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Monday, March 9, 2026

वैश्विक तनाव के बीच भारत पर बदले अमेरिका के सुर, ऊर्जा बाजार में सहयोग की बात

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डिजिटल डेस्क 09 मार्च 2026

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार की अनिश्चितता के बीच भारत को लेकर अमेरिका के रुख में कुछ नरमी के संकेत दिखाई दे रहे हैं। हाल के महीनों में जहां अमेरिका के कुछ नेताओं ने भारत द्वारा रूसी तेल खरीद को लेकर सख्त टिप्पणी की थी, वहीं अब ऊर्जा बाजार में स्थिरता के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर दिया जा रहा है।

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और प्रमुख ऊर्जा उत्पादक व उपभोक्ता देशों के साथ मिलकर वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए काम कर रहा है।

उन्होंने अपने संदेश में कहा कि ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जोखिमों को कम करना और बाजार को स्थिर बनाए रखना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ सहयोग को महत्वपूर्ण बताया गया।

गौरतलब है कि कुछ समय पहले अमेरिकी प्रशासन के कुछ नेताओं ने भारत द्वारा रूस से तेल खरीद को लेकर आलोचना की थी। उस समय यह भी कहा गया था कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने जैसे कदमों पर विचार किया जा सकता है। उस दौरान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े बयान भी चर्चा में रहे थे

हालांकि अब वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता और सहयोग पर जोर दिए जाने को कूटनीतिक दृष्टि से एक संतुलित संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देशों के साथ सहयोग वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभा सकता है।

भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न देशों से तेल आयात करता रहा है और ऊर्जा सुरक्षा को अपनी आर्थिक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर सहयोग और संवाद को बढ़ावा देने को सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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