बेमेतरा_ 02 मार्च 2026
बेमेतरा जिले के गिरते भूजल स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्तर को सुधारने और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिला प्रशासन सख्त नजर आ रहा है। इसी कड़ी में जिला पंचायत बेमेतरा की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) श्रीमती प्रेमलता पद्माकर ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में विशेष जल संरक्षण अभियान का आगाज किया। उन्होंने बेरला विकासखंड के ग्राम पंचायत रेवे का सघन दौरा कर विकास कार्यों की समीक्षा की।
हर घर में बनेगा ‘रिचार्ज पिट’: जल संकट से निपटने की तैयारी
निरीक्षण के दौरान जिला सीईओ ने ग्रामीणों को संबोधित कर जल संरक्षण के महत्व को समझाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में जल संकट से बचने के लिए ‘रिचार्ज पिट’ (भूजल पुनर्भरण गड्ढा) सबसे कारगर हथियार है।
अपील: सीईओ ने प्रत्येक परिवार से अपने घर के पास रिचार्ज पिट बनाने का आग्रह किया।
तकनीकी मार्गदर्शन: निर्माणाधीन पिट्स का अवलोकन कर इंजीनियरों को तकनीकी बारीकियों का पालन करने के निर्देश दिए गए।
आवास और रोजगार की जमीनी हकीकत
श्रीमती पद्माकर ने केवल जल संरक्षण ही नहीं, बल्कि गांव की अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी जानकारी ली:
प्रधानमंत्री आवास योजना: लाभार्थियों से सीधे बातचीत कर आवास निर्माण की प्रगति जानी और समय पर काम पूरा करने को कहा।
मनरेगा : कार्यस्थलों पर श्रमिकों से संवाद किया और मस्टरोल व भुगतान संबंधी जानकारी ली। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।
शिक्षा और पोषण पर विशेष ध्यान
गांव के स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्रों के निरीक्षण के दौरान सीईओ ने बच्चों से आत्मीय चर्चा की। उन्होंने शिक्षकों और कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ उनके पोषण और स्वास्थ्य ट्रैकिंग पर विशेष ध्यान दिया जाए।
प्रमुख उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के दौरान जनपद पंचायत बेरला सीईओ दीप्ति मंडावी, अनुविभागीय अधिकारी (RES) आसित गोलछा, मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी अरविंद कश्यप सहित तकनीकी सहायक और स्थानीय जनप्रतिनिधि (सरपंच पिंटू सिंहा) उपस्थित रहे। सरपंच ने ग्राम की समस्याओं को रखते हुए प्रशासन को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
जन जागरूकता से जनता को जल का महत्व
जन जागरूकता: लोगों को पता चलता है कि रिचार्ज पिट से उनके घर के बोरवेल या कुएं का जल स्तर बढ़ेगा।
काम में पारदर्शिता: सरकारी अधिकारियों के दौरे से स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार कम होता है और कार्यों में तेजी आती है।
जनता से सीधा संपर्क: ग्रामीणों को अपनी समस्याओं को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।


