यह बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया एक दूरदर्शी दस्तावेज है।”
बेमेतरा_ 28 फरवरी 2026
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अमित चिमनानी ने राज्य बजट को छत्तीसगढ़ की जनता की आकांक्षाओं का ‘संकल्प पत्र’ करार दिया है। शनिवार को बेमेतरा जिला कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता पर उन्होंने कहा कि यह बजट भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी कार्यप्रणाली का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो प्रदेश को विकास की सुपरफास्ट ट्रैक पर ले जाने का सामर्थ्य रखता है।
पिछली सरकार के ‘गड्ढों’ को भरने वाला बजट है।
श्री चिमनानी ने कहा वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी द्वारा प्रस्तुत यह बजट पिछले शासनकाल के दौरान बने भ्रष्टाचार के गढ़ और विकास की बाधाओं को दूर करने वाला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक और पारदर्शिता के मेल से जो वित्तीय ढांचा तैयार किया गया है, वह छत्तीसगढ़ को देश के टॉप राज्यों की सूची में शुमार करेगा। बजट की प्रशंसा करते हुए उन्होंने इसे ‘पॉलिसी से परिणाम’ तक पहुँचने वाला माध्यम बताया।
ज्ञान और गति के बाद अब ‘संकल्प’ की बारी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बजट पर भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “हमारी सरकार का पहला बजट ‘ज्ञान’ पर आधारित था और दूसरा ‘गति’ पर। इस वर्ष का बजट ‘संकल्प’ की थीम पर केंद्रित है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संकल्प समावेशी विकास, सुदृढ़ अधोसंरचना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के सपने को ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के जरिए साकार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
पांच विशेष मिशनों से बदलेगी प्रदेश की तस्वीर
बजट की प्रमुख घोषणाओं पर प्रकाश डालते हुए श्री चिमनानी ने राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए निर्धारित 5 विशेष मिशनों का उल्लेख भी किया।
मीडिया का सवाल( प्रेस वार्ता के अनछुए पहलू)
प्रेस वार्ता से विश्लेषण :बजट का कुल खर्च 1.72 लाख करोड़ है, जबकि प्राप्तियां केवल 1.45 लाख करोड़ हैं। इसमें भी 46% हिस्सा केंद्र की सहभागिता का है।
यदि केंद्र में गैर-भाजपा सरकार होती, तो क्या यह ‘संकल्प’ सिद्धि की ओर बढ़ पाता।महिलाएं हड़ताल पर है,युवाओं को वर्तमान में रोजगार नहीं है। अनियमित कर्मचारियों को कैशलेश ट्रिटमेंट सुविधा का आभाव है बजट सर्व समावेशी में कम दिखता है।
बजट में महिलाओं के लिए भारी भरकम फंड और ‘महतारी वंदन योजना’ का उल्लेख तो है, लेकिन अनछुए प्रश्न भी है ।आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की निरंतर जारी हड़ताल और अनियमित महिला कर्मचारियों की अनदेखी का मुद्दा भी तो है।
सवाल: क्या यह बजट केवल ‘वोट बैंक’ की सिद्धि के लिए है? सामूहिक महिला विकास और संविदा कर्मचारियों की मांगों पर बजट में चुप्पी क्यों है?
मीडिया का सवाल “युवा वर्तमान में जीता है, वृद्ध अतीत में और बच्चा भविष्य में”। बजट में भविष्य के विजन (AI और तकनीकी मिशन) की तो बात है, लेकिन तत्काल रोजगार सृजन के स्पष्ट उल्लेख की कमी पर सवाल है।
वर्तमान में बेरोजगार युवाओं के लिए तत्काल राहत की क्या योजना है? ग्रामीण मजदूरों के लिए बजट में शहरी मजदूरों जैसी स्पष्टता क्यों नहीं है?
कर्मचारियों का ‘कैशलेस ट्रीटमेंट’ और संविदा कर्मियों का संशय
बजट में कर्मचारियों के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा का प्रावधान है, लेकिन इसकी स्पष्टता को लेकर सवाल खड़े हुए?जोखिम तो बराबर का है।
मुद्दा: क्या यह सुविधा अनियमित और संविदा कर्मचारियों को भी मिलेगी? यदि नहीं, तो क्या यह बजट ‘सबका साथ, सबका विकास‘ के समावेशी सिद्धांत के विपरीत नहीं है?
खबर विश्लेषण एवं निष्कर्ष: मीडिया के नजरिए से यह सवाल उठता है क्या यह बजट केवल पार्टी के एजेंडे की पूर्ति है या आम जनता के लिए ‘सर्व समावेशी’ दस्तावेज? भाजपा प्रवक्ता ने इन सभी शंकाओं को नकारते हुए इसे ‘विकसित छत्तीसगढ़’ की नींव बताया।


