ईरान-इजरायल युद्ध के बीच भारत का बड़ा फैसला।
नई दिल्ली, 18 मार्च 2026
पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। इस संकट की आंच अब भारत के पड़ोसी देशों तक पहुँच गई है। बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव ने भारत से अतिरिक्त पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति का अनुरोध किया है, क्योंकि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वैश्विक ईंधन आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है।
भारत का स्पष्ट रुख — ‘पहले हम, फिर आप’
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि बांग्लादेश को ईंधन आपूर्ति के मामले में भारत की अपनी घरेलू जरूरतें, रिफाइनिंग क्षमता और डीजल की उपलब्धता को ध्यान में रखा जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि श्रीलंका और मालदीव ने भी इसी तरह के अनुरोध किए हैं।
जायसवाल ने कहा — “इन अनुरोधों की समीक्षा हमारी अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं और उपलब्धता को देखते हुए की जा रही है।”
संकट की जड़ — होर्मुज जलडमरूमध्य बंद
ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर देने से वैश्विक तेल आपूर्ति का 20% प्रभावित हुआ है। इस संकट के बाद ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 10-13% उछलकर लगभग 80-82 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गईं।
बांग्लादेश की हालत सबसे गंभीर
बांग्लादेश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए लगभग 95% आयात पर निर्भर है, ने ईंधन सीमा लागू की, विश्वविद्यालय बंद किए, ईद की रोशनी बुझाई और जमाखोरी रोकने के लिए तेल डिपो पर सेना तैनात की।
5 मार्च को बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने जमाखोरी रोकने के लिए वाहनों में ईंधन भरने की सीमा तय कर दी।
भारत ने उठाए आपातकालीन कदम
भारत ने आपातकालीन शक्तियों का उपयोग करते हुए एलपीजी की आपूर्ति औद्योगिक उपयोग से हटाकर घरेलू उपभोक्ताओं की ओर मोड़ी।
विदेश मंत्री जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री से पिछले कुछ दिनों में तीन बार बातचीत की है। अंतिम बातचीत में शिपिंग मार्गों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर चर्चा हुई।
श्रीलंका में राशनिंग वापस
श्रीलंका सरकार ने 2022 की तरह साप्ताहिक ईंधन राशनिंग फिर से लागू कर दी है और सरकारी कर्मचारियों के लिए चार दिन का कार्य सप्ताह घोषित किया है।
विशेषज्ञों की राय
एशियन डेवलपमेंट बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, फिलीपींस, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसी छोटी ऊर्जा-आयातक अर्थव्यवस्थाओं पर तुलनात्मक रूप से अधिक व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ने की संभावना है।
भारत से मदद की आशा
पड़ोसी देशों के अनुरोध यह साबित करते हैं कि वैश्विक अस्थिरता के दौर में भारत एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा है। भारत सावधानीपूर्वक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है — अपनी ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा करते हुए पड़ोसी देशों की मदद भी करना।


