छत्तीसगढ़ समाचार_ बिलासपुर | 07 मार्च 2026
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के करगी रोड कोटा क्षेत्र के तीन युवा दोस्त — शिवम मिश्रा, आकाश अग्रवाल और आयुष अग्रवाल — दुबई में लगातार 9 दिनों तक फंसे रहने के बाद आखिरकार सुरक्षित घर लौट आए हैं।
कैसे शुरू हुआ यह सफर?
तीनों दोस्त घूमने के उद्देश्य से दुबई गए थे। यह एक सामान्य पर्यटन यात्रा थी — लेकिन मध्य पूर्व में अचानक बढ़े भू-राजनीतिक तनाव ने उनकी वापसी की राह रोक दी।
28 फरवरी को उनकी वापसी की पहली फ्लाइट थी — वह रद्द हो गई। इसके बाद 3 मार्च की फ्लाइट बुक की — वह भी कैंसल। फिर 5 मार्च की टिकट ली — वह भी नहीं चली।
आखिरकार 6 मार्च की रात उनकी फ्लाइट रवाना हुई और तड़के 3 बजे दिल्ली पहुंचे। वहां से रायपुर होते हुए वे अपने घर कोटा पहुंचे।
परिवार की बेचैनी और सरकार से गुहार
घर पर बैठे परिजनों की चिंता का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। लगातार फ्लाइटें कैंसल होती रहीं, दुबई में सुरक्षा की स्थिति अस्पष्ट थी और खर्च बढ़ता जा रहा था।
परिजनों ने भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई। शिवम मिश्रा ने केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू से सीधे फोन पर संपर्क किया, जिन पर उन्होंने मदद का आश्वासन दिया। इस पहल का असर भी दिखा और अंततः तीनों की वापसी सुनिश्चित हो सकी।
तीनों युवक इस पूरे दौरान वीडियो कॉल के जरिए परिजनों से लगातार संपर्क में बने रहे, जिससे घरवालों को कुछ राहत मिलती रही।
कैसा रहा दुबई में 9 दिन का अनुभव?
शिवम मिश्रा ने बताया कि फ्लाइट बार-बार रद्द होने से होटल में रुकने की अवधि बढ़ती गई और खर्च भी लगातार बढ़ता रहा। इसके बावजूद तीनों ने धैर्य रखा और एयरलाइन तथा स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पूरी तरह पालन करते रहे।
समीक्षात्मक नजरिया: यह घटना एक बड़े सवाल की ओर इशारा करती है — क्या भारतीय पर्यटकों को विदेश यात्रा से पहले ट्रैवल एडवाइजरी और आपातकालीन संपर्क नंबरों की पर्याप्त जानकारी दी जाती है? इन तीन युवकों को सरकारी मदद मिली, लेकिन जिन्हें सही संपर्क नहीं पता, उनका क्या?
सुखद अंत, लेकिन सबक जरूरी
9 दिनों की मुश्किल यात्रा के बाद तीनों दोस्त सुरक्षित घर लौटे — यह राहत की बात है। लेकिन यह घटना उन हजारों भारतीय पर्यटकों के लिए एक सबक भी है जो बिना पूरी तैयारी के अशांत क्षेत्रों की यात्रा पर निकल जाते हैं।
विशेषज्ञ सुझाव:
विदेश यात्रा से पहले MEA (विदेश मंत्रालय) की ट्रैवल एडवाइजरी जरूर पढ़ें।
दूतावास का नंबर हमेशा फोन में सेव रखें।
ट्रैवल इंश्योरेंस लेना अनिवार्य समझें।
संकट में स्थानीय जनप्रतिनिधियों से संपर्क करने में संकोच न करें।
छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात
केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू का त्वरित हस्तक्षेप और तीनों युवकों का संयमित व्यवहार — दोनों ही इस पूरे प्रकरण के सकारात्मक पहलू हैं। यह घटना दिखाती है कि संकट में सही कदम उठाने से मुश्किल से मुश्किल हालात भी सुलझाए जा सकते हैं।


