीय उद्यमी के लिए एक नया द्वार खोलता है जो विदेश में अपना सामान बेचना चाहता है — बिना बड़े निर्यातक बने, बिना भारी लागत लगाए।

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