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Sunday, March 15, 2026

मनरेगा (वीबीजीराम)सोशल ऑडिट में बड़ा खुलासा: 18,664 मामलों में 136 करोड़ की अनियमितता, वसूली मात्र 20 लाख

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छत्तीसगढ़ डिजिटल डेस्क/15 मार्च 2026

छत्तीसगढ़ में मनरेगा (अब वीबीजीराम) के तहत कराए गए सोशल ऑडिट में एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। राज्यभर की हजारों ग्राम पंचायतों में हुए इस सामाजिक अंकेक्षण में कुल 18,664 मामलों में 136 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितताएं दर्ज की गई हैं। इन मामलों में वित्तीय गबन, नियमों का उल्लंघन और शिकायत से जुड़े प्रकरण शामिल हैं।

जो बात सबसे ज्यादा चिंताजनक है वह यह है कि इतनी बड़ी अनियमितता सामने आने के बावजूद अब तक वसूली के नाम पर केवल 20 लाख रुपये ही वापस लिए जा सके हैं। यानी 136 करोड़ की गड़बड़ी में से महज 20 लाख की रिकवरी — यह आंकड़ा खुद ही पूरी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

सोशल ऑडिट की प्रक्रिया क्या है?
छत्तीसगढ़ में सामाजिक अंकेक्षण की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ सामाजिक अंकेक्षण इकाई के पास है। यह इकाई हर साल अलग-अलग विकासखंडों की ग्राम पंचायतों के लिए सोशल ऑडिट का कैलेंडर तैयार करती है। इसके बाद जिला कार्यक्रम समन्वयक सह कलेक्टर संबंधित एजेंसियों को मनरेगा के कार्यों से जुड़े दस्तावेज 7 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश देते हैं।

ऑडिट के लिए गांवों के जॉबकार्डधारी परिवारों के 12वीं पास युवाओं और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को चुना जाता है। इन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है और फिर ये ग्रामीण स्तर पर योजनाओं की जांच करते हैं। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई थी ताकि आम नागरिक सरकारी खर्च पर नजर रख सकें — लेकिन अब यही ऑडिट सरकारी तंत्र में हुई गड़बड़ियों की पोल खोल रहा है।

वसूली की रफ्तार इतनी धीमी क्यों?
136 करोड़ की अनियमितता और मात्र 20 लाख की वसूली — यह अनुपात साफ बताता है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कागजों तक ही सीमित रही है। नियमों के अनुसार गड़बड़ी करने वालों से राशि वसूली जानी चाहिए, लेकिन व्यवहार में यह प्रक्रिया अत्यंत सुस्त है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर सख्त और पारदर्शी कार्रवाई हो तो सरकारी योजनाओं में होने वाली गड़बड़ियों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

मनरेगा जैसी योजना जो गरीब और मजदूर वर्ग की रोजी-रोटी से सीधे जुड़ी है, उसमें इस स्तर की अनियमितता न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि उन लाखों जरूरतमंद परिवारों के साथ भी अन्याय है जिनके हक का पैसा बीच में ही गायब हो गया। अब देखना यह है कि सरकार और प्रशासन इस खुलासे के बाद कितनी तेजी और ईमानदारी से वसूली और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करते हैं।

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