नई दिल्ली, 20 मार्च 2026
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शांति बहाली के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक समेत कई वैश्विक नेताओं से बातचीत कर हालात पर चर्चा की।
देश के प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने का एकमात्र रास्ता संवाद और शांति की बातचीत है। पश्चिम एशिया की स्थिति को देखते हुए तत्काल तनाव कम करना जरूरी है और सभी पक्षों को बातचीत की राह पर लौटना चाहिए।ईरान-इजरायल के बीच जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शांति और बातचीत पर जोर देते हुए कहा है कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने संघर्ष की शीघ्र समाप्ति की अपील की है और कहा कि कूटनीति के जरिए ही मध्य-पूर्व में शांति और स्थिरता बहाल की जा सकती है।
ओमान के सुल्तान के साथ बातचीत में दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। प्रधानमंत्री ने ओमान के लोगों को ईद की अग्रिम शुभकामनाएं भी दीं।
इस बीच, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव ने वैश्विक चिंता को बढ़ा दिया है। ईरान के गैस क्षेत्र ‘साउथ पार्स’ पर हमले के बाद हालात और बिगड़े हैं, वहीं जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया गया। कतर के प्रमुख LNG केंद्र ‘रास लफान’ पर हमले से वैश्विक गैस आपूर्ति पर असर पड़ा है।
भारत ने इन हमलों को अस्वीकार्य बताते हुए तुरंत रोकने की मांग की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि ऊर्जा और नागरिक ढांचे पर हमला पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है।
तेल की कीमतों में भी तेज उछाल देखा गया है, जो 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने की आशंका है। ऐसे में भारत की कूटनीतिक सक्रियता इस संकट को शांत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
“पश्चिम एशिया संकट पर सक्रिय भारत: शांति के लिए कूटनीति ही रास्ता, पीएम मोदी की वैश्विक पहल”


